विराम चिह्न — पूर्ण विराम से लोप चिह्न तक, प्रयोग-नियम और 30 शुद्धि वाक्य — CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: लिखते समय भाव को स्पष्ट करने के लिए वाक्य के बीच या अंत में जहाँ रुकना होता है, वहाँ लगाए जाने वाले चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं (विराम = ठहराव)। सबसे अधिक प्रयुक्त चिह्न हैं — पूर्ण विराम (।) वाक्य की समाप्ति पर, अल्प विराम (,) थोड़े ठहराव पर, अर्ध विराम (;) अल्प विराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव पर, उप विराम / अपूर्ण विराम (:) किसी बात को आगे स्पष्ट करने से पहले, प्रश्नवाचक (?) प्रश्न के अंत में और विस्मयादिबोधक (!) हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा या संबोधन के भाव में। इनके अतिरिक्त योजक (-), निर्देशक (—), उद्धरण (' ' / " "), कोष्ठक, हंसपद (^), लाघव (°), विवरण (:-), पुनरुक्तिसूचक („), तुल्यतासूचक (=) और लोप (…) चिह्न भी पढ़े जाते हैं। हिंदी ने इनमें से अधिकांश चिह्न अंग्रेज़ी से लिए हैं; केवल पूर्ण विराम (।) भारतीय लेखन-परंपरा का अपना चिह्न है। परीक्षा का मूल सूत्र एक है: चिह्न बदलते ही ठहराव बदलता है, और ठहराव बदलते ही अर्थ बदल जाता है — "रोको, मत जाने दो" और "रोको मत, जाने दो" का अर्थ एक-दूसरे का उलटा है।
संक्षिप्त उत्तर
| चिह्न | नाम | एक पंक्ति में प्रयोग |
|---|---|---|
| । | पूर्ण विराम | वाक्य पूरा होने पर |
| , | अल्प विराम | सबसे कम ठहराव — सूची, संबोधन, हाँ/नहीं के बाद |
| ; | अर्ध विराम | अल्प विराम से अधिक, पूर्ण विराम से कम ठहराव |
| : | उप विराम / अपूर्ण विराम | आगे की बात स्पष्ट करने से पहले |
| ? | प्रश्नवाचक | प्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में |
| ! | विस्मयादिबोधक | हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, संबोधन |
| - | योजक | दो शब्दों को जोड़ने में (माता-पिता) |
| — | निर्देशक | आगे की बात की ओर संकेत (जैसे —) |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| 'विराम' का अर्थ | ठहराव, रुकना |
| हिंदी का अपना (देशज परंपरा का) विराम चिह्न | पूर्ण विराम (।) — संस्कृत लेखन में 'दंड' |
| शेष अधिकांश चिह्न कहाँ से आए | अंग्रेज़ी लेखन-पद्धति से |
| सबसे कम ठहराव | अल्प विराम (,) |
| सबसे अधिक ठहराव | पूर्ण विराम (।) |
| छूटा हुआ शब्द जोड़ने का चिह्न | हंसपद (^) |
| शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाने का चिह्न | लाघव चिह्न (°) — डॉ°, पं° |
| अप्रत्यक्ष प्रश्न ("पूछा कि...") के अंत में | पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक नहीं |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
विराम चिह्न हिंदी व्याकरण के वाक्य-रचना और लेखन खंड का छोटा पर निर्णायक अध्याय है। इसके प्रश्न दो रूपों में आते हैं — सीधे (चिह्न का नाम / प्रयोग) और छिपे हुए (वाक्य-शुद्धि में विराम की भूल)। वाक्य शुद्धि के कई प्रश्नों में अशुद्धि शब्द में नहीं, चिह्न में होती है — प्रश्न के अंत में पूर्ण विराम, 'कि' से पहले अल्प विराम या 'क्या सुंदर दृश्य है' के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆
- CET 12th व Graduation स्तर
- पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
- REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
- राजस्थान पुलिस SI व RAS (हिंदी व्याकरण भाग)
- RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता
प्रश्न कैसे आते हैं?
- "(^) चिह्न का नाम क्या है?" — चिह्न से नाम या नाम से चिह्न
- "किस वाक्य में विराम चिह्नों का प्रयोग शुद्ध है?" — चार वाक्य, एक सही
- "रिक्त स्थान में उचित विराम चिह्न लगाइए" — वाक्य के अंत या बीच में
- अर्थ-परिवर्तन — "रोको मत, जाने दो" का आशय
- प्रयोग-आधारित — "शब्द के संक्षिप्त रूप के लिए कौन-सा चिह्न?"
