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भारत का इतिहास

16 महाजनपद, मगध का उदय, जैन और बौद्ध धर्म — महावीर, बुद्ध, संगीतियाँ, त्रिपिटक — UPSC/RAS

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
22 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS व SSC पाठ्यक्रम की भारतीय इतिहास इकाई; NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12) व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तथ्य। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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संक्षिप्त उत्तर: छठी शताब्दी ई.पू. उत्तर भारत में 16 महाजनपदों के उदय और नए धार्मिक आंदोलनों का काल है। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय 16 महाजनपदों की सूची देता है; इनमें वज्जि (राजधानी वैशाली) और मल्ल गणसंघ थे, अश्मक एकमात्र महाजनपद था जो विंध्य के दक्षिण (गोदावरी तट) पर था, और मत्स्य की राजधानी विराटनगर (बैराठ, राजस्थान) थी। इनमें से मगध क्रमशः हर्यक (बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन), शिशुनाग और नंद वंशों के अधीन सबसे शक्तिशाली बना; उदयिन ने पाटलिपुत्र बसाया। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर ने 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के चार व्रतों में ब्रह्मचर्य जोड़कर पंच महाव्रत बनाए; जैन त्रिरत्न हैं — सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र। गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी, ज्ञान-प्राप्ति बोधगया, प्रथम उपदेश सारनाथ (धर्मचक्र प्रवर्तन) और महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ। बौद्ध धर्म के मूल में चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग) हैं; चार बौद्ध संगीतियाँ क्रमशः राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र और कश्मीर में हुईं और चौथी संगीति के बाद हीनयान-महायान विभाजन स्पष्ट हुआ। महावीर और बुद्ध की जन्म-मृत्यु तिथियाँ विवादित हैं।


संक्षिप्त उत्तर

तथ्यउत्तर
16 महाजनपदों की सूची का स्रोतअंगुत्तर निकाय (बौद्ध); जैन भगवती सूत्र में भिन्न सूची
गणसंघ (गणराज्य) महाजनपदवज्जि, मल्ल
विंध्य के दक्षिण में एकमात्र महाजनपदअश्मक (गोदावरी तट)
राजस्थान से जुड़ा महाजनपदमत्स्य — राजधानी विराटनगर (बैराठ)
सबसे शक्तिशाली बनामगध
मगध के वंश (क्रम)हर्यक → शिशुनाग → नंद → (आगे मौर्य)
पाटलिपुत्र के संस्थापकउदयिन (हर्यक वंश)
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकरऋषभदेव (आदिनाथ)
23वें तीर्थंकरपार्श्वनाथ
24वें तीर्थंकरमहावीर (वर्धमान)
महावीर द्वारा जोड़ा गया व्रतब्रह्मचर्य
महावीर का कैवल्यजृम्भिकग्राम, ऋजुपालिका नदी तट, साल वृक्ष के नीचे
महावीर का निर्वाणपावापुरी (72 वर्ष की आयु)
बुद्ध का जन्मलुंबिनी (कपिलवस्तु के निकट, वर्तमान नेपाल)
ज्ञान-प्राप्तिबोधगया (उरुवेला), निरंजना नदी तट, पीपल वृक्ष के नीचे; 35 वर्ष की आयु
प्रथम उपदेशसारनाथ (ऋषिपत्तन / मृगदाव) — धर्मचक्र प्रवर्तन
महापरिनिर्वाणकुशीनगर (मल्ल), 80 वर्ष की आयु
बौद्ध ग्रंथत्रिपिटक — सुत्त, विनय, अभिधम्म (पालि भाषा)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

महाजनपद, मगध का उदय, जैन और बौद्ध धर्म — यह खंड वैदिक काल और मौर्य साम्राज्य के बीच की कड़ी है। UPSC CSE प्रारंभिक में बौद्ध-जैन दर्शन की अवधारणाएँ (जैसे अनेकांतवाद, स्याद्वाद, बोधिसत्व, मध्यम मार्ग), संगीतियाँ और बौद्ध स्थल कथन-आधारित प्रश्नों में आते हैं। RPSC RAS और राजस्थान CET (स्नातक) में महाजनपद–राजधानी तालिका, मत्स्य-विराटनगर, बैराठ के बौद्ध अवशेष, और राजस्थान के जैन मंदिर (दिलवाड़ा, रणकपुर) से जुड़े प्रश्न दिखते हैं। SSC CGL/CHSL में तीर्थंकर, बुद्ध के जीवन के स्थान और संगीतियों के तथ्य सीधे पूछे जाते हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • UPSC CSE प्रारंभिक — दर्शन, संगीतियाँ, संप्रदाय, स्थल
  • RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — महाजनपद, राजस्थान से संबंध, जैन कला
  • राजस्थान CET (स्नातक), RPSC व्याख्याता / वरिष्ठ अध्यापक
  • SSC CGL / CHSL — तथ्यात्मक प्रश्न

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. महाजनपद–राजधानी का सुमेलन
  2. मगध के शासकों / वंशों का कालक्रम
  3. बुद्ध / महावीर के जीवन की घटनाएँ और स्थान
  4. बौद्ध संगीतियाँ — स्थान, शासक, अध्यक्ष, परिणाम
  5. जैन व बौद्ध सिद्धांतों पर कथन — "कौन-सा/से कथन सही है/हैं?"
  6. हीनयान बनाम महायान, श्वेतांबर बनाम दिगंबर

