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भारत का इतिहास

मौर्य साम्राज्य — चंद्रगुप्त, बिंदुसार, अशोक, धम्म, अभिलेख, प्रशासन व कला — UPSC/RAS

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
25 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: मौर्य साम्राज्य (लगभग 322/321 ई.पू. – 185 ई.पू.) भारत का पहला अखिल-भारतीय साम्राज्य था, जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। इसके संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) की सहायता से नंद वंश (धनानंद) को हटाया और लगभग 305 ई.पू. में सेल्यूकस निकेटर को हराकर संधि की, जिसके बाद यूनानी राजदूत मेगस्थनीज़ पाटलिपुत्र आया और उसने इंडिका लिखी। चंद्रगुप्त के बाद बिंदुसार (यूनानी नाम अमित्रोकेटीज़) और फिर अशोक शासक बने। अशोक ने राज्याभिषेक के आठवें वर्ष (लगभग 261 ई.पू.) कलिंग युद्ध लड़ा, जिसका वर्णन 13वें बृहद् शिलालेख में है; इसके बाद उसने भेरीघोष के स्थान पर धम्मघोष और धम्म-विजय की नीति अपनाई। अशोक के अभिलेख अधिकतर प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में हैं; उत्तर-पश्चिम (शाहबाज़गढ़ी, मानसेहरा) में खरोष्ठी और कंधार में यूनानी व अरामाइक का प्रयोग हुआ। ब्राह्मी को जेम्स प्रिंसेप (1837) ने पढ़ा; अशोक का नाम सबसे पहले मास्की के लघु शिलालेख में मिला। सारनाथ का सिंह शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185 ई.पू. में की।


संक्षिप्त उत्तर

शासकशासनकाल (लगभग)सबसे अधिक पूछे जाने वाले तथ्य
चंद्रगुप्त मौर्य322/321 – 298/297 ई.पू.नंदों का अंत; सेल्यूकस से संधि; मेगस्थनीज़; जैन परंपरा के अनुसार भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला
बिंदुसार298/297 – 273/272 ई.पू.अमित्रोकेटीज़ (अमित्रघात); डाइमेकस राजदूत; आजीवक मत की ओर झुकाव
अशोक273/268 – 232 ई.पू.कलिंग युद्ध; धम्म; 14 बृहद् शिलालेख, 7 स्तंभलेख; तीसरी बौद्ध संगीति (बौद्ध परंपरा)
दशरथअशोक के बादनागार्जुनी पहाड़ी की गुफाएँ आजीवकों को दान
बृहद्रथलगभग 185 ई.पू. तकअंतिम मौर्य शासक; पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या
तथ्यउत्तर
राजधानीपाटलिपुत्र (आधुनिक पटना के निकट)
चंद्रगुप्त का यूनानी नामसैंड्रोकोटस (Sandrokottos) — पहचान विलियम जोन्स ने की
अर्थशास्त्र के लेखककौटिल्य (चाणक्य / विष्णुगुप्त)
इंडिका के लेखकमेगस्थनीज़ (सेल्यूकस का राजदूत)
मुद्राराक्षस के लेखकविशाखदत्त
कलिंग युद्ध का वर्णन13वाँ बृहद् शिलालेख
ब्राह्मी लिपि का पाठजेम्स प्रिंसेप, 1837
अशोक का नाम वाला पहला खोजा गया अभिलेखमास्की (कर्नाटक) लघु शिलालेख
सातों स्तंभलेख एक साथदिल्ली-टोपरा स्तंभ
राष्ट्रीय प्रतीकसारनाथ सिंह शीर्ष (26 जनवरी 1950 को अपनाया गया)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

मौर्य काल प्राचीन भारत के इतिहास का वह बिंदु है जहाँ से पहली बार लिखित अभिलेख, विदेशी विवरण और राजनीतिक ग्रंथ तीनों एक साथ मिलते हैं। इसलिए इस अध्याय से स्रोत-आधारित, कालक्रम-आधारित और कला-संस्कृति आधारित — तीनों तरह के प्रश्न बनते हैं। इसे समझने से पहले जैन-बौद्ध धर्म और महाजनपद वाला अध्याय पढ़ लें, क्योंकि मगध का उदय और बौद्ध धर्म का प्रसार यहीं से जुड़ते हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — अशोक के अभिलेखों की विषयवस्तु, कला-स्थापत्य, स्रोत
  • RPSC RAS — विराटनगर (बैराठ) का भाब्रू अभिलेख, प्रशासन, कला
  • SSC CGL / CHSL — सीधे तथ्य: लेखक-ग्रंथ, राजदूत, राजधानी
  • राजस्थान CET (स्नातक) — एक-पंक्ति तथ्य और कालक्रम
  • RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक — प्रशासनिक शब्दावली और विश्लेषण

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. ग्रंथ–लेखक या अभिलेख–विषयवस्तु का मिलान
  2. अभिलेख–स्थल–राज्य का मिलान (जैसे धौली–ओडिशा, गिरनार–गुजरात)
  3. लिपि का प्रश्न — कहाँ खरोष्ठी, कहाँ यूनानी-अरामाइक
  4. कथन-आधारित — धम्म की प्रकृति, मौर्य प्रशासन के अधिकारी
  5. कला — सारनाथ सिंह शीर्ष के पशु, रामपुरवा वृषभ, बराबर गुफाएँ
  6. कालक्रम — चंद्रगुप्त → बिंदुसार → अशोक → बृहद्रथ → पुष्यमित्र शुंग

3. मौर्य इतिहास के स्रोत

मौर्य इतिहास की खासियत यह है कि साहित्यिक, विदेशी और पुरातात्विक — तीनों प्रकार के स्रोत उपलब्ध हैं। परीक्षा में "कौन-सा स्रोत किस प्रकार का है" और "किसका लेखक कौन" — दोनों पूछे जाते हैं।