- अंतर — योजक (-) बनाम निर्देशक (—), इकहरा बनाम दुहरा उद्धरण चिह्न
3. विराम चिह्न: परिभाषा और महत्व
परिभाषा: बोलते समय हम भाव के अनुसार कहीं थोड़ा, कहीं अधिक रुकते हैं और स्वर का उतार-चढ़ाव बदलते हैं। लिखित भाषा में इसी ठहराव और भाव को दिखाने के लिए जो चिह्न लगाए जाते हैं, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं। विराम चिह्न के बिना लिखा वाक्य कई अर्थ दे सकता है; सही चिह्न उसे एक निश्चित अर्थ देता है।
3.1 चिह्न बदला, अर्थ बदला
| वाक्य (पहला रूप) | अर्थ | वाक्य (दूसरा रूप) | अर्थ |
|---|---|---|---|
| रोको, मत जाने दो। | उसे रोक लो; जाने मत दो। | रोको मत, जाने दो। | उसे मत रोको; जाने दो। |
| भागो, मत रुको। | भागते रहो, रुकना नहीं। | भागो मत, रुको। | भागना नहीं, ठहर जाओ। |
| बैठो, मत जाओ। | बैठ जाओ, जाना नहीं। | बैठो मत, जाओ। | बैठना नहीं, चले जाओ। |
| तुम कल आओगे। | सूचना / कथन | तुम कल आओगे? | प्रश्न |
| वह जीत गया। | साधारण सूचना | वह जीत गया! | आश्चर्य या हर्ष |
| मोहन, सोहन और गीता आए। | तीन लोग आए | मोहन! सोहन और गीता आए। | मोहन को पुकारकर बताया गया कि दो लोग आए |
पहली पंक्ति वाला उदाहरण इस अध्याय का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। शब्द वही हैं, क्रम वही है; केवल अल्प विराम का स्थान बदलने से आदेश उलट गया।
3.2 हिंदी में विराम चिह्न कहाँ से आए
संस्कृत और प्राचीन भारतीय लेखन में वाक्य या श्लोक के अंत में खड़ी रेखा — दंड (।) — का प्रयोग होता था। हिंदी ने यही चिह्न पूर्ण विराम के रूप में अपनाया। अल्प विराम, अर्ध विराम, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, उद्धरण, कोष्ठक, योजक आदि अधिकांश चिह्न आधुनिक काल में अंग्रेज़ी लेखन-पद्धति से लिए गए। इसलिए अंग्रेज़ी के full stop (.) के स्थान पर हिंदी में खड़ी पाई (।) लगती है, जबकि बाकी चिह्नों की आकृति लगभग अंग्रेज़ी जैसी ही है।
4. विराम चिह्नों की पूरी तालिका
| चिह्न | नाम | प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| । | पूर्ण विराम | साधारण, आज्ञावाचक व इच्छावाचक वाक्य की समाप्ति पर | राम विद्यालय जाता है। |
| , | अल्प विराम | थोड़े ठहराव पर — सूची, संबोधन, हाँ/नहीं के बाद, उपवाक्यों के बीच | राम, श्याम और मोहन खेल रहे हैं। |
| ; | अर्ध विराम | अल्प विराम से अधिक ठहराव; परस्पर जुड़े स्वतंत्र वाक्यों के बीच | सूर्योदय हुआ; अँधेरा दूर हो गया। |
| : | उप विराम / अपूर्ण विराम | किसी बात को आगे स्पष्ट करने, उदाहरण देने या संवाद में वक्ता के नाम के बाद | नोट: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। |
| ? | प्रश्नवाचक | प्रत्यक्ष प्रश्नवाचक वाक्य के अंत में | तुम कहाँ जा रहे हो? |
| ! | विस्मयादिबोधक | हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय के भाव और संबोधन के बाद | वाह! कितना सुंदर दृश्य है! |
| - | योजक | सामासिक / युग्म / पुनरुक्त शब्दों को जोड़ने में; सा, से, सी से पहले | माता-पिता, धीरे-धीरे, चाँद-सा मुख |
| — | निर्देशक | आगे आने वाली सूची, उदाहरण या स्पष्टीकरण की ओर संकेत; विचार में अचानक मोड़ | संज्ञा के पाँच भेद हैं — ... |
| ' ' | इकहरा उद्धरण चिह्न | उपनाम, पुस्तक / रचना का नाम, किसी शब्द पर विशेष बल | 'निराला' छायावाद के कवि हैं। |
| " " | दुहरा उद्धरण चिह्न | किसी के कहे या लिखे शब्दों को ज्यों-का-त्यों उद्धृत करने में | गांधीजी ने कहा, "करो या मरो।" |
| ( ) | कोष्ठक (छोटा) | अर्थ, पर्याय या स्पष्टीकरण देने में; क्रम-संख्या में; नाटक में अभिनय-निर्देश | अनल (आग) की लपटें उठीं। |
| { } [ ] | मझला व बड़ा कोष्ठक | मुख्यतः गणित में कोष्ठक के भीतर कोष्ठक; लेखन में संपादकीय टिप्पणी या निर्देश | [ परदा गिरता है ] |
| ^ | हंसपद / त्रुटिपूरक | लिखते समय छूटा हुआ शब्द ऊपर जोड़ने के लिए, नीचे यह चिह्न | मैं ^ जाऊँगा। (ऊपर 'कल' लिखा) |
| ° | लाघव चिह्न | किसी शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाने में | डॉ° (डॉक्टर), पं° (पंडित), प्रो° (प्रोफ़ेसर) |
| :- | विवरण चिह्न | आगे विस्तार से विवरण, सूची या उदाहरण देने से पहले | निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए :- |
| „ | पुनरुक्तिसूचक | ऊपर लिखे शब्द को नीचे की पंक्ति में दोहराने से बचने के लिए | श्री राम कुमार / „ श्याम कुमार |
| = | तुल्यतासूचक | समानता, बराबरी या अर्थ बताने में | विद्या + आलय = विद्यालय; जल = पानी |
| … | लोप चिह्न | वाक्य या उद्धरण का कुछ अंश छोड़ देने पर | तुम चिंता मत करो, मैं… |
ध्यान दें: लाघव चिह्न को देवनागरी में शून्य जैसे छोटे वृत्त (°/॰) से लिखा जाता है। व्यवहार में बहुत-से समाचार-पत्र और पुस्तकें डॉ. , प्रो. की तरह बिंदु (.) भी लगाती हैं; परीक्षा में "लाघव चिह्न" का उत्तर वृत्त वाला चिह्न (°) ही है।
4.1 एक चिह्न, कई नाम — पुस्तकों में अंतर
अलग-अलग व्याकरण-पुस्तकें कुछ चिह्नों के नाम अलग देती हैं। परीक्षा में विकल्पों में जो नाम दिया हो, उसे इसी तालिका से मिला लें।
| चिह्न | प्रचलित नाम | अन्य नाम (कुछ पुस्तकों में) |
|---|---|---|
| : | उप विराम | अपूर्ण विराम |
| ! | विस्मयादिबोधक चिह्न | संबोधन चिह्न, विस्मयसूचक चिह्न |
| ^ | हंसपद | त्रुटिपूरक चिह्न, काकपद |
| ° | लाघव चिह्न | संक्षेपसूचक चिह्न |
| „ | पुनरुक्तिसूचक चिह्न | पुनरुक्ति चिह्न |
| = | तुल्यतासूचक चिह्न | समतासूचक / समानतासूचक चिह्न |
