Rajasthan में सिंचाई के स्रोत और परियोजनाएं

राजस्थान में सिंचाई के स्रोत और परियोजनाएं: बहुउद्देशीय, वृहद्, मध्यम व लघु नदी घाटी योजनाओं के विस्तृत नोट्स

परिचय: मरुस्थलीय प्रदेश में सिंचाई का रणनीतिक व आर्थिक महत्व

भौगोलिक दृष्टि से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का लगभग 61 प्रतिशत भूभाग शुष्क एवं अर्ध-शुष्क मरुस्थलीय परिस्थितियों के अंतर्गत आता है। राज्य में देश के कुल सतही जल (Surface Water) का मात्र 1.16 प्रतिशत तथा भूमिगत जल (Ground Water) का केवल 1.72 प्रतिशत हिस्सा ही उपलब्ध है। सीमित जल संसाधनों और मानसूनी वर्षा की अत्यधिक अनिश्चितता के कारण राजस्थान की संपूर्ण कृषि को “मानसून का जुआ” (Gambling of Monsoon) कहा जाता है।

ऐसी विषम परिस्थितियों में राज्य की आजीविका के मुख्य आधार ‘कृषि क्षेत्र’ को संबल प्रदान करने के लिए कृत्रिम सिंचाई तकनीकों और नदी घाटी परियोजनाओं का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। सिंचाई के माध्यम से न केवल फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है, बल्कि मरुभूमि में मरुस्थलीकरण (Desertification) पर भी प्रभावी रोक लगती है। इस विस्तृत मास्टर-नोट्स में हम राज्य के सिंचाई स्रोतों, त्रिस्तरीय वर्गीकरण, इंदिरा गांधी नहर (IGNP) सहित सभी बहुउद्देशीय योजनाओं का प्रामाणिक व परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण करेंगे।

1. राजस्थान में सिंचाई के मुख्य स्रोत (Sources of Irrigation)

राजस्थान के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल (Net Irrigated Area) को सिंचाई के साधनों के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जाता है, जिसे याद रखने का हमारा पारंपरिक मूल मंत्र “कु-ना-ता” (कुएं, नहरें, तालाब) है:

📊 सिंचाई के साधनों का जिला-वार सांख्यिकीय विन्यास

क्र.सिंचाई का मुख्य साधनसिंचित हिस्सेदारी प्रतिशत (%)सर्वाधिक अग्रणी जिला (Top)विशिष्ट भौगोलिक व तकनीकी तथ्य
1कुएं और नलकूप (Wells & Tube-wells)~ 70.75%जयपुर / जयपुर ग्रामीणराज्य में सिंचाई का सबसे बड़ा स्रोत; भूजल के अत्यधिक दोहन से डार्क ज़ोन की समस्या बढ़ रही है।
2नहरें (Canals)~ 24.30% से 25.30%श्रीगंगानगरउत्तरी और उत्तर-पश्चिमी मरुस्थलीय भागों (सिंचित मैदानी क्षेत्रों) में सिंचाई का मुख्य आधार।
3तालाब (Tanks / Ponds)~ 1.5% से 2.0%भीलवाड़ादक्षिण और दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी भागों में वर्षा जल को रोककर पारंपरिक सिंचाई का माध्यम।
  • राज्य में सर्वाधिक संचयी सिंचाई: श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में होती है (नहरी नेटवर्क की सघनता के कारण)।
  • राज्य में न्यूनतम संचयी सिंचाई: डूंगरपुर और राजसमंद जिलों में दर्ज की गई है (पहाड़ी भूभाग और पथरीली मिट्टी के कारण)।

2. सिंचाई परियोजनाओं का आधिकारिक तकनीकी वर्गीकरण

भारत सरकार के योजना आयोग (वर्तमान नीति आयोग) और जल संसाधन मंत्रालय के नियमों के अनुसार कृषि कल्टिवेबल कमांड एरिया (CCA) के आधार पर सिंचाई परियोजनाओं को तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

⚠️ सुधार नोट (Peer-to-Peer Rectification): आम तौर पर गाइडबुक्स में यह वर्गीकरण गलत लिखा होता है। छात्र ध्यान दें कि वर्गीकरण का सही वैज्ञानिक मापदंड निम्नलिखित है:

  1. वृहद् सिंचाई परियोजनाएं (Major Projects): वे विशाल योजनाएं जिनका कृषि कल्टिवेबल कमांड एरिया (CCA) 10,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर विस्तृत होता है। इसके अंतर्गत बड़े बांध और नहर प्रणालियां (जैसे— IGNP, गंग नहर) आती हैं।
  2. मध्यम सिंचाई परियोजनाएं (Medium Projects): वे परियोजनाएं जिनका कमांड एरिया 2,000 हेक्टेयर से 10,000 हेक्टेयर के मध्य स्थित होता है। यह मुख्य रूप से जिला स्तर की स्थानीय नदियों पर निर्मित होती हैं (जैसे— सावन-भादो, छापी)।
  3. लघु सिंचाई परियोजनाएं (Minor Projects): वे स्थानीय परियोजनाएं जिनका सिंचाई क्षेत्र 2,000 हेक्टेयर तक (कम) सीमित होता है। इसके अंतर्गत छोटे एनिकट, कुएं, नलकूप, बावड़ियाँ और ड्रिप इरिगेशन (टपकन पद्धति) को शामिल किया जाता है।
  • बहुउद्देशीय परियोजनाएं (Multipurpose): वे वृहद् परियोजनाएं जिनका उद्देश्य केवल सिंचाई करना नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति, जल विद्युत (Hydro Power) उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, मत्स्य पालन और मृदा संरक्षण जैसे बहुआयामी लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त करना होता है।

3. प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं (Multi-Purpose Projects)

(A) भाखड़ा-नांगल परियोजना: “आधुनिक भारत का मंदिर”

यह सतलज नदी पर निर्मित पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की एक महान संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना है।

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सर्वप्रथम इसका विचार 1908 में सर लुई डेन द्वारा प्रस्तावित किया गया था। स्वतंत्रता के बाद मार्च 1948 में इसका निर्माण शुरू हुआ। 17 नवंबर 1955 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसके विशाल स्वरूप को देखकर इसे “आधुनिक भारत का नवीन मंदिर” (Temples of Modern India) की संज्ञा दी थी। अक्टूबर 1962 में यह पूर्ण हुआ।
  • मुख्य बांध संरचना:
    1. भाखड़ा बांध (हिमाचल प्रदेश): यह सतलज नदी पर स्थित एक कंक्रीट गुरुत्वीय बांध है, जिसकी ऊंचाई 225.55 मीटर (740 फीट) है। इसके दोनों किनारों पर कुल 1379 MW की विद्युत इकाइयाँ कार्यरत हैं।
    2. नांगल बांध (पंजाब): भाखड़ा बांध के नीचे अतिरिक्त जल नियंत्रण हेतु 1952 में निर्मित किया गया, जहाँ से मुख्य ‘भाखड़ा नहर’ निकाली गई है।
  • राजस्थान को लाभ: 1959 के ऐतिहासिक भाखड़ा समझौते के तहत इस परियोजना के जल और विद्युत प्रवाह में राजस्थान का हिस्सा 15.22 प्रतिशत (लगभग 227 MW बिजली) निर्धारित है। इससे मुख्य रूप से हनुमानगढ़ जिले को सर्वाधिक सिंचाई लाभ मिलता है, इसके अतिरिक्त चुरू, श्रीगंगानगर और झुंझुनू भी लाभान्वित हैं।

(B) व्यास परियोजना: आईजीएनपी की शीतकालीन जीवनरेखा

यह रावी, ब्यास और सतलज नदियों के जल के कुशल उपयोग के लिए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त योजना है।

  • प्रमुख बांध घटक:
    1. पंडोह बांध (हिमाचल प्रदेश): ब्यास नदी के पानी को सतलज नदी में मोड़ने के लिए निर्मित।
    2. पोंग बांध (हिमाचल प्रदेश): कांगड़ा जिले में निर्मित यह बांध इस परियोजना का सबसे रणनीतिक हिस्सा है। विशेष तथ्य: पोंग बांध का मुख्य उद्देश्य सर्दियों के मौसम (शीतकाल) में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में पानी के प्रवाह को निरंतर बनाए रखना है। इस परियोजना से उत्पादित बिजली में राजस्थान का एक बड़ा हिस्सा आवंटित है।

(C) चम्बल नदी घाटी परियोजना

यह राजस्थान और मध्य प्रदेश की समान 50:50 की हिस्सेदारी वाली अंतर-राजकीय बहुउद्देशीय योजना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1953-54 में हुई थी।

  • कुल विद्युत क्षमता का सही आँकड़ा: इस परियोजना के तीन मुख्य पनबिजली स्टेशनों से कुल 386 मेगावाट (MW) विद्युत का उत्पादन होता है, जिसमें से राजस्थान का वास्तविक हिस्सा 193 MW (50%) है।
  • तीन चरणों में निर्मित 4 बांधों का क्रमानुसार विवरण:
    • प्रथम चरण: गांधी सागर बांध (मंदसौर, मध्य प्रदेश) – यह चम्बल नदी पर बना क्षेत्रफल में सबसे बड़ा बांध है, जिसकी क्षमता 5 X 23 = 115 MW है। इसी चरण में सिंचाई हेतु राजस्थान में कोटा बैराज (1960) का निर्माण किया गया, जिससे कोटा, बूंदी और बारां जिलों में नहरों द्वारा सिंचाई होती है (कोटा बैराज से कोई बिजली नहीं बनती)।
    • द्वितीय चरण: राणा प्रताप सागर बांध (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़) – स्थापित क्षमता 172 MW (4 X 43MW)। यह भराव क्षमता (Water Storage) की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है।
    • तृतीय चरण: जवाहर सागर बांध (कोटा-बूंदी सीमा) – स्थापित क्षमता 99 MW (3 X 33 MW)। यह एक ‘पिकअप बांध’ के रूप में भी कार्य करता है।