3.1 साहित्यिक स्रोत

स्रोतलेखक / परंपराक्या बताता है
अर्थशास्त्रकौटिल्य (चाणक्य)राज्य-व्यवस्था, सप्तांग सिद्धांत, अधिकारी, कर, गुप्तचर; 15 अधिकरणों (खंडों) में विभाजित। इसकी पांडुलिपि 1905 में आर. शामशास्त्री को मिली और उन्होंने इसे प्रकाशित किया।
मुद्राराक्षसविशाखदत्त (संस्कृत नाटक, मौर्यों से कई शताब्दी बाद)चाणक्य द्वारा नंदों के मंत्री राक्षस को चंद्रगुप्त के पक्ष में लाने की कथा
दीपवंश, महावंशश्रीलंका के बौद्ध इतिवृत्त (पालि)अशोक का बौद्ध धर्म, महेंद्र-संघमित्रा का श्रीलंका जाना
दिव्यावदानबौद्ध (संस्कृत)अशोक से जुड़ी कथाएँ, तक्षशिला विद्रोह
परिशिष्टपर्वन्हेमचंद्र (जैन)चंद्रगुप्त का जैन धर्म अपनाना
पुराण (विशेषकर विष्णु पुराण)ब्राह्मण परंपरामौर्य वंशावली

ध्यान दें: अर्थशास्त्र के रचना-काल पर विद्वानों में मत-भेद है; कई विद्वान मानते हैं कि इसका वर्तमान रूप कई शताब्दियों में बना। फिर भी मौर्य प्रशासन को समझने के लिए यह प्रमुख ग्रंथ माना जाता है।

3.2 विदेशी स्रोत

लेखकग्रंथ / संदर्भमहत्व
मेगस्थनीज़इंडिकामूल ग्रंथ अप्राप्य; बाद के यूनानी-रोमन लेखकों (स्ट्रेबो, एरियन, डायोडोरस) के उद्धरणों में अंश सुरक्षित। भारतीय समाज के 7 वर्ग, पाटलिपुत्र का नगर-प्रशासन।
एरियन, स्ट्रेबो, प्लूटार्क, जस्टिनविभिन्न ग्रंथचंद्रगुप्त (सैंड्रोकोटस) और सिकंदर के बाद की स्थिति

3.3 पुरातात्विक स्रोत

  • अशोक के अभिलेख — शिलालेख, स्तंभलेख, गुहालेख; मौर्य इतिहास का सबसे प्रामाणिक स्रोत।
  • रुद्रदामन का जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख (लगभग 150 ई.) — बताता है कि सुदर्शन झील चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतपति पुष्यगुप्त ने बनवाई और अशोक के समय तुषास्प ने इससे नहरें निकलवाईं। यह मौर्य काल के बाद का अभिलेख है, पर मौर्य इतिहास का स्रोत है।
  • आहत (पंचमार्क) सिक्के — मुख्यतः चाँदी के; मौर्य काल में इनका व्यापक प्रचलन।
  • उत्तरी काले पॉलिशदार मृद्भांड (NBPW) — मौर्य काल की विशिष्ट मृद्भांड परंपरा।
  • कुम्हरार (पटना) — 80 स्तंभों वाले सभा-भवन के अवशेष।

4. चंद्रगुप्त मौर्य (लगभग 322/321 – 298/297 ई.पू.)

चंद्रगुप्त की उत्पत्ति पर स्रोतों में मत-भेद है — ब्राह्मण परंपरा (मुद्राराक्षस आदि) उसे निम्न कुल से जोड़ती है, जबकि बौद्ध स्रोत उसे मोरिय नामक क्षत्रिय कुल का बताते हैं। परीक्षा के लिए इतना पर्याप्त है कि उसने चाणक्य की सहायता से मगध के अंतिम नंद शासक धनानंद को हटाकर मौर्य वंश स्थापित किया।

4.1 सेल्यूकस से संघर्ष और संधि

बिंदुविवरण
प्रतिद्वंद्वीसेल्यूकस निकेटर — सिकंदर का सेनापति, पश्चिम एशिया का शासक
समयलगभग 305 ई.पू.
परिणामसेल्यूकस ने अराकोसिया (कंधार), गेड्रोसिया (बलूचिस्तान) और पेरोपेनिसडाई (काबुल क्षेत्र) चंद्रगुप्त को दिए; कुछ स्रोत एरिया (हेरात) का भी उल्लेख करते हैं
चंद्रगुप्त ने दिया500 हाथी
अन्य शर्तवैवाहिक संबंध (यूनानी स्रोतों में "एपिगेमिया" का उल्लेख)
राजदूतमेगस्थनीज़ पाटलिपुत्र दरबार में आया

4.2 साम्राज्य-विस्तार

चंद्रगुप्त के अधीन साम्राज्य उत्तर-पश्चिम में अफ़गानिस्तान के कुछ भागों से लेकर पूर्व में बंगाल तक और पश्चिम में सौराष्ट्र तक फैला। सौराष्ट्र उसके साम्राज्य में था — इसका प्रमाण जूनागढ़ अभिलेख में पुष्यगुप्त का उल्लेख है।

4.3 अंतिम दिन (जैन परंपरा)

जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त ने अंत में जैन धर्म अपनाया, सिंहासन त्यागकर आचार्य भद्रबाहु के साथ दक्षिण में श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) गया और सल्लेखना (उपवास द्वारा देह-त्याग) की। यह परंपरा पर आधारित विवरण है।


5. मेगस्थनीज़ की इंडिका — क्या लिखा है

विषयइंडिका का विवरण
समाजभारतीय समाज के 7 वर्ग — दार्शनिक, किसान, पशुपालक/शिकारी, कारीगर/व्यापारी, सैनिक, निरीक्षक, सभासद (मंत्री/परामर्शदाता)
पाटलिपुत्रगंगा और सोन के संगम के पास; लकड़ी की प्राचीर से घिरा विशाल नगर
नगर-प्रशासन6 समितियाँ, प्रत्येक में 5 सदस्य
सेना-प्रशासनसेना के प्रबंध के लिए भी 6 समितियाँ (पैदल, घुड़सवार, रथ, हाथी, नौसेना, रसद)
राजाराजमहल की भव्यता; राजा की सुरक्षा का कड़ा प्रबंध

5.1 पाटलिपुत्र की 6 नगर-समितियाँ

समितिकार्य
पहलीऔद्योगिक कलाएँ / शिल्प
दूसरीविदेशियों की देखरेख
तीसरीजन्म-मृत्यु का पंजीकरण
चौथीव्यापार-वाणिज्य, माप-तौल
पाँचवींनिर्मित वस्तुओं की बिक्री की निगरानी
छठीबिक्री-कर वसूली (बिक्री मूल्य का दसवाँ भाग)

सावधानी: इंडिका मूल रूप में उपलब्ध नहीं है और मेगस्थनीज़ के कुछ कथन (जैसे "भारत में दास-प्रथा नहीं है") भारतीय स्रोतों से मेल नहीं खाते। इसलिए इसे अन्य स्रोतों के साथ मिलाकर पढ़ा जाता है।


6. बिंदुसार (लगभग 298/297 – 273/272 ई.पू.)

