भारत के भौतिक प्रदेश — हिमालय, दर्रे, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, घाट, तट व द्वीप — UPSC, RAS
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: UPSC CSE प्रारंभिक, RPSC RAS, SSC व RSSB CET पाठ्यक्रम की भूगोल इकाई; NCERT भूगोल पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–12)। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: NCERT के अनुसार भारत को 6 भौतिक विभागों में बाँटा जाता है — हिमालय पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप समूह। हिमालय नवीन वलित पर्वत है जिसकी तीन समानांतर श्रेणियाँ हैं — हिमाद्रि (महान हिमालय), हिमाचल (लघु हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय); इसके उत्तर में ट्रांस-हिमालय (काराकोरम, लद्दाख, ज़ास्कर) है। नदी-घाटियों के आधार पर हिमालय के चार प्रादेशिक भाग हैं — पंजाब (सिंधु-सतलुज), कुमाऊँ (सतलुज-काली), नेपाल (काली-तीस्ता), असम (तीस्ता-दिहांग)। उत्तरी मैदान में पर्वतपाद से दक्षिण की ओर भाबर → तराई → भांगर (पुराना जलोढ़) → खादर (नया जलोढ़) क्रम मिलता है। प्रायद्वीपीय पठार सबसे पुराना भूखंड है; अरावली सबसे पुरानी वलित पर्वतमाला है (गुरु शिखर)। पश्चिमी घाट सतत और ऊँचे हैं (अनाईमुडी — दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी), पूर्वी घाट असतत और नीचे हैं (NCERT के अनुसार सर्वोच्च महेंद्रगिरि)। पश्चिमी तट पर कोंकण, कन्नड़, मालाबार और पूर्वी तट पर उत्तरी सरकार और कोरोमंडल तट हैं। बैरन द्वीप (अंडमान) भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है और लक्षद्वीप प्रवाल (कोरल) द्वीप हैं।
संक्षिप्त उत्तर
| भौतिक विभाग | मुख्य पहचान | सबसे महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| 1. हिमालय पर्वत | नवीन वलित पर्वत, पश्चिम से पूर्व लगभग 2400 किमी | तीन समानांतर श्रेणियाँ — हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक |
| 2. उत्तरी मैदान | सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र का जलोढ़ निक्षेप | भाबर, तराई, भांगर, खादर |
| 3. प्रायद्वीपीय पठार | सबसे पुराना, कठोर आग्नेय-कायांतरित चट्टानें | मध्य उच्चभूमि + दक्कन का पठार; पश्चिमी-पूर्वी घाट |
| 4. भारतीय मरुस्थल | अरावली के पश्चिम में थार | बहुत कम वर्षा, बरखान टीले, लूनी नदी |
| 5. तटीय मैदान | पश्चिमी (संकरा) व पूर्वी (चौड़ा) तट | पूर्वी तट पर डेल्टा, पश्चिमी तट पर ज्वारनदमुख व कयाल |
| 6. द्वीप समूह | अंडमान-निकोबार (बंगाल की खाड़ी), लक्षद्वीप (अरब सागर) | बैरन द्वीप — सक्रिय ज्वालामुखी; लक्षद्वीप — प्रवाल |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी | हिमाद्रि (महान / आंतरिक हिमालय) — औसत ऊँचाई लगभग 6000 मीटर |
| सबसे बाहरी (दक्षिणी) श्रेणी | शिवालिक — लगभग 900–1100 मीटर |
| शिवालिक और लघु हिमालय के बीच की घाटियाँ | दून (देहरादून, कोटली दून, पाटली दून) |
| भारत की सबसे ऊँची चोटी (भारत का दावा) | K2 / गॉडविन ऑस्टिन, काराकोरम (PoK क्षेत्र) |
| भारत में प्रशासित सबसे ऊँची चोटी | कंचनजंगा (सिक्किम-नेपाल सीमा) |
| पूरी तरह भारत में स्थित सबसे ऊँची चोटी | नंदा देवी (उत्तराखंड) |
| सबसे पुरानी वलित पर्वतमाला | अरावली; सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर (माउंट आबू) |
| दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी | अनाईमुडी (अन्नामलाई पहाड़ियाँ, केरल) |
| नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी | डोडाबेट्टा (तमिलनाडु) |
| पूर्वी घाट की सर्वोच्च चोटी (NCERT) | महेंद्रगिरि (ओडिशा) |
| सतपुड़ा की सर्वोच्च चोटी | धूपगढ़ (पचमढ़ी, महादेव पहाड़ियाँ, म.प्र.) |
| पश्चिमी व पूर्वी घाट का मिलन | नीलगिरि पहाड़ियाँ |
| भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी | बैरन द्वीप (अंडमान) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के भौतिक प्रदेश NCERT कक्षा 9 "समकालीन भारत" के दूसरे अध्याय और कक्षा 11 "भारत: भौतिक पर्यावरण" के संरचना-भूआकृति अध्याय का विषय हैं। भारत की स्थिति और विस्तार के बाद यही अध्याय आता है, और आगे के अपवाह तंत्र तथा मानसून को समझने का आधार है — हिमालय नदियों को सदावाहिनी बनाता है और पश्चिमी घाट पर्वतीय वर्षा कराते हैं।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- UPSC प्रारंभिक: दर्रे और उनके राज्य, उत्तर से दक्षिण / पश्चिम से पूर्व क्रम, पश्चिमी-पूर्वी घाट की तुलना, कथन-आधारित प्रश्न।
- RAS: अरावली, थार मरुस्थल, प्रायद्वीपीय पठार; राजस्थान के भौतिक विभागों से तुलना।
- SSC, RRB NTPC: एक-पंक्ति तथ्य — सबसे ऊँची चोटी, दर्रा ↔ राज्य, द्वीप, तट के नाम।
- राजस्थान CET, पटवारी: सुमेलन और सीधे तथ्य — शिवालिक, दून, भाबर-तराई, गुरु शिखर।
प्रश्न कैसे आते हैं?