| — | निर्देशक चिह्न | निर्देश चिह्न (डैश) |
| … | लोप चिह्न | लोपसूचक चिह्न (कुछ पुस्तकें × × × भी लोप के लिए देती हैं) |
उप विराम और अपूर्ण विराम — दोनों नाम कोलन (:) के लिए चलते हैं, इसलिए इस अध्याय के क्विज़ और कथनों में कोलन को केवल चिह्न से पहचाना गया है, नाम से नहीं। कोलन (:) को विसर्ग (ः) से भी न मिलाएँ — विसर्ग वर्ण का अंश है (दुःख, अतः), विराम चिह्न नहीं।
5. पूर्ण विराम (।)
नियम: जहाँ वाक्य का भाव पूरा हो जाए और पूरा ठहराव हो, वहाँ पूर्ण विराम लगता है। यह साधारण (विधानवाचक), निषेधवाचक, आज्ञावाचक और इच्छावाचक वाक्यों के अंत में आता है। प्रश्न और विस्मय वाले वाक्यों के अंत में इसके स्थान पर ? और ! लगते हैं।
| स्थिति | शुद्ध | अशुद्ध |
|---|---|---|
| साधारण वाक्य | सूर्य पूर्व में उगता है। | सूर्य पूर्व में उगता है |
| आज्ञावाचक वाक्य | दरवाज़ा बंद कर दो। | दरवाज़ा बंद कर दो? |
| निषेधवाचक वाक्य | मैं आज बाज़ार नहीं जाऊँगा। | मैं आज बाज़ार नहीं जाऊँगा, |
| इच्छावाचक वाक्य | भगवान तुम्हें सुखी रखे। | भगवान तुम्हें सुखी रखे? |
| अप्रत्यक्ष प्रश्न | मैंने पूछा कि वह कहाँ गया। | मैंने पूछा कि वह कहाँ गया? |
| प्रश्नवाचक वाक्य | तुम कब आओगे? | तुम कब आओगे। |
- शीर्षक, उपशीर्षक, पुस्तक के नाम और पता लिखते समय अंत में पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता — "मेरा प्रिय त्योहार" (शीर्षक), न कि "मेरा प्रिय त्योहार।"।
6. अल्प विराम (,)
नियम: वाक्य के भीतर जहाँ सबसे कम ठहराव हो, वहाँ अल्प विराम लगता है। हिंदी लेखन में सबसे अधिक प्रयुक्त चिह्न यही है और सबसे अधिक भूलें भी इसी में होती हैं।
| क्र. | प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | एक ही प्रकार के कई शब्द — अंतिम दो के बीच 'और', उससे पहले अल्प विराम नहीं | राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चार भाई थे। |
| 2 | जोड़े में आए शब्द-युग्मों के बीच | सुख और दुःख, लाभ और हानि, जीवन और मृत्यु — सब ईश्वर के हाथ में हैं। |
| 3 | हाँ, नहीं, अच्छा, बस, सचमुच, अतः जैसे शब्दों के बाद, जब वाक्य उनसे शुरू हो | हाँ, मैं कल आऊँगा। / नहीं, यह ठीक नहीं है। |
| 4 | संबोधन के बाद (साधारण स्वर में पुकार) | मोहन, यहाँ आओ। |
| 5 | उपवाक्यों को अलग करने में — जब... तब, यदि... तो, जो... वह | जब वर्षा हुई, तब किसान प्रसन्न हुए। |
| 6 | किसी शब्द या वाक्यांश की व्याख्या बीच में आए | भारत के प्रथम राष्ट्रपति, डॉ° राजेंद्र प्रसाद, बिहार के थे। |
| 7 | तिथि में महीने के बाद और वर्ष से पहले (प्रचलित प्रयोग) | 15 अगस्त, 1947 |
| 8 | पते और स्थान-नाम के अंशों के बीच | सीकर, राजस्थान |
| 9 | प्रत्यक्ष कथन से पहले (कुछ पुस्तकें यहाँ : या — भी लगाती हैं) | उसने कहा, "मैं कल आऊँगा।" |
| 10 | दोहराए गए शब्दों के बीच जब बल देना हो | चलो, चलो, देर हो रही है। |
6.1 अल्प विराम कहाँ नहीं लगता
| नियम | अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|---|
| 'और', 'तथा', 'एवं' से ठीक पहले नहीं | राम, श्याम, और मोहन आए। | राम, श्याम और मोहन आए। |
| 'कि' से पहले नहीं | उसने कहा, कि वह आएगा। | उसने कहा कि वह आएगा। |
| कर्ता और क्रिया के बीच नहीं | मेरा छोटा भाई, विद्यालय जाता है। | मेरा छोटा भाई विद्यालय जाता है। |
| विशेषण और विशेष्य के बीच नहीं | वह एक ईमानदार, व्यक्ति है। | वह एक ईमानदार व्यक्ति है। |
| योजक-युक्त युग्म के बीच नहीं | माता, पिता की सेवा करो। (जब अर्थ 'माता-पिता' हो) | माता-पिता की सेवा करो। |
7. अर्ध विराम (;) और उप विराम / अपूर्ण विराम (:)
7.1 अर्ध विराम (;)
नियम: जहाँ अल्प विराम से अधिक पर पूर्ण विराम से कम ठहराव हो, वहाँ अर्ध विराम लगता है। प्रायः ऐसे स्वतंत्र वाक्यों के बीच, जो भाव में आपस में जुड़े हों।
| प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|
| भाव में जुड़े स्वतंत्र वाक्यों के बीच | सूर्योदय हुआ; अँधेरा दूर हो गया; पक्षी चहचहाने लगे। |
| विरोध या परिणाम दिखाने वाले वाक्यों के बीच | वह परिश्रमी था; फिर भी असफल रहा। |
| ऐसे समूहों के बीच जिनके भीतर पहले से अल्प विराम हों | जयपुर, अजमेर राजस्थान में हैं; भोपाल, इंदौर मध्य प्रदेश में। |
सावधानी: अर्ध विराम के बाद वाक्य अधूरा नहीं छोड़ा जाता और उसके बाद का अंश भी अपने में पूरा वाक्य होता है। साधारण शब्द-सूची में अर्ध विराम नहीं, अल्प विराम लगता है — "आम; केला; अमरूद" अशुद्ध, "आम, केला, अमरूद" शुद्ध।
7.2 उप विराम / अपूर्ण विराम (:)
नियम: जब किसी कथन के बाद उसी बात को स्पष्ट करना हो, उदाहरण देना हो या शीर्षक के बाद विषय लिखना हो, तब कोलन लगता है। नाटक और संवाद-लेखन में वक्ता के नाम के बाद भी यही चिह्न आता है।
| प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|
| नोट, उदाहरण, विषय आदि के बाद | उदाहरण: राम, सीता, जयपुर |
| शीर्षक और उपशीर्षक के बीच | प्रदूषण: कारण और निवारण |
| संवाद में वक्ता के नाम के बाद | राम: तुम कहाँ जा रहे हो? |
| किसी कथन की व्याख्या से पहले | सफलता का एक ही मंत्र है: निरंतर परिश्रम। |
उप विराम (:) और विवरण चिह्न (:-) के प्रयोग कई स्थानों पर मिलते-जुलते हैं। अंतर इतना याद रखें — विवरण चिह्न प्रायः "निम्नलिखित", "इस प्रकार हैं" जैसे शब्दों के बाद लंबी सूची या विवरण से पहले आता है।
8. प्रश्नवाचक (?) और विस्मयादिबोधक (!) चिह्न
8.1 प्रश्नवाचक चिह्न (?)