  • यूनानी लेखकों ने उसे अमित्रोकेटीज़ (संस्कृत "अमित्रघात" — शत्रुओं का नाश करने वाला) कहा।
  • सीरिया के शासक एंटियोकस प्रथम ने डाइमेकस को उसके दरबार में राजदूत भेजा।
  • यूनानी लेखक एथेनियस के अनुसार बिंदुसार ने एंटियोकस से मीठी शराब, सूखे अंजीर और एक दार्शनिक माँगा था (दार्शनिक भेजने से मना कर दिया गया)।
  • बौद्ध स्रोत (दिव्यावदान) के अनुसार तक्षशिला में विद्रोह हुआ, जिसे दबाने के लिए अशोक भेजा गया।
  • बिंदुसार का झुकाव आजीवक संप्रदाय की ओर बताया जाता है।

7. अशोक (लगभग 273/268 – 232 ई.पू.)

बौद्ध परंपरा के अनुसार बिंदुसार की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार-संघर्ष हुआ और अशोक का औपचारिक राज्याभिषेक कुछ वर्ष बाद (लगभग 269/268 ई.पू.) हुआ। राजा बनने से पहले वह उज्जयिनी का प्रांतपति था। अभिलेखों में वह स्वयं को "देवानंपिय पियदसि" (देवताओं का प्रिय, प्रियदर्शी) कहता है; "अशोक" नाम केवल कुछ लघु शिलालेखों (मास्की, गुर्जरा आदि) में आता है।

7.1 कलिंग युद्ध

बिंदुतथ्य
समयराज्याभिषेक का 8वाँ वर्ष (लगभग 261 ई.पू.)
क्षेत्रकलिंग — वर्तमान ओडिशा व आसपास
स्रोत13वाँ बृहद् शिलालेख
हानि (अभिलेख के अनुसार)लगभग डेढ़ लाख लोग बंदी बनाकर ले जाए गए, एक लाख मारे गए और उससे कई गुना अधिक बाद में मरे
परिणामअशोक का पश्चाताप; भेरीघोष के स्थान पर धम्मघोष; दिग्विजय के स्थान पर धम्म-विजय
विशेषधौली और जौगड़ (कलिंग क्षेत्र) में 13वाँ शिलालेख नहीं, उसकी जगह 2 पृथक कलिंग अभिलेख हैं

7.2 अशोक और बौद्ध धर्म

  • बौद्ध परंपरा के अनुसार अशोक को उपगुप्त (अथवा निग्रोध) ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया — स्रोतों में भिन्नता है।
  • राज्याभिषेक के 10वें वर्ष में उसने संबोधि (बोधगया) की यात्रा की — 8वें शिलालेख में उल्लेख।
  • 20वें वर्ष में लुंबिनी गया — रुम्मिनदेई स्तंभलेख।
  • तीसरी बौद्ध संगीति — पाटलिपुत्र, अध्यक्ष मोग्गलिपुत्त तिस्स (श्रीलंकाई बौद्ध परंपरा के अनुसार)।
  • पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा (बौद्ध परंपरा)।
  • भाब्रू अभिलेख (बैराठ, कोटपूतली-बहरोड़ — पूर्व जयपुर ज़िला, राजस्थान) में अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में अपनी आस्था प्रकट करता है और कुछ बौद्ध ग्रंथों के अध्ययन की सलाह देता है।

7.3 धम्म — क्या था और क्या नहीं

अशोक का धम्म कोई नया धर्म या केवल बौद्ध धर्म नहीं था। यह आचरण की एक नैतिक संहिता थी जिसे उसने विशाल और विविध साम्राज्य को जोड़ने के लिए प्रचारित किया।

धम्म के मुख्य तत्वधम्म-प्रचार के साधन
माता-पिता और बड़ों का आदरशिलालेख और स्तंभलेख
दासों और सेवकों के प्रति उचित व्यवहारधम्म महामात्र (13वें वर्ष में नियुक्त — 5वाँ शिलालेख)
प्राणियों के प्रति अहिंसाधम्म-यात्राएँ (विहार-यात्रा/आखेट के स्थान पर — 8वाँ शिलालेख)
ब्राह्मणों और श्रमणों को दानराजुक, प्रादेशिक, युक्त का हर 5 वर्ष में दौरा (3रा शिलालेख)
सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता, वाणी-संयमविदेशों में धम्म-दूत
व्यर्थ के कर्मकांडों के स्थान पर धम्म-मंगलमनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सा, सड़कों पर वृक्ष, कुएँ

8. अशोक के अभिलेख — पूरी तालिका

अशोक के अभिलेखों को पहली बार 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। वे साम्राज्य की सीमाओं पर, व्यापार-मार्गों पर और धार्मिक स्थलों पर लगाए गए थे — इसलिए उनके स्थल साम्राज्य का विस्तार भी बताते हैं।

8.1 अभिलेखों के प्रकार

प्रकारसंख्या / उदाहरणमुख्य स्थल
बृहद् शिलालेख (Major Rock Edicts)14कालसी (उत्तराखंड), गिरनार (गुजरात), शाहबाज़गढ़ी व मानसेहरा (पाकिस्तान), धौली व जौगड़ (ओडिशा), सोपारा (महाराष्ट्र), येर्रागुडी (आंध्र प्रदेश)
पृथक कलिंग अभिलेख2धौली, जौगड़ — "सभी मनुष्य मेरी संतान हैं"
लघु शिलालेख (Minor Rock Edicts)अनेक स्थलमास्की, गुर्जरा, ब्रह्मगिरि, रूपनाथ, सहसराम, बैराठ
भाब्रू (कलकत्ता-बैराठ) अभिलेख1बैराठ, राजस्थान — बौद्ध त्रिरत्न में आस्था
स्तंभलेख (Pillar Edicts)7दिल्ली-टोपरा (सातों), दिल्ली-मेरठ, लौरिया-अरराज, लौरिया-नंदनगढ़, रामपुरवा, प्रयाग (कौशांबी)
लघु स्तंभलेखकईसारनाथ, साँची, प्रयाग (संघ-भेद अभिलेख), रुम्मिनदेई, निगाली सागर
गुहालेखबराबर पहाड़ी (बिहार)आजीवकों को गुफा-दान