- दर्रा ↔ राज्य / केंद्रशासित प्रदेश का सुमेलन
- हिमालय की श्रेणियों का उत्तर से दक्षिण क्रम
- भाबर, तराई, भांगर, खादर की विशेषताएँ
- पश्चिमी बनाम पूर्वी घाट — कथन-आधारित
- चोटी ↔ पर्वत श्रेणी (अनाईमुडी, डोडाबेट्टा, गुरु शिखर, धूपगढ़)
- तटीय मैदानों के नाम और क्रम
- द्वीपों की उत्पत्ति — ज्वालामुखी बनाम प्रवाल
3. भारत के 6 भौतिक विभाग: उत्पत्ति की झलक
भारत का भूभाग भूगर्भीय रूप से तीन भिन्न खंडों से बना है: प्राचीन प्रायद्वीपीय खंड (गोंडवानालैंड का भाग), नवीन हिमालय (भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव से टेथिस सागर के अवसादों के वलन से बना), और इन दोनों के बीच का सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान (हिमालय से आई नदियों के जलोढ़ से भरा अग्रगर्त)।
| खंड | आयु | चट्टान / रचना | स्थिरता |
|---|---|---|---|
| प्रायद्वीपीय पठार | सबसे पुराना | आग्नेय व कायांतरित (ग्रेनाइट, नीस); दक्कन ट्रैप में बेसाल्ट | स्थिर भूखंड |
| हिमालय | नवीन | अवसादी चट्टानें, वलन व भ्रंश | अस्थिर; भूकंप-प्रवण, अभी भी ऊपर उठ रहा |
| उत्तरी मैदान | सबसे नवीन | जलोढ़ (भांगर, खादर) | समतल, उपजाऊ |
4. हिमालय पर्वत
हिमालय विश्व की सबसे ऊँची और नवीन वलित पर्वत श्रृंखला है। यह भारत की उत्तरी सीमा पर सिंधु से ब्रह्मपुत्र तक लगभग 2400 किमी लंबे चाप के रूप में फैला है। इसकी चौड़ाई कश्मीर में लगभग 400 किमी और अरुणाचल प्रदेश में लगभग 150 किमी है — यानी पूर्व में चौड़ाई कम और ऊँचाई का अंतर अधिक है।
4.1 ट्रांस-हिमालय
महान हिमालय के उत्तर में स्थित श्रेणियाँ — काराकोरम, लद्दाख, ज़ास्कर — ट्रांस-हिमालय या तिब्बती हिमालय कहलाती हैं। काराकोरम श्रेणी में K2 (गॉडविन ऑस्टिन) है और यहीं सियाचिन हिमनद स्थित है। लद्दाख ठंडा मरुस्थल है।
4.2 तीन समानांतर श्रेणियाँ (उत्तर → दक्षिण)
| पक्ष | हिमाद्रि (महान हिमालय) | हिमाचल (लघु / मध्य हिमालय) | शिवालिक (बाह्य हिमालय) |
|---|---|---|---|
| स्थिति | सबसे उत्तरी, आंतरिक | हिमाद्रि के दक्षिण | सबसे दक्षिणी, बाहरी |
| औसत ऊँचाई (लगभग) | 6000 मीटर | 3700–4500 मीटर | 900–1100 मीटर |
| चौड़ाई (लगभग) | — | औसतन 50 किमी | 10–50 किमी |
| रचना | क्रोड ग्रेनाइट का; सदा हिमाच्छादित; अनेक हिमनद | अत्यधिक संपीडित व परिवर्तित चट्टानें | असंपिंडित अवसाद — बजरी, मिट्टी |
| प्रमुख श्रेणियाँ / भाग | एवरेस्ट, कंचनजंगा, नंदा देवी, नंगा पर्वत जैसी चोटियाँ | पीर पंजाल (सबसे लंबी), धौलाधार, महाभारत श्रेणी | दून घाटियाँ; पूर्व में डफला, मिरी, अबोर, मिशमी पहाड़ियाँ इसी क्रम में |
| घाटियाँ / स्थान | — | कश्मीर घाटी, कांगड़ा, कुल्लू घाटी; पर्वतीय नगर शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग | देहरादून, कोटली दून, पाटली दून |
दून: लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित अनुदैर्ध्य घाटियाँ "दून" कहलाती हैं। देहरादून इनमें सबसे प्रसिद्ध है।
4.3 नदी-घाटियों के आधार पर प्रादेशिक विभाजन (पश्चिम → पूर्व)
| भाग | किन नदियों के बीच | टिप्पणी |
|---|---|---|
| पंजाब हिमालय | सिंधु और सतलुज | पश्चिम से पूर्व इसे कश्मीर हिमालय और हिमाचल हिमालय भी कहते हैं |
| कुमाऊँ हिमालय | सतलुज और काली | उत्तराखंड; नंदा देवी, बद्रीनाथ क्षेत्र |
| नेपाल हिमालय | काली और तीस्ता | सबसे ऊँचा भाग — एवरेस्ट, कंचनजंगा |
| असम हिमालय | तीस्ता और दिहांग (ब्रह्मपुत्र) | अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम का पूर्वी भाग |
4.4 प्रमुख चोटियाँ (ऊँचाई लगभग)
| चोटी | ऊँचाई (लगभग, मीटर) | श्रेणी / स्थान |
|---|---|---|
| माउंट एवरेस्ट (सागरमाथा) | 8849 | नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा — विश्व की सबसे ऊँची |
| K2 / गॉडविन ऑस्टिन | 8611 | काराकोरम, PoK क्षेत्र — भारत के दावे वाली सबसे ऊँची |