| नियम | शुद्ध | अशुद्ध |
|---|---|---|
| प्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में | क्या तुमने भोजन कर लिया? | क्या तुमने भोजन कर लिया। |
| प्रश्नसूचक शब्द (कौन, क्या, कब, कहाँ, कैसे, क्यों) वाले प्रश्न | तुम कहाँ रहते हो? | तुम कहाँ रहते हो! |
| अप्रत्यक्ष प्रश्न ('कि' वाले) में नहीं | उसने पूछा कि तुम कहाँ रहते हो। | उसने पूछा कि तुम कहाँ रहते हो? |
| 'क्या' विस्मय में हो तो ? नहीं, ! लगेगा | क्या सुंदर दृश्य है! | क्या सुंदर दृश्य है? |
| बिना प्रश्नसूचक शब्द के, केवल स्वर से प्रश्न | तुम कल आओगे? | तुम कल आओगे। (यदि प्रश्न पूछना हो) |
| प्रत्यक्ष कथन के भीतर प्रश्न | माँ ने पूछा, "तुम कब लौटोगे?" | माँ ने पूछा, "तुम कब लौटोगे।" |
8.2 विस्मयादिबोधक चिह्न (!)
नियम: हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय जैसे मनोभाव प्रकट करने वाले शब्द या वाक्य के बाद, और ऊँचे स्वर में पुकार (संबोधन) के बाद यह चिह्न लगता है। ऐसे शब्द व्याकरण में विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं — विस्तार अव्यय के भेद नोट में है।
| भाव | उदाहरण |
|---|---|
| हर्ष | वाह! तुमने कमाल कर दिया। |
| शोक | हाय! मेरा बेटा घायल हो गया। |
| आश्चर्य | अरे! तुम यहाँ कैसे? |
| घृणा | छि! कितनी गंदगी है। |
| भय | बाप रे! इतना बड़ा साँप! |
| संबोधन | हे प्रभु! मेरी रक्षा करो। |
| विस्मय-भाव वाला पूरा वाक्य | कितना सुंदर फूल है! |
ध्यान दें: साधारण स्वर में पुकारने पर अल्प विराम भी लगता है — "मोहन, यहाँ आओ।" औपचारिक लेखन में "!!!" जैसे दोहरे-तिहरे चिह्न नहीं लगाए जाते। संबोधन बहुवचन की वर्तनी (बच्चो!, भाइयो!) के लिए कारक के भेद नोट का संबोधन कारक वाला भाग देखें।
9. योजक (-) और निर्देशक (—) चिह्न
दोनों आड़ी रेखाएँ हैं, पर काम उलटे हैं — योजक छोटा होता है और जोड़ता है; निर्देशक लंबा होता है और आगे की ओर संकेत करता है।
9.1 योजक चिह्न (-)
| प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|
| द्वंद्व समास के पदों के बीच | माता-पिता, राम-लक्ष्मण, दाल-रोटी, भाई-बहन |
| पुनरुक्त शब्दों के बीच | धीरे-धीरे, घर-घर, बार-बार, साथ-साथ |
| विपरीतार्थक युग्म | रात-दिन, सुख-दुःख, आना-जाना, ऊँच-नीच |
| समानार्थी / सहचर युग्म | धन-दौलत, कपड़े-लत्ते, चाय-पानी |
| तुलना वाले 'सा, से, सी' से पहले | चाँद-सा मुखड़ा, फूल-सी कोमल, तुम-से लोग |
| दो संख्याओं के बीच 'से... तक' के अर्थ में | पृष्ठ 10-15, सन् 1914-1918 |
| 'का, के, की' वाले युग्मों में | ज्यों-का-त्यों, ज्यों-के-त्यों |
समास-विग्रह में योजक-युक्त द्वंद्व की पहचान समास के भेद नोट में है।
9.2 निर्देशक चिह्न (—)
| प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|
| 'जैसे', 'यथा', 'निम्नलिखित' के बाद उदाहरण / सूची से पहले | कारक के आठ भेद हैं — कर्ता, कर्म, करण... |
| किसी बात का स्पष्टीकरण बीच में डालने में | उसका भाई — जो डॉक्टर है — कल आएगा। |
| विचार में अचानक मोड़ आने पर | मैं कहना चाहता था — पर छोड़ो, जाने दो। |
| संवाद में वक्ता के नाम के बाद (कुछ पुस्तकें : भी लगाती हैं) | शिक्षक — तुमने गृहकार्य किया? |
| किसी उद्धरण के बाद लेखक का नाम देने में | "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।" — वृंद |
10. उद्धरण चिह्न और कोष्ठक
10.1 इकहरा (' ') और दुहरा (" ") उद्धरण चिह्न
| बिंदु | इकहरा ' ' | दुहरा " " |
|---|---|---|
| मुख्य प्रयोग | किसी शब्द, उपनाम या रचना के नाम को अलग दिखाना | किसी के कथन को ज्यों-का-त्यों उद्धृत करना |
| उपनाम | सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | — |
| पुस्तक / रचना का नाम | 'रामचरितमानस' तुलसीदास की रचना है। | — |
| विशेष शब्द पर बल | 'ईमानदारी' सबसे बड़ा गुण है। | — |
| प्रत्यक्ष कथन | — | तिलक ने कहा, "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।" |
| उद्धरण के भीतर उद्धरण | भीतर वाला अंश इकहरे में | बाहर वाला अंश दुहरे में |
नियम: प्रत्यक्ष कथन का पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक या विस्मयादिबोधक चिह्न उद्धरण चिह्न के भीतर लगता है — उसने कहा, "मैं जा रहा हूँ।" अप्रत्यक्ष कथन ('कि' वाले) में उद्धरण चिह्न नहीं लगते — उसने कहा कि वह जा रहा है।
10.2 कोष्ठक ( ) [ ] { }
| प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|
| कठिन शब्द का अर्थ या पर्याय | उसके नेत्र (आँखें) सजल हो गए। |