8.2 14 बृहद् शिलालेख — विषयवस्तु

शिलालेखमुख्य विषय
पहलापशु-बलि का निषेध; समाज (उत्सव-सभाओं) पर रोक
दूसरामनुष्यों और पशुओं की चिकित्सा का प्रबंध; दक्षिण के चोल, पांड्य, सतियपुत्र, केरलपुत्र, ताम्रपर्णी (श्रीलंका) और यूनानी राजा एंटियोकस का उल्लेख
तीसराराजुक, प्रादेशिक और युक्त हर 5 वर्ष में दौरा करें; ब्राह्मणों-श्रमणों को दान
चौथाभेरीघोष के स्थान पर धम्मघोष
पाँचवाँधम्म महामात्रों की नियुक्ति (राज्याभिषेक का 13वाँ वर्ष)
छठाराजा हर समय प्रजा के कार्य सुनने को तत्पर; प्रतिवेदक (सूचना देने वाले)
सातवाँसभी संप्रदाय सर्वत्र रह सकें — सहिष्णुता, आत्म-संयम
आठवाँविहार-यात्रा के स्थान पर धम्म-यात्रा; 10वें वर्ष में संबोधि (बोधगया) की यात्रा
नौवाँव्यर्थ के मंगल-कर्मकांडों की आलोचना; धम्म-मंगल श्रेष्ठ
दसवाँयश और कीर्ति की इच्छा की निंदा, सिवाय धम्म के लिए
ग्यारहवाँधम्म की व्याख्या; धम्म-दान सर्वश्रेष्ठ दान
बारहवाँसभी संप्रदायों के प्रति सम्मान; वाणी-संयम (वचगुति); एक-दूसरे के मत का आदर
तेरहवाँकलिंग युद्ध और पश्चाताप; धम्म-विजय; 5 यूनानी राजाओं का उल्लेख
चौदहवाँअभिलेखों को लिखवाने का उद्देश्य

13वें शिलालेख के 5 यूनानी राजा: अंतियोक (सीरिया), तुरमय (मिस्र — टॉलेमी), अंतिकिनी (मकदूनिया — एंटिगोनस), मक (साइरीन — मगस), अलिकसुदर (एपिरस/कोरिंथ — सिकंदर नाम का शासक)।

8.3 स्तंभलेख और अन्य प्रमुख अभिलेख

अभिलेखविशेषता
दिल्ली-टोपरा स्तंभएकमात्र स्तंभ जिस पर सातों स्तंभलेख; 7वाँ स्तंभलेख केवल इसी पर। फ़िरोज़ शाह तुगलक इसे टोपरा (हरियाणा) से दिल्ली लाया।
दिल्ली-मेरठ स्तंभयह भी फ़िरोज़ शाह तुगलक मेरठ से दिल्ली लाया
चौथा स्तंभलेखराजुकों को न्याय और दंड के अधिकार
सातवाँ स्तंभलेखअशोक के धम्म-कार्यों का सारांश
रुम्मिनदेई (लुंबिनी, नेपाल)बुद्ध का जन्म-स्थान; यहाँ बलि कर से छूट और भाग घटाकर 1/8 किया गया
निगाली सागर (नेपाल)कोनागमन बुद्ध के स्तूप को बढ़ाने का उल्लेख
प्रयाग (इलाहाबाद-कौशांबी) स्तंभसंघ-भेद अभिलेख; रानी कारुवाकी (तीवर की माता) का दान-अभिलेख; बाद में इसी पर समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति भी खुदी
सारनाथ, साँची लघु स्तंभलेखसंघ में फूट डालने वालों के लिए चेतावनी
बराबर गुहालेखआजीवकों को गुफाओं का दान
मास्की (कर्नाटक)"अशोक" नाम का पहला मिला प्रमाण (1915 में खोज)

8.4 भाषा और लिपियाँ

लिपि / भाषाकहाँविशेष
ब्राह्मीसाम्राज्य के अधिकांश भागबाएँ से दाएँ लिखी जाती है; आधुनिक भारतीय लिपियों की जननी
खरोष्ठीउत्तर-पश्चिम — शाहबाज़गढ़ी, मानसेहरा (पाकिस्तान)दाएँ से बाएँ लिखी जाती है; अरामाइक से विकसित
यूनानी और अरामाइककंधार (शार-ए-कुना, अफ़गानिस्तान) — द्विभाषी अभिलेखउत्तर-पश्चिम की यूनानी और ईरानी-भाषी प्रजा के लिए
भाषाअधिकांश अभिलेखप्राकृत (स्थानीय रूपों में)

9. मौर्य प्रशासन

मौर्य प्रशासन अत्यधिक केंद्रीकृत माना जाता है। अर्थशास्त्र का सप्तांग सिद्धांत राज्य के 7 अंग बताता है — स्वामी (राजा), अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड (सेना) और मित्र।

9.1 केंद्रीय प्रशासन

पद / संस्थाकार्य
राजासर्वोच्च — विधि, सेना, न्याय का प्रमुख
मंत्रिपरिषदराजा को परामर्श देने वाली परिषद; अर्थशास्त्र में मंत्रियों के चयन व परीक्षा (उपधा) का उल्लेख
समाहर्ताराजस्व-संग्रह का प्रमुख अधिकारी
सन्निधाताराजकोष और भंडार का प्रमुख (कोषाध्यक्ष)
तीर्थअर्थशास्त्र में वर्णित 18 उच्च पदाधिकारी
अध्यक्षविभिन्न विभागों के अधीक्षक (नीचे तालिका)
गूढ़पुरुषगुप्तचर — संस्था (एक स्थान पर रहने वाले) और संचार (घूमने वाले)

9.2 अर्थशास्त्र के प्रमुख अध्यक्ष

अध्यक्षविभाग
सीताध्यक्षराजकीय भूमि पर कृषि
पण्याध्यक्षवाणिज्य / व्यापार
शुल्काध्यक्षचुंगी / सीमा-शुल्क
आकराध्यक्षखानें
लोहाध्यक्षधातु-कर्म
लक्षणाध्यक्षटकसाल (सिक्के)
पौतवाध्यक्षमाप-तौल
सूनाध्यक्षबूचड़खाने / पशु-वध
नावध्यक्षनौ-परिवहन