| कंचनजंगा | 8586 | सिक्किम-नेपाल सीमा — भारत में प्रशासित सबसे ऊँची |
| नंगा पर्वत | 8126 | महान हिमालय का पश्चिमी छोर (PoK क्षेत्र) |
| नंदा देवी | 7816 | उत्तराखंड — पूरी तरह भारत में स्थित सबसे ऊँची |
| कामेत | 7756 | उत्तराखंड |
| नामचा बरवा | 7782 | तिब्बत — हिमालय का पूर्वी छोर, जहाँ सांगपो मुड़ती है |
4.5 प्रमुख दर्रे
| दर्रा | राज्य / के.प्र. | जोड़ता है / महत्व |
|---|---|---|
| काराकोरम दर्रा | लद्दाख | लद्दाख को चीन (शिनजियांग) से; भारत के सबसे ऊँचे दर्रों में से एक |
| खारदुंग ला | लद्दाख | लेह को नुब्रा घाटी से |
| ज़ोजी ला | लद्दाख (जम्मू-कश्मीर सीमा) | श्रीनगर को कारगिल-लेह से |
| बनिहाल दर्रा | जम्मू-कश्मीर | जम्मू को श्रीनगर से; पीर पंजाल श्रेणी, जवाहर सुरंग |
| पीर पंजाल दर्रा | जम्मू-कश्मीर | जम्मू-श्रीनगर का पुराना मार्ग |
| रोहतांग दर्रा | हिमाचल प्रदेश | कुल्लू-मनाली को लाहौल-स्पीति से; पास में अटल सुरंग |
| बारालाचा ला | हिमाचल प्रदेश | मनाली-लेह मार्ग |
| शिपकी ला | हिमाचल प्रदेश | हिमाचल को तिब्बत से; सतलुज यहीं से भारत में प्रवेश करती है |
| माना दर्रा, नीति दर्रा | उत्तराखंड | उत्तराखंड को तिब्बत से |
| लिपुलेख दर्रा | उत्तराखंड | भारत-नेपाल-चीन त्रिसंगम के पास; कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग |
| नाथू ला | सिक्किम | सिक्किम को तिब्बत से; भारत-चीन सीमा व्यापार |
| जेलेप ला | सिक्किम | सिक्किम-चुंबी घाटी (तिब्बत), कालिम्पोंग-ल्हासा मार्ग |
| बोमडी ला | अरुणाचल प्रदेश | अरुणाचल (तवांग क्षेत्र) को तिब्बत/ल्हासा की ओर |
| दीफू दर्रा | अरुणाचल प्रदेश | भारत-चीन-म्यांमार त्रिसंगम के पास |
| पांगसाउ दर्रा | अरुणाचल प्रदेश | भारत-म्यांमार; स्टिलवेल रोड |
"ला" तिब्बती भाषा में "दर्रा" का अर्थ देता है, इसलिए "ज़ोजी ला दर्रा" लिखना दोहराव है, पर परीक्षाओं में प्रचलित है।
4.6 पूर्वांचल पहाड़ियाँ
दिहांग गॉर्ज के बाद हिमालय दक्षिण की ओर मुड़कर भारत की पूर्वी सीमा बनाता है। इन्हें पूर्वांचल कहते हैं। ये मुख्यतः बलुआ पत्थर (अवसादी) से बनी हैं और घने वनों से ढकी हैं।
| पहाड़ी | राज्य |
|---|---|
| पटकाई बुम | अरुणाचल प्रदेश (भारत-म्यांमार सीमा) |
| नागा पहाड़ियाँ | नागालैंड |
| मणिपुर पहाड़ियाँ | मणिपुर |
| मिज़ो (लुशाई) पहाड़ियाँ | मिज़ोरम |
ध्यान दें: मेघालय की गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियाँ पूर्वांचल नहीं, बल्कि प्रायद्वीपीय पठार का विस्तार (मेघालय पठार) हैं, जो राजमहल पहाड़ियों और मेघालय पठार के बीच के भ्रंश (मालदा भ्रंश) से मुख्य पठार से अलग है। असम की कार्बी-आंगलोंग पहाड़ियाँ भी इसी का भाग हैं।
5. उत्तरी मैदान
उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों के जलोढ़ निक्षेप से बना है। NCERT के अनुसार यह लगभग 7 लाख वर्ग किमी में फैला, लगभग 2400 किमी लंबा और 240–320 किमी चौड़ा है। यह विश्व के सबसे उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में है।
5.1 क्षेत्रीय विभाजन
| भाग | नदियाँ | विशेषता |
|---|---|---|
| पंजाब मैदान (पश्चिमी) | सिंधु और उसकी सहायक — झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज | दोआबों से बना; अधिकांश भाग पाकिस्तान में |
| गंगा मैदान (मध्य) | गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन | घग्गर से तीस्ता तक; हरियाणा, दिल्ली, उ.प्र., बिहार, झारखंड का भाग, प. बंगाल |
| ब्रह्मपुत्र मैदान (पूर्वी) | ब्रह्मपुत्र | असम; माजुली जैसे नदी-द्वीप |
दोआब = दो नदियों के बीच का भूभाग ("दो" + "आब" = जल)। उदाहरण: गंगा-यमुना दोआब।
5.2 भाबर, तराई, भांगर, खादर
| पक्ष | भाबर | तराई | भांगर | खादर |
|---|---|---|---|---|
| स्थिति | शिवालिक के पर्वतपाद पर, सबसे उत्तर | भाबर के दक्षिण | मैदान का ऊँचा भाग, बाढ़ से ऊपर | नदियों के बाढ़ के मैदान |
