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हिंदी व्याकरण

अव्यय के भेद और उदाहरण — क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक व निपात — CET

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
22 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल के कारण कभी नहीं बदलता, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं (अ + व्यय = जिसका व्यय या विकार न हो)। "लड़का धीरे चलता है", "लड़की धीरे चलती है", "लड़के धीरे चलते हैं" — क्रिया बदली, पर 'धीरे' वही रहा। कामता प्रसाद गुरु की परंपरा में अव्यय के चार भेद हैं — क्रिया-विशेषण (क्रिया की विशेषता: कब, कहाँ, कितना, कैसे), संबंधबोधक (संज्ञा / सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध दूसरे शब्दों से बताए: के साथ, के बिना, की ओर), समुच्चयबोधक (शब्दों या वाक्यों को जोड़े: और, परंतु, या, क्योंकि) और विस्मयादिबोधक (मन के भाव प्रकट करे: वाह!, हाय!, छि!)। कई आधुनिक पुस्तकें बल देने वाले शब्दों — ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़, केवल — को निपात नाम से अलग, पाँचवाँ भेद मानती हैं। परीक्षा का मूल सूत्र: शब्द से नहीं, उसके काम से भेद तय करें — "वह बाहर गया" में 'बाहर' क्रिया-विशेषण है, पर "घर के बाहर" में संबंधबोधक।


संक्षिप्त उत्तर

भेदकामपहचानउदाहरण
क्रिया-विशेषणक्रिया की विशेषताकब? कहाँ? कितना? कैसे?वह तेज़ दौड़ता है।
संबंधबोधकसंज्ञा / सर्वनाम का संबंध दूसरे शब्दों सेप्रायः संज्ञा + के / की / से के बादघर के सामने पेड़ है।
समुच्चयबोधकशब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़नादो अंशों के बीच, किसी संज्ञा से बँधा नहींराम और श्याम आए।
विस्मयादिबोधकहर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा आदि भावबाद में ! चिह्न; वाक्य से व्याकरणिक संबंध नहींवाह! क्या बात है।
निपात (कुछ पुस्तकों में अलग भेद)किसी शब्द पर बल देनाहटाने पर अर्थ बचा रहे, केवल बल घटेमैं ही जाऊँगा।
तथ्यउत्तर
अव्यय का दूसरा नामअविकारी शब्द
किन कारणों से रूप नहीं बदलतालिंग, वचन, कारक, काल
कामता प्रसाद गुरु के अनुसार भेद4 — क्रियाविशेषण, संबंधसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक
निपात को अलग भेद मानने पर5 भेद
क्रिया-विशेषण के अर्थ-आधारित भेद4 — कालवाचक, स्थानवाचक, परिमाणवाचक, रीतिवाचक
समुच्चयबोधक के मुख्य भेद2 — समानाधिकरण और व्यधिकरण
'बाहर', 'पास', 'ऊपर' अकेलेक्रिया-विशेषण
'के बाहर', 'के पास', 'के ऊपर'संबंधबोधक

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

अव्यय हिंदी व्याकरण के शब्द-विचार खंड का अंतिम अध्याय है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया — ये चार विकारी शब्द हैं; अव्यय पाँचवाँ, अविकारी वर्ग है। प्रश्न सीधे भी आते हैं ("'परंतु' कौन-सा अव्यय है?") और भ्रमित युग्मों के रूप में भी ("किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक है?")। क्रिया-विशेषण का आधार विशेषण और क्रिया के भेद नोट में है; यह नोट उसी को आगे बढ़ाकर पूरे अव्यय वर्ग को जोड़ता है।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • CET 12th व Graduation स्तर
  • पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
  • REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
  • राजस्थान पुलिस SI व RAS (हिंदी व्याकरण भाग)
  • RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. "रेखांकित शब्द कौन-सा अव्यय है?" — सबसे सामान्य रूप
  2. "'वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है' में क्रिया-विशेषण का भेद?" — काल / स्थान / परिमाण / रीति
  3. "'परंतु' किस प्रकार का समुच्चयबोधक है?" — संयोजक, विभाजक, विरोधदर्शक, परिणामदर्शक
  4. "किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक है?" — एक शब्द, चार वाक्य
  5. "'छि!' किस भाव का सूचक है?" — विस्मयादिबोधक के भाव
  6. "निम्नलिखित में से कौन-सा संबंधबोधक नहीं है?" — सूची में एक समुच्चयबोधक
  7. विशेषण बनाम क्रिया-विशेषण — "तेज़ घोड़ा" और "तेज़ दौड़ता"

3. अव्यय: परिभाषा और पहचान

परिभाषा: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक और काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, वे अव्यय (अविकारी) कहलाते हैं। विकारी शब्द वाक्य के अनुसार रूप बदलते हैं — लड़का / लड़की / लड़के, अच्छा / अच्छी / अच्छे, जाता / जाती / जाते; अव्यय हर स्थिति में एक-सा रहता है।