9.3 अशोक के अभिलेखों में अधिकारी

अधिकारीभूमिका
राजुकग्रामीण प्रशासन; अशोक ने उन्हें न्याय व दंड के अधिकार दिए (चौथा स्तंभलेख)
प्रादेशिकप्रदेश (ज़िला-स्तर) का अधिकारी
युक्तअधीनस्थ अधिकारी — लेखा/राजस्व से जुड़ा
धम्म महामात्रधम्म-प्रचार, संप्रदायों के कल्याण की देखरेख
महामात्रउच्च अधिकारियों के लिए सामान्य शब्द

9.4 प्रांत और राजधानियाँ (अशोक के समय)

प्रांतराजधानी
उत्तरापथतक्षशिला
अवंति (पश्चिमी प्रांत)उज्जयिनी
कलिंगतोसली
दक्षिणापथसुवर्णगिरि
प्राच्य / मध्य देश (केंद्रीय)पाटलिपुत्र

प्रांतों का शासन प्रायः राजकुल के कुमारों (राजकुमारों) के हाथ में होता था — जैसे अशोक स्वयं उज्जयिनी में था। प्रांत के नीचे जनपद/प्रदेश और सबसे नीचे ग्राम (ग्रामिक) थे।

9.5 सेना और न्याय

  • यूनानी विवरणों में मौर्य सेना बहुत विशाल बताई गई है; सेनापति सेना का प्रमुख था।
  • अर्थशास्त्र में दो प्रकार के न्यायालय — धर्मस्थीय (दीवानी) और कंटकशोधन (फ़ौजदारी)।
  • दंड कठोर थे; अशोक ने मृत्युदंड पाए बंदियों को 3 दिन की मोहलत दी (चौथा स्तंभलेख)।

10. अर्थव्यवस्था

क्षेत्रमुख्य बातें
कृषिअर्थव्यवस्था का आधार; राजकीय भूमि (सीता) पर सीताध्यक्ष की देखरेख में खेती; सिंचाई (सुदर्शन झील)
भू-राजस्व"भाग" — सामान्यतः उपज का 1/6, परिस्थिति के अनुसार अधिक; "बलि" एक अन्य कर
राज्य का नियंत्रणखानें, नमक, शस्त्र-निर्माण, जहाज़ — राज्य के अधिकार में (अर्थशास्त्र)
शिल्प-संघश्रेणियाँ (गिल्ड)
मुद्राआहत सिक्के — मुख्यतः चाँदी (पण/कार्षापण), कुछ ताँबे के
व्यापारउत्तरापथ जैसे मार्ग; पश्चिम एशिया से संपर्क
मृद्भांडउत्तरी काले पॉलिशदार मृद्भांड (NBPW)

11. मौर्य कला और स्थापत्य

मौर्य कला को दो भागों में देखा जाता है — राजकीय (दरबारी) कला: स्तंभ, महल, गुफाएँ; और लोक कला: यक्ष-यक्षी की मूर्तियाँ, मृण्मूर्तियाँ।

11.1 अशोक के स्तंभ

विशेषताविवरण
पत्थरचुनार (उत्तर प्रदेश) का बलुआ पत्थर
बनावटएकाश्म (एक ही पत्थर का) गोल स्तंभ, आधार-रहित
चमकविशिष्ट "मौर्य पॉलिश" — दर्पण जैसी चिकनाई
शीर्ष के भागउल्टा कमल (घंटी के आकार का), फलक (अबेकस), ऊपर पशु-आकृति

11.2 प्रमुख स्तंभ-शीर्ष

स्थलशीर्ष
सारनाथ (उत्तर प्रदेश)चार सिंह पीठ से पीठ सटाए; फलक पर हाथी, बैल (वृषभ), घोड़ा और सिंह, बीच-बीच में 24 तीलियों वाले चक्र — राष्ट्रीय प्रतीक
रामपुरवा (बिहार)वृषभ (बैल) शीर्ष — अब राष्ट्रपति भवन में
लौरिया-नंदनगढ़ (बिहार)एकल सिंह शीर्ष
संकिसा (उत्तर प्रदेश)हाथी शीर्ष

राष्ट्रीय प्रतीक: भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को सारनाथ सिंह शीर्ष को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया; इसके नीचे "सत्यमेव जयते" (मुंडक उपनिषद) लिखा है। फलक का चक्र राष्ट्रीय ध्वज में भी है।

11.3 अन्य कला-अवशेष

  • बराबर गुफाएँ (गया, बिहार) — चट्टान काटकर बनाई गई गुफाएँ; अशोक ने आजीवकों को दान दीं। लोमस ऋषि गुफा का प्रवेश-द्वार (चैत्य मेहराब) प्रसिद्ध है।
  • नागार्जुनी पहाड़ी की गुफाएँ — दशरथ ने आजीवकों को दीं।
  • धौली (ओडिशा) — चट्टान से तराशा गया हाथी।
  • साँची और भरहुत — साँची का मूल ईंटों का स्तूप अशोक के समय का माना जाता है; पत्थर की वेदिकाएँ और तोरण बाद (शुंग-सातवाहन काल) के हैं।
  • दीदारगंज यक्षी (चामरधारिणी, पटना) — चमकदार पॉलिश के कारण प्रायः मौर्य काल से जोड़ी जाती है, पर इसके काल पर मत-भेद है।
  • कुम्हरार — पाटलिपुत्र के महल का 80 स्तंभों वाला सभा-भवन।

12. मौर्य साम्राज्य का पतन

अशोक की मृत्यु (लगभग 232 ई.पू.) के बाद लगभग 50 वर्षों में साम्राज्य बिखर गया। अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या सेना-निरीक्षण के समय उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की (लगभग 185 ई.पू.) और शुंग वंश की स्थापना हुई। पतन के कारणों पर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं:

