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सामान्य ज्ञान

राजस्थान का राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष एवं पुष्प

योगेश जांगिड़योगेश जांगिड़ (सॉफ्टवेयर इंजीनियर और लेखक)
6 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं का संबंधित आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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राजस्थान का राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष एवं पुष्प

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के जीवित राज्य प्रतीक: राज्य पक्षी गोडावण (1981; आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स; IUCN — गंभीर रूप से संकटग्रस्त; प्रोजेक्ट गोडावण 2013)। राज्य वृक्ष खेजड़ी (1983; प्रोसोपिस सिनेरेरिया; ‘कल्पवृक्ष’; फलियाँ — सांगरी, चारा — लूंग)। राज्य पुष्प रोहिड़ा (1983; टिकोमेला अंडुलेटा; ‘मरुस्थल का सागवान’)। राज्य पशु चिंकारा (वन्य; गजेला बेनेट्टी) और ऊँट (पशुधन, 2014; ‘रेगिस्तान का जहाज’)।

📌 तथ्य-नीति: इस लेख के तथ्य मानक स्रोतों (राजस्थान सरकार के पोर्टल, जनगणना 2011, NCERT/RBSE पाठ्य-पुस्तकें, मान्य परीक्षा-पुस्तकें) से मिलाए गए हैं। जहाँ स्रोतों में तिथि/आँकड़े भिन्न हैं, वहाँ “परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार” लिखा है। जिलों के नाम दिसंबर 2024 के पुनर्गठन (41 जिले, 7 संभाग) के अनुसार हैं; जनगणना-आधारित ‘सबसे’ वाले तथ्य 2011 के 33 जिलों पर आधारित हैं। (स्थिति: अक्टूबर 2026)

1. चार जीवित प्रतीक — मरु-पारिस्थितिकी की कहानी

राजस्थान के राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष और पुष्प मिलकर थार मरुस्थल की पारिस्थितिकी की पूरी तस्वीर बनाते हैं। घास के मैदान में गोडावण, उसी मैदान में खेजड़ी-रोहिड़ा के वृक्ष, उनके नीचे चरते चिंकारा और इस पूरे तंत्र पर टिकी ऊँट-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था। यह लेख इन प्रतीकों की पहचान, आवास, उपयोग, संकट और संरक्षण को विस्तार से समझाता है। सभी प्रतीकों की सूची के लिए देखें राजस्थान के राज्य प्रतीक।

2. राज्य पक्षी — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)

बिंदुविवरण
घोषणा1981
वैज्ञानिक नामआर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स
स्थानीय नामसोन चिड़िया, माल मोरड़ी
IUCN स्थितिगंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)
कानूनी संरक्षणवन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I
प्रमुख आवासमरु राष्ट्रीय उद्यान (जैसलमेर-बाड़मेर); ऐतिहासिक रूप से सोरसन (बारां), शोकलिया (अजमेर)
संरक्षणप्रोजेक्ट गोडावण (2013); सम व रामदेवरा (जैसलमेर) में कृत्रिम प्रजनन केंद्र
प्रमुख संकटहाई-टेंशन बिजली लाइनों से टकराव, आवास-ह्रास, धीमी प्रजनन दर

गोडावण भारी शरीर वाला, धरती पर रहने वाला पक्षी है और एक बार में प्रायः एक ही अंडा देता है। इसलिए इसकी संख्या बहुत धीरे बढ़ती है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2021 में गोडावण के आवास-क्षेत्र में बिजली लाइनों को भूमिगत करने/बर्ड डायवर्टर लगाने संबंधी निर्देश दिए थे; आगे के संशोधित आदेशों की जानकारी करेंट अफेयर्स से लें।

3. राज्य वृक्ष — खेजड़ी

बिंदुविवरण
घोषणा1983
वैज्ञानिक नामप्रोसोपिस सिनेरेरिया
उपनामराजस्थान का कल्पवृक्ष; ‘शमी’ (दशहरे पर पूजा)
फलियाँसांगरी (सब्ज़ी)
पत्तियाँ (चारा)लूंग
पर्यावरणनाइट्रोजन-स्थिरीकरण से मिट्टी उपजाऊ; सूखे में भी हरा
सांस्कृतिक प्रसंगखेजड़ली बलिदान (1730) — अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 लोग

खेजड़ी पर विस्तृत लेख: खेजड़ी — राज्य वृक्ष

🎯 जीवित प्रतीक — पर्यावरण व वन्यजीव प्रश्नों का अभ्यास

गोडावण, खेजड़ी और ऊँट से जुड़े प्रश्न CET, वनरक्षक, पटवारी व REET में आते हैं:

सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स

4. राज्य पुष्प — रोहिड़ा

बिंदुविवरण
घोषणा1983
वैज्ञानिक नामटिकोमेला अंडुलेटा
उपनाममरुस्थल का सागवान (मारवाड़ टीक)
फूलकेसरिया-पीले-लाल; मार्च-अप्रैल में
उपयोगमज़बूत इमारती लकड़ी, फर्नीचर
क्षेत्रपश्चिमी राजस्थान के शुष्क भाग

