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हिंदी व्याकरण

विराम चिह्न — पूर्ण विराम से लोप चिह्न तक, प्रयोग-नियम और 30 शुद्धि वाक्य — CET

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
28 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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संक्षिप्त उत्तर: लिखते समय भाव को स्पष्ट करने के लिए वाक्य के बीच या अंत में जहाँ रुकना होता है, वहाँ लगाए जाने वाले चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं (विराम = ठहराव)। सबसे अधिक प्रयुक्त चिह्न हैं — पूर्ण विराम (।) वाक्य की समाप्ति पर, अल्प विराम (,) थोड़े ठहराव पर, अर्ध विराम (;) अल्प विराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव पर, उप विराम / अपूर्ण विराम (:) किसी बात को आगे स्पष्ट करने से पहले, प्रश्नवाचक (?) प्रश्न के अंत में और विस्मयादिबोधक (!) हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा या संबोधन के भाव में। इनके अतिरिक्त योजक (-), निर्देशक (—), उद्धरण (' ' / " "), कोष्ठक, हंसपद (^), लाघव (°), विवरण (:-), पुनरुक्तिसूचक („), तुल्यतासूचक (=) और लोप (…) चिह्न भी पढ़े जाते हैं। हिंदी ने इनमें से अधिकांश चिह्न अंग्रेज़ी से लिए हैं; केवल पूर्ण विराम (।) भारतीय लेखन-परंपरा का अपना चिह्न है। परीक्षा का मूल सूत्र एक है: चिह्न बदलते ही ठहराव बदलता है, और ठहराव बदलते ही अर्थ बदल जाता है — "रोको, मत जाने दो" और "रोको मत, जाने दो" का अर्थ एक-दूसरे का उलटा है।


संक्षिप्त उत्तर

चिह्ननामएक पंक्ति में प्रयोग
।पूर्ण विरामवाक्य पूरा होने पर
,अल्प विरामसबसे कम ठहराव — सूची, संबोधन, हाँ/नहीं के बाद
;अर्ध विरामअल्प विराम से अधिक, पूर्ण विराम से कम ठहराव
:उप विराम / अपूर्ण विरामआगे की बात स्पष्ट करने से पहले
?प्रश्नवाचकप्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में
!विस्मयादिबोधकहर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, संबोधन
-योजकदो शब्दों को जोड़ने में (माता-पिता)
—निर्देशकआगे की बात की ओर संकेत (जैसे —)
तथ्यउत्तर
'विराम' का अर्थठहराव, रुकना
हिंदी का अपना (देशज परंपरा का) विराम चिह्नपूर्ण विराम (।) — संस्कृत लेखन में 'दंड'
शेष अधिकांश चिह्न कहाँ से आएअंग्रेज़ी लेखन-पद्धति से
सबसे कम ठहरावअल्प विराम (,)
सबसे अधिक ठहरावपूर्ण विराम (।)
छूटा हुआ शब्द जोड़ने का चिह्नहंसपद (^)
शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाने का चिह्नलाघव चिह्न (°) — डॉ°, पं°
अप्रत्यक्ष प्रश्न ("पूछा कि...") के अंत मेंपूर्ण विराम, प्रश्नवाचक नहीं

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

विराम चिह्न हिंदी व्याकरण के वाक्य-रचना और लेखन खंड का छोटा पर निर्णायक अध्याय है। इसके प्रश्न दो रूपों में आते हैं — सीधे (चिह्न का नाम / प्रयोग) और छिपे हुए (वाक्य-शुद्धि में विराम की भूल)। वाक्य शुद्धि के कई प्रश्नों में अशुद्धि शब्द में नहीं, चिह्न में होती है — प्रश्न के अंत में पूर्ण विराम, 'कि' से पहले अल्प विराम या 'क्या सुंदर दृश्य है' के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆

  • CET 12th व Graduation स्तर
  • पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
  • REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
  • राजस्थान पुलिस SI व RAS (हिंदी व्याकरण भाग)
  • RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. "(^) चिह्न का नाम क्या है?" — चिह्न से नाम या नाम से चिह्न
  2. "किस वाक्य में विराम चिह्नों का प्रयोग शुद्ध है?" — चार वाक्य, एक सही
  3. "रिक्त स्थान में उचित विराम चिह्न लगाइए" — वाक्य के अंत या बीच में
  4. अर्थ-परिवर्तन — "रोको मत, जाने दो" का आशय
  5. प्रयोग-आधारित — "शब्द के संक्षिप्त रूप के लिए कौन-सा चिह्न?"
  6. अंतर — योजक (-) बनाम निर्देशक (—), इकहरा बनाम दुहरा उद्धरण चिह्न

3. विराम चिह्न: परिभाषा और महत्व

परिभाषा: बोलते समय हम भाव के अनुसार कहीं थोड़ा, कहीं अधिक रुकते हैं और स्वर का उतार-चढ़ाव बदलते हैं। लिखित भाषा में इसी ठहराव और भाव को दिखाने के लिए जो चिह्न लगाए जाते हैं, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं। विराम चिह्न के बिना लिखा वाक्य कई अर्थ दे सकता है; सही चिह्न उसे एक निश्चित अर्थ देता है।

3.1 चिह्न बदला, अर्थ बदला

वाक्य (पहला रूप)अर्थवाक्य (दूसरा रूप)अर्थ
रोको, मत जाने दो।उसे रोक लो; जाने मत दो।रोको मत, जाने दो।उसे मत रोको; जाने दो।
भागो, मत रुको।भागते रहो, रुकना नहीं।भागो मत, रुको।भागना नहीं, ठहर जाओ।
बैठो, मत जाओ।बैठ जाओ, जाना नहीं।बैठो मत, जाओ।बैठना नहीं, चले जाओ।
तुम कल आओगे।सूचना / कथनतुम कल आओगे?प्रश्न
वह जीत गया।साधारण सूचनावह जीत गया!आश्चर्य या हर्ष
मोहन, सोहन और गीता आए।तीन लोग आएमोहन! सोहन और गीता आए।मोहन को पुकारकर बताया गया कि दो लोग आए