मतमुख्य तर्कप्रतिवाद
ब्राह्मण प्रतिक्रिया (हरप्रसाद शास्त्री)अशोक की पशु-बलि निषेध नीति से ब्राह्मण असंतुष्ट; पुष्यमित्र स्वयं ब्राह्मणअशोक ने ब्राह्मणों को दान देने पर बल दिया था
अहिंसा नीति (एच.सी. रायचौधरी)अशोक की शांतिवादी नीति से सैन्य शक्ति कमज़ोरअशोक ने सेना भंग नहीं की थी; सीमांत जनजातियों को चेतावनी दी थी
प्रशासनिक/संगठनात्मक (रोमिला थापर)अत्यधिक केंद्रीकरण; राज्य के प्रति निष्ठा का अभाव; कमज़ोर उत्तराधिकारी—
आर्थिक दबावविशाल सेना और नौकरशाही का भारी व्ययप्रमाण सीमित
विदेशी आक्रमणउत्तर-पश्चिम से हिंद-यवन (इंडो-ग्रीक) दबाव—

मौर्यों के बाद का घटनाक्रम — शुंग, कण्व, सातवाहन, कुषाण और फिर गुप्त — गुप्त काल वाले नोट में आगे पढ़ें।


13. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: अर्थशास्त्र बनाम इंडिका बनाम मुद्राराक्षस

ग्रंथलेखकभाषा / प्रकार
अर्थशास्त्रकौटिल्यसंस्कृत; राजनीति-प्रशासन का ग्रंथ
इंडिकामेगस्थनीज़यूनानी; यात्रा/विवरण (अंश ही उपलब्ध)
मुद्राराक्षसविशाखदत्तसंस्कृत नाटक; मौर्यों से बहुत बाद रचित

Trap 2: डाइमेकस बनाम मेगस्थनीज़

मेगस्थनीज़ — सेल्यूकस का राजदूत, चंद्रगुप्त के दरबार में। डाइमेकस — एंटियोकस प्रथम का राजदूत, बिंदुसार के दरबार में।

Trap 3: कलिंग युद्ध कौन-सा शिलालेख — और कहाँ नहीं?

कलिंग युद्ध = 13वाँ बृहद् शिलालेख। परंतु धौली और जौगड़ (स्वयं कलिंग क्षेत्र) में 13वाँ शिलालेख नहीं मिलता — वहाँ उसके स्थान पर पृथक कलिंग अभिलेख हैं।

Trap 4: खरोष्ठी कहाँ, यूनानी कहाँ

शाहबाज़गढ़ी और मानसेहरा = खरोष्ठी (दाएँ से बाएँ)। कंधार = यूनानी व अरामाइक। "सभी अभिलेख ब्राह्मी में हैं" — गलत कथन।

Trap 5: "अशोक" नाम हर अभिलेख में नहीं

अधिकांश अभिलेखों में "देवानंपिय पियदसि" है। "अशोक" नाम पहली बार मास्की लघु शिलालेख में मिला; इसके बाद गुर्जरा (मध्य प्रदेश) सहित कुछ अन्य लघु शिलालेखों में भी।

Trap 6: दिल्ली के दो अशोक स्तंभ

दोनों फ़िरोज़ शाह तुगलक लाया — एक टोपरा (हरियाणा) से, एक मेरठ से। सातों स्तंभलेख केवल दिल्ली-टोपरा पर।

Trap 7: सारनाथ शीर्ष के फलक के पशु

ऊपर 4 सिंह; नीचे फलक पर हाथी, बैल, घोड़ा, सिंह। रामपुरवा का वृषभ शीर्ष अलग स्तंभ का है — दोनों को न मिलाएँ।

Trap 8: बराबर बनाम नागार्जुनी

बराबर गुफाएँ — अशोक ने आजीवकों को दीं। नागार्जुनी गुफाएँ — दशरथ ने। दोनों बिहार के गया ज़िले में और दोनों आजीवकों के लिए।

Trap 9: सुदर्शन झील — किसका अभिलेख

झील चंद्रगुप्त मौर्य के समय (पुष्यगुप्त) बनी, पर इसका विवरण रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख (लगभग 150 ई.) में है — मौर्य अभिलेख में नहीं। बाद में स्कंदगुप्त के समय भी इसकी मरम्मत हुई।

Trap 10: धम्म = बौद्ध धर्म?

नहीं। धम्म नैतिक आचरण की संहिता थी, जिसमें ब्राह्मणों और श्रमणों दोनों के सम्मान की बात है। अशोक व्यक्तिगत रूप से बौद्ध था, पर उसके धम्म में किसी देवता या बौद्ध दर्शन के सिद्धांतों की अनिवार्यता नहीं थी।