बदलाव का कारणविकारी शब्द बदलाअव्यय वही रहा
लिंगलड़का जाता है / लड़की जाती हैलड़का अभी जाता है / लड़की अभी जाती है
वचनबच्चा खेलता है / बच्चे खेलते हैंबच्चा बाहर खेलता है / बच्चे बाहर खेलते हैं
कारकलड़का आया / लड़के ने कहालड़का भी आया / लड़के ने भी कहा
कालवह पढ़ता है / पढ़ा / पढ़ेगावह ध्यान से पढ़ता है / पढ़ा / पढ़ेगा

3.1 अव्यय के भेद — चार या पाँच?

परंपराभेद
कामता प्रसाद गुरु ("हिंदी व्याकरण")4 — क्रियाविशेषण, संबंधसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक; ही, भी, तो जैसे शब्द क्रियाविशेषण के अंतर्गत
अनेक आधुनिक स्कूली व प्रतियोगी पुस्तकें5 — उपर्युक्त चार + निपात

दोनों मत प्रचलित हैं, इसलिए "अव्यय के कितने भेद?" का उत्तर प्रश्न के विकल्पों और संदर्भ-पुस्तक से तय होता है। इस नोट के क्विज़ और कथनों में यह संख्या नहीं पूछी गई है। गुरु 'संबंधसूचक' शब्द का प्रयोग करते हैं; अधिकांश पुस्तकों में यही 'संबंधबोधक' कहलाता है — दोनों एक ही हैं।


4. क्रिया-विशेषण

नियम: जो अव्यय क्रिया की विशेषता बताए — कब, कहाँ, कितना या कैसे हुई — वह क्रिया-विशेषण है। अर्थ के आधार पर इसके चार भेद हैं; हर भेद के छोटे उपभेद भी पुस्तकों में मिलते हैं।

4.1 कालवाचक (कब?)

उपभेदशब्दउदाहरण
समय-बिंदुआज, कल, परसों, अभी, अब, तब, जब, तुरंत, सवेरे, पहले, बाद मेंवह कल आएगा।
अवधिसदा, सदैव, दिनभर, आजकल, लगातार, निरंतर, अब तकवह दिनभर पढ़ता रहा।
बारंबारताप्रतिदिन, रोज़, बार-बार, हर बार, कई बार, कभी-कभीवह प्रतिदिन व्यायाम करता है।

4.2 स्थानवाचक (कहाँ?)

उपभेदशब्दउदाहरण
स्थितिवाचकयहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, अंदर, बाहर, भीतर, पास, दूर, सामने, आगे, पीछेबच्चे बाहर खेल रहे हैं।
दिशावाचकइधर, उधर, किधर, दाएँ, बाएँ, चारों ओरवह इधर आया।

4.3 परिमाणवाचक (कितना?)

उपभेदशब्दउदाहरण
अधिकताबोधकबहुत, अधिक, खूब, अत्यंत, अतिवह बहुत बोलता है।
न्यूनताबोधककम, थोड़ा, ज़रा, कुछ, किंचित्थोड़ा खाओ।
पर्याप्तिबोधकबस, काफ़ी, यथेष्ट, भरपूरवह काफ़ी पढ़ चुका है।
तुलनाबोधकइतना, उतना, जितना, कितना, अधिक, कमवह उतना नहीं दौड़ सकता।
श्रेणीबोधकथोड़ा-थोड़ा, क्रमशः, बारी-बारी से, एक-एक करकेदवा थोड़ा-थोड़ा करके पियो।

4.4 रीतिवाचक (कैसे?)

उपभेद / भावशब्दउदाहरण
प्रकार / ढंगधीरे, धीरे-धीरे, तेज़, ध्यानपूर्वक, ऐसे, वैसे, अचानक, जल्दी, सहसावह ध्यानपूर्वक पढ़ता है।
निश्चयअवश्य, ज़रूर, सचमुच, निस्संदेह, बेशकमैं अवश्य आऊँगा।
अनिश्चयशायद, संभवतः, कदाचित्शायद वह आए।
स्वीकारहाँ, जी, जी हाँ, ठीकहाँ, मैं चलूँगा।
निषेधनहीं, न, मतवहाँ मत जाओ।
कारणक्यों, किसलिएतुम क्यों रो रहे हो?