3. 16 महाजनपद

उत्तर-वैदिक काल के 'जन' धीरे-धीरे स्थायी क्षेत्रीय 'जनपद' बने और छठी शताब्दी ई.पू. तक उनमें से बड़े और शक्तिशाली राज्य महाजनपद कहलाए। लोहे के प्रयोग से गंगा घाटी में कृषि-अधिशेष, व्यापार, नगरों (द्वितीय नगरीकरण) और आहत (Punch-marked) सिक्कों का विकास इसी काल की पृष्ठभूमि है। अधिकांश महाजनपद राजतंत्र थे, जबकि कुछ गणसंघ (जहाँ सत्ता एक समूह के हाथ में थी) थे।

क्र.महाजनपदराजधानीवर्तमान क्षेत्र (लगभग)
1अंगचंपाभागलपुर-मुंगेर, बिहार
2मगधगिरिव्रज / राजगृह (बाद में पाटलिपुत्र)पटना-गया, बिहार
3काशीवाराणसीवाराणसी, उत्तर प्रदेश
4कोसलश्रावस्ती (साकेत / अयोध्या भी प्रमुख नगर)अवध क्षेत्र, उत्तर प्रदेश
5वज्जि (गणसंघ)वैशालीउत्तर बिहार
6मल्ल (गणसंघ)कुशीनारा और पावादेवरिया-गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
7चेदिशुक्तिमतीबुंदेलखंड क्षेत्र
8वत्सकौशाम्बीप्रयागराज के निकट, उत्तर प्रदेश
9कुरुइंद्रप्रस्थदिल्ली-मेरठ-हरियाणा क्षेत्र
10पांचालअहिच्छत्र (उत्तरी), काम्पिल्य (दक्षिणी)रुहेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश
11मत्स्यविराटनगर (बैराठ)जयपुर-अलवर क्षेत्र, राजस्थान
12शूरसेनमथुरामथुरा, उत्तर प्रदेश
13अश्मक (अस्सक)पोटन / पोतलिगोदावरी तट (दक्षिण भारत)
14अवंतिउज्जयिनी (उत्तरी), महिष्मती (दक्षिणी)मालवा, मध्य प्रदेश
15गांधारतक्षशिलारावलपिंडी-पेशावर क्षेत्र, पाकिस्तान
16कम्बोजराजपुरपश्चिमोत्तर सीमा क्षेत्र

3.1 महाजनपदों से जुड़े विशेष तथ्य

  • वज्जि आठ कुलों का संघ था, जिसमें लिच्छवि सबसे प्रमुख थे; राजधानी वैशाली।
  • अवंति का शासक चंड प्रद्योत बिंबिसार का समकालीन था; अवंति मगध का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी था।
  • कोसल के शासक प्रसेनजित बुद्ध के समकालीन और अनुयायी थे।
  • वत्स के शासक उदयन भी बुद्ध के समकालीन थे।
  • गांधार की राजधानी तक्षशिला शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था।
  • प्रमुख चार शक्तियाँ जिनमें संघर्ष चला — मगध, कोसल, वत्स, अवंति; अंततः मगध विजयी हुआ।

4. मगध का उदय

4.1 मगध की सफलता के कारण

कारकविवरण
लौह-भंडारनिकट के क्षेत्रों में लौह अयस्क — बेहतर औज़ार और हथियार
उपजाऊ भूमिगंगा घाटी की जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा — कृषि अधिशेष
सुरक्षित राजधानियाँराजगृह — पाँच पहाड़ियों से घिरा; पाटलिपुत्र — गंगा, सोन (और गंडक) के संगम पर "जल-दुर्ग"
हाथीपूर्वी वनों से हाथी — सेना में उपयोग
नदी-मार्गव्यापार और सैनिक आवागमन
महत्वाकांक्षी शासकबिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद आदि

4.2 मगध के वंश और शासक

नीचे दी गई तिथियाँ परंपरागत / अनुमानित हैं; विभिन्न पुस्तकों में कुछ अंतर मिलता है।

वंशशासकप्रमुख तथ्य
हर्यकबिंबिसारबुद्ध व महावीर के समकालीन; वैवाहिक संबंधों से शक्ति बढ़ाई (कोसल देवी — प्रसेनजित की बहन, चेल्लना — लिच्छवि, क्षेमा — मद्र); अंग को जीता; राजवैद्य जीवक को अवंति के प्रद्योत के उपचार हेतु भेजा
हर्यकअजातशत्रुपिता बिंबिसार की हत्या कर शासक बना (परंपरा के अनुसार); कोसल व वज्जि से युद्ध; वज्जि के विरुद्ध महाशिलाकंटक (पत्थर फेंकने का यंत्र) और रथमूसल (गदायुक्त रथ) का प्रयोग (जैन स्रोत); उसके शासनकाल में प्रथम बौद्ध संगीति
हर्यकउदयिनगंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र बसाया और राजधानी बनाया
शिशुनागशिशुनागअवंति की शक्ति को समाप्त कर मगध में मिलाया; राजधानी कुछ समय वैशाली ले गया
शिशुनागकालाशोक (काकवर्ण)राजधानी फिर पाटलिपुत्र; उसके शासनकाल में द्वितीय बौद्ध संगीति (वैशाली)
नंदमहापद्म नंदपुराणों में "एकराट्" और "सर्वक्षत्रांतक"; कलिंग पर अधिकार (हाथीगुम्फा अभिलेख में नंदराज का उल्लेख)
नंदधनानंदसिकंदर के आक्रमण (326 ई.पू.) के समय मगध का शासक; विशाल सेना व धन; चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से अपदस्थ किया