5. राज्य पशु — चिंकारा व ऊँट

बिंदुचिंकारा (वन्य श्रेणी)ऊँट (पशुधन श्रेणी)
वैज्ञानिक नामगजेला बेनेट्टीकैमेलस ड्रोमेडेरियस
घोषणा1981 (2014 में श्रेणी-विभाजन)2014
उपनामभारतीय गज़ेलरेगिस्तान का जहाज
संरक्षणबिश्नोई समाज; मरु राष्ट्रीय उद्यान, ताल छापर क्षेत्रऊँट अधिनियम 2015; NRC ऊँट, जोहड़बीड़ (बीकानेर)
संकटआवास-ह्रास, शिकारघटती संख्या, चराई भूमि की कमी, आर्थिक उपयोगिता में गिरावट
सांस्कृतिक जुड़ावजीव-दया की बिश्नोई परंपरापाबूजी (‘ऊँटों के देवता’), रायका-रेबारी समुदाय, पुष्कर व बीकानेर ऊँट उत्सव

20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार ऊँटों की संख्या में राजस्थान देश में प्रथम है, पर पिछली गणनाओं की तुलना में संख्या लगातार घटी है। प्रमुख नस्लें बीकानेरी, जैसलमेरी, कच्छी और मेवाड़ी हैं।

नस्लों का विवरण: ऊँट की नस्लें | वन्यजीव मानचित्र प्रश्न: वन्यजीव — मानचित्र प्रश्न

6. संरक्षण से जुड़ी प्रमुख पहलें

  1. प्रोजेक्ट गोडावण (2013) — आवास संरक्षण व कृत्रिम प्रजनन।
  2. अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार — वन्यजीव संरक्षण हेतु राज्य पुरस्कार।
  3. राजस्थान ऊँट अधिनियम, 2015 — ऊँट वध पर रोक।
  4. पीपलांत्री मॉडल (राजसमंद) — बेटी के जन्म पर 111 पेड़।
  5. बिश्नोई परंपरा — 29 नियमों में हरे वृक्ष न काटना व जीव-दया।

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
वैज्ञानिक नामचारों प्रतीकों केतालिकाएँ
संरक्षणप्रोजेक्ट गोडावण, ऊँट अधिनियमखंड 6
आवासगोडावण कहाँ मिलता है?गोडावण तालिका
स्थानीय शब्दसांगरी, लूंगखेजड़ी तालिका
इतिहासखेजड़ली 1730खेजड़ी तालिका

🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)

गोडावण को राज्य पक्षी कब घोषित किया गया?

1981 में; यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी है और इसकी अधिकांश आबादी राजस्थान में है।

खेजड़ी को कल्पवृक्ष क्यों कहते हैं?

क्योंकि इससे चारा (लूंग), सब्ज़ी (सांगरी), लकड़ी और छाया मिलती है, यह मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और सूखे में भी हरी रहती है।

रोहिड़ा को मरुस्थल का सागवान क्यों कहते हैं?

इसकी लकड़ी सागवान जैसी मज़बूत होती है और फर्नीचर-निर्माण में प्रयुक्त होती है।

ऊँट को राज्य पशु कब घोषित किया गया?

2014 में पशुधन श्रेणी में; 2015 में ऊँट वध प्रतिषेध अधिनियम भी बनाया गया।

प्रोजेक्ट गोडावण क्या है?

2013 में शुरू राजस्थान की संरक्षण परियोजना, जिसमें आवास-संरक्षण और सम-रामदेवरा (जैसलमेर) में कृत्रिम प्रजनन शामिल है।

📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)

  1. गोडावण की IUCN स्थिति —

    (A) संकटमुक्त (LC) (B) सुभेद्य (VU) (C) विलुप्त (EX) (D) गंभीर रूप से संकटग्रस्त (CR)

    ✅ उत्तर: (D) गंभीर रूप से संकटग्रस्त (CR) — विश्व में बची अधिकांश आबादी राजस्थान में।

  2. राजस्थान में ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ की शुरुआत —

    (A) 2019 (B) 2013 (C) 1981 (D) 2001

    ✅ उत्तर: (B) 2013 — 5 जून 2013 (विश्व पर्यावरण दिवस) को।

  3. गोडावण के कृत्रिम प्रजनन केंद्र कहाँ हैं?

    (A) सरिस्का व रणथंभौर (B) केवलादेव व सांभर (C) माउंट आबू व कुंभलगढ़ (D) सम व रामदेवरा (जैसलमेर)

    ✅ उत्तर: (D) सम व रामदेवरा (जैसलमेर) — अंडों से कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रम।

  4. खेजड़ली बलिदान में कितने लोगों ने प्राण दिए?

