झील क्या होती है और कैसे बनती है?
झील एक स्थिर जल निकाय होती है, जो भूमि के भीतर अवसाद या गड्ढे में जल भरने से बनती है। यह जल बारिश, नदियों, ग्लेशियरों के पिघलने या भूगर्भीय गतिविधियों के कारण एकत्र हो सकता है। झीलें प्राकृतिक भी हो सकती हैं और मानव निर्मित भी।
झीलों के प्रकार
राजस्थान में प्राकृतिक रूप से दो प्रकार की झीलें पाई जाती हैं –
- मीठे पानी की झीलें ✨
- खारे पानी की झीलें ❈
मीठे पानी की झीलें
मीठे पानी की झीलें अरावली पहाड़ी के पूर्वी भाग में पाई जाती हैं।
1. जयसमंद झील 🌊
- जयसमंद झील का निर्माण उदयपुर के महाराणा जय सिंह ने गोमती नदी पर बांध बनाकर किया था। (निर्माण काल = 1685−1691 ई.)
- यह मीठे पानी की राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
- इस झील में 7 टापू हैं, जिनमें बाबा का भागड़ा (या मगरा) सबसे बड़ा और प्यारी सबसे छोटा है।
- 1950 में सिंचाई सुविधा के लिए इस झील से श्यामपुर और भाट नहर निकाली गई थी।
- इस झील में निवास करने वाली जनजाति भील-मीणा है।
- नर्मदेश्वर महादेव मन्दिर एवं हाथियों की प्रतिमा इस झील के निकट स्थित है।
- इस झील में जलीय जैव विविधता अधिक पाई जाती है। इस कारण से इसे “जलचरों की बस्ती“ भी कहा जाता है।
- इसे ढेबर झील भी कहा जाता है।
2. राजसमंद झील 🏞️
स्थिति – राजसमंद
निर्माता – महाराजा राजसिंह
निर्माणकाल – 1662-76 ई.
नदियाँ – गोमती, ताली, केलवा
- इस झील की नींव घेवर माता ने रखी थी।
- महाराणा राज सिंह ने गोमती, ताल और केलवा नदियों के पानी को रोककर इसका निर्माण करवाया।
- झील के उत्तरी भाग को नौ चौकी कहा जाता है, जहां संगमरमर की 25 शिलाओं पर मेवाड़ का इतिहास संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
- इसे राज प्रशस्ति या राजसिंह प्रशस्ति कहा जाता है, जो भारत की सबसे बड़ी प्रशस्ति मानी जाती है।
3. पिछोला झील
- महाराणा लाखा के समय एक बंजारे ने अपने बैल की याद में इस झील का निर्माण कराया था।
- निर्माण काल – 1388
- नदियाँ – सीसारमा, बूझड़ा
- इसके किनारे ही नटनी का चबूतरा स्थित है।
- झील में स्थित जग मंदिर का निर्माण जगत सिंह प्रथम और जग निवास (लेक पैलेस) का निर्माण जगत सिंह द्वितीय ने करवाया था।
- वर्तमान में जग मन्दिर एवं जग निवास ’होटल लेक पैलेस’ के रूप में संचालित है।
- स्वरूप सागर चैनल – यह पिछोला झील के अतिरिक्त जल को फतह सागर में वितरित करता है।
- पिछोला झील के निकट दूधतलाई और उदयपुर सिटी पैलेस स्थित है।
- शाहजहाँ ने अपने निर्वासन काल में कुछ समय जग मंदिर में बिताया था।
4. रंग सागर / अमरकुट
- स्थिति – उदयपुर
- निर्माणकाल – अमरसिंह बड़वा
- नदी – सीसारमा, बूझड़ा
- यह झील पिछोला एवं स्वरूप सागर से जुडी हुई है।
4. फतेह सागर झील 🌊
- इस झील का निर्माण महाराणा जय सिंह ने करवाया था, लेकिन अधिक वर्षा के कारण इसका बांध टूट गया था।
- बाद में महाराणा फतेह सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।
- इसका शिलान्यास ड्यूक ऑफ कनॉट ने किया था, इसलिए इसे कनॉट बांध भी कहते हैं।
- एक नहर द्वारा फतेह सागर झील पिछोला झील से जुड़ी हुई है।
- सौर वैधशाला, टेलीस्कोप और ’वर्चुअल फ़िश एक्वेरियम’ भी इस झील के निकट स्थित है।
- इस झील में पानी की कमी होने पर मदार बाँध (बेड़च नदी) से जलापूर्ति की जाती है।
- इस झील के निकट ’मोती मगरी’ (पहाड़ी) स्थित है।
- इस झील के मध्य नेहरू उद्यान स्थित है जो पर्यटन को आकर्षित करता है।
5. नक्की झील ⛰️
- यह झील माउंट आबू (सिरोही) में स्थित है और राजस्थान की सबसे ऊँची झील है।
- इस झील के पास प्रसिद्ध टॉड रॉक, नन्दी रॉक, हॉर्न रॉक और नन रॉक स्थित हैं।
- मान्यता है कि इस झील को देवताओं ने अपने नाखूनों (नक्की) से खोदकर बनाया था।
- यह राजस्थान की सबसे ऊँची 1200 मी. एवं सबसे गहरी 35 मी. झील है।
- नक्की झील राजस्थान की सबसे ठण्डी झील है।
- राजस्थान में एकमात्र हिल स्टेशन वाली झील है।
- गरासिया जनजाति के द्वारा अस्थियों का विसर्जन इस झील में किया जाता है।
6. उदय सागर झील
- इस झील का निर्माण महाराणा उदय सिंह ने करवाया था। (1559-64 ई.)
