16 महाजनपद, मगध का उदय, जैन और बौद्ध धर्म — महावीर, बुद्ध, संगीतियाँ, त्रिपिटक — UPSC/RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
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संक्षिप्त उत्तर: छठी शताब्दी ई.पू. उत्तर भारत में 16 महाजनपदों के उदय और नए धार्मिक आंदोलनों का काल है। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय 16 महाजनपदों की सूची देता है; इनमें वज्जि (राजधानी वैशाली) और मल्ल गणसंघ थे, अश्मक एकमात्र महाजनपद था जो विंध्य के दक्षिण (गोदावरी तट) पर था, और मत्स्य की राजधानी विराटनगर (बैराठ, राजस्थान) थी। इनमें से मगध क्रमशः हर्यक (बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन), शिशुनाग और नंद वंशों के अधीन सबसे शक्तिशाली बना; उदयिन ने पाटलिपुत्र बसाया। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर ने 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के चार व्रतों में ब्रह्मचर्य जोड़कर पंच महाव्रत बनाए; जैन त्रिरत्न हैं — सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र। गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी, ज्ञान-प्राप्ति बोधगया, प्रथम उपदेश सारनाथ (धर्मचक्र प्रवर्तन) और महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ। बौद्ध धर्म के मूल में चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग) हैं; चार बौद्ध संगीतियाँ क्रमशः राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र और कश्मीर में हुईं और चौथी संगीति के बाद हीनयान-महायान विभाजन स्पष्ट हुआ। महावीर और बुद्ध की जन्म-मृत्यु तिथियाँ विवादित हैं।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| 16 महाजनपदों की सूची का स्रोत | अंगुत्तर निकाय (बौद्ध); जैन भगवती सूत्र में भिन्न सूची |
| गणसंघ (गणराज्य) महाजनपद | वज्जि, मल्ल |
| विंध्य के दक्षिण में एकमात्र महाजनपद | अश्मक (गोदावरी तट) |
| राजस्थान से जुड़ा महाजनपद | मत्स्य — राजधानी विराटनगर (बैराठ) |
| सबसे शक्तिशाली बना | मगध |
| मगध के वंश (क्रम) | हर्यक → शिशुनाग → नंद → (आगे मौर्य) |
| पाटलिपुत्र के संस्थापक | उदयिन (हर्यक वंश) |
| जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर | ऋषभदेव (आदिनाथ) |
| 23वें तीर्थंकर | पार्श्वनाथ |
| 24वें तीर्थंकर | महावीर (वर्धमान) |
| महावीर द्वारा जोड़ा गया व्रत | ब्रह्मचर्य |
| महावीर का कैवल्य | जृम्भिकग्राम, ऋजुपालिका नदी तट, साल वृक्ष के नीचे |
| महावीर का निर्वाण | पावापुरी (72 वर्ष की आयु) |
| बुद्ध का जन्म | लुंबिनी (कपिलवस्तु के निकट, वर्तमान नेपाल) |
| ज्ञान-प्राप्ति | बोधगया (उरुवेला), निरंजना नदी तट, पीपल वृक्ष के नीचे; 35 वर्ष की आयु |
| प्रथम उपदेश | सारनाथ (ऋषिपत्तन / मृगदाव) — धर्मचक्र प्रवर्तन |
| महापरिनिर्वाण | कुशीनगर (मल्ल), 80 वर्ष की आयु |
| बौद्ध ग्रंथ | त्रिपिटक — सुत्त, विनय, अभिधम्म (पालि भाषा) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
महाजनपद, मगध का उदय, जैन और बौद्ध धर्म — यह खंड वैदिक काल और मौर्य साम्राज्य के बीच की कड़ी है। UPSC CSE प्रारंभिक में बौद्ध-जैन दर्शन की अवधारणाएँ (जैसे अनेकांतवाद, स्याद्वाद, बोधिसत्व, मध्यम मार्ग), संगीतियाँ और बौद्ध स्थल कथन-आधारित प्रश्नों में आते हैं। RPSC RAS और राजस्थान CET (स्नातक) में महाजनपद–राजधानी तालिका, मत्स्य-विराटनगर, बैराठ के बौद्ध अवशेष, और राजस्थान के जैन मंदिर (दिलवाड़ा, रणकपुर) से जुड़े प्रश्न दिखते हैं। SSC CGL/CHSL में तीर्थंकर, बुद्ध के जीवन के स्थान और संगीतियों के तथ्य सीधे पूछे जाते हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC CSE प्रारंभिक — दर्शन, संगीतियाँ, संप्रदाय, स्थल
- RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — महाजनपद, राजस्थान से संबंध, जैन कला
- राजस्थान CET (स्नातक), RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक
- SSC CGL / CHSL — तथ्यात्मक प्रश्न
प्रश्न कैसे आते हैं?
- महाजनपद–राजधानी का सुमेलन
- मगध के शासकों / वंशों का कालक्रम
- बुद्ध / महावीर के जीवन की घटनाएँ और स्थान
- बौद्ध संगीतियाँ — स्थान, शासक, अध्यक्ष, परिणाम
- जैन व बौद्ध सिद्धांतों पर कथन — "कौन-सा/से कथन सही है/हैं?"