| चौड़ाई | लगभग 8–16 किमी संकरी पट्टी | भाबर से चौड़ी | विस्तृत | नदियों के किनारे |
| रचना | कंकड़-पत्थर, मोटे अवसाद | महीन अवसाद, दलदली | पुराना जलोढ़, कंकड़ (चूनेदार ग्रंथियाँ) | नया जलोढ़, हर वर्ष बाढ़ से नवीकरण |
| नदियों का व्यवहार | नदियाँ पत्थरों में लुप्त हो जाती हैं | नदियाँ फिर सतह पर निकलती हैं | — | — |
| उर्वरता / उपयोग | कृषि के अयोग्य | पहले घने वन व वन्य जीव; अब बड़े भाग पर कृषि | कम उपजाऊ | अत्यधिक उपजाऊ, गहन कृषि |
क्रम (उत्तर → दक्षिण): शिवालिक → भाबर → तराई → जलोढ़ मैदान (भांगर ऊँचा, खादर नदी के पास)। तराई क्षेत्र में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (उ.प्र.) जैसे संरक्षित क्षेत्र हैं।
6. प्रायद्वीपीय पठार
प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे पुराना और स्थिर भूखंड है — प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग। यह एक मेज़नुमा (टेबललैंड) भूभाग है जो पुरानी क्रिस्टलीय, आग्नेय और कायांतरित चट्टानों से बना है। इसके दो मुख्य भाग हैं — मध्य उच्चभूमि (नर्मदा के उत्तर) और दक्कन का पठार (नर्मदा के दक्षिण)।
6.1 मध्य उच्चभूमि
| भाग | विशेषता |
|---|---|
| मालवा पठार | पश्चिमी भाग; काली मिट्टी (लावा-जनित भागों में) |
| बुंदेलखंड, बघेलखंड | पूर्वी विस्तार; उ.प्र.-म.प्र. |
| छोटानागपुर पठार | झारखंड; खनिजों का भंडार; दामोदर नदी का अपवाह |
| अपवाह दिशा | चंबल, सिंध, बेतवा, केन — दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर (पठार का ढाल उसी ओर) |
| पश्चिमी सीमा | अरावली |
| दक्षिणी सीमा | विंध्याचल का कगार (नर्मदा के उत्तर) |
6.2 दक्कन का पठार
दक्कन का पठार नर्मदा के दक्षिण में स्थित एक त्रिभुजाकार भूभाग है। इसके उत्तर में सतपुड़ा श्रेणी और उसके पूर्वी विस्तार महादेव, मैकाल, कैमूर पहाड़ियाँ हैं; पश्चिम में पश्चिमी घाट और पूर्व में पूर्वी घाट। पठार का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है, इसलिए गोदावरी, कृष्णा, कावेरी बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। उत्तर-पश्चिमी भाग दक्कन ट्रैप कहलाता है — ज्वालामुखी लावा (बेसाल्ट) से बना, जिसके अपक्षय से काली (रेगुर) मिट्टी बनी है।
6.3 पठार की पर्वतमालाएँ
| पर्वतमाला | प्रकार / स्थिति | सर्वोच्च चोटी (लगभग) |
|---|---|---|
| अरावली | विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमालाओं में; गुजरात से दिल्ली तक दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व; अवशिष्ट पर्वत | गुरु शिखर, लगभग 1722 मी (माउंट आबू, सिरोही, राजस्थान) |
| विंध्याचल | नर्मदा के उत्तर; कगार (एस्कार्पमेंट); उत्तर और दक्षिण भारत की पारंपरिक विभाजक | — |
| सतपुड़ा | नर्मदा और ताप्ती के बीच; ब्लॉक पर्वत | धूपगढ़, लगभग 1350 मी (पचमढ़ी, म.प्र.) |
| पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) | पश्चिमी तट के समानांतर, सतत | अनाईमुडी, लगभग 2695 मी (केरल) |
| नीलगिरि | पश्चिमी व पूर्वी घाट का मिलन | डोडाबेट्टा, लगभग 2637 मी (तमिलनाडु) |
| पूर्वी घाट | पूर्वी तट के समानांतर, असतत | महेंद्रगिरि, लगभग 1501 मी (ओडिशा) — NCERT |
नर्मदा भ्रंश घाटी: नर्मदा विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच एक भ्रंश घाटी (रिफ्ट वैली) में पश्चिम की ओर बहती है। ताप्ती भी सतपुड़ा के दक्षिण में एक भ्रंश घाटी में बहती है।
6.4 पश्चिमी घाट बनाम पूर्वी घाट
| पक्ष | पश्चिमी घाट | पूर्वी घाट |
|---|---|---|
| निरंतरता | सतत; केवल दर्रों (घाटों) से पार | असतत; नदियों ने काटकर टुकड़ों में बाँटा |
| औसत ऊँचाई (लगभग) | 900–1600 मीटर | लगभग 600 मीटर |
| सर्वोच्च चोटी | अनाईमुडी (केरल) | महेंद्रगिरि (ओडिशा, NCERT); कुछ स्रोत आंध्र की अन्य चोटियाँ देते हैं |