- इसमें आयड़ नदी आकर मिलती है, जिसके बाद इसे बेड़च नदी कहा जाता है।
7. आना सागर झील 🌅
- इस झील का निर्माण 1137 ईस्वी में आनाजी (पृथ्वीराज चौहान के दादा) ने अजमेर में करवाया था।
- इसमें बांडी नदी का पानी आता है।
- जब जहांगीर अजमेर आया, तो उसने इस झील के किनारे दौलत बाग (सुभाष उद्यान) बनवाया।
- बाद में शाहजहाँ ने झील के किनारे बारहदरी का निर्माण करवाया।
- देश का प्रथम “इलेक्ट्रिक क्रूज“ इस झील में संचालित (अक्टूबर 2024) किया गया।
8. पुष्कर झील 🏞️
- यह एक क्रेटर झील / ज्वालामुखी झील का उदाहरण है |
- पुष्कर झील राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है
- यह झील अजमेर से 11 किमी दूर पुष्कर में स्थित है और इसे धार्मिक दृष्टि से अति पवित्र माना जाता है।
- हर साल कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ भव्य मेला आयोजित होता है।
- झील के पास ही विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर स्थित है।
- यह एक प्राकृतिक झील है, जिसे हिंदू धर्म में तीर्थों का राजा कहा गया है।
- उपनाम – पाँचवा तीर्थ, तीर्थराज, तीर्थों का मामा, कोंकण तीर्थ, 52 घाटा झील।
- इस झील में प्रमुख व्यक्तियों (जैसे – गाँधीजी, अटल बिहारी वाजपेयी, बाल ठाकरे, किरोड़ी सिंह बैंसला) की अस्थियों का विसर्जन किया गया है।
- कार्तिक पूर्णिमा को इस झील के किनारे मेला आयोजित होता है जिसे “राजस्थान का रंगीला मेला“ कहा जाता है।
- कार्तिक पूर्णिमा को इस झील में दीपदान किया जाता है।
9. सिलीसेढ़ झील 🌊
- इस झील का निर्माण 1845 ईस्वी में अलवर के महाराजा विनय सिंह ने अपनी रानी के लिए करवाया था।
- झील के पास एक शाही महल व लॉज बनवाया गया, जो आज लेक पैलेस होटल के रूप में संचालित हो रहा है।
- मत्स्यपालन एवं स्थानीय पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है।
- इस झील को ’राजस्थान का नन्दन कानन’ भी कहा जाता है।
- सिलीसेढ झील स्वर्णिक त्रिकोण (जयपुर, दिल्ली, आगरा) पर स्थित है।
10. कोलायत झील ⛲
- यह झील बीकानेर जिले में स्थित है।
- निर्माता – कपिल मुनि (इसलिए कपिल सरोवर भी कहते हैं), यहाँ प्रसिद्ध कपिल मुनि आश्रम स्थित है।
- इस झील के किनारे 52 घाट स्थित हैं।
- कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ एक भव्य मेला आयोजित किया जाता है।
- इस झील में कार्तिक पूर्णिमा को दीपदान भी किया जाता है।
- चारण जाति कोलायत झील में स्नान या दर्शन हेतु नहीं जाती क्योंकि यहीं उनकी पूज्य करणी माता के गोद लिए हुए पुत्र की मृत्यु हुई थी।
12. बड़ी झील / जाना / जियान सागर
- स्थिति – उदयपुर (बड़ी गाँव)
- निर्माता – महाराजा राजसिंह (निर्माणकाल = 1652-1680 ई.)