रीतिवाचक सबसे बड़ा वर्ग है — जो शब्द काल, स्थान या परिमाण में न आए और क्रिया का ढंग, निश्चय, निषेध आदि बताए, वह प्रायः इसी में गिना जाता है। कुछ पुस्तकें 'नहीं, न, मत' को निपात में भी रखती हैं।

4.5 रूप (रचना) के आधार पर — मूल, यौगिक, स्थानीय

भेदपहचानउदाहरण
मूलजो किसी दूसरे शब्द से न बने होंदूर, ठीक, अचानक, फिर, नहीं
यौगिकसंज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया या अव्यय में प्रत्यय / शब्द जोड़कर बनेरातभर, ध्यानपूर्वक, प्रेम से, चुपके से, देखते-देखते, यहाँ तक
स्थानीयअन्य शब्द-भेद जो बिना रूप बदले किसी विशेष स्थान पर आकर क्रिया-विशेषण का काम करेंवह अपना सिर पढ़ेगा। (अर्थ — कुछ नहीं पढ़ेगा)

रूप के आधार वाला वर्गीकरण कामता प्रसाद गुरु की परंपरा का है; परीक्षा में अर्थ वाले चार भेद कहीं अधिक पूछे जाते हैं। "प्रतिदिन", "यथाशक्ति", "आजन्म" जैसे क्रिया-विशेषण समास की दृष्टि से अव्ययीभाव भी हैं — देखें समास के भेद।


5. संबंधबोधक

नियम: जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताए, वह संबंधबोधक है। अधिकांश संबंधबोधक से पहले के, की या से आता है — "पेड़ के नीचे", "घर की ओर", "गाँव से दूर"।

अर्थ के आधार परसंबंधबोधकउदाहरण
कालवाचकके पहले, के बाद, के उपरांत, के पश्चात्भोजन के बाद टहलो।
स्थानवाचकके ऊपर, के नीचे, के पास, के अंदर, के बाहर, के सामने, के पीछे, के बीच, के निकटमेज़ के नीचे बिल्ली है।
दिशावाचककी ओर, की तरफ़, के आर-पारवह घर की ओर चला।
साधनवाचकके सहारे, के माध्यम से, के ज़रिएवह छड़ी के सहारे चलता है।
कारण / हेतुवाचकके कारण, के मारे, की वजह सेवर्षा के कारण खेल रुका।
विषयवाचकके बारे में, के विषय में, के संबंध मेंमुझे उसके बारे में बताओ।
व्यतिरेकवाचकके बिना, के सिवा, के अतिरिक्त, के अलावापानी के बिना जीवन नहीं।
विनिमयवाचकके बदले, की जगह, के स्थान परउसने रुपये के बदले अनाज लिया।
सादृश्यवाचकके समान, की तरह, की भाँति, के जैसावह शेर की तरह लड़ा।
विरोधवाचकके विरुद्ध, के विपरीत, के ख़िलाफ़वह नियम के विरुद्ध गया।
साहचर्यवाचकके साथ, के संग, समेत, सहितवह मित्र के साथ आया।
तुलनावाचककी अपेक्षा, से बढ़कर, के आगेराम श्याम की अपेक्षा तेज़ है।

5.1 प्रयोग के आधार पर — संबद्ध और अनुबद्ध

भेदपहचानउदाहरण
संबद्धसंज्ञा + विभक्ति (के / की / से) के बादधन के बिना, पूजा से पहले
अनुबद्धसंज्ञा के विकृत रूप के बाद, बिना अलग विभक्ति केकिनारे तक, सखियों सहित, पुत्रों समेत

5.2 परसर्ग और संबंधबोधक

ने, को, से, का-के-की, में, पर — ये कारक के परसर्ग (विभक्ति-चिह्न) हैं और कारक के अध्याय में पढ़े जाते हैं। के साथ, के बिना, की ओर, के पास जैसे शब्द-समूह संबंधबोधक अव्यय हैं, जिनमें 'के / की' परसर्ग और उसके बाद अव्यय आता है। परसर्गों का विस्तार कारक के भेद और विभक्ति चिह्न नोट में है।


6. समुच्चयबोधक

नियम: जो अव्यय दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़े या अलग करे, वह समुच्चयबोधक (योजक) है। यह किसी संज्ञा से बँधा नहीं होता और इसके पहले 'के / की' नहीं लगता। मुख्य भेद दो हैं।

6.1 समानाधिकरण समुच्चयबोधक

बराबर स्तर के — एक-दूसरे पर आश्रित न रहने वाले — शब्दों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं।

उपभेदशब्दउदाहरण
संयोजकऔर, तथा, एवं, वराम और श्याम भाई हैं।
विभाजक (विकल्पसूचक)या, अथवा, वा, किंवा, चाहे... चाहे, न... न, नहीं तोचाय लोगे या कॉफ़ी?
विरोधदर्शकपर, परंतु, किंतु, लेकिन, मगर, बल्कि, वरन्वह आया, परंतु देर से।
परिणामदर्शकइसलिए, अतः, अतएव, सोवह बीमार था, इसलिए विद्यालय नहीं गया।