(D) माही बजाज सागर परियोजना: आदिवासियों का स्वर्ण विन्यास

यह माही नदी पर निर्मित राजस्थान और गुजरात की संयुक्त बहुउद्देशीय योजना है, जिसमें वित्तीय लागत का अनुपात क्रमशः 45:55 निर्धारित है।

  • मुख्य बांध (बोरखेड़ा, बांसवाड़ा): यह 3109 मीटर लंबा राजस्थान का सबसे लंबा बांध है।
  • विद्युत आवंटन का विशिष्ट नियम: यद्यपि गुजरात का वित्तीय हिस्सा अधिक है, परंतु इस परियोजना से उत्पादित होने वाली 100% जल विद्युत (कुल 140 MW) केवल और केवल राजस्थान को प्राप्त होती है। इसका मुख्य उपयोग दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर के आदिवासी क्षेत्रों के आर्थिक उत्थान में किया जाता है। इसके तहत मुख्य बांध के नीचे ‘कागदी पिकअप बांध’ का निर्माण जल वितरण के लिए किया गया है।

4. वृहद् सिंचाई परियोजनाएं एवं प्रमुख नहरें (Major Canal Systems)

(A) इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) — “मरुगंगा”

यह संपूर्ण भारत की सबसे विशाल और महत्वाकांक्षी मानव निर्मित नहरी सिंचाई परियोजना है, जिसे पश्चिमी राजस्थान की ‘जीवनरेखा’ या ‘मरुगंगा’ कहा जाता है।

  • विकास का इतिहास: वर्ष 1948 में बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता श्री कंवर सेन ने सरकार के सामने एक शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसका शीर्षक था— “बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता”31 मार्च 1958 को तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री गोविंद बल्लभ पंत द्वारा इसकी आधारशिला रखी गई। इसके सुचारू निर्माण के लिए ‘IGNP बोर्ड’ का गठन किया गया जिसके प्रथम अध्यक्ष कंवर सेन बने। प्रारंभ में इसका नाम ‘राजस्थान नहर’ था, जिसे 2 नवम्बर 1984 को बदलकर ‘इंदिरा गांधी नहर परियोजना’ (IGNP) कर दिया गया।
  • उद्गम व तकनीकी संरचना: यह नहर पंजाब में सतलज और ब्यास नदियों के पवित्र संगम पर निर्मित हरिके बैराज (Harike Barrage) से निकाली गई है। यह मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित है:
    1. राजस्थान फीडर (Feeder Canal): इसकी कुल लंबाई 204 किलोमीटर है (170 किमी पंजाब व हरियाणा में, तथा 34 किमी राजस्थान में)। फीडर नहर से कहीं भी सिंचाई नहीं की जाती, यह केवल पानी लाने का माध्यम है।
    2. मुख्य नहर (Main Canal): हनुमानगढ़ के मसीतावाली हेड से शुरू होकर जैसलमेर के मोहनगढ़ तक इसकी कुल लंबाई 445 किलोमीटर है। वर्तमान में इसके अंतिम छोर को बाड़मेर के गडरा रोड (उपकंप सागरमल गोपा शाखा) तक बढ़ा दिया गया है।
  • 7 सुप्रसिद्ध लिफ्ट नहरों का नवीन जिला-वार मैपिंग (2026 Updated):पश्चिमी राजस्थान का धरातल ढलान के विपरीत ऊँचा होने के कारण पानी को मोटरों से ऊपर उठाकर छोटी नहरों में डाला जाता है, जिन्हें लिफ्ट नहरें कहते हैं:
    1. कंवर सेन लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: लूणकरणसर लिफ्ट)। यह IGNP की प्रथम और सबसे लंबी लिफ्ट नहर (151.64 किमी) है, जिससे बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों को जीवनदायिनी पेयजल मिलता है (इसे बीकानेर की जीवनरेखा कहते हैं)।
    2. चौधरी कुम्भाराम आर्य लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: नोहर-साहवा)। इससे हनुमानगढ़, चुरू, बीकानेर और झुंझुनू व नीमकाथाना के क्षेत्रों को लाभ मिलता है।
    3. पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: गजनेर लिफ्ट)। बीकानेर और नागौर जिलों को लाभान्वित करती है।
    4. डॉ. करणी सिंह लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: कोलायत लिफ्ट)। बीकानेर और जोधपुर/जोधपुर ग्रामीण जिलों में जल आपूर्ति।
    5. गुरु जम्भेश्वर लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: फलोदी लिफ्ट)। फलोदी, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जिलों के मरुस्थलीय ब्लॉकों को जोड़ती है।
    6. जयनारायण व्यास लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: पोकरण लिफ्ट)। जैसलमेर और जोधपुर ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य नहर।
    7. वीर तेजाजी लिफ्ट नहर: (पुराना नाम: बांगड़सर लिफ्ट)। यह क्षमता में सबसे छोटी लिफ्ट नहर है जो केवल बीकानेर क्षेत्र को सिंचित करती है।
  • तकनीकी नवाचार: इसके संपूर्ण जल प्रवाह, क्लोजर और गेट नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक स्काडा (SCADA) ऑटोमेशन सिस्टम लागू किया गया है।