नंदों के बाद मगध में मौर्य साम्राज्य स्थापित हुआ — विस्तार मौर्य साम्राज्य: चंद्रगुप्त से अशोक में।


5. नए धार्मिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि

  • उत्तर-वैदिक कर्मकांड की जटिलता और खर्च; ब्राह्मणों का वर्चस्व।
  • वर्ण व्यवस्था की कठोरता; क्षत्रियों और समृद्ध वैश्यों (गृहपति, श्रेष्ठि) की नई आकांक्षाएँ।
  • नई कृषि अर्थव्यवस्था में पशुओं की आवश्यकता — यज्ञ में पशु-बलि का विरोध।
  • व्यापार और सिक्कों का प्रसार; सूदखोरी आदि पर वैदिक ग्रंथों की नकारात्मक दृष्टि।
  • उपनिषदों के चिंतन ने भी कर्म, पुनर्जन्म और मोक्ष के प्रश्न उठाए थे। इसी काल में अनेक श्रमण संप्रदाय उभरे (जैसे आजीवक — मक्खलि गोसाल)।

6. जैन धर्म

6.1 तीर्थंकर

जैन परंपरा में 24 तीर्थंकर माने जाते हैं। 'तीर्थंकर' का अर्थ है — संसार-सागर से पार उतरने का घाट (तीर्थ) बनाने वाला।

तीर्थंकरक्रमप्रतीक (लांछन)टिप्पणी
ऋषभदेव (आदिनाथ)1बैलजैन परंपरा के संस्थापक माने जाते हैं
नेमिनाथ (अरिष्टनेमि)22शंख—
पार्श्वनाथ23सर्पकाशी के राजा अश्वसेन के पुत्र; चार व्रत (चातुर्याम) — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह
महावीर24सिंहपाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा

6.2 महावीर — जीवन

बिंदुतथ्य
बचपन का नामवर्धमान
जन्म स्थानकुंडग्राम (वैशाली के निकट)
तिथियाँविवादित — परंपरागत 599–527 ई.पू.; अनेक इतिहासकार लगभग 540–468 ई.पू. मानते हैं
पितासिद्धार्थ — ज्ञातृक कुल के प्रमुख
मातात्रिशला — लिच्छवि प्रमुख चेटक की बहन
पत्नीयशोदा (श्वेतांबर परंपरा; दिगंबर परंपरा उन्हें अविवाहित मानती है)
गृह-त्याग30 वर्ष की आयु में
तपस्यालगभग 12 वर्ष
कैवल्य (पूर्ण ज्ञान)42 वर्ष की आयु में; जृम्भिकग्राम के निकट ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे
उपाधियाँजिन (विजेता — इसी से 'जैन'), केवलिन, निर्ग्रंथ (बंधन-रहित), महावीर
उपदेश की भाषाप्राकृत (अर्धमागधी)
निर्वाण72 वर्ष की आयु में पावापुरी (राजगृह के निकट, बिहार)

6.3 जैन सिद्धांत

सिद्धांतअर्थ
त्रिरत्नसम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र (आचरण) — मोक्ष का मार्ग
पंच महाव्रतअहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (संग्रह न करना), ब्रह्मचर्य — भिक्षुओं के लिए
अणुव्रतगृहस्थों के लिए इन्हीं व्रतों का सरल रूप
अनेकांतवादसत्य के अनेक पक्ष होते हैं
स्याद्वाद (सप्तभंगी नय)किसी वस्तु के बारे में कथन सापेक्ष होते हैं — "स्यात्" (शायद / किसी दृष्टि से)
जीव और अजीवजीव (आत्मा) केवल मनुष्यों-पशुओं में नहीं, वनस्पति, जल, पृथ्वी आदि में भी
ईश्वरसृष्टिकर्ता ईश्वर की अवधारणा स्वीकार नहीं; देवताओं को जिन से निम्न स्थान
कर्म और मोक्षकर्म-बंधन से आत्मा की मुक्ति ही कैवल्य / मोक्ष
सल्लेखना (संथारा)उपवास द्वारा स्वेच्छा से देह-त्याग की प्रथा

6.4 श्वेतांबर और दिगंबर

जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य के समय मगध में लंबे अकाल के दौरान भद्रबाहु अपने अनुयायियों के साथ दक्षिण (कर्नाटक, श्रवणबेलगोला) चले गए, जबकि स्थूलभद्र मगध में रहे। लौटने पर आचरण के मतभेदों से धीरे-धीरे दो संप्रदाय बने (औपचारिक विभाजन बाद की शताब्दियों में स्पष्ट हुआ)।

बिंदुश्वेतांबरदिगंबर
वस्त्रश्वेत वस्त्र धारणभिक्षु नग्न ('दिशाएँ ही वस्त्र')
परंपरा से जुड़ेस्थूलभद्रभद्रबाहु
स्त्रियों का मोक्षस्त्रियाँ इसी जन्म में मोक्ष पा सकती हैंस्त्री-जन्म में मोक्ष संभव नहीं
महावीर का विवाहविवाहित मानते हैंअविवाहित मानते हैं
आगम ग्रंथवल्लभी में संकलित आगम स्वीकारमूल आगमों को लुप्त मानते हैं

6.5 जैन संगीतियाँ

संगीतिस्थानकाल (लगभग)अध्यक्षपरिणाम
प्रथमपाटलिपुत्रलगभग 300 ई.पू.स्थूलभद्र12 अंगों का संकलन
द्वितीयवल्लभी (गुजरात)लगभग 5वीं–6वीं शताब्दी ई.देवर्धि क्षमाश्रमणआगमों का अंतिम संकलन और लिपिबद्धीकरण