पहली पंक्ति वाला उदाहरण इस अध्याय का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। शब्द वही हैं, क्रम वही है; केवल अल्प विराम का स्थान बदलने से आदेश उलट गया।

3.2 हिंदी में विराम चिह्न कहाँ से आए

संस्कृत और प्राचीन भारतीय लेखन में वाक्य या श्लोक के अंत में खड़ी रेखा — दंड (।) — का प्रयोग होता था। हिंदी ने यही चिह्न पूर्ण विराम के रूप में अपनाया। अल्प विराम, अर्ध विराम, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, उद्धरण, कोष्ठक, योजक आदि अधिकांश चिह्न आधुनिक काल में अंग्रेज़ी लेखन-पद्धति से लिए गए। इसलिए अंग्रेज़ी के full stop (.) के स्थान पर हिंदी में खड़ी पाई (।) लगती है, जबकि बाकी चिह्नों की आकृति लगभग अंग्रेज़ी जैसी ही है।


4. विराम चिह्नों की पूरी तालिका

चिह्ननामप्रयोगउदाहरण
।पूर्ण विरामसाधारण, आज्ञावाचक व इच्छावाचक वाक्य की समाप्ति परराम विद्यालय जाता है।
,अल्प विरामथोड़े ठहराव पर — सूची, संबोधन, हाँ/नहीं के बाद, उपवाक्यों के बीचराम, श्याम और मोहन खेल रहे हैं।
;अर्ध विरामअल्प विराम से अधिक ठहराव; परस्पर जुड़े स्वतंत्र वाक्यों के बीचसूर्योदय हुआ; अँधेरा दूर हो गया।
:उप विराम / अपूर्ण विरामकिसी बात को आगे स्पष्ट करने, उदाहरण देने या संवाद में वक्ता के नाम के बादनोट: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
?प्रश्नवाचकप्रत्यक्ष प्रश्नवाचक वाक्य के अंत मेंतुम कहाँ जा रहे हो?
!विस्मयादिबोधकहर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय के भाव और संबोधन के बादवाह! कितना सुंदर दृश्य है!
-योजकसामासिक / युग्म / पुनरुक्त शब्दों को जोड़ने में; सा, से, सी से पहलेमाता-पिता, धीरे-धीरे, चाँद-सा मुख
—निर्देशकआगे आने वाली सूची, उदाहरण या स्पष्टीकरण की ओर संकेत; विचार में अचानक मोड़संज्ञा के पाँच भेद हैं — ...
' 'इकहरा उद्धरण चिह्नउपनाम, पुस्तक / रचना का नाम, किसी शब्द पर विशेष बल'निराला' छायावाद के कवि हैं।
" "दुहरा उद्धरण चिह्नकिसी के कहे या लिखे शब्दों को ज्यों-का-त्यों उद्धृत करने मेंगांधीजी ने कहा, "करो या मरो।"
( )कोष्ठक (छोटा)अर्थ, पर्याय या स्पष्टीकरण देने में; क्रम-संख्या में; नाटक में अभिनय-निर्देशअनल (आग) की लपटें उठीं।
{ } [ ]मझला व बड़ा कोष्ठकमुख्यतः गणित में कोष्ठक के भीतर कोष्ठक; लेखन में संपादकीय टिप्पणी या निर्देश[ परदा गिरता है ]
^हंसपद / त्रुटिपूरकलिखते समय छूटा हुआ शब्द ऊपर जोड़ने के लिए, नीचे यह चिह्नमैं ^ जाऊँगा। (ऊपर 'कल' लिखा)
°लाघव चिह्नकिसी शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाने मेंडॉ° (डॉक्टर), पं° (पंडित), प्रो° (प्रोफ़ेसर)
:-विवरण चिह्नआगे विस्तार से विवरण, सूची या उदाहरण देने से पहलेनिम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए :-
„पुनरुक्तिसूचकऊपर लिखे शब्द को नीचे की पंक्ति में दोहराने से बचने के लिएश्री राम कुमार / „ श्याम कुमार
=तुल्यतासूचकसमानता, बराबरी या अर्थ बताने मेंविद्या + आलय = विद्यालय; जल = पानी
…लोप चिह्नवाक्य या उद्धरण का कुछ अंश छोड़ देने परतुम चिंता मत करो, मैं…

ध्यान दें: लाघव चिह्न को देवनागरी में शून्य जैसे छोटे वृत्त (°/॰) से लिखा जाता है। व्यवहार में बहुत-से समाचार-पत्र और पुस्तकें डॉ. , प्रो. की तरह बिंदु (.) भी लगाती हैं; परीक्षा में "लाघव चिह्न" का उत्तर वृत्त वाला चिह्न (°) ही है।

4.1 एक चिह्न, कई नाम — पुस्तकों में अंतर

अलग-अलग व्याकरण-पुस्तकें कुछ चिह्नों के नाम अलग देती हैं। परीक्षा में विकल्पों में जो नाम दिया हो, उसे इसी तालिका से मिला लें।

चिह्नप्रचलित नामअन्य नाम (कुछ पुस्तकों में)
:उप विरामअपूर्ण विराम
!विस्मयादिबोधक चिह्नसंबोधन चिह्न, विस्मयसूचक चिह्न
^हंसपदत्रुटिपूरक चिह्न, काकपद
°लाघव चिह्नसंक्षेपसूचक चिह्न
„पुनरुक्तिसूचक चिह्नपुनरुक्ति चिह्न
=तुल्यतासूचक चिह्नसमतासूचक / समानतासूचक चिह्न
—निर्देशक चिह्ननिर्देश चिह्न (डैश)
…लोप चिह्नलोपसूचक चिह्न (कुछ पुस्तकें × × × भी लोप के लिए देती हैं)

उप विराम और अपूर्ण विराम — दोनों नाम कोलन (:) के लिए चलते हैं, इसलिए इस अध्याय के क्विज़ और कथनों में कोलन को केवल चिह्न से पहचाना गया है, नाम से नहीं। कोलन (:) को विसर्ग (ः) से भी न मिलाएँ — विसर्ग वर्ण का अंश है (दुःख, अतः), विराम चिह्न नहीं।