| ऊँचाई की दिशा | उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ती है | — |
| नदियाँ | गोदावरी, कृष्णा, कावेरी का उद्गम; पश्चिम में छोटी तीव्र नदियाँ | पूर्ववाही बड़ी नदियाँ इन्हें काटकर बहती हैं |
| वर्षा | दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारी पर्वतीय वर्षा (पवनमुखी ढाल) | अपेक्षाकृत कम |
| स्थानीय नाम | सह्याद्रि (महाराष्ट्र-कर्नाटक), नीलगिरि, अन्नामलाई, इलायची (कार्डमम) पहाड़ियाँ | जावादी, शेवरॉय, पालकोंडा, नल्लामलाई पहाड़ियाँ |
| प्रमुख दर्रे / अंतराल | थाल घाट, भोर घाट (महाराष्ट्र), पालघाट (केरल-तमिलनाडु) | — |
| मिलन | दक्षिण में नीलगिरि पहाड़ियों में | दक्षिण-पश्चिम में नीलगिरि पहाड़ियों में |
पालघाट दर्रा नीलगिरि और अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच का अंतराल है, जो केरल को तमिलनाडु से जोड़ता है। थाल घाट मुंबई-नासिक और भोर घाट मुंबई-पुणे मार्ग पर है।
7. भारतीय मरुस्थल (थार)
| पक्ष | विवरण |
|---|---|
| स्थिति | अरावली के पश्चिम; अधिकांश भाग राजस्थान में, कुछ गुजरात, पंजाब, हरियाणा में |
| वर्षा | बहुत कम — NCERT के अनुसार 150 मिमी प्रति वर्ष से कम (पश्चिमी भाग) |
| भूआकृति | बालू के टीले — अर्धचंद्राकार बरखान; अनुदैर्ध्य टीले |
| नदी | लूनी — एकमात्र बड़ी नदी; कच्छ के रण में विलीन; अधिकांश धाराएँ वर्षा के बाद लुप्त |
| वनस्पति | कम; मरुद्भिद (कँटीली झाड़ियाँ) |
| क्षेत्रीय नाम | राजस्थान में "मरुस्थली" |
| शीत मरुस्थल | लद्दाख (ट्रांस-हिमालय में) — थार से भिन्न |
8. तटीय मैदान
| पक्ष | पश्चिमी तटीय मैदान | पूर्वी तटीय मैदान |
|---|---|---|
| स्थिति | पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच | पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच |
| चौड़ाई | संकरा | चौड़ा और समतल |
| भाग (उत्तर → दक्षिण) | कोंकण (मुंबई-गोवा), कन्नड़ / कनारा (गोवा-मंगलौर), मालाबार (केरल) | उत्तरी सरकार (उत्तरी भाग), कोरोमंडल (दक्षिणी भाग) |
| नदियों के मुहाने | ज्वारनदमुख (एस्चुअरी) — नर्मदा, ताप्ती | डेल्टा — महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी |
| विशेष भूआकृति | मालाबार तट पर कयाल (पश्च जल / लैगून) — वेंबनाड | चिल्का (ओडिशा), पुलिकट (आंध्र-तमिलनाडु) लैगून |
| बंदरगाह के लिए | गहरे प्राकृतिक बंदरगाह — मुंबई, मार्मागाओ, कोच्चि | उथला तट; विशाखापत्तनम जैसे बंदरगाह |
गुजरात तट: कच्छ और काठियावाड़ प्रायद्वीप पश्चिमी तट के उत्तर में हैं; खंभात की खाड़ी में नर्मदा और ताप्ती गिरती हैं।
9. द्वीप समूह
| पक्ष | अंडमान-निकोबार | लक्षद्वीप |
|---|---|---|
| समुद्र | बंगाल की खाड़ी | अरब सागर (केरल तट के पास) |
| उत्पत्ति | समुद्र में डूबी पर्वत श्रृंखला के ऊपरी भाग; कुछ ज्वालामुखी | प्रवाल (कोरल) निक्षेप — एटॉल |
| आकार | बड़े, अधिक संख्या | छोटे द्वीप |
| ज्वालामुखी | बैरन द्वीप — भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी; नारकोंडम — सुप्त ज्वालामुखी | नहीं |
| प्रमुख स्थान | राजधानी श्री विजयपुरम (पूर्व पोर्ट ब्लेयर); सैडल पीक (उत्तरी अंडमान) सर्वोच्च; इंदिरा पॉइंट (ग्रेट निकोबार) | राजधानी कवरत्ती; पिट्टी द्वीप पक्षी अभयारण्य; मिनिकॉय दक्षिण में |
| चैनल | 10° चैनल (अंडमान-निकोबार के बीच); डंकन पास (दक्षिण अंडमान-लिटिल अंडमान) | 9° चैनल; 8° चैनल (मिनिकॉय-मालदीव) |
| जैव विविधता | भूमध्यरेखीय वन; ग्रेट निकोबार जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र | प्रवाल भित्तियाँ |
10. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: हिमालय की श्रेणियों का क्रम
उत्तर से दक्षिण: ट्रांस-हिमालय → हिमाद्रि → हिमाचल → शिवालिक। "हिमाचल" श्रेणी का नाम है, हिमाचल प्रदेश राज्य नहीं। शिमला, मसूरी, नैनीताल हिमाचल (लघु हिमालय) श्रेणी में हैं, शिवालिक में नहीं।
Trap 2: दून घाटियाँ कहाँ?