6.6 संरक्षक और राजस्थान के जैन स्मारक

  • संरक्षक: कलिंग का खारवेल (हाथीगुम्फा अभिलेख), जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य, गुजरात के चालुक्य शासक कुमारपाल (आचार्य हेमचंद्र)।
  • दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू, सिरोही) — विमल वसही: चालुक्य (सोलंकी) शासक भीम प्रथम के मंत्री विमल शाह द्वारा (11वीं शताब्दी); लूण वसही: वस्तुपाल-तेजपाल द्वारा (13वीं शताब्दी)।
  • रणकपुर मंदिर (पाली) — धरणशाह द्वारा, राणा कुंभा के काल में; स्तंभों की बहुलता के लिए प्रसिद्ध।
  • गोमतेश्वर (बाहुबली) प्रतिमा, श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) — गंग मंत्री चामुंडराय द्वारा (10वीं शताब्दी)।

7. बौद्ध धर्म

7.1 गौतम बुद्ध — जीवन

बिंदुतथ्य
बचपन का नामसिद्धार्थ
तिथियाँविवादित — परंपरागत 563–483 ई.पू.; अनेक विद्वान बाद की तिथियाँ मानते हैं
कुल / गणराज्यशाक्य गणराज्य, राजधानी कपिलवस्तु
पिताशुद्धोधन
मातामहामाया (कोलिय कुल); जन्म के कुछ दिनों बाद निधन
पालनमौसी महाप्रजापति गौतमी
पत्नी / पुत्रयशोधरा / राहुल
सारथी / घोड़ाछन्न / कंथक
चार दृश्यवृद्ध, रोगी, मृतक (शव), संन्यासी
गृह-त्याग (महाभिनिष्क्रमण)29 वर्ष की आयु में
प्रारंभिक गुरुआलार कालाम, उद्रक रामपुत्र
ज्ञान-प्राप्ति (संबोधि)35 वर्ष की आयु में, उरुवेला (बोधगया), निरंजना नदी तट, पीपल (बोधि) वृक्ष के नीचे
प्रथम उपदेशसारनाथ — पाँच साथियों को; धर्मचक्र प्रवर्तन
सर्वाधिक उपदेशश्रावस्ती (कोसल)
महापरिनिर्वाण80 वर्ष की आयु में कुशीनगर (मल्ल गणराज्य)
उपदेश की भाषापालि (जनभाषा)

7.2 बुद्ध के जीवन की घटनाएँ — स्थान और प्रतीक

घटनास्थानप्रतीक (कला में)
जन्मलुंबिनीकमल और बैल
महाभिनिष्क्रमण (गृह-त्याग)कपिलवस्तुघोड़ा
संबोधि / निर्वाण (ज्ञान)बोधगयाबोधि वृक्ष
धर्मचक्र प्रवर्तन (प्रथम उपदेश)सारनाथचक्र
महापरिनिर्वाण (मृत्यु)कुशीनगरस्तूप

7.3 चार आर्य सत्य

क्र.आर्य सत्यअर्थ
1दुःखसंसार दुःखमय है
2दुःख समुदयदुःख का कारण है — तृष्णा (इच्छा)
3दुःख निरोधदुःख का अंत संभव है — निर्वाण
4दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदादुःख के अंत का मार्ग — अष्टांगिक मार्ग

7.4 अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग)

क्र.अंगवर्ग
1सम्यक् दृष्टिप्रज्ञा
2सम्यक् संकल्पप्रज्ञा
3सम्यक् वाक्शील
4सम्यक् कर्मांतशील
5सम्यक् आजीवशील
6सम्यक् व्यायाम (प्रयास)समाधि
7सम्यक् स्मृतिसमाधि
8सम्यक् समाधिसमाधि

मध्यम मार्ग: अत्यधिक भोग-विलास और अत्यधिक काया-क्लेश (कठोर तप) — दोनों अतियों से बचने का मार्ग। त्रिरत्न (बौद्ध): बुद्ध, धम्म, संघ। अन्य प्रमुख अवधारणाएँ — प्रतीत्यसमुत्पाद (कार्य-कारण की शृंखला), अनित्य (सब कुछ परिवर्तनशील), अनात्म (स्थायी आत्मा का निषेध), कर्म और पुनर्जन्म की स्वीकृति। बुद्ध ने ईश्वर के प्रश्न पर मौन रखा और वेदों की प्रामाणिकता को स्वीकार नहीं किया।

7.5 संघ

  • संघ में सभी वर्णों के लोग प्रवेश पा सकते थे; ऋणी, दास, रोगी और बिना अनुमति के अवयस्कों पर रोक थी।
  • आनंद के आग्रह पर स्त्रियों को संघ में प्रवेश मिला; पहली भिक्षुणी महाप्रजापति गौतमी।
  • प्रमुख अनुयायी: आनंद, उपालि, सारिपुत्त, मोग्गलान, महाकस्सप; शासक — बिंबिसार, प्रसेनजित, उदयन; वैशाली की गणिका आम्रपाली; डाकू अंगुलिमाल।

7.6 चार बौद्ध संगीतियाँ

संगीतियों की तिथियाँ अनुमानित हैं; परीक्षा में स्थान, शासक, अध्यक्ष और परिणाम अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