| किसी शब्द / संक्षेप का पूरा रूप | RSMSSB (राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड) |
| क्रम-संख्या या विकल्प-संख्या | (क) संज्ञा (ख) सर्वनाम (ग) विशेषण |
| नाटक में अभिनय-निर्देश | राम — (हँसते हुए) अच्छा, यही बात है! |
| गणित में कोष्ठक के भीतर कोष्ठक | [ 2 × { 3 + ( 4 − 1 ) } ] |
कोष्ठक के भीतर लिखा अंश हटा दें तो भी वाक्य का अर्थ और व्याकरण पूरा रहना चाहिए — "उसके नेत्र सजल हो गए।" यही कोष्ठक के सही प्रयोग की कसौटी है।
11. अन्य चिह्न — हंसपद, लाघव, विवरण, पुनरुक्ति, तुल्यता, लोप
| चिह्न | नियम | शुद्ध प्रयोग | भूल |
|---|---|---|---|
| हंसपद (^) | लिखते समय छूटा शब्द पंक्ति के ऊपर लिखें और जहाँ उसे आना है, वहाँ नीचे ^ लगाएँ | राम ^ गया। (ऊपर 'बाज़ार' — राम बाज़ार गया।) | छूटा शब्द पंक्ति के अंत में अलग से जोड़ देना |
| लाघव (°) | शब्द का पहला अंश लिखकर शेष के स्थान पर चिह्न | डॉ°, पं° जवाहरलाल नेहरू, प्रो° (प्रोफ़ेसर), कृ° पृ° उ° (कृपया पृष्ठ उलटिए) | पूरा शब्द लिखकर भी चिह्न लगाना — "डॉक्टर°" |
| विवरण (:-) | आगे आने वाले विस्तृत विवरण / सूची से पहले | राजस्थान के संभाग इस प्रकार हैं :- जयपुर, जोधपुर... | साधारण वाक्य के बीच लगाना |
| पुनरुक्तिसूचक („) | सूची में ऊपर वाला शब्द नीचे दोहराना हो तो उसके ठीक नीचे | श्री मोहनलाल शर्मा / „ सोहनलाल शर्मा | पहली पंक्ति में ही लगाना |
| तुल्यतासूचक (=) | बराबरी, अर्थ या परिणाम बताने में | सूर्य = रवि; 2 + 2 = 4; हिम + आलय = हिमालय | साधारण वाक्य में "है" के स्थान पर लगाना |
| लोप (…) | बात अधूरी छोड़ने या उद्धरण का अंश छोड़ने पर | अगर तुमने फिर ऐसा किया तो… | पूरे वाक्य के बाद अनावश्यक रूप से लगाना |
12. विराम चिह्न शुद्धि — अभ्यास तालिका (30 वाक्य)
| क्र. | अशुद्ध | शुद्ध | कारण |
|---|---|---|---|
| 1 | तुम कहाँ जा रहे हो। | तुम कहाँ जा रहे हो? | प्रत्यक्ष प्रश्न |
| 2 | उसने पूछा कि तुम कौन हो? | उसने पूछा कि तुम कौन हो। | अप्रत्यक्ष प्रश्न |
| 3 | क्या सुंदर दृश्य है? | क्या सुंदर दृश्य है! | 'क्या' विस्मय में |
| 4 | राम, श्याम, और मोहन आए। | राम, श्याम और मोहन आए। | 'और' से पहले अल्प विराम नहीं |
| 5 | उसने कहा, कि मैं थक गया हूँ। | उसने कहा कि मैं थक गया हूँ। | 'कि' से पहले अल्प विराम नहीं |
| 6 | हाँ मैं कल आऊँगा। | हाँ, मैं कल आऊँगा। | 'हाँ' के बाद अल्प विराम |
| 7 | मोहन यहाँ आओ। | मोहन, यहाँ आओ। | संबोधन के बाद अल्प विराम |
| 8 | वाह, कितना सुंदर गीत है। | वाह! कितना सुंदर गीत है। | हर्षसूचक शब्द के बाद ! |
| 9 | हाय। मेरा सब कुछ लुट गया। | हाय! मेरा सब कुछ लुट गया। | शोकसूचक शब्द के बाद ! |
| 10 | माता पिता की आज्ञा मानो। | माता-पिता की आज्ञा मानो। | द्वंद्व युग्म में योजक |
| 11 | वह धीरे धीरे चलता है। | वह धीरे-धीरे चलता है। | पुनरुक्त शब्द में योजक |
| 12 | उसका चाँद सा मुख है। | उसका चाँद-सा मुख है। | 'सा' से पहले योजक |
| 13 | तुम्हारा नाम क्या है। | तुम्हारा नाम क्या है? | प्रश्नसूचक शब्द वाला प्रश्न |
| 14 | शाबाश तुमने बहुत अच्छा किया। | शाबाश! तुमने बहुत अच्छा किया। | प्रशंसा / हर्ष के शब्द के बाद ! |
| 15 | गांधीजी ने कहा करो या मरो। | गांधीजी ने कहा, "करो या मरो।" | प्रत्यक्ष कथन में दुहरा उद्धरण |
| 16 | सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" छायावादी कवि थे। | सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' छायावादी कवि थे। | उपनाम इकहरे उद्धरण में |
| 17 | मेरा भाई, कल जयपुर जाएगा। | मेरा भाई कल जयपुर जाएगा। | कर्ता-क्रिया के बीच अल्प विराम नहीं |
| 18 | आम; केला; अमरूद मुझे पसंद हैं। | आम, केला और अमरूद मुझे पसंद हैं। | शब्द-सूची में अल्प विराम |
| 19 | क्या तुम मेरे साथ चलोगे। | क्या तुम मेरे साथ चलोगे? | 'क्या' से आरंभ प्रश्न |
| 20 | अरे तुम कब आए? | अरे! तुम कब आए? | आश्चर्यसूचक शब्द के बाद ! |
| 21 | छि कितनी गंदी आदत है। | छि! कितनी गंदी आदत है। | घृणासूचक शब्द के बाद ! |
| 22 | भगवान तुम्हारा भला करे? | भगवान तुम्हारा भला करे। | इच्छावाचक वाक्य में पूर्ण विराम |
| 23 | कृपया शांत रहिए? | कृपया शांत रहिए। | आज्ञा / अनुरोध में पूर्ण विराम |
| 24 | नहीं मैं यह काम नहीं करूँगा। | नहीं, मैं यह काम नहीं करूँगा। | 'नहीं' के बाद अल्प विराम |
| 25 | वह ईमानदार, लड़का है। | वह ईमानदार लड़का है। | विशेषण-विशेष्य के बीच अल्प विराम नहीं |