5. पूर्ण विराम (।)

नियम: जहाँ वाक्य का भाव पूरा हो जाए और पूरा ठहराव हो, वहाँ पूर्ण विराम लगता है। यह साधारण (विधानवाचक), निषेधवाचक, आज्ञावाचक और इच्छावाचक वाक्यों के अंत में आता है। प्रश्न और विस्मय वाले वाक्यों के अंत में इसके स्थान पर ? और ! लगते हैं।

स्थितिशुद्धअशुद्ध
साधारण वाक्यसूर्य पूर्व में उगता है।सूर्य पूर्व में उगता है
आज्ञावाचक वाक्यदरवाज़ा बंद कर दो।दरवाज़ा बंद कर दो?
निषेधवाचक वाक्यमैं आज बाज़ार नहीं जाऊँगा।मैं आज बाज़ार नहीं जाऊँगा,
इच्छावाचक वाक्यभगवान तुम्हें सुखी रखे।भगवान तुम्हें सुखी रखे?
अप्रत्यक्ष प्रश्नमैंने पूछा कि वह कहाँ गया।मैंने पूछा कि वह कहाँ गया?
प्रश्नवाचक वाक्यतुम कब आओगे?तुम कब आओगे।
  • शीर्षक, उपशीर्षक, पुस्तक के नाम और पता लिखते समय अंत में पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता — "मेरा प्रिय त्योहार" (शीर्षक), न कि "मेरा प्रिय त्योहार।"।

6. अल्प विराम (,)

नियम: वाक्य के भीतर जहाँ सबसे कम ठहराव हो, वहाँ अल्प विराम लगता है। हिंदी लेखन में सबसे अधिक प्रयुक्त चिह्न यही है और सबसे अधिक भूलें भी इसी में होती हैं।

क्र.प्रयोगउदाहरण
1एक ही प्रकार के कई शब्द — अंतिम दो के बीच 'और', उससे पहले अल्प विराम नहींराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चार भाई थे।
2जोड़े में आए शब्द-युग्मों के बीचसुख और दुःख, लाभ और हानि, जीवन और मृत्यु — सब ईश्वर के हाथ में हैं।
3हाँ, नहीं, अच्छा, बस, सचमुच, अतः जैसे शब्दों के बाद, जब वाक्य उनसे शुरू होहाँ, मैं कल आऊँगा। / नहीं, यह ठीक नहीं है।
4संबोधन के बाद (साधारण स्वर में पुकार)मोहन, यहाँ आओ।
5उपवाक्यों को अलग करने में — जब... तब, यदि... तो, जो... वहजब वर्षा हुई, तब किसान प्रसन्न हुए।
6किसी शब्द या वाक्यांश की व्याख्या बीच में आएभारत के प्रथम राष्ट्रपति, डॉ° राजेंद्र प्रसाद, बिहार के थे।
7तिथि में महीने के बाद और वर्ष से पहले (प्रचलित प्रयोग)15 अगस्त, 1947
8पते और स्थान-नाम के अंशों के बीचसीकर, राजस्थान
9प्रत्यक्ष कथन से पहले (कुछ पुस्तकें यहाँ : या — भी लगाती हैं)उसने कहा, "मैं कल आऊँगा।"
10दोहराए गए शब्दों के बीच जब बल देना होचलो, चलो, देर हो रही है।

6.1 अल्प विराम कहाँ नहीं लगता

नियमअशुद्धशुद्ध
'और', 'तथा', 'एवं' से ठीक पहले नहींराम, श्याम, और मोहन आए।राम, श्याम और मोहन आए।
'कि' से पहले नहींउसने कहा, कि वह आएगा।उसने कहा कि वह आएगा।
कर्ता और क्रिया के बीच नहींमेरा छोटा भाई, विद्यालय जाता है।मेरा छोटा भाई विद्यालय जाता है।
विशेषण और विशेष्य के बीच नहींवह एक ईमानदार, व्यक्ति है।वह एक ईमानदार व्यक्ति है।
योजक-युक्त युग्म के बीच नहींमाता, पिता की सेवा करो। (जब अर्थ 'माता-पिता' हो)माता-पिता की सेवा करो।

7. अर्ध विराम (;) और उप विराम / अपूर्ण विराम (:)

7.1 अर्ध विराम (;)

नियम: जहाँ अल्प विराम से अधिक पर पूर्ण विराम से कम ठहराव हो, वहाँ अर्ध विराम लगता है। प्रायः ऐसे स्वतंत्र वाक्यों के बीच, जो भाव में आपस में जुड़े हों।

प्रयोगउदाहरण
भाव में जुड़े स्वतंत्र वाक्यों के बीचसूर्योदय हुआ; अँधेरा दूर हो गया; पक्षी चहचहाने लगे।
विरोध या परिणाम दिखाने वाले वाक्यों के बीचवह परिश्रमी था; फिर भी असफल रहा।
ऐसे समूहों के बीच जिनके भीतर पहले से अल्प विराम होंजयपुर, अजमेर राजस्थान में हैं; भोपाल, इंदौर मध्य प्रदेश में।

सावधानी: अर्ध विराम के बाद वाक्य अधूरा नहीं छोड़ा जाता और उसके बाद का अंश भी अपने में पूरा वाक्य होता है। साधारण शब्द-सूची में अर्ध विराम नहीं, अल्प विराम लगता है — "आम; केला; अमरूद" अशुद्ध, "आम, केला, अमरूद" शुद्ध।

7.2 उप विराम / अपूर्ण विराम (:)

नियम: जब किसी कथन के बाद उसी बात को स्पष्ट करना हो, उदाहरण देना हो या शीर्षक के बाद विषय लिखना हो, तब कोलन लगता है। नाटक और संवाद-लेखन में वक्ता के नाम के बाद भी यही चिह्न आता है।

प्रयोगउदाहरण
नोट, उदाहरण, विषय आदि के बादउदाहरण: राम, सीता, जयपुर
शीर्षक और उपशीर्षक के बीचप्रदूषण: कारण और निवारण
संवाद में वक्ता के नाम के बादराम: तुम कहाँ जा रहे हो?
किसी कथन की व्याख्या से पहलेसफलता का एक ही मंत्र है: निरंतर परिश्रम।

उप विराम (:) और विवरण चिह्न (:-) के प्रयोग कई स्थानों पर मिलते-जुलते हैं। अंतर इतना याद रखें — विवरण चिह्न प्रायः "निम्नलिखित", "इस प्रकार हैं" जैसे शब्दों के बाद लंबी सूची या विवरण से पहले आता है।


8. प्रश्नवाचक (?) और विस्मयादिबोधक (!) चिह्न

8.1 प्रश्नवाचक चिह्न (?)