संगीतिकाल (लगभग)स्थानसंरक्षक शासकअध्यक्षपरिणाम
प्रथमबुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद (लगभग 483 ई.पू., परंपरागत)राजगृह (सप्तपर्णी गुफा)अजातशत्रु (हर्यक)महाकस्सपसुत्त पिटक (आनंद) और विनय पिटक (उपालि) का संकलन
द्वितीयलगभग 383 ई.पू.वैशालीकालाशोक (शिशुनाग)सब्बकामीविनय के नियमों पर मतभेद; संघ स्थविरवादी और महासांघिक में विभाजित
तृतीयलगभग 250 ई.पू.पाटलिपुत्रअशोक (मौर्य)मोग्गलिपुत्त तिस्सअभिधम्म पिटक (कथावत्थु) का संकलन; धर्म-प्रचारकों को विदेश भेजा गया
चतुर्थलगभग पहली शताब्दी ई.कुंडलवन (कश्मीर)कनिष्क (कुषाण)वसुमित्र (उपाध्यक्ष अश्वघोष)हीनयान और महायान में विभाजन स्पष्ट; 'महाविभाषा' की रचना

7.7 त्रिपिटक

पिटकविषय
सुत्त पिटकबुद्ध के उपदेश और संवाद; पाँच निकाय (दीघ, मज्झिम, संयुत्त, अंगुत्तर, खुद्दक); जातक कथाएँ खुद्दक निकाय का भाग
विनय पिटकसंघ और भिक्षु-भिक्षुणियों के आचरण के नियम
अभिधम्म पिटकबौद्ध दर्शन और मनोविज्ञान की व्याख्या

अन्य प्रमुख बौद्ध ग्रंथ: जातक (बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ), मिलिंदपन्हो (यवन राजा मिनांडर और भिक्षु नागसेन का संवाद), बुद्धचरित (अश्वघोष, संस्कृत), श्रीलंका के इतिवृत्त दीपवंश और महावंश।

7.8 हीनयान, महायान और वज्रयान

बिंदुहीनयान (थेरवाद)महायान
बुद्ध की धारणामार्गदर्शक / महापुरुषदेवतुल्य; उपास्य
मूर्ति-पूजानहीं; प्रतीकों से पूजाबुद्ध व बोधिसत्वों की मूर्ति-पूजा
आदर्शअर्हत् — व्यक्तिगत निर्वाणबोधिसत्व — सबके निर्वाण तक प्रयास
भाषापालिसंस्कृत
प्रसारश्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड आदिचीन, जापान, कोरिया, तिब्बत आदि

वज्रयान बाद में विकसित तांत्रिक शाखा है (पूर्वी भारत, तिब्बत)। महायान के दो दार्शनिक संप्रदाय — माध्यमिक / शून्यवाद (नागार्जुन) और योगाचार / विज्ञानवाद (असंग, वसुबंधु)।

7.9 राजस्थान से बौद्ध संबंध

बैराठ (विराटनगर, कोटपूतली-बहरोड़ ज़िला — पूर्व में जयपुर) — मत्स्य महाजनपद की राजधानी। यहीं से अशोक का भाब्रू अभिलेख मिला, जिसमें अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में अपनी आस्था प्रकट करता है; 'बीजक की पहाड़ी' पर बौद्ध चैत्य / विहार के अवशेष मिले हैं।


8. जैन धर्म बनाम बौद्ध धर्म

आधारजैन धर्मबौद्ध धर्म
प्रवर्तक / सुधारकमहावीर (24वें तीर्थंकर)गौतम बुद्ध
आत्माआत्मा (जीव) का अस्तित्व; सर्वत्र जीवस्थायी आत्मा का निषेध (अनात्मवाद)
अहिंसाअत्यंत कठोरमध्यम
मार्गकठोर तप, उपवास, काया-क्लेशमध्यम मार्ग
त्रिरत्नसम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्रबुद्ध, धम्म, संघ
लक्ष्यकैवल्य / मोक्षनिर्वाण
भाषाप्राकृत (अर्धमागधी)पालि
भारत से बाहर प्रसारसीमितव्यापक (एशिया भर में)

समानताएँ: दोनों के प्रवर्तक क्षत्रिय थे; दोनों ने वेदों की प्रामाणिकता, यज्ञ और पशु-बलि का विरोध किया; दोनों कर्म और पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं; दोनों ने जनभाषा में उपदेश दिया और संघ व्यवस्था अपनाई।


9. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: पार्श्वनाथ के चार व्रत, महावीर का पाँचवाँ

महावीर ने ब्रह्मचर्य जोड़ा — अहिंसा नहीं। अहिंसा पार्श्वनाथ के चार व्रतों में पहले से थी।

Trap 2: जैन त्रिरत्न बनाम बौद्ध त्रिरत्न

जैन = सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र। बौद्ध = बुद्ध, धम्म, संघ। "सम्यक् समाधि" अष्टांगिक मार्ग (बौद्ध) का अंग है, जैन त्रिरत्न का नहीं।

Trap 3: पावा बनाम पावापुरी

महावीर का निर्वाण पावापुरी (राजगृह के निकट, बिहार) में माना जाता है। बुद्ध ने अंतिम भोजन मल्लों के पावा में चुंद के यहाँ किया और महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ।

Trap 4: ज्ञान बोधगया में, उपदेश सारनाथ में

"धर्मचक्र प्रवर्तन" = प्रथम उपदेश = सारनाथ। ज्ञान-प्राप्ति = बोधगया। सर्वाधिक उपदेश = श्रावस्ती।