दून लघु हिमालय और शिवालिक के बीच हैं, हिमाद्रि और हिमाचल के बीच नहीं।
Trap 3: भाबर बनाम तराई
भाबर में नदियाँ लुप्त होती हैं (कंकड़-पत्थर), तराई में फिर निकलती हैं (दलदल)। भाबर तराई के उत्तर में है।
Trap 4: भांगर पुराना, खादर नया
"भांगर" = पुराना जलोढ़ (ऊँचा, कंकड़ युक्त); "खादर" = नया जलोढ़ (बाढ़ का मैदान, अधिक उपजाऊ)। उल्टा न पढ़ें।
Trap 5: गारो-खासी-जयंतिया पूर्वांचल नहीं
ये मेघालय पठार हैं, जो प्रायद्वीपीय पठार का विस्तार है। पूर्वांचल = पटकाई, नागा, मणिपुर, मिज़ो पहाड़ियाँ।
Trap 6: भारत की सबसे ऊँची चोटी
प्रश्न की भाषा देखें: "भारत (दावा)" → K2; "भारत में प्रशासित / भारतीय क्षेत्र में" → कंचनजंगा; "पूरी तरह भारत में" → नंदा देवी; "दक्षिण भारत" → अनाईमुडी। एवरेस्ट भारत में नहीं है।
Trap 7: पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटी
NCERT महेंद्रगिरि बताती है; कुछ अन्य स्रोत आंध्र प्रदेश की चोटियों को अधिक ऊँचा बताते हैं। इसलिए इस तथ्य पर प्रश्न आए तो विकल्पों में NCERT वाला उत्तर (महेंद्रगिरि) देखें; इसे इस नोट के क्विज़ में नहीं रखा गया है।
Trap 8: दर्रों के राज्य
शिपकी ला, रोहतांग, बारालाचा — हिमाचल; नाथू ला, जेलेप ला — सिक्किम; बोमडी ला — अरुणाचल; लिपुलेख, माना, नीति — उत्तराखंड; बनिहाल, पीर पंजाल — जम्मू-कश्मीर; ज़ोजी ला, खारदुंग ला, काराकोरम — लद्दाख।
Trap 9: पूर्वी तट के नाम का क्रम
पूर्वी तट का उत्तरी भाग उत्तरी सरकार और दक्षिणी भाग कोरोमंडल है। पश्चिमी तट: कोंकण (उत्तर) → कन्नड़ → मालाबार (दक्षिण)।
Trap 10: लक्षद्वीप ज्वालामुखी नहीं
लक्षद्वीप प्रवाल से बने हैं। ज्वालामुखी द्वीप — बैरन और नारकोंडम — अंडमान सागर / बंगाल की खाड़ी में हैं।
11. Most-Asked रिवीज़न तालिका (52 तथ्य)
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | भारत के भौतिक विभाग (NCERT) | 6 |
| 2 | सबसे पुराना भूखंड | प्रायद्वीपीय पठार |
| 3 | सबसे नवीन भूखंड | उत्तरी मैदान |
| 4 | हिमालय का प्रकार | नवीन वलित पर्वत |
| 5 | हिमालय की लंबाई (लगभग) | 2400 किमी |
| 6 | हिमालय की चौड़ाई अधिक कहाँ | कश्मीर (पश्चिम) |
| 7 | सबसे उत्तरी श्रेणी (हिमालय की तीन में) | हिमाद्रि |
| 8 | हिमाद्रि का क्रोड | ग्रेनाइट |
| 9 | हिमाचल की सबसे लंबी श्रेणी | पीर पंजाल |
| 10 | हिमाचल की अन्य श्रेणियाँ | धौलाधार, महाभारत |
| 11 | सबसे बाहरी श्रेणी | शिवालिक |
| 12 | शिवालिक की रचना | असंपिंडित अवसाद |
| 13 | दून कहाँ | लघु हिमालय व शिवालिक के बीच |
| 14 | ट्रांस-हिमालय श्रेणियाँ | काराकोरम, लद्दाख, ज़ास्कर |
| 15 | सियाचिन हिमनद | काराकोरम (लद्दाख) |
| 16 | पंजाब हिमालय | सिंधु-सतलुज |
| 17 | कुमाऊँ हिमालय | सतलुज-काली |
| 18 | नेपाल हिमालय | काली-तीस्ता |
| 19 | असम हिमालय | तीस्ता-दिहांग |
| 20 | K2 किस श्रेणी में | काराकोरम |
| 21 | कंचनजंगा | सिक्किम-नेपाल सीमा |
| 22 | पूरी तरह भारत में सबसे ऊँची | नंदा देवी (उत्तराखंड) |
| 23 | हिमालय का पूर्वी छोर | नामचा बरवा |
| 24 | शिपकी ला | हिमाचल प्रदेश (सतलुज का प्रवेश) |
| 25 | नाथू ला | सिक्किम |
| 26 | बोमडी ला | अरुणाचल प्रदेश |
| 27 | रोहतांग | हिमाचल प्रदेश |
| 28 | ज़ोजी ला | श्रीनगर-लेह मार्ग (लद्दाख) |
| 29 | बनिहाल | जम्मू-श्रीनगर (जवाहर सुरंग) |
| 30 | लिपुलेख | उत्तराखंड — कैलाश-मानसरोवर मार्ग |
| 31 | खारदुंग ला | लद्दाख — लेह-नुब्रा |
| 32 | पूर्वांचल की पहाड़ियाँ | पटकाई, नागा, मणिपुर, मिज़ो |
| 33 | गारो-खासी-जयंतिया | मेघालय पठार (प्रायद्वीपीय) |
| 34 | उत्तरी मैदान का क्षेत्रफल (लगभग) | 7 लाख वर्ग किमी |
| 35 | भाबर | कंकड़-पत्थर; नदियाँ लुप्त |
| 36 | तराई | दलदली; नदियाँ फिर प्रकट |
| 37 | भांगर | पुराना जलोढ़, कंकड़ |
| 38 | खादर | नया जलोढ़, बाढ़ का मैदान |
| 39 | दोआब | दो नदियों के बीच की भूमि |
| 40 | प्रायद्वीपीय पठार किसका भाग था | गोंडवानालैंड |
| 41 | दक्कन ट्रैप की चट्टान | बेसाल्ट (लावा) |
| 42 | अरावली की सर्वोच्च चोटी | गुरु शिखर (माउंट आबू) |
| 43 | सतपुड़ा की सर्वोच्च चोटी | धूपगढ़ |
| 44 | दक्षिण भारत की सर्वोच्च चोटी | अनाईमुडी |
| 45 | नीलगिरि की सर्वोच्च चोटी | डोडाबेट्टा |
| 46 | पश्चिमी व पूर्वी घाट का मिलन | नीलगिरि |
| 47 | पालघाट | नीलगिरि-अन्नामलाई के बीच; केरल-तमिलनाडु |