6.2 व्यधिकरण समुच्चयबोधक

एक मुख्य उपवाक्य को उस पर आश्रित उपवाक्य से जोड़ते हैं।

उपभेदशब्दउदाहरण
कारणवाचकक्योंकि, चूँकि, जोकिवह नहीं आया क्योंकि बीमार था।
उद्देश्यवाचकताकि, जिससे कि, किमेहनत करो ताकि सफल हो सको।
संकेतवाचकयदि... तो, अगर... तो, जो... तो, यद्यपि... तथापि, चाहे... परयदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे।
स्वरूपवाचककि, अर्थात्, यानी, मानो, जोवह इतना डरा मानो भूत देख लिया हो।

सावधानी: 'कि' उद्देश्य, स्वरूप और विभाजन — तीनों अर्थों में आता है ("उसने कहा कि वह आएगा" — स्वरूपवाचक; "तुम जाओगे कि नहीं" — विभाजक)। ऐसे बहु-अर्थी शब्द का भेद वाक्य के अर्थ से ही तय करें।


7. विस्मयादिबोधक

नियम: जो अव्यय वक्ता के मन के भाव — हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, स्वीकृति आदि — प्रकट करें या किसी को पुकारें, वे विस्मयादिबोधक हैं। इनका वाक्य के अन्य शब्दों से व्याकरणिक संबंध नहीं होता और इनके बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है — इस चिह्न के नियम विराम चिह्न नोट में हैं।

भावशब्दउदाहरण
हर्षवाह!, अहा!, शाबाश!, धन्य!वाह! कितना सुंदर गीत है।
शोकहाय!, आह!, हे राम!, उफ़!हाय! वह चल बसा।
आश्चर्यअरे!, ओह!, क्या!, ऐं!ओह! तुम यहाँ?
घृणा / तिरस्कारछि!, छी!, धिक्!, थू!छि! कितनी गंदगी है।
स्वीकृतिहाँ!, ठीक!, अच्छा!, जी हाँ!अच्छा! मैं चलता हूँ।
संबोधनहे!, अरे!, ओ!, अजी!, अरी!अरे मोहन! इधर आओ।
भयबाप रे!, हाय राम!बाप रे! इतना बड़ा साँप।
चेतावनीसावधान!, ख़बरदार!, बचो!ख़बरदार! आगे मत बढ़ना।

ध्यान दें: एक ही शब्द भिन्न भाव दे सकता है — 'अरे' आश्चर्य में भी आता है और संबोधन में भी; 'अच्छा' स्वीकृति भी बता सकता है और आश्चर्य भी। ऐसे शब्दों का भाव वाक्य से तय होता है, इसलिए परीक्षा में प्रायः 'छि' (घृणा), 'हाय' (शोक), 'वाह' (हर्ष) जैसे स्पष्ट शब्द पूछे जाते हैं।


8. निपात

नियम: जो अव्यय वाक्य में किसी शब्द या पद के बाद लगकर उस पर विशेष बल दें, उन्हें निपात कहते हैं। निपात हटा देने पर वाक्य का मूल अर्थ बचा रहता है, केवल बल या भाव बदल जाता है। जैसा ऊपर बताया गया, कुछ पुस्तकें इन्हें अव्यय का अलग भेद मानती हैं और कुछ क्रिया-विशेषण के अंतर्गत रखती हैं।

निपातभावउदाहरणबल किस पर
हीकेवल यही, अन्य नहींराम ही यह काम करेगा।राम
भीदूसरों के साथ यह भीमैं भी चलूँगा।मैं
तोबल / आग्रहतुम तो आओ।तुम
तकसीमा या अपेक्षा से कमउसने मुझे देखा तक नहीं।देखना
मात्रकेवल इतनादस रुपये मात्र।दस रुपये
भरपूरा / केवलवह रात भर जागा।रात
सिर्फ़केवलसिर्फ़ तुम जा सकते हो।तुम
केवलअकेला यहीकेवल सच बोलो।सच
जीआदरगुरुजी आ गए। / जी, मैं आया।गुरु / उत्तर

स्थान बदलो, बल बदलो: "राम ही आज जाएगा" (और कोई नहीं), "राम आज ही जाएगा" (किसी और दिन नहीं), "राम आज जाएगा ही" (जाना निश्चित है)। 'ही' जिस पद के ठीक बाद आता है, बल उसी पर पड़ता है।

'तक' के दो रूप: "वह दिल्ली तक गया" — स्थान की सीमा, संबंधबोधक का काम; "उसने पानी तक नहीं पिया" — अपेक्षा से कम होने पर बल, निपात का काम।


9. पहचान की कसौटियाँ — भ्रमित युग्म

9.1 क्रिया-विशेषण बनाम संबंधबोधक

शब्द अकेला, सीधे क्रिया से जुड़ा → क्रिया-विशेषण | संज्ञा / सर्वनाम + के / की / से के बाद → संबंधबोधक