| 26 | सुख दुःख जीवन के अंग हैं। | सुख-दुःख जीवन के अंग हैं। | विपरीतार्थक युग्म में योजक |
| 27 | माँ ने पूछा, "खाना खाया।" | माँ ने पूछा, "खाना खाया?" | उद्धरण के भीतर प्रश्न |
| 28 | उफ़ कितनी गर्मी है। | उफ़! कितनी गर्मी है। | पीड़ा / खीज के शब्द के बाद ! |
| 29 | बस अब और नहीं। | बस, अब और नहीं। | 'बस' के बाद अल्प विराम |
| 30 | राम ने पूछा, "तुम कहाँ थे"? | राम ने पूछा, "तुम कहाँ थे?" | प्रश्नवाचक उद्धरण के भीतर |
13. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: अल्प विराम का स्थान — आदेश उलट जाता है
"रोको, मत जाने दो" = रोक लो। "रोको मत, जाने दो" = जाने दो। प्रश्न में आशय पूछा जाए तो अल्प विराम से पहले वाला अंश एक आदेश और बाद वाला दूसरा आदेश मानकर पढ़ें।
Trap 2: अप्रत्यक्ष प्रश्न पर ? नहीं
"उसने पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो?" — अशुद्ध। 'कि' के बाद प्रश्न अप्रत्यक्ष हो गया; पूरा वाक्य अब सूचना है — "उसने पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो।"
Trap 3: 'क्या' हर बार प्रश्न नहीं
"क्या सुंदर दृश्य है!", "क्या बात है!" — यहाँ 'क्या' आश्चर्य / प्रशंसा बताता है, उत्तर नहीं माँगता; इसलिए ! लगेगा। "क्या तुम आओगे?" — उत्तर माँगता है; इसलिए ?।
Trap 4: 'और' तथा 'कि' से पहले अल्प विराम नहीं
अंग्रेज़ी की तरह "A, B, and C" लिखने की आदत हिंदी में अशुद्ध मानी जाती है — "राम, श्याम और मोहन"। इसी प्रकार "उसने कहा कि..." में 'कि' से पहले चिह्न नहीं लगता।
Trap 5: योजक (-) बनाम निर्देशक (—)
"माता-पिता", "धीरे-धीरे" — छोटी रेखा, जोड़ने वाली — योजक। "भेद हैं — ..." — लंबी रेखा, आगे की ओर संकेत करने वाली — निर्देशक। विकल्पों में दोनों साथ दिए जाते हैं।
Trap 6: इकहरा बनाम दुहरा उद्धरण
उपनाम, पुस्तक का नाम, किसी शब्द पर बल → इकहरा ('निराला', 'गोदान')। किसी के कहे शब्द ज्यों-के-त्यों → दुहरा ("करो या मरो")।
Trap 7: कोलन (:) और विसर्ग (ः)
"दुःख", "अतः", "प्रातः" में दिखने वाले दो बिंदु विसर्ग हैं — वर्ण का भाग। विराम चिह्न कोलन (:) शब्द के बाद, स्थान छोड़कर, स्पष्टीकरण से पहले आता है। वर्तनी के प्रश्नों में यह अंतर शब्द शुद्धि (वर्तनी) नोट से जुड़ता है।
Trap 8: लाघव (°) बनाम हंसपद (^)
दोनों छोटे चिह्न हैं, पर काम अलग — लाघव शब्द छोटा करता है (डॉ°), हंसपद छूटा शब्द जोड़ता है (^)। नाम याद रखने का संकेत: हंस के पैर जैसा आकार — हंसपद।
Trap 9: संबोधन में , या !
"मोहन, यहाँ आओ" — साधारण पुकार, अल्प विराम। "हे भगवान! बचाओ" — भावपूर्ण / ऊँचे स्वर में पुकार, विस्मयादिबोधक। दोनों शुद्ध हैं; प्रश्न में भाव देखकर चुनें।
14. Most-Asked रिवीज़न तालिका (40 स्थितियाँ)
| क्र. | स्थिति / वाक्य | चिह्न |
|---|---|---|
| 1 | साधारण कथन का अंत — "वह पढ़ रहा है_" | । पूर्ण विराम |
| 2 | आज्ञा का अंत — "दरवाज़ा खोलो_" | । पूर्ण विराम |
| 3 | इच्छा का अंत — "ईश्वर तुम्हें सफल करे_" | । पूर्ण विराम |
| 4 | अप्रत्यक्ष प्रश्न — "उसने पूछा कि मैं कब आऊँगा_" | । पूर्ण विराम |
| 5 | प्रत्यक्ष प्रश्न — "तुम कब आओगे_" | ? प्रश्नवाचक |
| 6 | 'क्या' से आरंभ प्रश्न — "क्या तुमने खाना खाया_" | ? प्रश्नवाचक |
| 7 | विस्मय वाला 'क्या' — "क्या सुंदर फूल है_" | ! विस्मयादिबोधक |
| 8 | हर्ष — "वाह_" | ! विस्मयादिबोधक |
| 9 | शोक — "हाय_" | ! विस्मयादिबोधक |
| 10 | घृणा — "छि_" | ! विस्मयादिबोधक |
| 11 | भावपूर्ण संबोधन — "हे प्रभु_" | ! विस्मयादिबोधक |
| 12 | साधारण संबोधन — "रमेश_ इधर आओ।" | , अल्प विराम |
| 13 | 'हाँ' / 'नहीं' के बाद | , अल्प विराम |
| 14 | शब्द-सूची — "आम_ केला और अमरूद" | , अल्प विराम |
| 15 | जब... तब उपवाक्य के बीच | , अल्प विराम |
| 16 | तिथि में वर्ष से पहले — "26 जनवरी_ 1950" | , अल्प विराम |
| 17 | पता — "अजमेर_ राजस्थान" | , अल्प विराम |
| 18 | भाव में जुड़े स्वतंत्र वाक्य — "सूर्योदय हुआ_ अँधेरा मिटा।" | ; अर्ध विराम |
| 19 | अल्प विराम से अधिक, पूर्ण विराम से कम ठहराव | ; अर्ध विराम |
| 20 | "नोट_ सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।" | : कोलन |
| 21 | शीर्षक-उपशीर्षक — "पर्यावरण_ समस्या और समाधान" | : कोलन |
| 22 | "निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए_" (विस्तृत सूची से पहले) | :- विवरण चिह्न |
| 23 | द्वंद्व युग्म — "भाई_बहन" | - योजक |