| 48 | थार की एकमात्र बड़ी नदी | लूनी |
| 49 | अर्धचंद्राकार टीले | बरखान |
| 50 | पूर्वी तट का दक्षिणी भाग | कोरोमंडल |
| 51 | केरल का तट | मालाबार |
| 52 | भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी | बैरन द्वीप |
12. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
नीचे इस अध्याय के प्रचलित ढाँचे और स्वयं बनाए नमूना प्रश्न हैं:
- सुमेलन (दर्रा ↔ राज्य): "शिपकी ला — ?, नाथू ला — ?, बोमडी ला — ?" — हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल।
- क्रम-व्यवस्था: "निम्न दर्रों को पश्चिम से पूर्व क्रम में रखें: नाथू ला, ज़ोजी ला, शिपकी ला, बोमडी ला" — ज़ोजी ला → शिपकी ला → नाथू ला → बोमडी ला।
- कथन-आधारित (UPSC शैली): "1. पूर्वी घाट सतत हैं। 2. पश्चिमी घाट की ऊँचाई उत्तर से दक्षिण बढ़ती है।" — केवल कथन 2 सही।
- विशेषता पहचान: "वह क्षेत्र जहाँ नदियाँ लुप्त हो जाती हैं?" — भाबर।
- चोटी ↔ श्रेणी: "डोडाबेट्टा किस पहाड़ी में है?" — नीलगिरि।
- "कौन-सा सही सुमेलित नहीं": "गारो पहाड़ी — पूर्वांचल" जैसा गलत युग्म।
- द्वीप: "भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ है?" — बैरन द्वीप।
रणनीति: दर्रों के प्रश्न में पहले मानचित्र पर पश्चिम से पूर्व चलें — जम्मू-कश्मीर/लद्दाख → हिमाचल → उत्तराखंड → सिक्किम → अरुणाचल। तुलना वाले प्रश्नों में "सतत / असतत" और "डेल्टा / ज्वारनदमुख" — ये दो जोड़ियाँ सबसे अधिक काम आती हैं।
13. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. भौतिक विभाग: "हि-म-प्र-म-त-द्वी" — हिमालय, मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान, द्वीप।
2. हिमालय की श्रेणियाँ (उत्तर → दक्षिण): "हि-हि-शि" — हिमाद्रि, हिमाचल, शिवालिक। ऊँचाई भी इसी क्रम में घटती है।
3. प्रादेशिक हिमालय: "पंजाब-कुमाऊँ-नेपाल-असम, नदियाँ सि-स-का-ती-दि" — सिंधु, सतलुज, काली, तीस्ता, दिहांग।
4. मैदान का क्रम: "भा-त-भां-खा" — भाबर (पत्थर), तराई (दलदल), भांगर (बूढ़ा), खादर (नया)।
5. दर्रे: "शि-रो-बा हिमाचल, ना-जे सिक्किम, बो अरुणाचल, लि-मा-नी उत्तराखंड।"
6. दक्षिण की चोटियाँ: "अना-डोडा-महेंद्र" — अनाईमुडी (पश्चिमी घाट / अन्नामलाई), डोडाबेट्टा (नीलगिरि), महेंद्रगिरि (पूर्वी घाट)।
7. पश्चिमी तट: "को-क-मा" — कोंकण, कन्नड़, मालाबार (उत्तर से दक्षिण)। पूर्वी तट: "उत्तर में सरकार, दक्षिण में कोरोमंडल"।
8. पश्चिम = एस्चुअरी, पूर्व = डेल्टा: "नर्मदा-ताप्ती पश्चिम में डेल्टा नहीं बनातीं।"
14. कथन अभ्यास
हिमालय नवीन वलित पर्वत है। — सही।
शिवालिक हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है। — गलत (सबसे ऊँची हिमाद्रि; शिवालिक सबसे बाहरी और नीची)।
दून घाटियाँ लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित हैं। — सही।
भाबर क्षेत्र में नदियाँ फिर से सतह पर निकल आती हैं। — गलत (भाबर में लुप्त होती हैं, तराई में निकलती हैं)।
खादर नया जलोढ़ है और भांगर पुराना। — सही।
गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ पूर्वांचल का भाग हैं। — गलत (मेघालय पठार — प्रायद्वीपीय पठार का विस्तार)।
नाथू ला दर्रा सिक्किम में है। — सही।
शिपकी ला दर्रा अरुणाचल प्रदेश में है। — गलत (हिमाचल प्रदेश)।
पश्चिमी घाट सतत हैं और पूर्वी घाट असतत। — सही।
अनाईमुडी नीलगिरि पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी है। — गलत (अनाईमुडी अन्नामलाई में; नीलगिरि की सर्वोच्च डोडाबेट्टा)।
कोरोमंडल तट पूर्वी तटीय मैदान का दक्षिणी भाग है। — सही।
लक्षद्वीप ज्वालामुखी द्वीप हैं। — गलत (प्रवाल द्वीप)।
15. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- 6 भौतिक विभाग: हिमालय, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान, द्वीप
- हिमालय — नवीन वलित, लगभग 2400 किमी; कश्मीर में चौड़ा, अरुणाचल में संकरा
- हिमाद्रि (लगभग 6000 मी, ग्रेनाइट क्रोड) → हिमाचल (पीर पंजाल, धौलाधार, महाभारत) → शिवालिक (असंपिंडित, दून)
- ट्रांस-हिमालय: काराकोरम (K2, सियाचिन), लद्दाख, ज़ास्कर
- पंजाब (सिंधु-सतलुज), कुमाऊँ (सतलुज-काली), नेपाल (काली-तीस्ता), असम (तीस्ता-दिहांग)
- K2 — दावा; कंचनजंगा — प्रशासित; नंदा देवी — पूरी तरह भारत में
- शिपकी ला, रोहतांग — हिमाचल; नाथू ला — सिक्किम; बोमडी ला — अरुणाचल; ज़ोजी ला — लद्दाख; बनिहाल — जम्मू-कश्मीर