शब्दक्रिया-विशेषण (अकेला)संबंधबोधक (संज्ञा के साथ)
बाहरवह बाहर गया।वह घर के बाहर गया।
भीतर / अंदरभीतर आ जाओ।कमरे के भीतर अँधेरा है।
पासवह पास बैठा है।मेरे पास एक कलम है।
दूरवह दूर रहता है।गाँव से दूर एक मंदिर है।
ऊपरपतंग ऊपर उड़ रही है।छत के ऊपर बंदर है।
नीचेवह नीचे गिर गया।पेड़ के नीचे छाया है।
आगेतुम आगे चलो।घर के आगे बगीचा है।
पीछेवह पीछे रह गया।विद्यालय के पीछे खेल का मैदान है।
सामनेसामने देखो।मंदिर के सामने दुकान है।
पहलेवह पहले आया।भोजन से पहले हाथ धोओ।
साथहम साथ चलेंगे।वह भाई के साथ आया।
निकटवह निकट आया।नदी के निकट गाँव है।

9.2 समुच्चयबोधक बनाम संबंधबोधक

बिंदुसमुच्चयबोधकसंबंधबोधक
कामदो शब्दों / वाक्यों को जोड़ता हैसंज्ञा का संबंध दूसरे शब्द से बताता है
पहले 'के / की'नहींप्रायः हाँ
क्रिया का वचनराम और श्याम आए। (दोनों कर्ता — बहुवचन)राम के साथ श्याम आया। (कर्ता केवल श्याम)
कारणवर्षा हुई, इसलिए खेल रुका।वर्षा के कारण खेल रुका।
विरोध / अपवादसब आए, परंतु मोहन नहीं आया।मोहन के सिवा सब आए।
सहितपिता तथा पुत्र गए।पिता पुत्र सहित गए।

9.3 विशेषण बनाम क्रिया-विशेषण

संज्ञा की विशेषता बताए तो विशेषण, क्रिया की विशेषता बताए तो क्रिया-विशेषण। आकारांत विशेषण संज्ञा के लिंग-वचन के साथ बदलता है (अच्छा लड़का, अच्छी लड़की); क्रिया-विशेषण के रूप में वही शब्द प्रायः एक-सा रहता है — "लड़की अच्छा गाती है"।

शब्दविशेषण (संज्ञा के साथ)क्रिया-विशेषण (क्रिया के साथ)
तेज़तेज़ घोड़ा जीत गया।घोड़ा तेज़ दौड़ता है।
अच्छावह अच्छा लड़का है।वह अच्छा गाता है।
थोड़ाथोड़ा पानी पियो।थोड़ा आराम करो।
बहुतबहुत लोग आए।वह बहुत हँसा।
कमकम नमक डालो।वह कम बोलता है।
सुंदरसुंदर चित्र है।वह सुंदर लिखता है।
अधिकअधिक धन हानिकारक है।वह अधिक पढ़ता है।

विधेय विशेषण का जाल: "यह चाकू तेज़ है" — 'तेज़' क्रिया के पास है, पर विशेषता चाकू (संज्ञा) की बता रहा है; यह विधेय विशेषण है, क्रिया-विशेषण नहीं।


10. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: 'बाहर' का भेद संज्ञा तय करती है

"वह बाहर गया" — क्रिया-विशेषण (स्थानवाचक)। "वह घर के बाहर गया" — संबंधबोधक। वाक्य में 'बाहर' से पहले संज्ञा + 'के' है या नहीं — बस यही देखना है।

Trap 2: 'मेरे पास' — संबंधबोधक

'मेरे' में 'के' दिखता नहीं (मैं + रे), फिर भी 'पास' सर्वनाम के संबंध-रूप के बाद आया है; इसलिए "मेरे पास", "उसके साथ", "तुम्हारे बिना" — सब संबंधबोधक।

Trap 3: 'इसलिए' बनाम 'क्योंकि'

'इसलिए' परिणाम बताता है और समानाधिकरण (परिणामदर्शक) है; 'क्योंकि' कारण बताता है और व्यधिकरण (कारणवाचक) है। "वह बीमार था, इसलिए नहीं आया" / "वह नहीं आया क्योंकि बीमार था"।

Trap 4: 'के कारण' समुच्चयबोधक नहीं

अर्थ में 'इसलिए' जैसा लगने पर भी "वर्षा के कारण" संज्ञा से बँधा है — संबंधबोधक। समुच्चयबोधक पहले 'के / की' नहीं लेता।

Trap 5: "राम के साथ श्याम आया" — क्रिया एकवचन

'और' दोनों को कर्ता बनाता है (आए); 'के साथ' केवल साथ होने का संबंध बताता है, कर्ता 'श्याम' अकेला रहता है (आया)। वाक्य-शुद्धि में यह अंतर पूछा जाता है।

Trap 6: "तेज़ घोड़ा" बनाम "तेज़ दौड़ता"