(B) गंग नहर परियोजना: आधुनिक सिंचाई का प्रथम चमत्कार

यह राजस्थान की सबसे पहली आधुनिक नहर सिंचाई परियोजना है, जिसे बीकानेर के आधुनिक दूरदर्शी महाराजा गंगा सिंह के भगीरथ प्रयासों से निर्मित किया गया था।

  • ऐतिहासिक तिथियाँ: 4 सितंबर 1920 को पंजाब के राजाओं और बीकानेर के मध्य सतलज नदी के पानी के लिए त्रिपक्षीय समझौता हुआ। 5 सितंबर 1921 को इसकी आधारशिला रखी गई और 1927 में यह पूर्ण हुई। 26 अक्टूबर 1927 को भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन ने शिवपुर हेडवर्क्स पर इसका भव्य उद्घाटन किया था
  • भौगोलिक पथ: यह पंजाब के हुसैनीवाला (फिरोजपुर) से सतलज नदी से निकलती है। इसकी कुल लंबाई 129 किमी है (112 किमी पंजाब में, 17 किमी राजस्थान में)। यह मुख्य रूप से श्रीगंगानगर जिले की कृषि का आधार है। इसकी प्रसिद्ध शाखाएँ— लालगढ़, लक्ष्मीनारायण, करणी और समीजा हैं।

(C) नर्मदा नहर परियोजना: फुहार सिंचाई का अनूठा मॉडल

यह गुजरात के सरदार सरोवर बांध से निकाली गई एक अत्यंत आधुनिक नहर परियोजना है, जो गुजरात से होते हुए राजस्थान के सांचौर जिले के सीलू गाँव से राज्य में प्रवेश करती है।

  • अनिवार्य तकनीकी नियम: यह संपूर्ण भारत की एकमात्र ऐसी सिंचाई परियोजना है जिसमें “फव्वारा पद्धति” / टपकन सिंचाई (Sprinkler & Drip Irrigation) को वैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) किया गया है। यहाँ खुला पानी छोड़कर बहती सिंचाई करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इससे राज्य के सांचौर (नवीन जिला) और बाड़मेर/बालोतरा जिलों के अत्यंत सूखे क्षेत्रों को हरित पट्टी में बदल दिया गया है।

(D) बीसलपुर व ईसरदा बांध परियोजना (बनास नदी की कड़ियाँ)

  • बीसलपुर परियोजना (टोंक): बनास नदी पर टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे के पास निर्मित यह राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल (Drinking Water) परियोजना है, जो अजमेर, टोंक, जयपुर शहर और जयपुर ग्रामीण को स्वच्छ जल की आपूर्ति करती है।
  • ईसरदा बांध परियोजना (सवाई माधोपुर / टोंक सीमा): बनास नदी पर बीसलपुर बांध के अतिरिक्त बहने वाले पानी (Surplus Water) को रोकने के लिए ईसरदा में एक वृहद् बांध बनाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दौसा और सवाई माधोपुर जिलों को पेयजल और सिंचाई सुरक्षा देना है।

5. मध्यम सिंचाई परियोजनाएं (Medium Irrigation Matrix)

RPSC और RSMSSB की परीक्षाओं में सीधे तौर पर मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के नाम देकर कूट मिलान वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दी गई प्रामाणिक सारणी को कंठस्थ करना परीक्षा के लिए अचूक है:

📊 राजस्थान की प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजनाएं

मध्यम परियोजना का नामआधिकारिक भौगोलिक स्थान / जिलासंबद्ध नदी / विशिष्ट विवरण
पांचना बांधगुडला गाँव, करौलीगंभीर की 5 सहायक नदियों (भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, माची, भैंसावट) के संगम पर स्थित मिट्टी से बना राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है (अमेरिका के आर्थिक सहयोग से निर्मित)।
सावन-भादो परियोजनासांगोद, कोटाअरू नदी पर स्थित कोटा जिले की मुख्य मध्यम सिंचाई योजना।
सोम कमला अम्बाआसपुर, डूंगरपुरसोम नदी पर स्थित वागड़ क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण मध्यम सिंचाई परियोजना।
सोम कागदर बांधखेरवाड़ा, उदयपुरउदयपुर के जनजातीय क्षेत्रों के लिए सोम नदी पर निर्मित बांध।
छापी बांध / चोली बांधअकलेरा / पिड़ावा, झालावाड़मालवा पठार के मुहाने पर चोली और छापी नदियों पर निर्मित आधुनिक मध्यम बांध।
मोरेल बांधलालसोट, दौसामोरेल (बनास की सहायक) नदी पर मिट्टी और कंक्रीट से निर्मित पुराना बांध।
गरदड़ा परियोजनाबूंदीमँगाली और गणेशी नाले पर स्थित बूंदी की प्रमुख सिंचाई परियोजना, जो तकनीकी अवरोधों के कारण चर्चा में रही।
अजान बांधभरतपुरगंभीर नदी के पानी को रोकने के लिए राजा सूरजमल द्वारा निर्मित, जो केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को जल की आपूर्ति करता है।
परवन लिफ्ट योजनाबारांपरवन नदी के जल को लिफ्ट करके हाड़ौती के खेतों तक पहुँचाने की वृहद्-मध्यम योजना।

📝 विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam-Targeted PYQs with Explanations)

यहाँ RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के 20 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के पूर्ण प्रामाणिक उत्तर और विश्लेषणात्मक व्याख्याएँ दी जा रही हैं:

Q1. राजस्थान में सिंचाई का सबसे बड़ा और प्राथमिक स्रोत कौन सा है और इसमें कौन सा जिला शीर्ष पर है? (RPSC 2018)

  • उत्तर: कुएं और नलकूप (Wells & Tube-wells) राज्य में सिंचाई का सबसे बड़ा स्रोत हैं, जिनकी कुल सिंचित क्षेत्रफल में हिस्सेदारी लगभग 70.75% है। इस विधा में जयपुर और जयपुर ग्रामीण जिला पूरे राज्य में शीर्ष स्थान पर आता है।

Q2. बहुउद्देशीय परियोजनाओं के अंतर्गत ‘भाखड़ा-नांगल परियोजना’ में राजस्थान का कुल कितना प्रतिशत हिस्सा निर्धारित है? (REET 2021)

  • उत्तर: 1959 के भाखड़ा समझौते के अनुसार इस संयुक्त परियोजना में राजस्थान का कुल हिस्सा 15.22 प्रतिशत निर्धारित है। इसके तहत राज्य को लगभग 227 मेगावाट जल विद्युत और हनुमानगढ़ बेल्ट में प्रचुर पानी प्राप्त होता है।

Q3. चम्बल नदी घाटी परियोजना के अंतर्गत स्थापित पनबिजली स्टेशनों से उत्पादित होने वाली कुल विद्युत क्षमता में से राजस्थान को कितनी बिजली मिलती है?

  • उत्तर: चम्बल परियोजना की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 386 MW है। चूँकि यह राजस्थान और मध्य प्रदेश का 50:50 का संयुक्त उपक्रम है, अतः राजस्थान का वास्तविक हिस्सा 193 MW है। (छात्र ध्यान दें कि कोटा बैराज से कोई बिजली नहीं बनती, केवल गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर से बनती है)।

Q4. ‘कंवर सेन लिफ्ट नहर’ का पुराना नाम क्या था और यह किस रणनीतिक विशेषता के लिए जानी जाती है? (RSMSSB)

  • उत्तर: इसका पुराना नाम लूणकरणसर लिफ्ट नहर था। यह इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की सबसे पहली और सबसे लंबी (151.64 किमी) लिफ्ट नहर है, जिसे ‘बीकानेर की जीवनरेखा’ कहा जाता है क्योंकि यह बीकानेर और श्रीगंगानगर को पेयजल का मुख्य संबल देती है।

Q5. संपूर्ण भारत की वह कौन सी एकमात्र सिंचाई परियोजना है जिसमें ‘फव्वारा सिंचाई पद्धति’ (Sprinkler Irrigation) को वैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया है?