    (A) 363 (B) 111 (C) 29 (D) 1730

    ✅ उत्तर: (A) 363 — 1730, अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में।

  5. खेजड़ी की पत्तियों से बने चारे को कहते हैं —

    (A) लूंग (B) सांगरी (C) खोखा (D) फोग

    ✅ उत्तर: (A) लूंग — सांगरी — फलियाँ।

  6. रोहिड़ा को कहा जाता है —

    (A) राजस्थान का कल्पवृक्ष (B) मरुस्थल का कमल (C) थार का गुलाब (D) मरुस्थल का सागवान

    ✅ उत्तर: (D) मरुस्थल का सागवान — कल्पवृक्ष — खेजड़ी।

  7. ऊँट के संरक्षण हेतु राजस्थान का कानून —

    (A) पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (B) राजस्थान गोवंश अधिनियम, 1995 (C) राजस्थान ऊँट (वध प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 (D) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (राज्य संशोधन)

    ✅ उत्तर: (C) राजस्थान ऊँट (वध प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 — ऊँट वध व राज्य से बाहर ले जाने पर नियंत्रण।

  8. राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र कहाँ है?

    (A) तबीजी (अजमेर) (B) सेवर (भरतपुर) (C) जोहड़बीड़ (बीकानेर) (D) अविकानगर (टोंक)

    ✅ उत्तर: (C) जोहड़बीड़ (बीकानेर) — ICAR का केंद्र।

  9. चिंकारा के संरक्षण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध समुदाय —

    (A) बिश्नोई (B) रायका (C) सहरिया (D) गरासिया

    ✅ उत्तर: (A) बिश्नोई — जांभोजी के 29 नियमों में जीव-दया।

  10. गोडावण का प्रमुख प्राकृतिक आवास (राष्ट्रीय उद्यान) —

    (A) मुकुंदरा हिल्स (B) मरु राष्ट्रीय उद्यान (C) केवलादेव (D) रणथंभौर

    ✅ उत्तर: (B) मरु राष्ट्रीय उद्यान — जैसलमेर-बाड़मेर; सोरसन (बारां) भी ज्ञात आवास।

⚡ One-Liner Revision (Key Facts)

  1. गोडावण — आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स
  2. प्रोजेक्ट गोडावण — 2013
  3. खेजड़ी फलियाँ — सांगरी
  4. खेजड़ी चारा — लूंग
  5. रोहिड़ा — मरुस्थल का सागवान
  6. ऊँट अधिनियम — 2015
  7. NRC ऊँट — जोहड़बीड़ (बीकानेर)
  8. खेजड़ली — 1730, 363 बलिदानी

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • चारों प्रतीक मरु-पारिस्थितिकी से जुड़े।
  • गोडावण सबसे संकटग्रस्त प्रतीक।
  • खेजड़ी का सांस्कृतिक आधार — बिश्नोई परंपरा।
  • ऊँट की घटती संख्या चिंता का विषय।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • सांगरी फलियाँ हैं, लूंग पत्तियाँ।
  • गोडावण अनुसूची-I में, IUCN में CR।
  • प्रजनन केंद्र जैसलमेर में (सम, रामदेवरा)।

🧠 याद रखने की ट्रिक

खेजड़ी — “सांगरी साग, लूंग चारा”। गोडावण — “81 का पक्षी, 2013 का प्रोजेक्ट, सम-रामदेवरा का घर”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

जीवित प्रतीकों पर प्रश्न अब केवल ‘नाम बताइए’ तक सीमित नहीं हैं; संरक्षण-परियोजना, IUCN स्थिति और कानून भी पूछे जाते हैं। तालिकाओं का ‘संरक्षण’ स्तंभ विशेष ध्यान से पढ़ें।

✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स

राजस्थान का राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष एवं पुष्प पर अपनी तैयारी परखने के लिए:

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • IUCN Red List — Great Indian Bustard (Ardeotis nigriceps)।
  • राजस्थान वन विभाग — प्रोजेक्ट गोडावण व प्रजनन कार्यक्रम।
  • राजस्थान ऊँट (वध प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015।
  • 20वीं पशुगणना 2019 — DAHD।
  • सर्वोच्च न्यायालय — एम. के. रणजीतसिंह बनाम भारत संघ (2021) संबंधी रिपोर्टें।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी राजस्थान सामान्य ज्ञान संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान का राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष एवं पुष्प

स्रोत-आधार: राजस्थान सरकार के आधिकारिक पोर्टल, जनगणना 2011, RBSE/NCERT पाठ्य-पुस्तकें, राजस्थान सुजस, मान्य परीक्षा-पुस्तकें तथा RSSB/RPSC के प्रश्न-पत्रों का विश्लेषण।

परीक्षा उपयोगिता: Rajasthan CET, पटवारी, VDO, LDC, पुलिस, REET/शिक्षक भर्ती, RAS/RTS एवं अन्य RSSB/RPSC परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: गोडावण-आवास में बिजली लाइनों संबंधी न्यायालय-आदेश बाद में संशोधित हुए; नवीनतम स्थिति करेंट अफेयर्स से देखें।

अंतिम समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 6 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. गोडावण की IUCN स्थिति —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. राजस्थान में ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ की शुरुआत —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. गोडावण के कृत्रिम प्रजनन केंद्र कहाँ हैं?

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Q4. खेजड़ली बलिदान में कितने लोगों ने प्राण दिए?

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Q5. खेजड़ी की पत्तियों से बने चारे को कहते हैं —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स।

2013।

मरुस्थल का सागवान।

राजस्थान ऊँट अधिनियम, 2015।

सांगरी।

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