- विशेषताएँ –
- इस झील के निकट बाहुबली पहाड़ी स्थित है।
- इस झील में महासीर मछली की प्रजाति पाई जाती है।
- यह झील ’कन्जर्वेशन रिजर्व’ में शामिल है।
13. दूधतलाई – उदयपुर
- पिछोला झील के निकट स्थित है।
- नोट :- दूध बावड़ी (सिरोही)
14. फॉय सागर झील
- निर्माता – इंजीनियर फॉय (निर्माण काल – 1891-92 ई.)
- नदी – बांडी नदी
- राजस्थान की दूसरी अकाल राहत झील फॉय सागर है। (प्रथम -राजसमंद, 1662 ई.)
15.मानसागर झील – (जयपुर)
- निर्माता – मानसिंह (निर्माण काल – 1610 ई.)
- मानसागर झील राजस्थान की सर्वाधिक प्रदूषित झील है।
- जलमहल इसी में स्थित है एवं नाहरगढ़ पहाड़ी भी इसके निकट स्थित है।
- द्रव्यवती नदी (अमानी शाह नाला) मानसागर झील से निकलती है।
- जयपुर शहर इसी नदी के किनारे स्थित है।
16. मावठा झील –
- यह जयपुर में स्थित मीठे पानी की झील है।
- वर्षा जल पर आधारित।
- यह एक प्राकृतिक झील है जो आमेर दुर्ग के निकट स्थित है।
17. कायलाना झील (सर प्रताप सागर झील) – जोधपुर
- निर्माता – सर प्रताप सिंह (निर्माण काल – 1872 ई.)
- कायलाना राजस्थान की पहली झील है जो इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़ी हुई है। (हाल ही में गढ़सीसर झील (जैसलमेर) को भी IGNP से जोड़ा गया है )
- इस झील से जोधपुर को पेय जलापूर्ति होती है।
- माचिया सफारी (मृग उद्यान) इसके निकट स्थित है।
18. गजनेर झील –
- स्थिति – बीकानेर (गजनेर पैलेस के निकट)
- निर्माता – महाराजा गंगासिंह
- गजनेर झील वर्षा जल पर आधारित है। जिसे ’पानी का शुद्ध दपर्ण’ भी कहा जाता है।
19. रामगढ़ झील – (बाराँ)
- यह एक क्रेटर/उल्कापिंड झील का उदाहरण है।
- यह झील “घोड़े की नाल“ जैसी पहाड़ियों से घिरी हुई है।
- यूनेस्को के द्वारा इस झील को 2024 में भू-विरासत स्थल की सूची में शामिल किया गया।
20. नवल सागर/नवलखा झील –
- बूँदी में स्थित मीठे पानी की झील है।
- निर्माता – उम्मेद सिंह
- विशेषताएँ – तारागढ़ दुर्ग (बूँदी) के निकट स्थित है।
- इस झील के मध्य वरुण देवता का मन्दिर (आधा जल में डूबा ) स्थित है।
- इस झील के निकट सुन्दर घाट स्थित है।
राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलें

राजस्थान अपनी प्राकृतिक विविधता और भौगोलिक संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई प्रकार की झीलें पाई जाती हैं, जिनमें खारे पानी की झीलों का विशेष महत्व है। ये झीलें न केवल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनमें से कई नमक उत्पादन का भी एक प्रमुख स्रोत हैं। इस लेख में राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। राजस्थान के उत्तर-पश्चिम में खारे पानी की झीलें अधिक पाई जाती हैं, क्योंकि यहाँ झीलों के नीचे माईकाशिष्ट चट्टानें पाई जाती हैं।
1. सांभर झील
सांभर झील का निर्माण वासुदेव चौहान (बिजौलिया शिलालेख के अनुसार) द्वारा किया गया | सांभर झील राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यह झील जयपुर जिले में स्थित है और नागौर तथा अजमेर जिलों की सीमाओं को भी छूती है। सांभर राजस्थान की सबसे बड़ी एवं देश की तीसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। (1 ) चिल्का झील (ओडिशा), (2) – पुलीकट (आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु) | सांभर झील से भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 8.7% प्राप्त होता है, जबकि राजस्थान का 80−90 % है |
विशेषताएँ:
- यह भारत की आंतरिक जल क्षेत्र की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
- यहां मुगल काल से ही नमक उत्पादन किया जाता रहा है।
- झील में पांच प्रमुख नदियां मिलती हैं – मेंथा, रूपनगढ़, खारी, खंडेला और तुरतमति ( बांडी का नाला )।
- यह झील अपने उत्तम गुणवत्ता वाले नमक के लिए प्रसिद्ध है।
- सांभर से उत्पादित नमक को क्यार कहते हैं।
- सांभर झील रामसर साईट सूची में शामिल है। (1990 (दूसरी))