  • उत्तर: नर्मदा नहर परियोजना। गुजरात के सरदार सरोवर बांध से निकलने वाली यह नहर राजस्थान के सांचौर जिले के सीलू गाँव से प्रवेश करती है। इसके पूरे कमांड एरिया में ड्रिप या स्प्रिंकलर तकनीक से ही सिंचाई करने का कड़ा नियम है।

Q6. राजस्थान के करौली जिले में स्थित ‘पांचना बांध’ की स्थापत्य कला की सबसे अनूठी विशेषता क्या है? (Patwari 2021)

  • उत्तर: पांचना बांध पूर्ण रूप से मिट्टी से निर्मित (Earth-fill Dam) राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है। यह गंभीर की पांच छोटी सहायक नदियों (भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, माची, भैंसावट) के संगम पर अमेरिका के आर्थिक सहयोग से बनाया गया था।

Q7. ‘माही बजाज सागर परियोजना’ के लागत और विद्युत आवंटन के कूट नियमों का विश्लेषणात्मक विवरण दीजिए? (RAS Pre 2019)

  • उत्तर: यह राजस्थान और गुजरात की योजना है जिसमें वित्तीय लागत का अनुपात 45:55 है। परंतु विद्युत आवंटन के नियमों के तहत उत्पादित होने वाली 100% बिजली (140 MW) केवल राजस्थान को मिलती है, जिसका उपयोग आदिवासी क्षेत्रों में होता है।

Q8. बीकानेर रियासत में महाराजा गंगा सिंह द्वारा निर्मित ‘गंग नहर’ का उद्घाटन किस ब्रिटिश वायसराय द्वारा और किस वर्ष किया गया था?

  • उत्तर: गंग नहर का भव्य उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 को भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा शिवपुर हेडवर्क्स पर फीता काटकर किया गया था। यह राज्य की पहली आधुनिक नहरी व्यवस्था थी।

Q9. ‘सोम कमला अम्बा’ और ‘सोम कागदर’ मध्यम सिंचाई परियोजनाएं क्रमशः राजस्थान के किन जिलों की आजीविका का मुख्य आधार हैं?

  • उत्तर: ‘सोम कमला अम्बा’ परियोजना डूंगरपुर जिले में स्थित है तथा ‘सोम कागदर’ बांध परियोजना उदयपुर जिले में स्थित है। ये दोनों सोम नदी के जल विन्यास पर आधारित हैं।

Q10. भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (पक्षी अभ्यारण्य) को शीतकाल में जल संकट के समय किस बांध से पानी की आपूर्ति की जाती है?

  • उत्तर: अजान बांध (भरतपुर) से। गंभीर नदी के पानी को डाइवर्ट करके महाराजा सूरजमल के काल में निर्मित यह बांध केवलादेव के पारिस्थितिक तंत्र और पक्षियों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है।

Q11. इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की परिकल्पना सर्वप्रथम किस सिंचाई इंजीनियर ने और किस वर्ष प्रस्तुत की थी? (Gram Sevak)

  • उत्तर: वर्ष 1948 में बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता श्री कंवर सेन ने भारत सरकार के सामने “बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता” शीर्षक से एक प्रामाणिक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया था, जो बाद में मरुगंगा बना।

Q12. ‘व्यास परियोजना’ के अंतर्गत निर्मित ‘पोंग बांध’ का मुख्य तकनीकी उद्देश्य राजस्थान की किस वृहद् नहर के संदर्भ में रणनीतिक माना जाता है?

  • उत्तर: पोंग बांध का मुख्य उद्देश्य शीतकाल (सर्दियों के मौसम) में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में पानी की निरंतरता और अतिरिक्त जल प्रवाह को सुनिश्चित करना है ताकि रबी की फसलों को समय पर पानी मिल सके।

Q13. ‘सावन-भादो’ और ‘गरदड़ा’ सिंचाई परियोजनाएं क्रमशः राजस्थान के किन दो हाड़ौती संभाग के जिलों में स्थित हैं?

  • उत्तर: ‘सावन-भादो’ सिंचाई परियोजना कोटा जिले में (सांगोद के निकट) स्थित है तथा ‘गरदड़ा’ परियोजना बूंदी जिले में मँगाली नदी पर स्थित है।

Q14. बनास नदी पर निर्मित ‘बीसलपुर परियोजना’ का मुख्य प्राथमिक उद्देश्य क्या है और यह किन शहरों की जीवनरेखा है?

  • उत्तर: यह राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल (Drinking Water) परियोजना है। यह मुख्य रूप से प्रशासनिक राजधानी जयपुर, अजमेर, ब्याावर, दूदू और टोंक जिले को स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति करने वाली जीवनरेखा है।

Q15. कल्टिवेबल कमांड एरिया (CCA) के आधार पर ‘वृहद्’ और ‘मध्यम’ सिंचाई परियोजनाओं की आधिकारिक विधिक सीमा क्या निर्धारित है?

  • उत्तर: वृहद् परियोजनाओं की सीमा 10,000 हेक्टेयर से अधिक कल्टिवेबल कमांड एरिया होती है। जबकि मध्यम परियोजनाओं की विधिक सीमा 2,000 हेक्टेयर से 10,000 हेक्टेयर के मध्य निर्धारित है।

Q16. राजस्थान के किस जिले में तालाबों द्वारा सिंचाई का घनत्व और हिस्सेदारी संपूर्ण राज्य में सर्वाधिक पाई जाती है?