नियमशुद्धअशुद्ध
प्रत्यक्ष प्रश्न के अंत मेंक्या तुमने भोजन कर लिया?क्या तुमने भोजन कर लिया।
प्रश्नसूचक शब्द (कौन, क्या, कब, कहाँ, कैसे, क्यों) वाले प्रश्नतुम कहाँ रहते हो?तुम कहाँ रहते हो!
अप्रत्यक्ष प्रश्न ('कि' वाले) में नहींउसने पूछा कि तुम कहाँ रहते हो।उसने पूछा कि तुम कहाँ रहते हो?
'क्या' विस्मय में हो तो ? नहीं, ! लगेगाक्या सुंदर दृश्य है!क्या सुंदर दृश्य है?
बिना प्रश्नसूचक शब्द के, केवल स्वर से प्रश्नतुम कल आओगे?तुम कल आओगे। (यदि प्रश्न पूछना हो)
प्रत्यक्ष कथन के भीतर प्रश्नमाँ ने पूछा, "तुम कब लौटोगे?"माँ ने पूछा, "तुम कब लौटोगे।"

8.2 विस्मयादिबोधक चिह्न (!)

नियम: हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय जैसे मनोभाव प्रकट करने वाले शब्द या वाक्य के बाद, और ऊँचे स्वर में पुकार (संबोधन) के बाद यह चिह्न लगता है। ऐसे शब्द व्याकरण में विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं — विस्तार अव्यय के भेद नोट में है।

भावउदाहरण
हर्षवाह! तुमने कमाल कर दिया।
शोकहाय! मेरा बेटा घायल हो गया।
आश्चर्यअरे! तुम यहाँ कैसे?
घृणाछि! कितनी गंदगी है।
भयबाप रे! इतना बड़ा साँप!
संबोधनहे प्रभु! मेरी रक्षा करो।
विस्मय-भाव वाला पूरा वाक्यकितना सुंदर फूल है!

ध्यान दें: साधारण स्वर में पुकारने पर अल्प विराम भी लगता है — "मोहन, यहाँ आओ।" औपचारिक लेखन में "!!!" जैसे दोहरे-तिहरे चिह्न नहीं लगाए जाते। संबोधन बहुवचन की वर्तनी (बच्चो!, भाइयो!) के लिए कारक के भेद नोट का संबोधन कारक वाला भाग देखें।


9. योजक (-) और निर्देशक (—) चिह्न

दोनों आड़ी रेखाएँ हैं, पर काम उलटे हैं — योजक छोटा होता है और जोड़ता है; निर्देशक लंबा होता है और आगे की ओर संकेत करता है।

9.1 योजक चिह्न (-)

प्रयोगउदाहरण
द्वंद्व समास के पदों के बीचमाता-पिता, राम-लक्ष्मण, दाल-रोटी, भाई-बहन
पुनरुक्त शब्दों के बीचधीरे-धीरे, घर-घर, बार-बार, साथ-साथ
विपरीतार्थक युग्मरात-दिन, सुख-दुःख, आना-जाना, ऊँच-नीच
समानार्थी / सहचर युग्मधन-दौलत, कपड़े-लत्ते, चाय-पानी
तुलना वाले 'सा, से, सी' से पहलेचाँद-सा मुखड़ा, फूल-सी कोमल, तुम-से लोग
दो संख्याओं के बीच 'से... तक' के अर्थ मेंपृष्ठ 10-15, सन् 1914-1918
'का, के, की' वाले युग्मों मेंज्यों-का-त्यों, ज्यों-के-त्यों

समास-विग्रह में योजक-युक्त द्वंद्व की पहचान समास के भेद नोट में है।

9.2 निर्देशक चिह्न (—)

प्रयोगउदाहरण
'जैसे', 'यथा', 'निम्नलिखित' के बाद उदाहरण / सूची से पहलेकारक के आठ भेद हैं — कर्ता, कर्म, करण...
किसी बात का स्पष्टीकरण बीच में डालने मेंउसका भाई — जो डॉक्टर है — कल आएगा।
विचार में अचानक मोड़ आने परमैं कहना चाहता था — पर छोड़ो, जाने दो।
संवाद में वक्ता के नाम के बाद (कुछ पुस्तकें : भी लगाती हैं)शिक्षक — तुमने गृहकार्य किया?
किसी उद्धरण के बाद लेखक का नाम देने में"करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।" — वृंद

10. उद्धरण चिह्न और कोष्ठक

10.1 इकहरा (' ') और दुहरा (" ") उद्धरण चिह्न

बिंदुइकहरा ' 'दुहरा " "
मुख्य प्रयोगकिसी शब्द, उपनाम या रचना के नाम को अलग दिखानाकिसी के कथन को ज्यों-का-त्यों उद्धृत करना
उपनामसूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'—
पुस्तक / रचना का नाम'रामचरितमानस' तुलसीदास की रचना है।—
विशेष शब्द पर बल'ईमानदारी' सबसे बड़ा गुण है।—
प्रत्यक्ष कथन—तिलक ने कहा, "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।"
उद्धरण के भीतर उद्धरणभीतर वाला अंश इकहरे मेंबाहर वाला अंश दुहरे में