14. Most-Asked रिवीज़न तालिका (55 तथ्य)

क्र.प्रश्न / विषयउत्तर
1मौर्य वंश का संस्थापकचंद्रगुप्त मौर्य
2मौर्य राजधानीपाटलिपुत्र
3चंद्रगुप्त के गुरु / मंत्रीचाणक्य (कौटिल्य, विष्णुगुप्त)
4अंतिम नंद शासकधनानंद
5चंद्रगुप्त का यूनानी नामसैंड्रोकोटस
6सैंड्रोकोटस = चंद्रगुप्त की पहचानविलियम जोन्स
7सेल्यूकस से युद्धलगभग 305 ई.पू.
8संधि में चंद्रगुप्त ने दिए500 हाथी
9सेल्यूकस का राजदूतमेगस्थनीज़
10मेगस्थनीज़ का ग्रंथइंडिका
11इंडिका में समाज के वर्ग7
12पाटलिपुत्र की नगर-समितियाँ6 (प्रत्येक में 5 सदस्य)
13अर्थशास्त्र के अधिकरण15
14अर्थशास्त्र की खोज / प्रकाशनआर. शामशास्त्री
15मुद्राराक्षस के रचयिताविशाखदत्त
16परिशिष्टपर्वन् के रचयिताहेमचंद्र
17चंद्रगुप्त के जैन गुरु (परंपरा)भद्रबाहु
18चंद्रगुप्त का अंतिम स्थान (परंपरा)श्रवणबेलगोला
19सुदर्शन झील बनवाने वाला प्रांतपतिपुष्यगुप्त
20सुदर्शन झील का विवरण देने वाला अभिलेखरुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
21बिंदुसार का यूनानी नामअमित्रोकेटीज़
22बिंदुसार के दरबार में राजदूतडाइमेकस
23बिंदुसार का धार्मिक झुकावआजीवक
24अशोक राजा बनने से पहलेउज्जयिनी का प्रांतपति
25अभिलेखों में अशोक की उपाधिदेवानंपिय पियदसि
26कलिंग युद्धराज्याभिषेक का 8वाँ वर्ष (लगभग 261 ई.पू.)
27कलिंग युद्ध का वर्णन13वाँ बृहद् शिलालेख
28बृहद् शिलालेखों की संख्या14
29स्तंभलेखों की संख्या7
30धम्म महामात्रों की नियुक्ति5वाँ शिलालेख; 13वाँ वर्ष
31भेरीघोष के स्थान पर धम्मघोष4था शिलालेख
32धम्म-यात्रा व संबोधि यात्रा8वाँ शिलालेख
33पशु-बलि निषेध1ला शिलालेख
34मनुष्य-पशु चिकित्सा; दक्षिणी राज्यों का उल्लेख2रा शिलालेख
35"सभी मनुष्य मेरी संतान हैं"पृथक कलिंग अभिलेख (धौली, जौगड़)
36सातों स्तंभलेख एक साथदिल्ली-टोपरा
37टोपरा-मेरठ स्तंभ दिल्ली लाने वालाफ़िरोज़ शाह तुगलक
38राजुकों को न्यायिक अधिकार4था स्तंभलेख
39लुंबिनी में कर-छूटरुम्मिनदेई स्तंभलेख (भाग 1/8)
40"अशोक" नाम का पहला प्रमाणमास्की लघु शिलालेख
41राजस्थान में अशोक के अभिलेखबैराठ — लघु शिलालेख व भाब्रू अभिलेख
42ब्राह्मी को पढ़ने वालेजेम्स प्रिंसेप (1837)
43खरोष्ठी के अभिलेखशाहबाज़गढ़ी, मानसेहरा
44यूनानी-अरामाइक द्विभाषी अभिलेखकंधार (शार-ए-कुना)
45अभिलेखों की भाषाप्राकृत
46तीसरी बौद्ध संगीति के अध्यक्ष (परंपरा)मोग्गलिपुत्त तिस्स
47श्रीलंका भेजे गएमहेंद्र और संघमित्रा
48कलिंग प्रांत की राजधानीतोसली
49दक्षिणापथ की राजधानीसुवर्णगिरि
50उत्तरापथ की राजधानीतक्षशिला
51राजस्व-संग्रह का प्रमुखसमाहर्ता
52कोषाध्यक्षसन्निधाता
53स्तंभों का पत्थरचुनार का बलुआ पत्थर
54राष्ट्रीय प्रतीकसारनाथ सिंह शीर्ष
55अंतिम मौर्य शासक / हत्याराबृहद्रथ / पुष्यमित्र शुंग

15. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

मौर्य काल के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे का एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न है:

  1. मिलान (Match the following): "सूची-I (अभिलेख) — सूची-II (विषय): 13वाँ शिलालेख — कलिंग युद्ध; 5वाँ शिलालेख — धम्म महामात्र; 4था शिलालेख — धम्मघोष; रुम्मिनदेई — लुंबिनी में कर-छूट।"
  2. कालक्रम: "सही क्रम चुनिए — सेल्यूकस से संधि, कलिंग युद्ध, बृहद्रथ की हत्या, डाइमेकस का आगमन।" (उत्तर: सेल्यूकस संधि → डाइमेकस → कलिंग युद्ध → बृहद्रथ की हत्या)
  3. कथन-आधारित: "1. अशोक के सभी अभिलेख ब्राह्मी लिपि में हैं। 2. शाहबाज़गढ़ी अभिलेख खरोष्ठी में है। कौन-सा सही है?" (उत्तर: केवल 2)
  4. अभिकथन-कारण: "अभिकथन (A): अशोक ने धम्म-विजय की नीति अपनाई। कारण (R): कलिंग युद्ध की हिंसा से उसे पश्चाताप हुआ।" (दोनों सही, R, A की सही व्याख्या)
  5. स्थल–राज्य: "धौली अभिलेख किस राज्य में है?" (ओडिशा) — "कालसी?" (उत्तराखंड)
  6. कला: "सारनाथ सिंह शीर्ष के फलक पर कौन-सा पशु नहीं है?" (विकल्पों में ऊँट या हिरण जैसा पशु)

रणनीति: अभिलेख-प्रश्नों में पहले संख्या (कौन-सा शिलालेख) और फिर स्थल याद करें। लिपि वाले प्रश्नों में केवल तीन अपवाद याद रखें — उत्तर-पश्चिम में खरोष्ठी, कंधार में यूनानी-अरामाइक, बाकी सब ब्राह्मी।


16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. वंश-क्रम: "चंदा बिंदु अशोक बृहत" — चंद्रगुप्त → बिंदुसार → अशोक → … → बृहद्रथ।

2. राजदूत जोड़ी: "मे-से-चं, डा-एं-बिं" — मेगस्थनीज़ (सेल्यूकस → चंद्रगुप्त), डाइमेकस (एंटियोकस → बिंदुसार)।

3. शिलालेख 1–5: "बलि बंद (1), दवा-दारू (2), दौरा हर पाँच साल (3), ढोल नहीं धम्म (4), महामात्र (5)।"

4. 13 = कलिंग: "तेरह का अंक अशुभ — इसी में युद्ध का दुःख।"

5. प्रांत-राजधानी: "उत्तर में तक्ष, अवंति में उज्जैन, कलिंग में तोसली, दक्षिण में सुवर्ण।"

6. सारनाथ फलक: "हा-बै-घो-सिं" — हाथी, बैल, घोड़ा, सिंह (और बीच में चक्र)।

7. लिपि: "ब्राह्मी बाएँ से, खरोष्ठी दाएँ से; कंधार में यूनानी।"


17. कथन अभ्यास

चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस निकेटर को 500 हाथी दिए थे। — सही।

मेगस्थनीज़ बिंदुसार के दरबार में आया था। — गलत (चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में; बिंदुसार के दरबार में डाइमेकस आया)।

कलिंग युद्ध का वर्णन अशोक के 13वें बृहद् शिलालेख में है। — सही।

अशोक के सभी अभिलेख ब्राह्मी लिपि में हैं। — गलत (उत्तर-पश्चिम में खरोष्ठी, कंधार में यूनानी व अरामाइक भी)।

ब्राह्मी लिपि को सबसे पहले जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। — सही।

दिल्ली-मेरठ स्तंभ पर सातों स्तंभलेख अंकित हैं। — गलत (सातों केवल दिल्ली-टोपरा स्तंभ पर)।