- हीनयान बनाम महायान, श्वेतांबर बनाम दिगंबर
3. 16 महाजनपद
उत्तर-वैदिक काल के 'जन' धीरे-धीरे स्थायी क्षेत्रीय 'जनपद' बने और छठी शताब्दी ई.पू. तक उनमें से बड़े और शक्तिशाली राज्य महाजनपद कहलाए। लोहे के प्रयोग से गंगा घाटी में कृषि-अधिशेष, व्यापार, नगरों (द्वितीय नगरीकरण) और आहत (Punch-marked) सिक्कों का विकास इसी काल की पृष्ठभूमि है। अधिकांश महाजनपद राजतंत्र थे, जबकि कुछ गणसंघ (जहाँ सत्ता एक समूह के हाथ में थी) थे।
| क्र. | महाजनपद | राजधानी | वर्तमान क्षेत्र (लगभग) |
|---|---|---|---|
| 1 | अंग | चंपा | भागलपुर-मुंगेर, बिहार |
| 2 | मगध | गिरिव्रज / राजगृह (बाद में पाटलिपुत्र) | पटना-गया, बिहार |
| 3 | काशी | वाराणसी | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| 4 | कोसल | श्रावस्ती (साकेत / अयोध्या भी प्रमुख नगर) | अवध क्षेत्र, उत्तर प्रदेश |
| 5 | वज्जि (गणसंघ) | वैशाली | उत्तर बिहार |
| 6 | मल्ल (गणसंघ) | कुशीनारा और पावा | देवरिया-गोरखपुर, उत्तर प्रदेश |
| 7 | चेदि | शुक्तिमती | बुंदेलखंड क्षेत्र |
| 8 | वत्स | कौशाम्बी | प्रयागराज के निकट, उत्तर प्रदेश |
| 9 | कुरु | इंद्रप्रस्थ | दिल्ली-मेरठ-हरियाणा क्षेत्र |
| 10 | पांचाल | अहिच्छत्र (उत्तरी), काम्पिल्य (दक्षिणी) | रुहेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश |
| 11 | मत्स्य | विराटनगर (बैराठ) | जयपुर-अलवर क्षेत्र, राजस्थान |
| 12 | शूरसेन | मथुरा | मथुरा, उत्तर प्रदेश |
| 13 | अश्मक (अस्सक) | पोटन / पोतलि | गोदावरी तट (दक्षिण भारत) |
| 14 | अवंति | उज्जयिनी (उत्तरी), महिष्मती (दक्षिणी) | मालवा, मध्य प्रदेश |
| 15 | गांधार | तक्षशिला | रावलपिंडी-पेशावर क्षेत्र, पाकिस्तान |
| 16 | कम्बोज | राजपुर | पश्चिमोत्तर सीमा क्षेत्र |
3.1 महाजनपदों से जुड़े विशेष तथ्य
- वज्जि आठ कुलों का संघ था, जिसमें लिच्छवि सबसे प्रमुख थे; राजधानी वैशाली।
- अवंति का शासक चंड प्रद्योत बिंबिसार का समकालीन था; अवंति मगध का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी था।
- कोसल के शासक प्रसेनजित बुद्ध के समकालीन और अनुयायी थे।
- वत्स के शासक उदयन भी बुद्ध के समकालीन थे।
- गांधार की राजधानी तक्षशिला शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था।
- प्रमुख चार शक्तियाँ जिनमें संघर्ष चला — मगध, कोसल, वत्स, अवंति; अंततः मगध विजयी हुआ।
4. मगध का उदय
4.1 मगध की सफलता के कारण
| कारक | विवरण |
|---|---|
| लौह-भंडार | निकट के क्षेत्रों में लौह अयस्क — बेहतर औज़ार और हथियार |
| उपजाऊ भूमि | गंगा घाटी की जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा — कृषि अधिशेष |
| सुरक्षित राजधानियाँ | राजगृह — पाँच पहाड़ियों से घिरा; पाटलिपुत्र — गंगा, सोन (और गंडक) के संगम पर "जल-दुर्ग" |
| हाथी | पूर्वी वनों से हाथी — सेना में उपयोग |
| नदी-मार्ग | व्यापार और सैनिक आवागमन |
| महत्वाकांक्षी शासक | बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद आदि |
4.2 मगध के वंश और शासक
नीचे दी गई तिथियाँ परंपरागत / अनुमानित हैं; विभिन्न पुस्तकों में कुछ अंतर मिलता है।
| वंश | शासक | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| हर्यक | बिंबिसार | बुद्ध व महावीर के समकालीन; वैवाहिक संबंधों से शक्ति बढ़ाई (कोसल देवी — प्रसेनजित की बहन, चेल्लना — लिच्छवि, क्षेमा — मद्र); अंग को जीता; राजवैद्य जीवक को अवंति के प्रद्योत के उपचार हेतु भेजा |
| हर्यक | अजातशत्रु | पिता बिंबिसार की हत्या कर शासक बना (परंपरा के अनुसार); कोसल व वज्जि से युद्ध; वज्जि के विरुद्ध महाशिलाकंटक (पत्थर फेंकने का यंत्र) और रथमूसल (गदायुक्त रथ) का प्रयोग (जैन स्रोत); उसके शासनकाल में प्रथम बौद्ध संगीति |
| हर्यक | उदयिन | गंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र बसाया और राजधानी बनाया |
| शिशुनाग | शिशुनाग | अवंति की शक्ति को समाप्त कर मगध में मिलाया; राजधानी कुछ समय वैशाली ले गया |
| शिशुनाग | कालाशोक (काकवर्ण) | राजधानी फिर पाटलिपुत्र; उसके शासनकाल में द्वितीय बौद्ध संगीति (वैशाली) |
| नंद | महापद्म नंद | पुराणों में "एकराट्" और "सर्वक्षत्रांतक"; कलिंग पर अधिकार (हाथीगुम्फा अभिलेख में नंदराज का उल्लेख) |
| नंद | धनानंद | सिकंदर के आक्रमण (326 ई.पू.) के समय मगध का शासक; विशाल सेना व धन; चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से अपदस्थ किया |