पहले में घोड़े की विशेषता — गुणवाचक विशेषण; दूसरे में दौड़ने की — रीतिवाचक क्रिया-विशेषण। "चाकू तेज़ है" — विधेय विशेषण।

Trap 7: 'ही' का स्थान बदलते ही बल बदलता है

"मैं ही कल जाऊँगा" (केवल मैं), "मैं कल ही जाऊँगा" (केवल कल)। प्रश्न "बल किस पर है?" हो तो 'ही' से ठीक पहले वाला पद देखें।

Trap 8: 'परंतु' और 'या' को एक न समझें

'परंतु, किंतु, लेकिन' — विरोध (विरोधदर्शक); 'या, अथवा' — विकल्प (विभाजक); 'और, तथा' — जोड़ (संयोजक); 'अतः, इसलिए' — परिणाम (परिणामदर्शक)। चारों समानाधिकरण के उपभेद हैं।

Trap 9: अव्यय से बने विशेषण अव्यय नहीं

'ऊपर' अव्यय है, पर 'ऊपरी' (ऊपरी मंज़िल / ऊपरी कमाई) विशेषण है; 'पीछे' अव्यय, 'पिछला / पिछली' विशेषण — विशेषण विकारी शब्द-भेद है ('पिछला / पिछली' तो लिंग के अनुसार बदलता भी है)।


11. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 प्रयोग)

क्र.वाक्यअव्ययभेद
1वह कल आएगा।कलकालवाचक क्रिया-विशेषण
2वह प्रतिदिन व्यायाम करता है।प्रतिदिनकालवाचक क्रिया-विशेषण
3तुम अभी चले जाओ।अभीकालवाचक क्रिया-विशेषण
4वह बार-बार पूछता है।बार-बारकालवाचक क्रिया-विशेषण
5सदा सच बोलो।सदाकालवाचक क्रिया-विशेषण
6बच्चे बाहर खेल रहे हैं।बाहरस्थानवाचक क्रिया-विशेषण
7यहाँ बैठो।यहाँस्थानवाचक क्रिया-विशेषण
8वह इधर-उधर घूमता है।इधर-उधरस्थानवाचक क्रिया-विशेषण
9पतंग ऊपर उड़ रही है।ऊपरस्थानवाचक क्रिया-विशेषण
10वह दूर रहता है।दूरस्थानवाचक क्रिया-विशेषण
11वह बहुत बोलता है।बहुतपरिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
12थोड़ा खाओ।थोड़ापरिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
13वह कम सोता है।कमपरिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
14वह खूब हँसा।खूबपरिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
15वह काफ़ी पढ़ चुका है।काफ़ीपरिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
16वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है।ध्यानपूर्वकरीतिवाचक क्रिया-विशेषण
17घोड़ा तेज़ दौड़ता है।तेज़रीतिवाचक क्रिया-विशेषण
18वह धीरे-धीरे चलता है।धीरे-धीरेरीतिवाचक क्रिया-विशेषण
19मैं अवश्य आऊँगा।अवश्यरीतिवाचक (निश्चय)
20शायद वर्षा होगी।शायदरीतिवाचक (अनिश्चय)
21वह अचानक आ गया।अचानकरीतिवाचक क्रिया-विशेषण
22पेड़ के नीचे छाया है।के नीचेसंबंधबोधक (स्थान)
23वह घर की ओर चला।की ओरसंबंधबोधक (दिशा)
24पानी के बिना जीवन नहीं।के बिनासंबंधबोधक (व्यतिरेक)
25वह मित्र के साथ आया।के साथसंबंधबोधक (साहचर्य)
26वर्षा के कारण खेल रुका।के कारणसंबंधबोधक (कारण)
27भोजन के बाद टहलो।के बादसंबंधबोधक (काल)
28मेरे पास एक कलम है।पाससंबंधबोधक (स्थान)
29वह शेर की तरह लड़ा।की तरहसंबंधबोधक (सादृश्य)
30वह नियम के विरुद्ध गया।के विरुद्धसंबंधबोधक (विरोध)
31मोहन के सिवा सब आए।के सिवासंबंधबोधक (व्यतिरेक)
32मुझे उसके बारे में बताओ।के बारे मेंसंबंधबोधक (विषय)
33राम और श्याम भाई हैं।औरसंयोजक (समानाधिकरण)
34माता तथा पिता आए।तथासंयोजक (समानाधिकरण)
35चाय लोगे या कॉफ़ी?याविभाजक (समानाधिकरण)
36न वह आया, न उसका भाई।न... नविभाजक (समानाधिकरण)
37वह आया, परंतु देर से।परंतुविरोधदर्शक (समानाधिकरण)
38वह गरीब है, लेकिन ईमानदार है।लेकिनविरोधदर्शक (समानाधिकरण)
39वह बीमार था, इसलिए नहीं आया।इसलिएपरिणामदर्शक (समानाधिकरण)
40परीक्षा निकट है, अतः पढ़ाई करो।अतःपरिणामदर्शक (समानाधिकरण)
41वह नहीं आया क्योंकि बीमार था।क्योंकिकारणवाचक (व्यधिकरण)
42मेहनत करो ताकि सफल हो सको।ताकिउद्देश्यवाचक (व्यधिकरण)
43यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे।यदि... तोसंकेतवाचक (व्यधिकरण)
44यद्यपि वह गरीब है तथापि ईमानदार है।यद्यपि... तथापिसंकेतवाचक (व्यधिकरण)
45वह इतना डरा मानो भूत देख लिया हो।मानोस्वरूपवाचक (व्यधिकरण)
46वाह! क्या गोल किया।वाहविस्मयादिबोधक (हर्ष)
47हाय! वह चल बसा।हायविस्मयादिबोधक (शोक)
48छि! कितनी गंदगी है।छिविस्मयादिबोधक (घृणा)
49राम ही यह काम करेगा।हीनिपात (बल)
50उसने पानी तक नहीं पिया।तकनिपात (बल)