अर्थशास्त्र के अनुसार समाहर्ता राजस्व-संग्रह का प्रमुख अधिकारी था। — सही।

अशोक के समय कलिंग प्रांत की राजधानी तक्षशिला थी। — गलत (तोसली; तक्षशिला उत्तरापथ की राजधानी)।

सारनाथ सिंह शीर्ष के फलक पर हाथी, बैल, घोड़ा और सिंह अंकित हैं। — सही।

मुद्राराक्षस नाटक के रचयिता कौटिल्य हैं। — गलत (विशाखदत्त)।

बराबर की गुफाएँ अशोक ने आजीवकों को दान दी थीं। — सही।

अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या पुष्यमित्र शुंग ने की। — सही।


18. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. मौर्य वंश: लगभग 322/321 – 185 ई.पू.; राजधानी पाटलिपुत्र
  2. चंद्रगुप्त + चाणक्य → धनानंद का अंत
  3. सेल्यूकस संधि (लगभग 305 ई.पू.): तीन-चार प्रांत मिले, 500 हाथी दिए, मेगस्थनीज़ आया
  4. इंडिका: 7 वर्ग, 6 नगर-समितियाँ × 5 सदस्य
  5. अर्थशास्त्र: कौटिल्य; 15 अधिकरण; सप्तांग सिद्धांत; शामशास्त्री ने प्रकाशित किया
  6. मुद्राराक्षस — विशाखदत्त; परिशिष्टपर्वन् — हेमचंद्र
  7. बिंदुसार = अमित्रोकेटीज़; डाइमेकस; आजीवक झुकाव
  8. अशोक: पहले उज्जयिनी का प्रांतपति; "देवानंपिय पियदसि"
  9. कलिंग युद्ध — 8वाँ वर्ष — 13वाँ शिलालेख; धौली-जौगड़ में पृथक कलिंग अभिलेख
  10. 14 बृहद् शिलालेख, 7 स्तंभलेख; सातों स्तंभलेख दिल्ली-टोपरा पर
  11. लिपि: ब्राह्मी; खरोष्ठी (शाहबाज़गढ़ी, मानसेहरा); यूनानी-अरामाइक (कंधार); भाषा प्राकृत
  12. प्रिंसेप 1837 — ब्राह्मी; मास्की — "अशोक" नाम
  13. प्रांत: तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसली, सुवर्णगिरि, पाटलिपुत्र
  14. सारनाथ सिंह शीर्ष — राष्ट्रीय प्रतीक; चुनार का पत्थर, मौर्य पॉलिश
  15. बृहद्रथ की हत्या — पुष्यमित्र शुंग (लगभग 185 ई.पू.)

19. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 8 (अभिलेख तालिका) और खंड 13 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। पूरे प्राचीन भारत को परीक्षा-स्तर पर परखने के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक फ्री टेस्ट सीरीज़ और RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।


20. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

मौर्य साम्राज्य भारत का पहला ऐसा राज्य था जिसने लगभग पूरे उपमहाद्वीप को एक प्रशासन के अधीन लाया। चंद्रगुप्त ने इसकी नींव रखी, बिंदुसार ने इसे बनाए रखा और अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद इसे धम्म के माध्यम से नैतिक एकता देने का प्रयास किया। परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय का केंद्र अशोक के अभिलेख हैं — उनकी संख्या, विषयवस्तु, स्थल और लिपि। इसके साथ अर्थशास्त्र के अधिकारी, इंडिका का नगर-प्रशासन और सारनाथ सिंह शीर्ष पक्के कर लें। जहाँ तिथियाँ "लगभग" हैं, वहाँ क्रम याद रखें, सटीक वर्ष पर ज़ोर न दें।

चंद्रगुप्त (चाणक्य, सेल्यूकस, मेगस्थनीज़) → बिंदुसार (डाइमेकस) → अशोक (कलिंग = 13वाँ, धम्म, ब्राह्मी-खरोष्ठी-यूनानी) → बृहद्रथ (पुष्यमित्र शुंग) | सारनाथ = राष्ट्रीय प्रतीक


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322/321 ई.पू. में चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद शासक धनानंद को हटाकर की। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।

लगभग 305 ई.पू. के संघर्ष के बाद सेल्यूकस ने अराकोसिया, गेड्रोसिया और पेरोपेनिसडाई जैसे क्षेत्र चंद्रगुप्त को दिए और बदले में 500 हाथी प्राप्त किए। इसके बाद मेगस्थनीज़ राजदूत बनकर पाटलिपुत्र आया।

इंडिका में भारतीय समाज के 7 वर्गों, पाटलिपुत्र नगर और उसके 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) वाले नगर-प्रशासन का वर्णन है। मूल ग्रंथ अप्राप्य है; इसके अंश बाद के यूनानी लेखकों के उद्धरणों में मिलते हैं।

कलिंग युद्ध का वर्णन 13वें बृहद् शिलालेख में है। यह युद्ध अशोक के राज्याभिषेक के आठवें वर्ष (लगभग 261 ई.पू.) में हुआ।

धम्म नैतिक आचरण की संहिता थी — बड़ों का आदर, दासों-सेवकों से उचित व्यवहार, प्राणियों पर दया, ब्राह्मणों-श्रमणों को दान और सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता। यह कोई नया धर्म नहीं था।

अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में हैं। उत्तर-पश्चिम के शाहबाज़गढ़ी व मानसेहरा में खरोष्ठी तथा कंधार में यूनानी और अरामाइक का प्रयोग हुआ है।

ब्राह्मी लिपि में लिखे अशोक के अभिलेखों को 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा। अशोक का नाम सबसे पहले कर्नाटक के मास्की लघु शिलालेख में मिला।

कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले (पूर्व में जयपुर) के बैराठ (विराटनगर) से अशोक का लघु शिलालेख और भाब्रू अभिलेख मिले हैं। भाब्रू अभिलेख में अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में अपनी आस्था प्रकट करता है।

भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ के अशोक स्तंभ के सिंह शीर्ष से लिया गया है, जिसे 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया। इसके फलक पर हाथी, बैल, घोड़ा और सिंह तथा चक्र अंकित हैं।

अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या लगभग 185 ई.पू. में उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की। इसके बाद शुंग वंश की स्थापना हुई।

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