नंदों के बाद मगध में मौर्य साम्राज्य स्थापित हुआ — विस्तार मौर्य साम्राज्य: चंद्रगुप्त से अशोक में।
5. नए धार्मिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि
- उत्तर-वैदिक कर्मकांड की जटिलता और खर्च; ब्राह्मणों का वर्चस्व।
- वर्ण व्यवस्था की कठोरता; क्षत्रियों और समृद्ध वैश्यों (गृहपति, श्रेष्ठि) की नई आकांक्षाएँ।
- नई कृषि अर्थव्यवस्था में पशुओं की आवश्यकता — यज्ञ में पशु-बलि का विरोध।
- व्यापार और सिक्कों का प्रसार; सूदखोरी आदि पर वैदिक ग्रंथों की नकारात्मक दृष्टि।
- उपनिषदों के चिंतन ने भी कर्म, पुनर्जन्म और मोक्ष के प्रश्न उठाए थे। इसी काल में अनेक श्रमण संप्रदाय उभरे (जैसे आजीवक — मक्खलि गोसाल)।
6. जैन धर्म
6.1 तीर्थंकर
जैन परंपरा में 24 तीर्थंकर माने जाते हैं। 'तीर्थंकर' का अर्थ है — संसार-सागर से पार उतरने का घाट (तीर्थ) बनाने वाला।
| तीर्थंकर | क्रम | प्रतीक (लांछन) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| ऋषभदेव (आदिनाथ) | 1 | बैल | जैन परंपरा के संस्थापक माने जाते हैं |
| नेमिनाथ (अरिष्टनेमि) | 22 | शंख | — |
| पार्श्वनाथ | 23 | सर्प | काशी के राजा अश्वसेन के पुत्र; चार व्रत (चातुर्याम) — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह |
| महावीर | 24 | सिंह | पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा |
6.2 महावीर — जीवन
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| बचपन का नाम | वर्धमान |
| जन्म स्थान | कुंडग्राम (वैशाली के निकट) |
| तिथियाँ | विवादित — परंपरागत 599–527 ई.पू.; अनेक इतिहासकार लगभग 540–468 ई.पू. मानते हैं |
| पिता | सिद्धार्थ — ज्ञातृक कुल के प्रमुख |
| माता | त्रिशला — लिच्छवि प्रमुख चेटक की बहन |
| पत्नी | यशोदा (श्वेतांबर परंपरा; दिगंबर परंपरा उन्हें अविवाहित मानती है) |
| गृह-त्याग | 30 वर्ष की आयु में |
| तपस्या | लगभग 12 वर्ष |
| कैवल्य (पूर्ण ज्ञान) | 42 वर्ष की आयु में; जृम्भिकग्राम के निकट ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे |
| उपाधियाँ | जिन (विजेता — इसी से 'जैन'), केवलिन, निर्ग्रंथ (बंधन-रहित), महावीर |
| उपदेश की भाषा | प्राकृत (अर्धमागधी) |
| निर्वाण | 72 वर्ष की आयु में पावापुरी (राजगृह के निकट, बिहार) |
6.3 जैन सिद्धांत
| सिद्धांत | अर्थ |
|---|---|
| त्रिरत्न | सम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र (आचरण) — मोक्ष का मार्ग |
| पंच महाव्रत | अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (संग्रह न करना), ब्रह्मचर्य — भिक्षुओं के लिए |
| अणुव्रत | गृहस्थों के लिए इन्हीं व्रतों का सरल रूप |
| अनेकांतवाद | सत्य के अनेक पक्ष होते हैं |
| स्याद्वाद (सप्तभंगी नय) | किसी वस्तु के बारे में कथन सापेक्ष होते हैं — "स्यात्" (शायद / किसी दृष्टि से) |
| जीव और अजीव | जीव (आत्मा) केवल मनुष्यों-पशुओं में नहीं, वनस्पति, जल, पृथ्वी आदि में भी |
| ईश्वर | सृष्टिकर्ता ईश्वर की अवधारणा स्वीकार नहीं; देवताओं को जिन से निम्न स्थान |
| कर्म और मोक्ष | कर्म-बंधन से आत्मा की मुक्ति ही कैवल्य / मोक्ष |
| सल्लेखना (संथारा) | उपवास द्वारा स्वेच्छा से देह-त्याग की प्रथा |
6.4 श्वेतांबर और दिगंबर
जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य के समय मगध में लंबे अकाल के दौरान भद्रबाहु अपने अनुयायियों के साथ दक्षिण (कर्नाटक, श्रवणबेलगोला) चले गए, जबकि स्थूलभद्र मगध में रहे। लौटने पर आचरण के मतभेदों से धीरे-धीरे दो संप्रदाय बने (औपचारिक विभाजन बाद की शताब्दियों में स्पष्ट हुआ)।
| बिंदु | श्वेतांबर | दिगंबर |
|---|---|---|
| वस्त्र | श्वेत वस्त्र धारण | भिक्षु नग्न ('दिशाएँ ही वस्त्र') |
| परंपरा से जुड़े | स्थूलभद्र | भद्रबाहु |
| स्त्रियों का मोक्ष | स्त्रियाँ इसी जन्म में मोक्ष पा सकती हैं | स्त्री-जन्म में मोक्ष संभव नहीं |
| महावीर का विवाह | विवाहित मानते हैं | अविवाहित मानते हैं |
| आगम ग्रंथ | वल्लभी में संकलित आगम स्वीकार | मूल आगमों को लुप्त मानते हैं |
6.5 जैन संगीतियाँ
| संगीति | स्थान | काल (लगभग) | अध्यक्ष | परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम | पाटलिपुत्र | लगभग 300 ई.पू. | स्थूलभद्र | 12 अंगों का संकलन |