12. CET में अव्यय कैसे पूछे जाते हैं

राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में अव्यय के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचा पहचान लेने से उत्तर जल्दी मिलता है:

  1. रेखांकित शब्द का भेद: "'वह धीरे-धीरे चलता है' में 'धीरे-धीरे'" — क्रिया से कैसे? पूछें → रीतिवाचक।
  2. समुच्चयबोधक का उपभेद: 'परंतु' विरोधदर्शक, 'या' विभाजक, 'क्योंकि' कारणवाचक, 'ताकि' उद्देश्यवाचक।
  3. एक शब्द, चार वाक्य: "किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक है?" — संज्ञा / सर्वनाम + के वाला वाक्य।
  4. बेमेल शब्द: "कौन-सा संबंधबोधक नहीं है — के साथ, की ओर, के बिना, और?" — 'और'।
  5. भाव-पहचान: "'छि!' किस भाव का सूचक है?" — घृणा।
  6. विशेषण या क्रिया-विशेषण: "तेज़ घोड़ा" बनाम "तेज़ दौड़ता"।

रणनीति: पहले देखें कि शब्द किससे जुड़ा है — क्रिया से (क्रिया-विशेषण), संज्ञा से 'के / की' के साथ (संबंधबोधक), दो वाक्यों के बीच (समुच्चयबोधक), किसी से नहीं और भाव प्रकट करता है (विस्मयादिबोधक)। फिर उपभेद के लिए अर्थ देखें।


13. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. चार काम — "क्रिया, संबंध, जोड़, भाव": क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।

2. क्रिया-विशेषण के चार प्रश्न — "कब-कहाँ-कितना-कैसे": काल, स्थान, परिमाण, रीति।

3. "के लगा तो संबंध, अकेला तो क्रिया": 'के बाहर' संबंधबोधक, 'बाहर' क्रिया-विशेषण।

4. समानाधिकरण के चार — "जोड़ो, बाँटो, विरोध करो, नतीजा बताओ": संयोजक, विभाजक, विरोधदर्शक, परिणामदर्शक।

5. व्यधिकरण के चार — "क्यों? किसलिए? अगर? यानी?": कारण (क्योंकि), उद्देश्य (ताकि), संकेत (यदि... तो), स्वरूप (अर्थात्, मानो)।

6. निपात = बल: "ही-भी-तो-तक, मात्र-भर, सिर्फ़-केवल" — हटाओ तो अर्थ बचे, ज़ोर घटे।

7. 'इसलिए' नतीजा, 'क्योंकि' कारण: पहला समानाधिकरण, दूसरा व्यधिकरण।


14. कथन अभ्यास

अव्यय का रूप लिंग, वचन, कारक और काल के कारण नहीं बदलता। — सही।

'वह बाहर गया' में 'बाहर' संबंधबोधक है। — गलत (स्थानवाचक क्रिया-विशेषण)।

'घर के बाहर पेड़ है' में 'के बाहर' संबंधबोधक है। — सही।

'परंतु' विभाजक समुच्चयबोधक है। — गलत (विरोधदर्शक)।

'क्योंकि' व्यधिकरण समुच्चयबोधक है। — सही (कारणवाचक)।

'छि!' हर्ष का सूचक है। — गलत (घृणा)।

'घोड़ा तेज़ दौड़ता है' में 'तेज़' विशेषण है। — गलत (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)।

'वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है' में 'ध्यानपूर्वक' रीतिवाचक क्रिया-विशेषण है। — सही।