  • उत्तर: भीलवाड़ा जिले में। पहाड़ी और पठारी संस्तर के कारण यहाँ पारंपरिक रूप से तालाबों (Tanks) में वर्षा जल रोकना सुगम है, जो कुल सिंचाई का एक मुख्य केंद्र है।

Q17. आईजीएनपी की ‘चौधरी कुम्भाराम आर्य लिफ्ट नहर’ से वर्तमान 2026 के प्रशासनिक विन्यास के अनुसार किन जिलों को लाभ मिल रहा है?

  • उत्तर: इसके तहत मुख्य रूप से हनुमानगढ़, चुरू, बीकानेर, झुंझुनू और नए गठित जिले नीमकाथाना (Neem Ka Thana) के क्षेत्रों को पेयजल और आंशिक सिंचाई सुरक्षा मिलती है।

Q18. राजस्थान में ‘नहरों द्वारा सिंचाई’ का सर्वोच्च प्रतिशत और क्षेत्रफल किस जिले के अंतर्गत दर्ज किया गया है?

  • उत्तर: श्रीगंगानगर जिले में। गंग नहर और आईजीएनपी की विभिन्न वितरिकाओं के घने संजाल के कारण यह जिला नहरी सिंचाई में पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर आता है।

Q19. ‘मोरेल बांध’ परियोजना राजस्थान के किस जिले में स्थित है और यह किसकी सहायक नदी पर निर्मित है?

  • उत्तर: मोरेल बांध परियोजना दौसा जिले (लालसोट के पास) में स्थित है। यह बनास की मुख्य सहायक नदी मोरेल नदी पर मिट्टी और कंक्रीट के मिश्रण से निर्मित पुरानी योजना है।

Q20. चम्बल नदी घाटी परियोजना के अंतर्गत निर्मित वह कौन सा बांध है जिससे कोई पनबिजली (Hydro Power) नहीं बनाई जाती, केवल सिंचाई होती है?

  • उत्तर: कोटा बैराज (कोटा)। इसका उद्घाटन 20 नवंबर 1960 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था। इसका उपयोग केवल दाईं और बाईं नहरों के माध्यम से कोटा, बूंदी और बारां के खेतों को पानी देने के लिए किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

Q1. राजस्थान के प्रशासनिक पुनर्गठन (41 जिलों) के बाद ‘नर्मदा नहर’ और ‘खड़ीन कृषि’ के मुख्य जिले अब कौन से हैं?

उत्तर: नर्मदा नहर अब बाड़मेर से अलग होकर नए गठित जिले सांचौर (Sanchore) के सीलू गाँव से प्रवेश करती है और सांचौर व बालोतरा बेल्ट को सिंचित करती है। वहीं, पारंपरिक जल संचयन आधारित ‘खड़ीन कृषि’ का मुख्य केंद्र अभी भी मरुस्थलीय जिला जैसलमेर ही बना हुआ है।

Q2. ‘स्थानांतरण कृषि / वालरा’ के अंतर्गत ‘चिमाता’ और ‘दजिया’ का मुख्य भौगोलिक अंतर क्या होता है?

उत्तर: आदिवासियों द्वारा पहाड़ी अरावली की ढलानों और जंगलों को जलाकर की जाने वाली खेती को चिमाता कहते हैं। इसके विपरीत, जब वे मैदानी या समतल भागों में वनों को साफ करके कृषि भूमि तैयार करते हैं, तो उसे दजिया कहा जाता है।

Q3. ‘प्रसाद’ (PRASHAD) योजना की तरह ही सिंचाई और जल जीवन मिशन के तहत ‘SCADA’ तकनीक का आईजीएनपी में क्या कार्य है?

उत्तर: SCADA का पूरा नाम Supervisory Control and Data Acquisition है। इस कंप्यूटर आधारित तकनीक का मुख्य कार्य इंदिरा गांधी नहर के मुख्य फाटकों (Gates), जल प्रवाह की गति और वितरिकाओं में पानी के स्तर की रिमोटली लाइव मॉनिटरिंग और ऑटोमेटेड कंट्रोल करना है ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके।

Q4. राजस्थान के किस बांध को ‘मिट्टी से निर्मित सबसे बड़ा बांध’ होने का गौरव प्राप्त है और यह कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह गौरव पांचना बांध को प्राप्त है, जो करौली जिले के गुडला गाँव के पास स्थित है। यह पूर्णतः मिट्टी (Earth-fill) से बना राज्य का सबसे बड़ा बांध संरचना है।

Q5. ‘काजरी’ (CAZRI) और शुष्क कृषि के सिद्धांतों के अनुसार राजस्थान में ‘मानसून का जुआ’ शब्द का वास्तविक आर्थिक अर्थ क्या है?