नियम: प्रत्यक्ष कथन का पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक या विस्मयादिबोधक चिह्न उद्धरण चिह्न के भीतर लगता है — उसने कहा, "मैं जा रहा हूँ।" अप्रत्यक्ष कथन ('कि' वाले) में उद्धरण चिह्न नहीं लगते — उसने कहा कि वह जा रहा है।

10.2 कोष्ठक ( ) [ ] { }

प्रयोगउदाहरण
कठिन शब्द का अर्थ या पर्यायउसके नेत्र (आँखें) सजल हो गए।
किसी शब्द / संक्षेप का पूरा रूपRSMSSB (राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड)
क्रम-संख्या या विकल्प-संख्या(क) संज्ञा (ख) सर्वनाम (ग) विशेषण
नाटक में अभिनय-निर्देशराम — (हँसते हुए) अच्छा, यही बात है!
गणित में कोष्ठक के भीतर कोष्ठक[ 2 × { 3 + ( 4 − 1 ) } ]

कोष्ठक के भीतर लिखा अंश हटा दें तो भी वाक्य का अर्थ और व्याकरण पूरा रहना चाहिए — "उसके नेत्र सजल हो गए।" यही कोष्ठक के सही प्रयोग की कसौटी है।


11. अन्य चिह्न — हंसपद, लाघव, विवरण, पुनरुक्ति, तुल्यता, लोप

चिह्ननियमशुद्ध प्रयोगभूल
हंसपद (^)लिखते समय छूटा शब्द पंक्ति के ऊपर लिखें और जहाँ उसे आना है, वहाँ नीचे ^ लगाएँराम ^ गया। (ऊपर 'बाज़ार' — राम बाज़ार गया।)छूटा शब्द पंक्ति के अंत में अलग से जोड़ देना
लाघव (°)शब्द का पहला अंश लिखकर शेष के स्थान पर चिह्नडॉ°, पं° जवाहरलाल नेहरू, प्रो° (प्रोफ़ेसर), कृ° पृ° उ° (कृपया पृष्ठ उलटिए)पूरा शब्द लिखकर भी चिह्न लगाना — "डॉक्टर°"
विवरण (:-)आगे आने वाले विस्तृत विवरण / सूची से पहलेराजस्थान के संभाग इस प्रकार हैं :- जयपुर, जोधपुर...साधारण वाक्य के बीच लगाना
पुनरुक्तिसूचक („)सूची में ऊपर वाला शब्द नीचे दोहराना हो तो उसके ठीक नीचेश्री मोहनलाल शर्मा / „ सोहनलाल शर्मापहली पंक्ति में ही लगाना
तुल्यतासूचक (=)बराबरी, अर्थ या परिणाम बताने मेंसूर्य = रवि; 2 + 2 = 4; हिम + आलय = हिमालयसाधारण वाक्य में "है" के स्थान पर लगाना
लोप (…)बात अधूरी छोड़ने या उद्धरण का अंश छोड़ने परअगर तुमने फिर ऐसा किया तो…पूरे वाक्य के बाद अनावश्यक रूप से लगाना

12. विराम चिह्न शुद्धि — अभ्यास तालिका (30 वाक्य)

क्र.अशुद्धशुद्धकारण
1तुम कहाँ जा रहे हो।तुम कहाँ जा रहे हो?प्रत्यक्ष प्रश्न
2उसने पूछा कि तुम कौन हो?उसने पूछा कि तुम कौन हो।अप्रत्यक्ष प्रश्न
3क्या सुंदर दृश्य है?क्या सुंदर दृश्य है!'क्या' विस्मय में
4राम, श्याम, और मोहन आए।राम, श्याम और मोहन आए।'और' से पहले अल्प विराम नहीं
5उसने कहा, कि मैं थक गया हूँ।उसने कहा कि मैं थक गया हूँ।'कि' से पहले अल्प विराम नहीं
6हाँ मैं कल आऊँगा।हाँ, मैं कल आऊँगा।'हाँ' के बाद अल्प विराम
7मोहन यहाँ आओ।मोहन, यहाँ आओ।संबोधन के बाद अल्प विराम
8वाह, कितना सुंदर गीत है।वाह! कितना सुंदर गीत है।हर्षसूचक शब्द के बाद !
9हाय। मेरा सब कुछ लुट गया।हाय! मेरा सब कुछ लुट गया।शोकसूचक शब्द के बाद !
10माता पिता की आज्ञा मानो।माता-पिता की आज्ञा मानो।द्वंद्व युग्म में योजक
11वह धीरे धीरे चलता है।वह धीरे-धीरे चलता है।पुनरुक्त शब्द में योजक
12उसका चाँद सा मुख है।उसका चाँद-सा मुख है।'सा' से पहले योजक
13तुम्हारा नाम क्या है।तुम्हारा नाम क्या है?प्रश्नसूचक शब्द वाला प्रश्न
14शाबाश तुमने बहुत अच्छा किया।शाबाश! तुमने बहुत अच्छा किया।प्रशंसा / हर्ष के शब्द के बाद !
15गांधीजी ने कहा करो या मरो।गांधीजी ने कहा, "करो या मरो।"प्रत्यक्ष कथन में दुहरा उद्धरण
16सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" छायावादी कवि थे।सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' छायावादी कवि थे।उपनाम इकहरे उद्धरण में
17मेरा भाई, कल जयपुर जाएगा।मेरा भाई कल जयपुर जाएगा।कर्ता-क्रिया के बीच अल्प विराम नहीं
18आम; केला; अमरूद मुझे पसंद हैं।आम, केला और अमरूद मुझे पसंद हैं।शब्द-सूची में अल्प विराम
19क्या तुम मेरे साथ चलोगे।क्या तुम मेरे साथ चलोगे?'क्या' से आरंभ प्रश्न
20अरे तुम कब आए?अरे! तुम कब आए?आश्चर्यसूचक शब्द के बाद !
21छि कितनी गंदी आदत है।छि! कितनी गंदी आदत है।घृणासूचक शब्द के बाद !
22भगवान तुम्हारा भला करे?भगवान तुम्हारा भला करे।इच्छावाचक वाक्य में पूर्ण विराम
23कृपया शांत रहिए?कृपया शांत रहिए।आज्ञा / अनुरोध में पूर्ण विराम
24नहीं मैं यह काम नहीं करूँगा।नहीं, मैं यह काम नहीं करूँगा।'नहीं' के बाद अल्प विराम
25वह ईमानदार, लड़का है।वह ईमानदार लड़का है।विशेषण-विशेष्य के बीच अल्प विराम नहीं
26सुख दुःख जीवन के अंग हैं।सुख-दुःख जीवन के अंग हैं।विपरीतार्थक युग्म में योजक
27माँ ने पूछा, "खाना खाया।"माँ ने पूछा, "खाना खाया?"उद्धरण के भीतर प्रश्न
28उफ़ कितनी गर्मी है।उफ़! कितनी गर्मी है।पीड़ा / खीज के शब्द के बाद !
29बस अब और नहीं।बस, अब और नहीं।'बस' के बाद अल्प विराम
30राम ने पूछा, "तुम कहाँ थे"?राम ने पूछा, "तुम कहाँ थे?"प्रश्नवाचक उद्धरण के भीतर

13. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: अल्प विराम का स्थान — आदेश उलट जाता है

"रोको, मत जाने दो" = रोक लो। "रोको मत, जाने दो" = जाने दो। प्रश्न में आशय पूछा जाए तो अल्प विराम से पहले वाला अंश एक आदेश और बाद वाला दूसरा आदेश मानकर पढ़ें।

Trap 2: अप्रत्यक्ष प्रश्न पर ? नहीं

"उसने पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो?" — अशुद्ध। 'कि' के बाद प्रश्न अप्रत्यक्ष हो गया; पूरा वाक्य अब सूचना है — "उसने पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो।"

Trap 3: 'क्या' हर बार प्रश्न नहीं

"क्या सुंदर दृश्य है!", "क्या बात है!" — यहाँ 'क्या' आश्चर्य / प्रशंसा बताता है, उत्तर नहीं माँगता; इसलिए ! लगेगा। "क्या तुम आओगे?" — उत्तर माँगता है; इसलिए ?।

Trap 4: 'और' तथा 'कि' से पहले अल्प विराम नहीं

अंग्रेज़ी की तरह "A, B, and C" लिखने की आदत हिंदी में अशुद्ध मानी जाती है — "राम, श्याम और मोहन"। इसी प्रकार "उसने कहा कि..." में 'कि' से पहले चिह्न नहीं लगता।

Trap 5: योजक (-) बनाम निर्देशक (—)

"माता-पिता", "धीरे-धीरे" — छोटी रेखा, जोड़ने वाली — योजक। "भेद हैं — ..." — लंबी रेखा, आगे की ओर संकेत करने वाली — निर्देशक। विकल्पों में दोनों साथ दिए जाते हैं।

Trap 6: इकहरा बनाम दुहरा उद्धरण

उपनाम, पुस्तक का नाम, किसी शब्द पर बल → इकहरा ('निराला', 'गोदान')। किसी के कहे शब्द ज्यों-के-त्यों → दुहरा ("करो या मरो")।

Trap 7: कोलन (:) और विसर्ग (ः)

"दुःख", "अतः", "प्रातः" में दिखने वाले दो बिंदु विसर्ग हैं — वर्ण का भाग। विराम चिह्न कोलन (:) शब्द के बाद, स्थान छोड़कर, स्पष्टीकरण से पहले आता है। वर्तनी के प्रश्नों में यह अंतर शब्द शुद्धि (वर्तनी) नोट से जुड़ता है।

Trap 8: लाघव (°) बनाम हंसपद (^)

दोनों छोटे चिह्न हैं, पर काम अलग — लाघव शब्द छोटा करता है (डॉ°), हंसपद छूटा शब्द जोड़ता है (^)। नाम याद रखने का संकेत: हंस के पैर जैसा आकार — हंसपद।

Trap 9: संबोधन में , या !

"मोहन, यहाँ आओ" — साधारण पुकार, अल्प विराम। "हे भगवान! बचाओ" — भावपूर्ण / ऊँचे स्वर में पुकार, विस्मयादिबोधक। दोनों शुद्ध हैं; प्रश्न में भाव देखकर चुनें।