| द्वितीय | वल्लभी (गुजरात) | लगभग 5वीं–6वीं शताब्दी ई. | देवर्धि क्षमाश्रमण | आगमों का अंतिम संकलन और लिपिबद्धीकरण |
6.6 संरक्षक और राजस्थान के जैन स्मारक
- संरक्षक: कलिंग का खारवेल (हाथीगुम्फा अभिलेख), जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य, गुजरात के चालुक्य शासक कुमारपाल (आचार्य हेमचंद्र)।
- दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू, सिरोही) — विमल वसही: चालुक्य (सोलंकी) शासक भीम प्रथम के मंत्री विमल शाह द्वारा (11वीं शताब्दी); लूण वसही: वस्तुपाल-तेजपाल द्वारा (13वीं शताब्दी)।
- रणकपुर मंदिर (पाली) — धरणशाह द्वारा, राणा कुंभा के काल में; स्तंभों की बहुलता के लिए प्रसिद्ध।
- गोमतेश्वर (बाहुबली) प्रतिमा, श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) — गंग मंत्री चामुंडराय द्वारा (10वीं शताब्दी)।
7. बौद्ध धर्म
7.1 गौतम बुद्ध — जीवन
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| बचपन का नाम | सिद्धार्थ |
| तिथियाँ | विवादित — परंपरागत 563–483 ई.पू.; अनेक विद्वान बाद की तिथियाँ मानते हैं |
| कुल / गणराज्य | शाक्य गणराज्य, राजधानी कपिलवस्तु |
| पिता | शुद्धोधन |
| माता | महामाया (कोलिय कुल); जन्म के कुछ दिनों बाद निधन |
| पालन | मौसी महाप्रजापति गौतमी |
| पत्नी / पुत्र | यशोधरा / राहुल |
| सारथी / घोड़ा | छन्न / कंथक |
| चार दृश्य | वृद्ध, रोगी, मृतक (शव), संन्यासी |
| गृह-त्याग (महाभिनिष्क्रमण) | 29 वर्ष की आयु में |
| प्रारंभिक गुरु | आलार कालाम, उद्रक रामपुत्र |
| ज्ञान-प्राप्ति (संबोधि) | 35 वर्ष की आयु में, उरुवेला (बोधगया), निरंजना नदी तट, पीपल (बोधि) वृक्ष के नीचे |
| प्रथम उपदेश | सारनाथ — पाँच साथियों को; धर्मचक्र प्रवर्तन |
| सर्वाधिक उपदेश | श्रावस्ती (कोसल) |
| महापरिनिर्वाण | 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर (मल्ल गणराज्य) |
| उपदेश की भाषा | पालि (जनभाषा) |
7.2 बुद्ध के जीवन की घटनाएँ — स्थान और प्रतीक
| घटना | स्थान | प्रतीक (कला में) |
|---|---|---|
| जन्म | लुंबिनी | कमल और बैल |
| महाभिनिष्क्रमण (गृह-त्याग) | कपिलवस्तु | घोड़ा |
| संबोधि / निर्वाण (ज्ञान) | बोधगया | बोधि वृक्ष |
| धर्मचक्र प्रवर्तन (प्रथम उपदेश) | सारनाथ | चक्र |
| महापरिनिर्वाण (मृत्यु) | कुशीनगर | स्तूप |
7.3 चार आर्य सत्य
| क्र. | आर्य सत्य | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | दुःख | संसार दुःखमय है |
| 2 | दुःख समुदय | दुःख का कारण है — तृष्णा (इच्छा) |
| 3 | दुःख निरोध | दुःख का अंत संभव है — निर्वाण |
| 4 | दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा | दुःख के अंत का मार्ग — अष्टांगिक मार्ग |
7.4 अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग)
| क्र. | अंग | वर्ग |
|---|---|---|
| 1 | सम्यक् दृष्टि | प्रज्ञा |
| 2 | सम्यक् संकल्प | प्रज्ञा |
| 3 | सम्यक् वाक् | शील |
| 4 | सम्यक् कर्मांत | शील |
| 5 | सम्यक् आजीव | शील |
| 6 | सम्यक् व्यायाम (प्रयास) | समाधि |
| 7 | सम्यक् स्मृति | समाधि |
| 8 | सम्यक् समाधि | समाधि |
मध्यम मार्ग: अत्यधिक भोग-विलास और अत्यधिक काया-क्लेश (कठोर तप) — दोनों अतियों से बचने का मार्ग। त्रिरत्न (बौद्ध): बुद्ध, धम्म, संघ। अन्य प्रमुख अवधारणाएँ — प्रतीत्यसमुत्पाद (कार्य-कारण की शृंखला), अनित्य (सब कुछ परिवर्तनशील), अनात्म (स्थायी आत्मा का निषेध), कर्म और पुनर्जन्म की स्वीकृति। बुद्ध ने ईश्वर के प्रश्न पर मौन रखा और वेदों की प्रामाणिकता को स्वीकार नहीं किया।
7.5 संघ
- संघ में सभी वर्णों के लोग प्रवेश पा सकते थे; ऋणी, दास, रोगी और बिना अनुमति के अवयस्कों पर रोक थी।
- आनंद के आग्रह पर स्त्रियों को संघ में प्रवेश मिला; पहली भिक्षुणी महाप्रजापति गौतमी।
- प्रमुख अनुयायी: आनंद, उपालि, सारिपुत्त, मोग्गलान, महाकस्सप; शासक — बिंबिसार, प्रसेनजित, उदयन; वैशाली की गणिका आम्रपाली; डाकू अंगुलिमाल।
7.6 चार बौद्ध संगीतियाँ
संगीतियों की तिथियाँ अनुमानित हैं; परीक्षा में स्थान, शासक, अध्यक्ष और परिणाम अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।
| संगीति | काल (लगभग) | स्थान | संरक्षक शासक | अध्यक्ष | परिणाम |
|---|---|---|---|---|---|