| 24 | पुनरुक्त शब्द — "घर_घर" | - योजक |
| 25 | 'सा, सी, से' से पहले — "फूल_सी" | - योजक |
| 26 | "जैसे _ राम, श्याम" (उदाहरण से पहले) | — निर्देशक |
| 27 | उद्धरण के बाद रचनाकार का नाम | — निर्देशक |
| 28 | कवि का उपनाम — 'दिनकर' | ' ' इकहरा उद्धरण |
| 29 | पुस्तक का नाम — 'गोदान' | ' ' इकहरा उद्धरण |
| 30 | किसी के कहे शब्द ज्यों-के-त्यों | " " दुहरा उद्धरण |
| 31 | कठिन शब्द का अर्थ — "पावक (आग)" | ( ) कोष्ठक |
| 32 | नाटक में अभिनय-निर्देश — "(क्रोध से)" | ( ) कोष्ठक |
| 33 | छूटा हुआ शब्द जोड़ना | ^ हंसपद |
| 34 | डॉक्टर → डॉ_ | ° लाघव चिह्न |
| 35 | पंडित → पं_ | ° लाघव चिह्न |
| 36 | सूची में ऊपर का शब्द नीचे दोहराना | „ पुनरुक्तिसूचक |
| 37 | "जल _ पानी" (अर्थ / समानता) | = तुल्यतासूचक |
| 38 | "विद्या + आलय _ विद्यालय" | = तुल्यतासूचक |
| 39 | अधूरी छोड़ी बात — "अगर तुमने फिर ऐसा किया तो_" | … लोप चिह्न |
| 40 | उद्धरण का छोड़ा गया अंश | … लोप चिह्न |
15. CET में विराम चिह्न कैसे पूछे जाते हैं
राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में विराम चिह्न के प्रश्न प्रायः इन ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचे स्थिर रहते हैं:
- चिह्न → नाम: "(^) / (°) / („) चिह्न का नाम है?" — Section 4 की तालिका।
- प्रयोग → चिह्न: "किसी शब्द का संक्षिप्त रूप लिखने के लिए कौन-सा चिह्न?" — लाघव।
- शुद्ध वाक्य छाँटना: चार वाक्य, केवल विराम चिह्नों में अंतर — प्रश्न, अप्रत्यक्ष प्रश्न, 'और' व 'कि' वाले नियम जाँचें।
- अर्थ-परिवर्तन: "रोको मत, जाने दो" जैसा वाक्य देकर आशय पूछना।
- रिक्त स्थान: "हाय___ अब क्या होगा" — भाव पहचानकर चिह्न।
- सैद्धांतिक: हिंदी का अपना चिह्न कौन-सा (पूर्ण विराम), सबसे कम ठहराव (अल्प विराम)।
रणनीति: विकल्प पढ़ते समय वाक्य को मन में बोलकर देखें — कहाँ रुकते हैं, स्वर उठता है (प्रश्न) या भाव फूटता है (विस्मय)। जो चिह्न आपके स्वाभाविक ठहराव से मेल खाए, वही प्रायः सही होता है; फिर 'और', 'कि' और अप्रत्यक्ष प्रश्न वाले नियमों से पुष्टि करें।
16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. ठहराव की सीढ़ी: "अल्प (,) → अर्ध (;) → पूर्ण (।)" — छोटा, मझला, पूरा ठहराव।
2. एक देसी, बाकी विदेशी: पूर्ण विराम (।) भारतीय 'दंड' है; शेष अधिकांश चिह्न अंग्रेज़ी से आए।
3. योजक जोड़े, निर्देशक दिखाए: छोटी रेखा (-) जोड़ती है, लंबी रेखा (—) आगे की ओर इशारा करती है।
4. 'कि' और 'और' — अल्प विराम से दूर: दोनों से ठीक पहले अल्प विराम नहीं।
5. 'कि' आया, प्रश्न गया: "पूछा कि..." वाले वाक्य के अंत में पूर्ण विराम।
6. हंस का पैर (^) = छूटा शब्द जोड़ो; छोटा गोला (°) = शब्द छोटा करो।
7. एक कोट — नाम; दो कोट — कथन: 'निराला', 'गोदान' इकहरे में; "करो या मरो" दुहरे में।
17. कथन अभ्यास
पूर्ण विराम (।) हिंदी लेखन का अपना चिह्न है; अधिकांश अन्य विराम चिह्न अंग्रेज़ी से लिए गए हैं। — सही।
अप्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न लगता है। — गलत (पूर्ण विराम लगता है)।
'राम, श्याम, और मोहन आए' में विराम चिह्नों का प्रयोग शुद्ध है। — गलत ('और' से पहले अल्प विराम नहीं)।
शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाने के लिए लाघव चिह्न (°) का प्रयोग होता है। — सही।
'माता-पिता' में प्रयुक्त चिह्न निर्देशक चिह्न है। — गलत (योजक चिह्न)।
'क्या सुंदर दृश्य है' के अंत में विस्मयादिबोधक चिह्न लगेगा। — सही।
किसी के कथन को ज्यों-का-त्यों लिखने के लिए दुहरा उद्धरण चिह्न लगता है। — सही।
'रोको मत, जाने दो' का अर्थ है कि जाने वाले को रोक लिया जाए। — गलत (उसे जाने दिया जाए)।
अर्ध विराम (;) अल्प विराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव बताता है। — सही।
18. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
- विराम चिह्न = लिखित भाषा में ठहराव और भाव दिखाने वाले चिह्न
- पूर्ण विराम (।) भारतीय दंड-परंपरा से; बाकी अधिकांश अंग्रेज़ी से
- ठहराव: अल्प (,) से कम, अर्ध (;) बीच में, पूर्ण (।) सबसे अधिक
- "रोको, मत जाने दो" = रोक लो; "रोको मत, जाने दो" = जाने दो
- 'और' व 'कि' से ठीक पहले अल्प विराम नहीं
- हाँ, नहीं, बस, अच्छा और साधारण संबोधन के बाद अल्प विराम
- प्रत्यक्ष प्रश्न ?; अप्रत्यक्ष प्रश्न ('पूछा कि') ।
- हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय, भावपूर्ण संबोधन → !; विस्मय वाला 'क्या' → !