14. Most-Asked रिवीज़न तालिका (40 स्थितियाँ)

क्र.स्थिति / वाक्यचिह्न
1साधारण कथन का अंत — "वह पढ़ रहा है_"। पूर्ण विराम
2आज्ञा का अंत — "दरवाज़ा खोलो_"। पूर्ण विराम
3इच्छा का अंत — "ईश्वर तुम्हें सफल करे_"। पूर्ण विराम
4अप्रत्यक्ष प्रश्न — "उसने पूछा कि मैं कब आऊँगा_"। पूर्ण विराम
5प्रत्यक्ष प्रश्न — "तुम कब आओगे_"? प्रश्नवाचक
6'क्या' से आरंभ प्रश्न — "क्या तुमने खाना खाया_"? प्रश्नवाचक
7विस्मय वाला 'क्या' — "क्या सुंदर फूल है_"! विस्मयादिबोधक
8हर्ष — "वाह_"! विस्मयादिबोधक
9शोक — "हाय_"! विस्मयादिबोधक
10घृणा — "छि_"! विस्मयादिबोधक
11भावपूर्ण संबोधन — "हे प्रभु_"! विस्मयादिबोधक
12साधारण संबोधन — "रमेश_ इधर आओ।", अल्प विराम
13'हाँ' / 'नहीं' के बाद, अल्प विराम
14शब्द-सूची — "आम_ केला और अमरूद", अल्प विराम
15जब... तब उपवाक्य के बीच, अल्प विराम
16तिथि में वर्ष से पहले — "26 जनवरी_ 1950", अल्प विराम
17पता — "अजमेर_ राजस्थान", अल्प विराम
18भाव में जुड़े स्वतंत्र वाक्य — "सूर्योदय हुआ_ अँधेरा मिटा।"; अर्ध विराम
19अल्प विराम से अधिक, पूर्ण विराम से कम ठहराव; अर्ध विराम
20"नोट_ सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।": कोलन
21शीर्षक-उपशीर्षक — "पर्यावरण_ समस्या और समाधान": कोलन
22"निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए_" (विस्तृत सूची से पहले):- विवरण चिह्न
23द्वंद्व युग्म — "भाई_बहन"- योजक
24पुनरुक्त शब्द — "घर_घर"- योजक
25'सा, सी, से' से पहले — "फूल_सी"- योजक
26"जैसे _ राम, श्याम" (उदाहरण से पहले)— निर्देशक
27उद्धरण के बाद रचनाकार का नाम— निर्देशक
28कवि का उपनाम — 'दिनकर'' ' इकहरा उद्धरण
29पुस्तक का नाम — 'गोदान'' ' इकहरा उद्धरण
30किसी के कहे शब्द ज्यों-के-त्यों" " दुहरा उद्धरण
31कठिन शब्द का अर्थ — "पावक (आग)"( ) कोष्ठक
32नाटक में अभिनय-निर्देश — "(क्रोध से)"( ) कोष्ठक
33छूटा हुआ शब्द जोड़ना^ हंसपद
34डॉक्टर → डॉ_° लाघव चिह्न
35पंडित → पं_° लाघव चिह्न
36सूची में ऊपर का शब्द नीचे दोहराना„ पुनरुक्तिसूचक
37"जल _ पानी" (अर्थ / समानता)= तुल्यतासूचक
38"विद्या + आलय _ विद्यालय"= तुल्यतासूचक
39अधूरी छोड़ी बात — "अगर तुमने फिर ऐसा किया तो_"… लोप चिह्न
40उद्धरण का छोड़ा गया अंश… लोप चिह्न

15. CET में विराम चिह्न कैसे पूछे जाते हैं

राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में विराम चिह्न के प्रश्न प्रायः इन ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचे स्थिर रहते हैं:

  1. चिह्न → नाम: "(^) / (°) / („) चिह्न का नाम है?" — Section 4 की तालिका।
  2. प्रयोग → चिह्न: "किसी शब्द का संक्षिप्त रूप लिखने के लिए कौन-सा चिह्न?" — लाघव।
  3. शुद्ध वाक्य छाँटना: चार वाक्य, केवल विराम चिह्नों में अंतर — प्रश्न, अप्रत्यक्ष प्रश्न, 'और' व 'कि' वाले नियम जाँचें।
  4. अर्थ-परिवर्तन: "रोको मत, जाने दो" जैसा वाक्य देकर आशय पूछना।
  5. रिक्त स्थान: "हाय___ अब क्या होगा" — भाव पहचानकर चिह्न।
  6. सैद्धांतिक: हिंदी का अपना चिह्न कौन-सा (पूर्ण विराम), सबसे कम ठहराव (अल्प विराम)।

रणनीति: विकल्प पढ़ते समय वाक्य को मन में बोलकर देखें — कहाँ रुकते हैं, स्वर उठता है (प्रश्न) या भाव फूटता है (विस्मय)। जो चिह्न आपके स्वाभाविक ठहराव से मेल खाए, वही प्रायः सही होता है; फिर 'और', 'कि' और अप्रत्यक्ष प्रश्न वाले नियमों से पुष्टि करें।


16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. ठहराव की सीढ़ी: "अल्प (,) → अर्ध (;) → पूर्ण (।)" — छोटा, मझला, पूरा ठहराव।

2. एक देसी, बाकी विदेशी: पूर्ण विराम (।) भारतीय 'दंड' है; शेष अधिकांश चिह्न अंग्रेज़ी से आए।

3. योजक जोड़े, निर्देशक दिखाए: छोटी रेखा (-) जोड़ती है, लंबी रेखा (—) आगे की ओर इशारा करती है।

4. 'कि' और 'और' — अल्प विराम से दूर: दोनों से ठीक पहले अल्प विराम नहीं।

5. 'कि' आया, प्रश्न गया: "पूछा कि..." वाले वाक्य के अंत में पूर्ण विराम।

6. हंस का पैर (^) = छूटा शब्द जोड़ो; छोटा गोला (°) = शब्द छोटा करो।

7. एक कोट — नाम; दो कोट — कथन: 'निराला', 'गोदान' इकहरे में; "करो या मरो" दुहरे में।


17. कथन अभ्यास

पूर्ण विराम (।) हिंदी लेखन का अपना चिह्न है; अधिकांश अन्य विराम चिह्न अंग्रेज़ी से लिए गए हैं। — सही।

अप्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न लगता है। — गलत (पूर्ण विराम लगता है)।

'राम, श्याम, और मोहन आए' में विराम चिह्नों का प्रयोग शुद्ध है। — गलत ('और' से पहले अल्प विराम नहीं)।

शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाने के लिए लाघव चिह्न (°) का प्रयोग होता है। — सही।

'माता-पिता' में प्रयुक्त चिह्न निर्देशक चिह्न है। — गलत (योजक चिह्न)।

'क्या सुंदर दृश्य है' के अंत में विस्मयादिबोधक चिह्न लगेगा। — सही।

किसी के कथन को ज्यों-का-त्यों लिखने के लिए दुहरा उद्धरण चिह्न लगता है। — सही।

'रोको मत, जाने दो' का अर्थ है कि जाने वाले को रोक लिया जाए। — गलत (उसे जाने दिया जाए)।

अर्ध विराम (;) अल्प विराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव बताता है। — सही।


18. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ

  1. विराम चिह्न = लिखित भाषा में ठहराव और भाव दिखाने वाले चिह्न
  2. पूर्ण विराम (।) भारतीय दंड-परंपरा से; बाकी अधिकांश अंग्रेज़ी से
  3. ठहराव: अल्प (,) से कम, अर्ध (;) बीच में, पूर्ण (।) सबसे अधिक
  4. "रोको, मत जाने दो" = रोक लो; "रोको मत, जाने दो" = जाने दो
  5. 'और' व 'कि' से ठीक पहले अल्प विराम नहीं
  6. हाँ, नहीं, बस, अच्छा और साधारण संबोधन के बाद अल्प विराम
  7. प्रत्यक्ष प्रश्न ?; अप्रत्यक्ष प्रश्न ('पूछा कि') ।
  8. हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय, भावपूर्ण संबोधन → !; विस्मय वाला 'क्या' → !
  9. योजक (-) जोड़ता है: माता-पिता, धीरे-धीरे, चाँद-सा; निर्देशक (—) संकेत करता है
  10. इकहरा ' ' उपनाम / रचना-नाम; दुहरा " " ज्यों-का-त्यों कथन
  11. हंसपद ^ छूटा शब्द; लाघव ° संक्षेप; „ पुनरुक्ति; = तुल्यता; … लोप; :- विवरण
  12. कोलन (:) के नाम — उप विराम / अपूर्ण विराम; विसर्ग (ः) से अलग

19. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में विकल्प केवल चिह्नों में भिन्न हों, वहाँ हर वाक्य को बोलकर पढ़ें और Section 12 की शुद्धि तालिका के नियम से मिलाएँ। विराम चिह्न, वाक्य-शुद्धि और वर्तनी के मिश्रित अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।


20. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

विराम चिह्न छोटे दिखते हैं, पर वाक्य का अर्थ इन्हीं पर टिका है — एक अल्प विराम खिसकते ही "रोको" का आदेश "जाने दो" में बदल जाता है। परीक्षा के लिए तीन बातें पक्की करें: ठहराव का क्रम (अल्प, अर्ध, पूर्ण), प्रश्न और विस्मय का अंतर (अप्रत्यक्ष प्रश्न और विस्मय वाले 'क्या' सहित), और अल्प विराम के निषेध ('और' तथा 'कि' से पहले नहीं)। बाकी चिह्न — हंसपद, लाघव, पुनरुक्ति, तुल्यता, लोप — नाम और प्रयोग की सीधी जोड़ी हैं, जिन्हें Section 4 की तालिका से दोहराना पर्याप्त है। जहाँ पुस्तकें नाम में भिन्न हैं (कोलन के लिए उप विराम / अपूर्ण विराम), वहाँ चिह्न की आकृति और प्रयोग से उत्तर तय करें।

, अल्प · ; अर्ध · । पूर्ण | ? प्रत्यक्ष प्रश्न · 'पूछा कि' = । | ! भाव व संबोधन | - जोड़े · — दिखाए | ' ' नाम · " " कथन | ^ जोड़ो · ° छोटा करो · „ दोहराओ · … छोड़ो


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“विराम चिह्न — पूर्ण विराम से लोप चिह्न तक, प्रयोग-नियम और 30 शुद्धि वाक्य — CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

लिखते समय वाक्य के बीच या अंत में ठहराव और भाव दिखाने के लिए लगाए जाने वाले चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं। 'विराम' का अर्थ है ठहराव। जैसे पूर्ण विराम (।), अल्प विराम (,), प्रश्नवाचक (?) और विस्मयादिबोधक (!)।

पूर्ण विराम (।), अल्प विराम (,), अर्ध विराम (;), उप विराम (:), प्रश्नवाचक (?), विस्मयादिबोधक (!), योजक (-), निर्देशक (—), इकहरा व दुहरा उद्धरण (' ' / “ ”), कोष्ठक, हंसपद (^), लाघव (°), विवरण (:-), पुनरुक्तिसूचक („), तुल्यतासूचक (=) और लोप चिह्न (…)।

पूर्ण विराम (।) भारतीय लेखन-परंपरा का अपना चिह्न है, जो संस्कृत में 'दंड' कहलाता था। हिंदी के अधिकांश अन्य विराम चिह्न अंग्रेज़ी लेखन-पद्धति से लिए गए हैं।

'रोको, मत जाने दो' का अर्थ है कि उसे रोक लो, जाने मत दो। 'रोको मत, जाने दो' का अर्थ है कि उसे मत रोको, जाने दो। केवल अल्प विराम का स्थान बदलने से अर्थ उलट जाता है।

अल्प विराम (,) सबसे कम ठहराव बताता है और सूची, संबोधन तथा 'हाँ/नहीं' के बाद लगता है। अर्ध विराम (;) अल्प विराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव बताता है, जैसे 'सूर्योदय हुआ; अँधेरा दूर हो गया।'

अप्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में पूर्ण विराम लगता है, प्रश्नवाचक चिह्न नहीं। जैसे 'उसने पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो।' प्रत्यक्ष प्रश्न 'तुम कहाँ जा रहे हो?' में प्रश्नवाचक चिह्न लगता है।

योजक (-) छोटी रेखा है जो दो शब्दों को जोड़ती है, जैसे माता-पिता, धीरे-धीरे, चाँद-सा। निर्देशक (—) लंबी रेखा है जो आगे आने वाली सूची, उदाहरण या स्पष्टीकरण की ओर संकेत करती है, जैसे 'संज्ञा के भेद हैं — ...'।

इकहरा उद्धरण (' ') उपनाम, पुस्तक या रचना के नाम और किसी शब्द पर बल देने में लगता है, जैसे 'निराला', 'गोदान'। दुहरा उद्धरण (“ ”) किसी के कहे शब्दों को ज्यों-का-त्यों लिखने में लगता है, जैसे “करो या मरो।”

हंसपद (^) लिखते समय छूटा हुआ शब्द जोड़ने के लिए लगाया जाता है; छूटा शब्द ऊपर लिखकर उसके स्थान पर नीचे ^ लगाते हैं। लाघव चिह्न (°) किसी शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाता है, जैसे डॉ°, पं°, प्रो°।

दोनों नाम प्रचलित हैं; कुछ पुस्तकें इसे उप विराम और कुछ अपूर्ण विराम कहती हैं। इसका प्रयोग किसी बात को आगे स्पष्ट करने, 'नोट:' या 'उदाहरण:' के बाद और संवाद में वक्ता के नाम के बाद होता है। इसे विसर्ग (ः) से अलग समझें।

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