- जिसमें संरक्षित जीव = कुरंजा, राजहंस (फ्लेमिंगो)
- सांभर झील संयुक्त उपक्रम द्वारा संचालित है |
- केंद्र सरकार – हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड ( 60 % )
- राज्य सरकार – सांभर साल्ट लिमिटेड
पारिस्थितिकी महत्व:
सांभर झील प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान है। हर साल हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी यहां आते हैं। विशेष रूप से फ्लेमिंगो पक्षी इस झील में बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं।
विशेष – 2019 सांभर झील कुरंजा पक्षियों की मृत्यु के कारण चर्चा में थी। ( मृत्यु का कारण = एवियन बोटुलिज्म)
2. डीडवाना झील
डीडवाना झील डीडवाना कुचामन जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण खारे पानी की झील है। यह झील मुख्य रूप से अपनी लवणीय चट्टानों और जल भंडारों के लिए जानी जाती है।
विशेषताएँ:
- इस झील में सोडियम की तुलना में सोडियम सल्फेट की मात्रा अधिक होती है।
- इस कारण, यहां का नमक खाने योग्य नहीं होता है।
- यह क्षेत्र नमक खनन के लिए भी जाना जाता है।
- झील के आसपास लवणीय मिट्टी पाई जाती है, जिससे स्थानीय कृषि प्रभावित होती है।
- यह झील आसपास के कई छोटे तालाबों और जल स्रोतों से जुड़ी हुई है।
- इस झील के निकट ’राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स, 1964 डीडवाना में स्थापित किया गया।
- सोडियम सल्फेट के उपयोग – काँच उद्योग, कागज उद्योग, चमड़ा उद्योग।
3. पचपदरा झील
पचपदरा झील राजस्थान के बालोतरा में स्थित है और अपनी उच्च गुणवत्ता वाले नमक के लिए प्रसिद्ध है।
विशेषताएँ:
- इस झील में 98% तक सोडियम क्लोराइड पाया जाता है।
- यहां के खारवाल जाति के लोग पारंपरिक तकनीक “मोरली / मोहनी झाड़ी” का उपयोग करके नमक के स्फटिक (क्रिस्टल) बनाते हैं।
- इस झील का नमक उद्योग और चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग किया जाता है।
- झील का पानी अत्यधिक खारा होने के कारण अन्य उपयोगों के लिए अनुपयोगी होता है।
- यह झील राजस्थान की महत्वपूर्ण खारे पानी की झीलों में से एक है।
4. फलोदी झील (जोधपुर)

फलोदी झील जोधपुर जिले में स्थित है। यह झील भी खारे पानी की झीलों में शामिल है और इस क्षेत्र की जलवायु पर प्रभाव डालती है।
विशेषताएँ:
- झील का पानी अत्यधिक खारा होता है और इसमें लवणीय खनिज पाए जाते हैं।
- यह झील स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- यहाँ कई प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं।
- यह झील जोधपुर क्षेत्र की जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
- नमक उत्पादन के अलावा, झील आसपास की मिट्टी को भी प्रभावित करती है।
5. लूणकरणसर झील (बीकानेर)
बीकानेर जिले में स्थित लूणकरणसर झील नमक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का नमक अच्छी गुणवत्ता का होता है और स्थानीय बाजार में इसकी काफी मांग रहती है।
विशेषताएँ:
- झील का जल अत्यधिक लवणीय होता है।
- झील के आसपास नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र विकसित हुआ है।
- यहाँ विभिन्न प्रकार के खनिज तत्व पाए जाते हैं।
- इस झील का पारिस्थितिकी तंत्र आसपास के कृषि क्षेत्रों पर प्रभाव डालता है।
- स्थानीय समुदायों के लिए यह झील आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है।
6. डेगाना झील (नागौर)
डेगाना झील नागौर जिले में स्थित है। इस झील में नमक की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।
विशेषताएँ:
- झील का पानी अत्यधिक खारा होता है।
- झील से नमक खनन किया जाता है।
- यह झील औद्योगिक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण है।
- क्षेत्रीय जलवायु पर इसका प्रभाव पड़ता है।
- स्थानीय कृषि पर झील के जल की लवणीयता का असर देखा जाता है।
7. कुचामन झील ( डीडवाना कुचामन )