- योजक (-) जोड़ता है: माता-पिता, धीरे-धीरे, चाँद-सा; निर्देशक (—) संकेत करता है
- इकहरा ' ' उपनाम / रचना-नाम; दुहरा " " ज्यों-का-त्यों कथन
- हंसपद ^ छूटा शब्द; लाघव ° संक्षेप; „ पुनरुक्ति; = तुल्यता; … लोप; :- विवरण
- कोलन (:) के नाम — उप विराम / अपूर्ण विराम; विसर्ग (ः) से अलग
19. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में विकल्प केवल चिह्नों में भिन्न हों, वहाँ हर वाक्य को बोलकर पढ़ें और Section 12 की शुद्धि तालिका के नियम से मिलाएँ। विराम चिह्न, वाक्य-शुद्धि और वर्तनी के मिश्रित अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।
20. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
विराम चिह्न छोटे दिखते हैं, पर वाक्य का अर्थ इन्हीं पर टिका है — एक अल्प विराम खिसकते ही "रोको" का आदेश "जाने दो" में बदल जाता है। परीक्षा के लिए तीन बातें पक्की करें: ठहराव का क्रम (अल्प, अर्ध, पूर्ण), प्रश्न और विस्मय का अंतर (अप्रत्यक्ष प्रश्न और विस्मय वाले 'क्या' सहित), और अल्प विराम के निषेध ('और' तथा 'कि' से पहले नहीं)। बाकी चिह्न — हंसपद, लाघव, पुनरुक्ति, तुल्यता, लोप — नाम और प्रयोग की सीधी जोड़ी हैं, जिन्हें Section 4 की तालिका से दोहराना पर्याप्त है। जहाँ पुस्तकें नाम में भिन्न हैं (कोलन के लिए उप विराम / अपूर्ण विराम), वहाँ चिह्न की आकृति और प्रयोग से उत्तर तय करें।
, अल्प · ; अर्ध · । पूर्ण | ? प्रत्यक्ष प्रश्न · 'पूछा कि' = । | ! भाव व संबोधन | - जोड़े · — दिखाए | ' ' नाम · " " कथन | ^ जोड़ो · ° छोटा करो · „ दोहराओ · … छोड़ो
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“विराम चिह्न — पूर्ण विराम से लोप चिह्न तक, प्रयोग-नियम और 30 शुद्धि वाक्य — CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
लिखते समय वाक्य के बीच या अंत में ठहराव और भाव दिखाने के लिए लगाए जाने वाले चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं। 'विराम' का अर्थ है ठहराव। जैसे पूर्ण विराम (।), अल्प विराम (,), प्रश्नवाचक (?) और विस्मयादिबोधक (!)।
पूर्ण विराम (।), अल्प विराम (,), अर्ध विराम (;), उप विराम (:), प्रश्नवाचक (?), विस्मयादिबोधक (!), योजक (-), निर्देशक (—), इकहरा व दुहरा उद्धरण (' ' / “ ”), कोष्ठक, हंसपद (^), लाघव (°), विवरण (:-), पुनरुक्तिसूचक („), तुल्यतासूचक (=) और लोप चिह्न (…)।
पूर्ण विराम (।) भारतीय लेखन-परंपरा का अपना चिह्न है, जो संस्कृत में 'दंड' कहलाता था। हिंदी के अधिकांश अन्य विराम चिह्न अंग्रेज़ी लेखन-पद्धति से लिए गए हैं।
'रोको, मत जाने दो' का अर्थ है कि उसे रोक लो, जाने मत दो। 'रोको मत, जाने दो' का अर्थ है कि उसे मत रोको, जाने दो। केवल अल्प विराम का स्थान बदलने से अर्थ उलट जाता है।
अल्प विराम (,) सबसे कम ठहराव बताता है और सूची, संबोधन तथा 'हाँ/नहीं' के बाद लगता है। अर्ध विराम (;) अल्प विराम से अधिक और पूर्ण विराम से कम ठहराव बताता है, जैसे 'सूर्योदय हुआ; अँधेरा दूर हो गया।'
अप्रत्यक्ष प्रश्न के अंत में पूर्ण विराम लगता है, प्रश्नवाचक चिह्न नहीं। जैसे 'उसने पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो।' प्रत्यक्ष प्रश्न 'तुम कहाँ जा रहे हो?' में प्रश्नवाचक चिह्न लगता है।
योजक (-) छोटी रेखा है जो दो शब्दों को जोड़ती है, जैसे माता-पिता, धीरे-धीरे, चाँद-सा। निर्देशक (—) लंबी रेखा है जो आगे आने वाली सूची, उदाहरण या स्पष्टीकरण की ओर संकेत करती है, जैसे 'संज्ञा के भेद हैं — ...'।
इकहरा उद्धरण (' ') उपनाम, पुस्तक या रचना के नाम और किसी शब्द पर बल देने में लगता है, जैसे 'निराला', 'गोदान'। दुहरा उद्धरण (“ ”) किसी के कहे शब्दों को ज्यों-का-त्यों लिखने में लगता है, जैसे “करो या मरो।”
हंसपद (^) लिखते समय छूटा हुआ शब्द जोड़ने के लिए लगाया जाता है; छूटा शब्द ऊपर लिखकर उसके स्थान पर नीचे ^ लगाते हैं। लाघव चिह्न (°) किसी शब्द का संक्षिप्त रूप दिखाता है, जैसे डॉ°, पं°, प्रो°।
दोनों नाम प्रचलित हैं; कुछ पुस्तकें इसे उप विराम और कुछ अपूर्ण विराम कहती हैं। इसका प्रयोग किसी बात को आगे स्पष्ट करने, 'नोट:' या 'उदाहरण:' के बाद और संवाद में वक्ता के नाम के बाद होता है। इसे विसर्ग (ः) से अलग समझें।
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