Trap 5: संगीतियों के शासक

अजातशत्रु → प्रथम (राजगृह), कालाशोक → द्वितीय (वैशाली), अशोक → तृतीय (पाटलिपुत्र), कनिष्क → चतुर्थ (कश्मीर)। "कालाशोक" और "अशोक" को न मिलाएँ।

Trap 6: पाटलिपुत्र — उदयिन ने बसाया

बिंबिसार और अजातशत्रु की राजधानी राजगृह थी। पाटलिपुत्र को राजधानी उदयिन ने बनाया।

Trap 7: अश्मक — दक्षिण का एकमात्र महाजनपद

अवंति मालवा में है, विंध्य के उत्तर में। विंध्य के दक्षिण में (गोदावरी तट) केवल अश्मक।

Trap 8: मत्स्य = विराटनगर; शूरसेन = मथुरा; कुरु = इंद्रप्रस्थ

राजस्थान से जुड़े प्रश्न में मत्स्य की राजधानी विराटनगर (बैराठ) है, मथुरा नहीं।

Trap 9: अवंति की दो राजधानियाँ

उत्तरी अवंति — उज्जयिनी, दक्षिणी अवंति — महिष्मती। इसी प्रकार पांचाल — अहिच्छत्र (उत्तरी) और काम्पिल्य (दक्षिणी)।

Trap 10: विनय बनाम अभिधम्म

विनय = संघ के नियम (उपालि, प्रथम संगीति); अभिधम्म = दर्शन (तृतीय संगीति)। सुत्त = उपदेश (आनंद)।


10. Most-Asked रिवीज़न तालिका (56 तथ्य)

क्र.प्रश्न-बिंदुउत्तर
116 महाजनपदों की सूचीअंगुत्तर निकाय
2अंग की राजधानीचंपा
3मगध की प्रारंभिक राजधानीगिरिव्रज / राजगृह
4काशी की राजधानीवाराणसी
5कोसल की राजधानीश्रावस्ती
6वज्जि की राजधानीवैशाली
7मल्ल की राजधानियाँकुशीनारा, पावा
8चेदि की राजधानीशुक्तिमती
9वत्स की राजधानीकौशाम्बी
10कुरु की राजधानीइंद्रप्रस्थ
11पांचाल की राजधानियाँअहिच्छत्र, काम्पिल्य
12मत्स्य की राजधानीविराटनगर (बैराठ)
13शूरसेन की राजधानीमथुरा
14अश्मक की राजधानीपोटन / पोतलि
15अवंति की राजधानियाँउज्जयिनी, महिष्मती
16गांधार की राजधानीतक्षशिला
17कम्बोज की राजधानीराजपुर
18गणसंघ महाजनपदवज्जि, मल्ल
19विंध्य के दक्षिण का महाजनपदअश्मक
20अंग को मगध में मिलाने वालाबिंबिसार
21बिंबिसार का राजवैद्यजीवक
22महाशिलाकंटक व रथमूसलअजातशत्रु (वज्जि के विरुद्ध)
23पाटलिपुत्र का संस्थापकउदयिन
24अवंति को मगध में मिलायाशिशुनाग
25"एकराट्", "सर्वक्षत्रांतक"महापद्म नंद
26सिकंदर के समय मगध शासकधनानंद
27प्रथम तीर्थंकरऋषभदेव (आदिनाथ)
2823वें तीर्थंकरपार्श्वनाथ
29महावीर का जन्म स्थानकुंडग्राम (वैशाली)
30महावीर के माता-पितात्रिशला, सिद्धार्थ
31महावीर का कैवल्यजृम्भिकग्राम, ऋजुपालिका नदी, साल वृक्ष
32महावीर का निर्वाणपावापुरी, 72 वर्ष
33महावीर द्वारा जोड़ा व्रतब्रह्मचर्य
34जैन त्रिरत्नसम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्र
35स्याद्वाद / अनेकांतवादजैन दर्शन
36प्रथम जैन संगीतिपाटलिपुत्र, स्थूलभद्र
37द्वितीय जैन संगीतिवल्लभी, देवर्धि क्षमाश्रमण
38दिलवाड़ा का विमल वसहीविमल शाह
39रणकपुर मंदिरधरणशाह (राणा कुंभा का काल)
40बुद्ध का जन्म स्थानलुंबिनी
41बुद्ध के माता-पितामहामाया, शुद्धोधन
42बुद्ध की पत्नी / पुत्रयशोधरा / राहुल
43बुद्ध का घोड़ा / सारथीकंथक / छन्न
44बुद्ध के प्रथम गुरुआलार कालाम
45ज्ञान-प्राप्तिबोधगया, निरंजना नदी, 35 वर्ष
46प्रथम उपदेशसारनाथ (धर्मचक्र प्रवर्तन)
47महापरिनिर्वाणकुशीनगर, 80 वर्ष
48महाभिनिष्क्रमण का प्रतीकघोड़ा
49प्रथम बौद्ध संगीतिराजगृह, अजातशत्रु, महाकस्सप
50द्वितीय बौद्ध संगीतिवैशाली, कालाशोक, सब्बकामी
51तृतीय बौद्ध संगीतिपाटलिपुत्र, अशोक, मोग्गलिपुत्त तिस्स
52चतुर्थ बौद्ध संगीतिकश्मीर, कनिष्क, वसुमित्र
53हीनयान-महायान विभाजनचतुर्थ संगीति
54संघ के नियमों का पिटकविनय पिटक
55मिनांडर-नागसेन संवादमिलिंदपन्हो
56शून्यवाद (माध्यमिक)नागार्जुन

11. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

इस खंड के प्रश्न प्रायः इन ढाँचों में आते हैं (नमूने अभ्यास हेतु बनाए गए हैं):

  1. सुमेलन: सूची-I (महाजनपद) — वत्स, अवंति, मत्स्य, गांधार; सूची-II (राजधानी) — कौशाम्बी, उज्जयिनी, विराटनगर, तक्षशिला। उत्तर: क्रम से सीधा मेल।
  2. कालक्रम: "मगध के शासकों का सही क्रम — बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन, शिशुनाग, महापद्म नंद।"
  3. कथन आधारित: "1. महावीर ने अहिंसा का व्रत जोड़ा। 2. जैन धर्म सृष्टिकर्ता ईश्वर को स्वीकार नहीं करता। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?" — केवल 2।
  4. संगीति तालिका: "तृतीय बौद्ध संगीति के संबंध में सही युग्म चुनें" — पाटलिपुत्र — अशोक — मोग्गलिपुत्त तिस्स।
  5. अभिकथन-कारण: "A: महायान में बुद्ध की मूर्ति-पूजा प्रचलित हुई। R: महायान बुद्ध को देवतुल्य मानता है।" — A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है।
  6. स्थल आधारित: "धर्मचक्र प्रवर्तन किस स्थान से जुड़ा है?" — सारनाथ।

रणनीति: संगीतियों को चार खानों में याद करें — स्थान, शासक, अध्यक्ष, परिणाम। महाजनपद तालिका को पूर्व से पश्चिम (अंग से गांधार-कम्बोज) मानचित्र-क्रम में पढ़ें।


12. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. संगीतियाँ: "रा-वै-पा-क" — राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कश्मीर; शासक "अ-का-अ-क" — अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क।

2. बुद्ध के चार स्थल: "लु-बो-सा-कु" — लुंबिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान), सारनाथ (उपदेश), कुशीनगर (मृत्यु)।

3. बुद्ध की आयु: "29 में घर छोड़ा, 35 में ज्ञान, 80 में निर्वाण।" महावीर: "30 में घर छोड़ा, 42 में कैवल्य, 72 में निर्वाण।"

4. जैन त्रिरत्न: "द-ज्ञा-च" — दर्शन, ज्ञान, चरित्र (देखो, जानो, चलो)।

5. पंच महाव्रत: "अ-स-अ-अ-ब" — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह + ब्रह्मचर्य (महावीर का)।

6. मगध वंश: "ह-शि-नं-मौ" — हर्यक, शिशुनाग, नंद, मौर्य।

7. त्रिपिटक: "सुत्त = सुनाया (उपदेश), विनय = विनम्र आचरण (नियम), अभिधम्म = अधिक गहरा (दर्शन)।"


13. कथन अभ्यास

अश्मक एकमात्र महाजनपद था जो विंध्य के दक्षिण में स्थित था। — सही।

मत्स्य महाजनपद की राजधानी मथुरा थी। — गलत (विराटनगर; मथुरा शूरसेन की राजधानी थी)।

पाटलिपुत्र की स्थापना बिंबिसार ने की। — गलत (उदयिन ने)।

महावीर ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों में ब्रह्मचर्य जोड़ा। — सही।

जैन धर्म सृष्टिकर्ता ईश्वर को स्वीकार करता है। — गलत (सृष्टिकर्ता ईश्वर की अवधारणा स्वीकार नहीं)।

महावीर को कैवल्य ऋजुपालिका नदी के तट पर प्राप्त हुआ। — सही।

बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश बोधगया में दिया। — गलत (सारनाथ में; बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ)।

द्वितीय बौद्ध संगीति वैशाली में कालाशोक के शासनकाल में हुई। — सही।

तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता वसुमित्र ने की। — गलत (मोग्गलिपुत्त तिस्स; वसुमित्र चतुर्थ संगीति के अध्यक्ष थे)।

विनय पिटक में संघ के आचरण संबंधी नियम हैं। — सही।

महायान संप्रदाय के ग्रंथ मुख्यतः पालि भाषा में हैं। — गलत (संस्कृत में; पालि हीनयान / थेरवाद की भाषा है)।