कुचामन झील नागौर जिले में स्थित है और खारे पानी की झीलों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह झील क्षेत्रीय स्तर पर जल आपूर्ति और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।
विशेषताएँ:
- झील के पानी में उच्च मात्रा में लवण पाए जाते हैं।
- यह झील पारिस्थितिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
- झील से जुड़ा नमक उत्पादन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
- झील के आसपास की मिट्टी अत्यधिक क्षारीय होती है।
- यह झील आसपास के गांवों के लिए जल स्रोत का कार्य भी करती है।
8. ताल छापर झील (चूरू)
चूरू जिले में स्थित ताल छापर झील राजस्थान के वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण स्थल है। यह क्षेत्र काले हिरणों और प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।
विशेषताएँ:
- यह झील मुख्य रूप से काले हिरणों के लिए संरक्षित क्षेत्र में स्थित है।
- झील के आसपास प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं।
- इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी विविधता अत्यधिक समृद्ध है।
- यह झील जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- झील का जल स्तर मानसून पर निर्भर करता है।
9. थोब झील (बाड़मेर)
थोब झील बाड़मेर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण खारे पानी की झील है। यह झील स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाती है।
विशेषताएँ:
- झील अत्यधिक खारे पानी वाली है।
- स्थानीय समुदायों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।
- यह झील आसपास की मिट्टी को प्रभावित करती है।
- झील के जल स्तर में मौसमी बदलाव आते हैं।
- प्रवासी पक्षियों के लिए यह झील आकर्षण का केंद्र है।
राजस्थान की खारे पानी की झीलें याद रखने की ट्रिक
राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलों को याद रखने के लिए निम्नलिखित ट्रिक का उपयोग किया जा सकता है:
“सा-डी-पा-फ-लू-डे-कु-ता-थो“
जहाँ:
- सा – सांभर झील
- डी – डीडवाना झील
- पा – पचपदरा झील
- फ – फलोदी झील
- लू – लूणकरणसर झील
- डे – डेगाना झील
- कु – कुचामन झील
- ता – ताल छापर झील
- थो – थोब झील
राजस्थान की मीठे पानी की झीलें
राजस्थान में खारे पानी की झीलों के अलावा मीठे पानी की झीलें भी पाई जाती हैं, जो जल आपूर्ति और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुछ प्रमुख मीठे पानी की झीलें निम्नलिखित हैं:
- आना सागर झील (अजमेर) – अजमेर में स्थित यह झील जल आपूर्ति और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है।
- फतेह सागर झील (उदयपुर) – उदयपुर की प्रमुख झीलों में से एक, जिसे महाराणा फतेह सिंह ने बनवाया था।
- पिछोला झील (उदयपुर) – उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध झीलों में से एक, जो अपनी सुंदरता और पर्यटन स्थलों के लिए जानी जाती है।
- राजसमंद झील (राजसमंद) – इस झील का निर्माण महाराणा राज सिंह ने करवाया था।
- जयसमंद झील (उदयपुर) – यह भारत की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में से एक है।
- उदयसागर झील (उदयपुर) – महाराणा उदय सिंह द्वारा निर्मित यह झील जल आपूर्ति के लिए उपयोग होती है।
- गैप सागर झील (डूंगरपुर) – डूंगरपुर जिले की प्रमुख मीठे पानी की झीलों में से एक।
📚 Rajasthan ki Pramukh Jheelen – MCQs (Exam Level)
निष्कर्ष
राजस्थान की खारे पानी की झीलें प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से कुछ झीलें नमक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि कुछ पारिस्थितिकी और प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल हैं। दूसरी ओर, मीठे पानी की झीलें जल आपूर्ति, पर्यटन और जैव विविधता के लिए आवश्यक हैं। यह झीलें राजस्थान की जलवायु, भूगोल और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इनके संरक्षण और सतत विकास के लिए उपयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी बनी रहें।