| प्रथम | बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद (लगभग 483 ई.पू., परंपरागत) | राजगृह (सप्तपर्णी गुफा) | अजातशत्रु (हर्यक) | महाकस्सप | सुत्त पिटक (आनंद) और विनय पिटक (उपालि) का संकलन |
| द्वितीय | लगभग 383 ई.पू. | वैशाली | कालाशोक (शिशुनाग) | सब्बकामी | विनय के नियमों पर मतभेद; संघ स्थविरवादी और महासांघिक में विभाजित |
| तृतीय | लगभग 250 ई.पू. | पाटलिपुत्र | अशोक (मौर्य) | मोग्गलिपुत्त तिस्स | अभिधम्म पिटक (कथावत्थु) का संकलन; धर्म-प्रचारकों को विदेश भेजा गया |
| चतुर्थ | लगभग पहली शताब्दी ई. | कुंडलवन (कश्मीर) | कनिष्क (कुषाण) | वसुमित्र (उपाध्यक्ष अश्वघोष) | हीनयान और महायान में विभाजन स्पष्ट; 'महाविभाषा' की रचना |
7.7 त्रिपिटक
| पिटक | विषय |
|---|---|
| सुत्त पिटक | बुद्ध के उपदेश और संवाद; पाँच निकाय (दीघ, मज्झिम, संयुत्त, अंगुत्तर, खुद्दक); जातक कथाएँ खुद्दक निकाय का भाग |
| विनय पिटक | संघ और भिक्षु-भिक्षुणियों के आचरण के नियम |
| अभिधम्म पिटक | बौद्ध दर्शन और मनोविज्ञान की व्याख्या |
अन्य प्रमुख बौद्ध ग्रंथ: जातक (बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ), मिलिंदपन्हो (यवन राजा मिनांडर और भिक्षु नागसेन का संवाद), बुद्धचरित (अश्वघोष, संस्कृत), श्रीलंका के इतिवृत्त दीपवंश और महावंश।
7.8 हीनयान, महायान और वज्रयान
| बिंदु | हीनयान (थेरवाद) | महायान |
|---|---|---|
| बुद्ध की धारणा | मार्गदर्शक / महापुरुष | देवतुल्य; उपास्य |
| मूर्ति-पूजा | नहीं; प्रतीकों से पूजा | बुद्ध व बोधिसत्वों की मूर्ति-पूजा |
| आदर्श | अर्हत् — व्यक्तिगत निर्वाण | बोधिसत्व — सबके निर्वाण तक प्रयास |
| भाषा | पालि | संस्कृत |
| प्रसार | श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड आदि | चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत आदि |
वज्रयान बाद में विकसित तांत्रिक शाखा है (पूर्वी भारत, तिब्बत)। महायान के दो दार्शनिक संप्रदाय — माध्यमिक / शून्यवाद (नागार्जुन) और योगाचार / विज्ञानवाद (असंग, वसुबंधु)।
7.9 राजस्थान से बौद्ध संबंध
बैराठ (विराटनगर, कोटपूतली-बहरोड़ ज़िला — पूर्व में जयपुर) — मत्स्य महाजनपद की राजधानी। यहीं से अशोक का भाब्रू अभिलेख मिला, जिसमें अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में अपनी आस्था प्रकट करता है; 'बीजक की पहाड़ी' पर बौद्ध चैत्य / विहार के अवशेष मिले हैं।
8. जैन धर्म बनाम बौद्ध धर्म
| आधार | जैन धर्म | बौद्ध धर्म |
|---|---|---|
| प्रवर्तक / सुधारक | महावीर (24वें तीर्थंकर) | गौतम बुद्ध |
| आत्मा | आत्मा (जीव) का अस्तित्व; सर्वत्र जीव | स्थायी आत्मा का निषेध (अनात्मवाद) |
| अहिंसा | अत्यंत कठोर | मध्यम |
| मार्ग | कठोर तप, उपवास, काया-क्लेश | मध्यम मार्ग |
| त्रिरत्न | सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्र | बुद्ध, धम्म, संघ |
| लक्ष्य | कैवल्य / मोक्ष | निर्वाण |
| भाषा | प्राकृत (अर्धमागधी) | पालि |
| भारत से बाहर प्रसार | सीमित | व्यापक (एशिया भर में) |
समानताएँ: दोनों के प्रवर्तक क्षत्रिय थे; दोनों ने वेदों की प्रामाणिकता, यज्ञ और पशु-बलि का विरोध किया; दोनों कर्म और पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं; दोनों ने जनभाषा में उपदेश दिया और संघ व्यवस्था अपनाई।
9. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: पार्श्वनाथ के चार व्रत, महावीर का पाँचवाँ
महावीर ने ब्रह्मचर्य जोड़ा — अहिंसा नहीं। अहिंसा पार्श्वनाथ के चार व्रतों में पहले से थी।
Trap 2: जैन त्रिरत्न बनाम बौद्ध त्रिरत्न
जैन = सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र। बौद्ध = बुद्ध, धम्म, संघ। "सम्यक् समाधि" अष्टांगिक मार्ग (बौद्ध) का अंग है, जैन त्रिरत्न का नहीं।
Trap 3: पावा बनाम पावापुरी
महावीर का निर्वाण पावापुरी (राजगृह के निकट, बिहार) में माना जाता है। बुद्ध ने अंतिम भोजन मल्लों के पावा में चुंद के यहाँ किया और महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ।
Trap 4: ज्ञान बोधगया में, उपदेश सारनाथ में
"धर्मचक्र प्रवर्तन" = प्रथम उपदेश = सारनाथ। ज्ञान-प्राप्ति = बोधगया। सर्वाधिक उपदेश = श्रावस्ती।
Trap 5: संगीतियों के शासक
अजातशत्रु → प्रथम (राजगृह), कालाशोक → द्वितीय (वैशाली), अशोक → तृतीय (पाटलिपुत्र), कनिष्क → चतुर्थ (कश्मीर)। "कालाशोक" और "अशोक" को न मिलाएँ।
Trap 6: पाटलिपुत्र — उदयिन ने बसाया