- पूर्वांचल: पटकाई, नागा, मणिपुर, मिज़ो; गारो-खासी-जयंतिया = मेघालय पठार
- भाबर (नदियाँ लुप्त) → तराई (दलदल) → भांगर (पुराना) / खादर (नया)
- प्रायद्वीपीय पठार — गोंडवाना, सबसे पुराना; मध्य उच्चभूमि + दक्कन; दक्कन ट्रैप बेसाल्ट
- अरावली — प्राचीनतम वलित, गुरु शिखर; सतपुड़ा — धूपगढ़
- पश्चिमी घाट सतत, ऊँचे — अनाईमुडी; पूर्वी घाट असतत — महेंद्रगिरि (NCERT); मिलन नीलगिरि (डोडाबेट्टा)
- थार — अरावली के पश्चिम, बरखान, लूनी
- पश्चिमी तट: कोंकण-कन्नड़-मालाबार; पूर्वी: उत्तरी सरकार-कोरोमंडल; पूर्व में डेल्टा
- बैरन — सक्रिय ज्वालामुखी, नारकोंडम — सुप्त; लक्षद्वीप — प्रवाल, कवरत्ती
16. अभ्यास
पृष्ठ के अंत में 25 प्रश्नों का अभ्यास क्विज़ है — हिमालय की श्रेणियाँ, दर्रे और उनके राज्य, मैदान की पट्टियाँ, घाट, तट और द्वीप। गलत उत्तरों को ऊपर की दर्रा-तालिका और घाट-तुलना से मिलाएँ। राज्य-स्तरीय भूगोल के मिश्रित अभ्यास के लिए राजस्थान CET स्नातक मेगा टेस्ट 2026 और SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
17. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
भारत के भौतिक विभाग तीन भूगर्भीय कहानियाँ कहते हैं — प्राचीन, स्थिर प्रायद्वीप; नवीन, ऊँचा और अस्थिर हिमालय; और दोनों के बीच नदियों से भरा उपजाऊ मैदान। मरुस्थल, तट और द्वीप इन्हीं के किनारे बने हैं। परीक्षा के लिए चार चीज़ें पक्की रखें: हिमालय की श्रेणियों का क्रम, दर्रे और उनके राज्य, भाबर-तराई-भांगर-खादर का अंतर, तथा पश्चिमी बनाम पूर्वी घाट और तटों के नाम। चोटियों की ऊँचाइयाँ "लगभग" याद रखें और प्रश्न की भाषा ("दावा", "प्रशासित", "पूरी तरह भारत में") पर ध्यान दें।
6 विभाग | हिमाद्रि → हिमाचल → शिवालिक (दून) | भाबर-तराई-भांगर-खादर | प. घाट सतत (अनाईमुडी), पू. घाट असतत | कोंकण-कन्नड़-मालाबार, सरकार-कोरोमंडल | बैरन सक्रिय, लक्षद्वीप प्रवाल
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“भारत के भौतिक प्रदेश — हिमालय, दर्रे, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, घाट, तट व द्वीप — UPSC, RAS” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- भारत के भौतिक प्रदेश — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- भारत की स्थिति, विस्तार और पड़ोसी देश — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
NCERT के अनुसार भारत के 6 भौतिक विभाग हैं — हिमालय पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप समूह।
उत्तर से दक्षिण हिमालय की तीन श्रेणियाँ हैं — हिमाद्रि (महान हिमालय), हिमाचल (लघु हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय)। इनके उत्तर में काराकोरम, लद्दाख और ज़ास्कर श्रेणियाँ ट्रांस-हिमालय कहलाती हैं।
लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित अनुदैर्ध्य घाटियाँ दून कहलाती हैं। देहरादून, कोटली दून और पाटली दून इसके उदाहरण हैं।
भाबर शिवालिक के पर्वतपाद पर कंकड़-पत्थरों की संकरी पट्टी है जहाँ नदियाँ लुप्त हो जाती हैं। उसके दक्षिण में तराई का दलदली क्षेत्र है जहाँ ये नदियाँ फिर सतह पर निकल आती हैं।
भांगर पुराना जलोढ़ है जो बाढ़ के मैदान से ऊँचा होता है और इसमें कंकड़ मिलते हैं। खादर नया जलोढ़ है जो नदियों के बाढ़ के मैदानों में हर वर्ष नवीकृत होता है और अधिक उपजाऊ है।
पश्चिमी घाट सतत और अधिक ऊँचे हैं तथा केवल दर्रों से पार किए जा सकते हैं, जबकि पूर्वी घाट असतत और नीचे हैं क्योंकि पूर्ववाही नदियों ने इन्हें काट दिया है। दोनों नीलगिरि पहाड़ियों में मिलते हैं।
दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी है, जो केरल की अन्नामलाई पहाड़ियों में है। नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी डोडाबेट्टा है।
नाथू ला सिक्किम में, शिपकी ला हिमाचल प्रदेश में और बोमडी ला अरुणाचल प्रदेश में है। शिपकी ला से सतलुज नदी भारत में प्रवेश करती है।
पूर्वांचल में पटकाई बुम, नागा पहाड़ियाँ, मणिपुर पहाड़ियाँ और मिज़ो (लुशाई) पहाड़ियाँ आती हैं। मेघालय की गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ पूर्वांचल नहीं, बल्कि प्रायद्वीपीय पठार का विस्तार हैं।
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप पर है, जो अंडमान द्वीप समूह में स्थित है। नारकोंडम द्वीप एक सुप्त ज्वालामुखी है।
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