बौद्ध धर्म का त्रिरत्न बुद्ध, धम्म और संघ है। — सही।


14. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. 16 महाजनपद — अंगुत्तर निकाय; गणसंघ — वज्जि (वैशाली), मल्ल (कुशीनारा, पावा)
  2. मत्स्य — विराटनगर; शूरसेन — मथुरा; कुरु — इंद्रप्रस्थ; वत्स — कौशाम्बी; गांधार — तक्षशिला
  3. अश्मक — विंध्य के दक्षिण (गोदावरी); अवंति — उज्जयिनी, महिष्मती
  4. मगध: हर्यक (बिंबिसार, अजातशत्रु, उदयिन) → शिशुनाग (शिशुनाग, कालाशोक) → नंद (महापद्म, धनानंद)
  5. उदयिन — पाटलिपुत्र; शिशुनाग — अवंति विजय; धनानंद — सिकंदर का समकालीन
  6. तीर्थंकर: ऋषभदेव (1), पार्श्वनाथ (23), महावीर (24)
  7. महावीर: कुंडग्राम, त्रिशला-सिद्धार्थ, 30 में गृह-त्याग, 42 में कैवल्य (ऋजुपालिका), 72 में पावापुरी
  8. त्रिरत्न (जैन): सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चरित्र; पंच महाव्रत — ब्रह्मचर्य महावीर का
  9. जैन संगीतियाँ: पाटलिपुत्र (स्थूलभद्र), वल्लभी (देवर्धि क्षमाश्रमण)
  10. बुद्ध: लुंबिनी, शुद्धोधन-महामाया, 29 में गृह-त्याग, 35 में बोधगया, सारनाथ, 80 में कुशीनगर
  11. चार आर्य सत्य — दुःख, समुदय, निरोध, मार्ग; अष्टांगिक मार्ग = मध्यम मार्ग
  12. संगीतियाँ: राजगृह-अजातशत्रु-महाकस्सप; वैशाली-कालाशोक; पाटलिपुत्र-अशोक-मोग्गलिपुत्त तिस्स; कश्मीर-कनिष्क-वसुमित्र
  13. त्रिपिटक: सुत्त (उपदेश), विनय (नियम), अभिधम्म (दर्शन) — पालि
  14. हीनयान — पालि, अर्हत्, प्रतीक; महायान — संस्कृत, बोधिसत्व, मूर्ति-पूजा; नागार्जुन — शून्यवाद
  15. राजस्थान: बैराठ — भाब्रू अभिलेख, बौद्ध अवशेष; दिलवाड़ा (विमल शाह), रणकपुर (धरणशाह)

15. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। गलत उत्तरों के लिए महाजनपद तालिका और संगीति तालिका को दोबारा चार खानों में लिखें। पूरे प्राचीन भारत के मिश्रित अभ्यास के लिए RPSC RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ और UPSC CSE 2027 प्रारंभिक फ्री टेस्ट सीरीज़ हल करें।


16. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

छठी शताब्दी ई.पू. का भारत राजनीतिक रूप से महाजनपदों से मगध साम्राज्य की ओर और धार्मिक रूप से वैदिक कर्मकांड से जैन-बौद्ध जैसे नैतिक, जनभाषा आधारित आंदोलनों की ओर बढ़ा। इस खंड के प्रश्न तालिकाओं से सबसे अच्छी तरह हल होते हैं — महाजनपद–राजधानी, मगध के शासक–उपलब्धि, बुद्ध-महावीर के जीवन की घटनाएँ–स्थान, और संगीति–स्थान–शासक–अध्यक्ष। महावीर और बुद्ध की तिथियाँ तथा संगीतियों के वर्ष अनुमानित हैं; उन पर टिके कथनों से सावधान रहें। पृष्ठभूमि के लिए वैदिक काल और आगे की कड़ी के लिए मौर्य साम्राज्य पढ़ें।

16 महाजनपद (अंगुत्तर निकाय) · अश्मक दक्षिण में · मत्स्य-विराटनगर · हर्यक-शिशुनाग-नंद · उदयिन-पाटलिपुत्र | महावीर: +ब्रह्मचर्य, दर्शन-ज्ञान-चरित्र, पावापुरी | बुद्ध: लुंबिनी-बोधगया-सारनाथ-कुशीनगर · संगीतियाँ रा-वै-पा-क


अंतिम संशोधन (Last Updated):
RPSC / RSSB सिलेबस के अनुसार
इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखकलेखक परिचय

इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?

“16 महाजनपद, मगध का उदय, जैन और बौद्ध धर्म — महावीर, बुद्ध, संगीतियाँ, त्रिपिटक — UPSC/RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

16 महाजनपदों की प्रसिद्ध सूची बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में मिलती है। जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में भी महाजनपदों की सूची है, जो इससे कुछ भिन्न है।

मत्स्य महाजनपद राजस्थान के जयपुर-अलवर क्षेत्र में था और इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ) थी।

हर्यक वंश के शासक उदयिन ने गंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र बसाया और उसे मगध की राजधानी बनाया। इससे पहले राजधानी राजगृह थी।

निकट के लौह-भंडार, गंगा घाटी की उपजाऊ भूमि, पहाड़ियों और नदियों से सुरक्षित राजधानियाँ, सेना में हाथियों का प्रयोग और बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद जैसे महत्वाकांक्षी शासक मगध के उदय के मुख्य कारण थे।

जैन धर्म के त्रिरत्न हैं — सम्यक् दर्शन (सही श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र (सही आचरण)। इन्हें मोक्ष का मार्ग माना गया है।

23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने चार व्रत दिए थे — अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह। महावीर ने इनमें पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा, जिससे पंच महाव्रत बने।

लुंबिनी (जन्म), बोधगया (ज्ञान-प्राप्ति), सारनाथ (प्रथम उपदेश — धर्मचक्र प्रवर्तन) और कुशीनगर (महापरिनिर्वाण)।

बुद्ध के चार आर्य सत्य हैं — संसार में दुःख है, दुःख का कारण तृष्णा है, दुःख का अंत संभव है, और दुःख के अंत का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।

प्रथम संगीति राजगृह में अजातशत्रु, द्वितीय वैशाली में कालाशोक, तृतीय पाटलिपुत्र में अशोक और चतुर्थ कश्मीर में कनिष्क के समय हुई। चतुर्थ संगीति के बाद हीनयान और महायान का विभाजन स्पष्ट हुआ।

हीनयान बुद्ध को मार्गदर्शक मानता है, मूर्ति-पूजा नहीं करता और इसके ग्रंथ पालि में हैं। महायान बुद्ध को देवतुल्य मानकर मूर्ति-पूजा करता है, बोधिसत्व का आदर्श रखता है और इसके ग्रंथ संस्कृत में हैं।

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