बिंबिसार और अजातशत्रु की राजधानी राजगृह थी। पाटलिपुत्र को राजधानी उदयिन ने बनाया।
Trap 7: अश्मक — दक्षिण का एकमात्र महाजनपद
अवंति मालवा में है, विंध्य के उत्तर में। विंध्य के दक्षिण में (गोदावरी तट) केवल अश्मक।
Trap 8: मत्स्य = विराटनगर; शूरसेन = मथुरा; कुरु = इंद्रप्रस्थ
राजस्थान से जुड़े प्रश्न में मत्स्य की राजधानी विराटनगर (बैराठ) है, मथुरा नहीं।
Trap 9: अवंति की दो राजधानियाँ
उत्तरी अवंति — उज्जयिनी, दक्षिणी अवंति — महिष्मती। इसी प्रकार पांचाल — अहिच्छत्र (उत्तरी) और काम्पिल्य (दक्षिणी)।
Trap 10: विनय बनाम अभिधम्म
विनय = संघ के नियम (उपालि, प्रथम संगीति); अभिधम्म = दर्शन (तृतीय संगीति)। सुत्त = उपदेश (आनंद)।
10. Most-Asked रिवीज़न तालिका (56 तथ्य)
| क्र. | प्रश्न-बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | 16 महाजनपदों की सूची | अंगुत्तर निकाय |
| 2 | अंग की राजधानी | चंपा |
| 3 | मगध की प्रारंभिक राजधानी | गिरिव्रज / राजगृह |
| 4 | काशी की राजधानी | वाराणसी |
| 5 | कोसल की राजधानी | श्रावस्ती |
| 6 | वज्जि की राजधानी | वैशाली |
| 7 | मल्ल की राजधानियाँ | कुशीनारा, पावा |
| 8 | चेदि की राजधानी | शुक्तिमती |
| 9 | वत्स की राजधानी | कौशाम्बी |
| 10 | कुरु की राजधानी | इंद्रप्रस्थ |
| 11 | पांचाल की राजधानियाँ | अहिच्छत्र, काम्पिल्य |
| 12 | मत्स्य की राजधानी | विराटनगर (बैराठ) |
| 13 | शूरसेन की राजधानी | मथुरा |
| 14 | अश्मक की राजधानी | पोटन / पोतलि |
| 15 | अवंति की राजधानियाँ | उज्जयिनी, महिष्मती |
| 16 | गांधार की राजधानी | तक्षशिला |
| 17 | कम्बोज की राजधानी | राजपुर |
| 18 | गणसंघ महाजनपद | वज्जि, मल्ल |
| 19 | विंध्य के दक्षिण का महाजनपद | अश्मक |
| 20 | अंग को मगध में मिलाने वाला | बिंबिसार |
| 21 | बिंबिसार का राजवैद्य | जीवक |
| 22 | महाशिलाकंटक व रथमूसल | अजातशत्रु (वज्जि के विरुद्ध) |
| 23 | पाटलिपुत्र का संस्थापक | उदयिन |
| 24 | अवंति को मगध में मिलाया | शिशुनाग |
| 25 | "एकराट्", "सर्वक्षत्रांतक" | महापद्म नंद |
| 26 | सिकंदर के समय मगध शासक | धनानंद |
| 27 | प्रथम तीर्थंकर | ऋषभदेव (आदिनाथ) |
| 28 | 23वें तीर्थंकर | पार्श्वनाथ |
| 29 | महावीर का जन्म स्थान | कुंडग्राम (वैशाली) |
| 30 | महावीर के माता-पिता | त्रिशला, सिद्धार्थ |
| 31 | महावीर का कैवल्य | जृम्भिकग्राम, ऋजुपालिका नदी, साल वृक्ष |
| 32 | महावीर का निर्वाण | पावापुरी, 72 वर्ष |
| 33 | महावीर द्वारा जोड़ा व्रत | ब्रह्मचर्य |
| 34 | जैन त्रिरत्न | सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्र |
| 35 | स्याद्वाद / अनेकांतवाद | जैन दर्शन |
| 36 | प्रथम जैन संगीति | पाटलिपुत्र, स्थूलभद्र |
| 37 | द्वितीय जैन संगीति | वल्लभी, देवर्धि क्षमाश्रमण |
| 38 | दिलवाड़ा का विमल वसही | विमल शाह |
| 39 | रणकपुर मंदिर | धरणशाह (राणा कुंभा का काल) |
| 40 | बुद्ध का जन्म स्थान | लुंबिनी |
| 41 | बुद्ध के माता-पिता | महामाया, शुद्धोधन |
| 42 | बुद्ध की पत्नी / पुत्र | यशोधरा / राहुल |
| 43 | बुद्ध का घोड़ा / सारथी | कंथक / छन्न |
| 44 | बुद्ध के प्रथम गुरु | आलार कालाम |
| 45 | ज्ञान-प्राप्ति | बोधगया, निरंजना नदी, 35 वर्ष |
| 46 | प्रथम उपदेश | सारनाथ (धर्मचक्र प्रवर्तन) |
| 47 | महापरिनिर्वाण | कुशीनगर, 80 वर्ष |
| 48 | महाभिनिष्क्रमण का प्रतीक | घोड़ा |
| 49 | प्रथम बौद्ध संगीति | राजगृह, अजातशत्रु, महाकस्सप |
| 50 | द्वितीय बौद्ध संगीति | वैशाली, कालाशोक, सब्बकामी |
| 51 | तृतीय बौद्ध संगीति | पाटलिपुत्र, अशोक, मोग्गलिपुत्त तिस्स |
| 52 | चतुर्थ बौद्ध संगीति | कश्मीर, कनिष्क, वसुमित्र |
| 53 | हीनयान-महायान विभाजन | चतुर्थ संगीति |
| 54 | संघ के नियमों का पिटक | विनय पिटक |
| 55 | मिनांडर-नागसेन संवाद | मिलिंदपन्हो |
| 56 | शून्यवाद (माध्यमिक) | नागार्जुन |
11. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
इस खंड के प्रश्न प्रायः इन ढाँचों में आते हैं (नमूने अभ्यास हेतु बनाए गए हैं):
- सुमेलन: सूची-I (महाजनपद) — वत्स, अवंति, मत्स्य, गांधार; सूची-II (राजधानी) — कौशाम्बी, उज्जयिनी, विराटनगर, तक्षशिला। उत्तर: क्रम से सीधा मेल।
- कालक्रम: "मगध के शासकों का सही क्रम — बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन, शिशुनाग, महापद्म नंद।"