उत्तर: इसका अर्थ यह है कि राज्य की 60% से अधिक कृषि योग्य भूमि कृत्रिम सिंचाई के साधनों से वंचित है और पूर्णतः अनिश्चित मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। यदि वर्षा समय पर और पर्याप्त हुई तो अर्थव्यवस्था फलती-फूलती है, अन्यथा अकाल पड़ता है। कृषि की इसी पूर्ण प्राकृतिक निर्भरता और जोखिम को ‘मानसून का जुआ’ कहते हैं।

Q6. इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की सबसे लंबी और सबसे छोटी लिफ्ट नहरें क्रमशः कौन सी हैं?

उत्तर: आईजीएनपी की सबसे लंबी लिफ्ट नहर कंवर सेन लिफ्ट नहर (151.64 किमी) है, जो बीकानेर की जीवनरेखा है। वहीं सबसे छोटी लिफ्ट नहर क्षमता और लंबाई की दृष्टि से वीर तेजाजी लिफ्ट नहर (बीकानेर) मानी जाती है।

Q7. चम्बल परियोजना के अंतर्गत ‘राणा प्रताप सागर बांध’ की भराव क्षमता के संदर्भ में क्या विशिष्ट रिकॉर्ड है?

उत्तर: रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में स्थित राणा प्रताप सागर बांध भराव क्षमता (Water Storage Capacity) के दृष्टिकोण से पूरे राजस्थान का सबसे बड़ा और विशालतम बांध है। यहाँ परमाणु बिजलीघर को भी पानी की आपूर्ति की जाती है।

Q8. महाराजा गंगा सिंह द्वारा निर्मित ‘गंग नहर’ का उद्गम स्थल कहाँ है और यह किस नदी से निकाली गई है?

उत्तर: गंग नहर का उद्गम स्थल पंजाब के फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला हेडवर्क्स है। यह नहर प्राचीन सतलज नदी (Satluj River) के जल प्रवाह से निकाली गई है।

Q9. भीलवाड़ा को ‘माईका सिटी’ की तरह ही ‘तालाबों द्वारा सिंचाई का गढ़’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: भीलवाड़ा की भूगर्भीय बनावट पथरीली और कठोर है जहाँ कुएं खोदना कठिन है, परंतु वर्षा जल को छोटे बांधों और तालाबों में रोकना अत्यंत सुगम है। इसी कारण पूरे राजस्थान में तालाबों द्वारा होने वाली कुल सिंचाई का सबसे बड़ा हिस्सा अकेले भीलवाड़ा जिले में केंद्रित है।

Q10. राजस्थान जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) का मुख्य कार्य क्या है और इसकी प्रामाणिकता का स्रोत क्या है?

उत्तर: इस विभाग का मुख्य कार्य राज्य की सभी लघु, मध्यम और वृहद् नदी घाटी परियोजनाओं का प्रशासनिक नियंत्रण, नहरों का रखरखाव, बांधों की सुरक्षा और जल वितरण का न्यायपूर्ण मानकीकरण सुनिश्चित करना है। इसके आंकड़े राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर लाइव प्रलेखित होते हैं।

📚 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत (References & E-E-A-T Seal)

  • तथ्य जाँच एवं संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd, महेंद्र ढाका – भूगोल विशेषज्ञ)।
  • आधिकारिक प्रलेखन, जल संसाधन विभाग, राजस्थान सरकार (Water Resources Department, Rajasthan).
  • डॉ. हरीमोहन सक्सेना, “राजस्थान का प्रादेशिक भूगोल” (राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा स्वीकृत प्रामाणिक संदर्भ पाठ).
  • भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) एवं इंदिरा गांधी नहर बोर्ड (IGNP) की वार्षिक क्षमता संचय रिपोर्ट्स।
  • RPSC RAS Pre/Mains, स्कूल व्याख्याता (Grade-I) और RSMSSB पटवारी व ग्राम विकास अधिकारी परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के हल प्रश्नपत्रों का प्रामाणिक विश्लेषणात्मक संकलन।

📚 सुयोग अकादमी: राजस्थान संपूर्ण अध्ययन श्रृंखला

भूगोल (Geography): स्थिति एवं विस्तार | भौतिक स्वरूप | अरावली पर्वत | मैदान व पठार | जलवायु | मिट्टी

जल संसाधन (Water Resources): नदियाँ व अपवाह तंत्र | प्रमुख झीलें | सिंचाई परियोजनाएं

अर्थव्यवस्था (Economy): कृषि एवं जलवायु प्रदेश | खनिज संपदा | ऊर्जा परियोजनाएं | उद्योग | जनसंख्या (2011)

पारिस्थितिकी एवं इतिहास: वन्यजीव अभ्यारण्य | राष्ट्रीय उद्यान | पर्यटन | एकीकरण | प्रमुख दुर्ग

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