- कथन आधारित: "1. महावीर ने अहिंसा का व्रत जोड़ा। 2. जैन धर्म सृष्टिकर्ता ईश्वर को स्वीकार नहीं करता। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?" — केवल 2।
- संगीति तालिका: "तृतीय बौद्ध संगीति के संबंध में सही युग्म चुनें" — पाटलिपुत्र — अशोक — मोग्गलिपुत्त तिस्स।
- अभिकथन-कारण: "A: महायान में बुद्ध की मूर्ति-पूजा प्रचलित हुई। R: महायान बुद्ध को देवतुल्य मानता है।" — A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है।
- स्थल आधारित: "धर्मचक्र प्रवर्तन किस स्थान से जुड़ा है?" — सारनाथ।
रणनीति: संगीतियों को चार खानों में याद करें — स्थान, शासक, अध्यक्ष, परिणाम। महाजनपद तालिका को पूर्व से पश्चिम (अंग से गांधार-कम्बोज) मानचित्र-क्रम में पढ़ें।
12. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. संगीतियाँ: "रा-वै-पा-क" — राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कश्मीर; शासक "अ-का-अ-क" — अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क।
2. बुद्ध के चार स्थल: "लु-बो-सा-कु" — लुंबिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान), सारनाथ (उपदेश), कुशीनगर (मृत्यु)।
3. बुद्ध की आयु: "29 में घर छोड़ा, 35 में ज्ञान, 80 में निर्वाण।" महावीर: "30 में घर छोड़ा, 42 में कैवल्य, 72 में निर्वाण।"
4. जैन त्रिरत्न: "द-ज्ञा-च" — दर्शन, ज्ञान, चरित्र (देखो, जानो, चलो)।
5. पंच महाव्रत: "अ-स-अ-अ-ब" — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह + ब्रह्मचर्य (महावीर का)।
6. मगध वंश: "ह-शि-नं-मौ" — हर्यक, शिशुनाग, नंद, मौर्य।
7. त्रिपिटक: "सुत्त = सुनाया (उपदेश), विनय = विनम्र आचरण (नियम), अभिधम्म = अधिक गहरा (दर्शन)।"
13. कथन अभ्यास
अश्मक एकमात्र महाजनपद था जो विंध्य के दक्षिण में स्थित था। — सही।
मत्स्य महाजनपद की राजधानी मथुरा थी। — गलत (विराटनगर; मथुरा शूरसेन की राजधानी थी)।
पाटलिपुत्र की स्थापना बिंबिसार ने की। — गलत (उदयिन ने)।
महावीर ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों में ब्रह्मचर्य जोड़ा। — सही।
जैन धर्म सृष्टिकर्ता ईश्वर को स्वीकार करता है। — गलत (सृष्टिकर्ता ईश्वर की अवधारणा स्वीकार नहीं)।
महावीर को कैवल्य ऋजुपालिका नदी के तट पर प्राप्त हुआ। — सही।
बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश बोधगया में दिया। — गलत (सारनाथ में; बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ)।
द्वितीय बौद्ध संगीति वैशाली में कालाशोक के शासनकाल में हुई। — सही।
तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता वसुमित्र ने की। — गलत (मोग्गलिपुत्त तिस्स; वसुमित्र चतुर्थ संगीति के अध्यक्ष थे)।
विनय पिटक में संघ के आचरण संबंधी नियम हैं। — सही।
महायान संप्रदाय के ग्रंथ मुख्यतः पालि भाषा में हैं। — गलत (संस्कृत में; पालि हीनयान / थेरवाद की भाषा है)।
बौद्ध धर्म का त्रिरत्न बुद्ध, धम्म और संघ है। — सही।
14. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- 16 महाजनपद — अंगुत्तर निकाय; गणसंघ — वज्जि (वैशाली), मल्ल (कुशीनारा, पावा)
- मत्स्य — विराटनगर; शूरसेन — मथुरा; कुरु — इंद्रप्रस्थ; वत्स — कौशाम्बी; गांधार — तक्षशिला
- अश्मक — विंध्य के दक्षिण (गोदावरी); अवंति — उज्जयिनी, महिष्मती
- मगध: हर्यक (बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन) → शिशुनाग (शिशुनाग, कालाशोक) → नंद (महापद्म, धनानंद)
- उदयिन — पाटलिपुत्र; शिशुनाग — अवंति विजय; धनानंद — सिकंदर का समकालीन
- तीर्थंकर: ऋषभदेव (1), पार्श्वनाथ (23), महावीर (24)
- महावीर: कुंडग्राम, त्रिशला-सिद्धार्थ, 30 में गृह-त्याग, 42 में कैवल्य (ऋजुपालिका), 72 में पावापुरी
- त्रिरत्न (जैन): सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्र; पंच महाव्रत — ब्रह्मचर्य महावीर का
- जैन संगीतियाँ: पाटलिपुत्र (स्थूलभद्र), वल्लभी (देवर्धि क्षमाश्रमण)
- बुद्ध: लुंबिनी, शुद्धोधन-महामाया, 29 में गृह-त्याग, 35 में बोधगया, सारनाथ, 80 में कुशीनगर
- चार आर्य सत्य — दुःख, समुदय, निरोध, मार्ग; अष्टांगिक मार्ग = मध्यम मार्ग
- संगीतियाँ: राजगृह-अजातशत्रु-महाकस्सप; वैशाली-कालाशोक; पाटलिपुत्र-अशोक-मोग्गलिपुत्त तिस्स; कश्मीर-कनिष्क-वसुमित्र
- त्रिपिटक: सुत्त (उपदेश), विनय (नियम), अभिधम्म (दर्शन) — पालि
- हीनयान — पालि, अर्हत्, प्रतीक; महायान — संस्कृत, बोधिसत्व, मूर्ति-पूजा; नागार्जुन — शून्यवाद
- राजस्थान: बैराठ — भाब्रू अभिलेख, बौद्ध अवशेष; दिलवाड़ा (विमल शाह), रणकपुर (धरणशाह)
15. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। गलत उत्तरों के लिए महाजनपद तालिका और संगीति तालिका को दोबारा चार खानों में लिखें। पूरे प्राचीन भारत के मिश्रित अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ और UPSC CSE 2027 प्रारंभिक फ्री टेस्ट सीरीज़ हल करें।
16. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
छठी शताब्दी ई.पू. का भारत राजनीतिक रूप से महाजनपदों से मगध साम्राज्य की ओर और धार्मिक रूप से वैदिक कर्मकांड से जैन-बौद्ध जैसे नैतिक, जनभाषा आधारित आंदोलनों की ओर बढ़ा। इस खंड के प्रश्न तालिकाओं से सबसे अच्छी तरह हल होते हैं — महाजनपद–राजधानी, मगध के शासक–उपलब्धि, बुद्ध-महावीर के जीवन की घटनाएँ–स्थान, और संगीति–स्थान–शासक–अध्यक्ष। महावीर और बुद्ध की तिथियाँ तथा संगीतियों के वर्ष अनुमानित हैं; उन पर टिके कथनों से सावधान रहें। पृष्ठभूमि के लिए वैदिक काल और आगे की कड़ी के लिए मौर्य साम्राज्य पढ़ें।
16 महाजनपद (अंगुत्तर निकाय) · अश्मक दक्षिण में · मत्स्य-विराटनगर · हर्यक-शिशुनाग-नंद · उदयिन-पाटलिपुत्र | महावीर: +ब्रह्मचर्य, दर्शन-ज्ञान-चरित्र, पावापुरी | बुद्ध: लुंबिनी-बोधगया-सारनाथ-कुशीनगर · संगीतियाँ रा-वै-पा-क
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“16 महाजनपद, मगध का उदय, जैन और बौद्ध धर्म — महावीर, बुद्ध, संगीतियाँ, त्रिपिटक — UPSC/RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- महाजनपद, जैन और बौद्ध धर्म — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- वैदिक काल: ऋग्वैदिक और उत्तर-वैदिक — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- मौर्य साम्राज्य — चंद्रगुप्त से अशोक — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
RPSC RAS Prelims 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
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- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
16 महाजनपदों की प्रसिद्ध सूची बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में मिलती है। जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में भी महाजनपदों की सूची है, जो इससे कुछ भिन्न है।
मत्स्य महाजनपद राजस्थान के जयपुर-अलवर क्षेत्र में था और इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) थी।
हर्यक वंश के शासक उदयिन ने गंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र बसाया और उसे मगध की राजधानी बनाया। इससे पहले राजधानी राजगृह थी।
निकट के लौह-भंडार, गंगा घाटी की उपजाऊ भूमि, पहाड़ियों और नदियों से सुरक्षित राजधानियाँ, सेना में हाथियों का प्रयोग और बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद जैसे महत्वाकांक्षी शासक मगध के उदय के मुख्य कारण थे।
जैन धर्म के त्रिरत्न हैं — सम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र (सही आचरण)। इन्हें मोक्ष का मार्ग माना गया है।
23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने चार व्रत दिए थे — अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह। महावीर ने इनमें पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा, जिससे पंच महाव्रत बने।
लुंबिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान-प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश — धर्मचक्र प्रवर्तन) और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण)।
बुद्ध के चार आर्य सत्य हैं — संसार में दुःख है, दुःख का कारण तृष्णा है, दुःख का अंत संभव है, और दुःख के अंत का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।
प्रथम संगीति राजगृह में अजातशत्रु, द्वितीय वैशाली में कालाशोक, तृतीय पाटलिपुत्र में अशोक और चतुर्थ कश्मीर में कनिष्क के समय हुई। चतुर्थ संगीति के बाद हीनयान और महायान का विभाजन स्पष्ट हुआ।
हीनयान बुद्ध को मार्गदर्शक मानता है, मूर्ति-पूजा नहीं करता और इसके ग्रंथ पालि में हैं। महायान बुद्ध को देवतुल्य मानकर मूर्ति-पूजा करता है, बोधिसत्व का आदर्श रखता है और इसके ग्रंथ संस्कृत में हैं।
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