'राम के साथ श्याम आया' में 'के साथ' समुच्चयबोधक है। — गलत (संबंधबोधक)।


15. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ

  1. अव्यय = अविकारी शब्द; लिंग, वचन, कारक, काल से रूप नहीं बदलता
  2. गुरु के अनुसार 4 भेद; निपात जोड़ने पर 5 — दोनों मत प्रचलित
  3. क्रिया-विशेषण: कब (काल), कहाँ (स्थान), कितना (परिमाण), कैसे (रीति)
  4. रूप के आधार पर: मूल (दूर, अचानक), यौगिक (रातभर, ध्यानपूर्वक), स्थानीय
  5. संबंधबोधक: संज्ञा / सर्वनाम के बाद — के साथ, के बिना, की ओर, के पास, के कारण
  6. 'बाहर' अकेला = क्रिया-विशेषण; 'के बाहर' = संबंधबोधक; 'मेरे पास' = संबंधबोधक
  7. समानाधिकरण: संयोजक (और), विभाजक (या), विरोधदर्शक (परंतु), परिणामदर्शक (इसलिए, अतः)
  8. व्यधिकरण: कारण (क्योंकि), उद्देश्य (ताकि), संकेत (यदि... तो), स्वरूप (अर्थात्, मानो)
  9. विस्मयादिबोधक: वाह (हर्ष), हाय (शोक), ओह (आश्चर्य), छि (घृणा), अच्छा (स्वीकृति), हे (संबोधन)
  10. निपात: ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़, केवल — बल देने वाले
  11. 'और' → क्रिया बहुवचन (राम और श्याम आए); 'के साथ' → एकवचन (राम के साथ श्याम आया)
  12. 'तेज़ घोड़ा' विशेषण; 'तेज़ दौड़ता' क्रिया-विशेषण; 'चाकू तेज़ है' विधेय विशेषण

16. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। हर गलत उत्तर पर देखें कि शब्द किससे जुड़ा था — क्रिया से, संज्ञा से या दो वाक्यों के बीच। संज्ञा से अव्यय तक पूरे शब्द-विचार के मिश्रित अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।


17. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

अव्यय का अध्याय शब्दों की सूची रटने का नहीं, उनके काम को पहचानने का है। एक ही 'बाहर' क्रिया-विशेषण भी है और संबंधबोधक भी; एक ही 'तेज़' विशेषण भी है और क्रिया-विशेषण भी; 'इसलिए' और 'के कारण' अर्थ में पास होकर भी अलग वर्गों के हैं। निर्णय हर बार यही प्रश्न करता है — यह शब्द किससे जुड़ा है? क्रिया से तो क्रिया-विशेषण, संज्ञा से 'के / की' के साथ तो संबंधबोधक, दो अंशों के बीच तो समुच्चयबोधक, और किसी से नहीं तो विस्मयादिबोधक। निपात को अलग भेद मानें या न मानें, ही-भी-तो का काम बल देना ही है। 50 प्रयोगों की तालिका को इसी प्रश्न के साथ दोहराएँ।

अव्यय = अविकारी | कब-कहाँ-कितना-कैसे = क्रिया-विशेषण | के + शब्द = संबंधबोधक | और · या · परंतु · इसलिए = समानाधिकरण | क्योंकि · ताकि · यदि-तो · मानो = व्यधिकरण | वाह · हाय · छि = विस्मयादिबोधक | ही · भी · तो = निपात


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल के कारण नहीं बदलता, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं। जैसे 'लड़का धीरे चलता है' और 'लड़की धीरे चलती है' — दोनों में 'धीरे' वही रहता है।

कामता प्रसाद गुरु की परंपरा में चार भेद हैं — क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक। कई आधुनिक पुस्तकें निपात (ही, भी, तो आदि) को पाँचवाँ भेद मानती हैं, इसलिए उत्तर संदर्भ-पुस्तक पर निर्भर करता है।

अर्थ के आधार पर क्रिया-विशेषण के चार भेद हैं — कालवाचक (कब?), स्थानवाचक (कहाँ?), परिमाणवाचक (कितना?) और रीतिवाचक (कैसे?)। रूप के आधार पर इसके मूल, यौगिक और स्थानीय भेद भी बताए जाते हैं।

जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताए, वह संबंधबोधक है। जैसे के साथ, के बिना, की ओर, के पास, के कारण — 'वह मित्र के साथ आया।'

एक ही शब्द अकेला आकर क्रिया की विशेषता बताए तो क्रिया-विशेषण है, जैसे 'वह बाहर गया'। वही शब्द संज्ञा या सर्वनाम के बाद के / की के साथ आए तो संबंधबोधक है, जैसे 'वह घर के बाहर गया'।

समानाधिकरण समुच्चयबोधक बराबर स्तर के शब्दों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं — संयोजक (और), विभाजक (या), विरोधदर्शक (परंतु), परिणामदर्शक (इसलिए)। व्यधिकरण समुच्चयबोधक मुख्य उपवाक्य को आश्रित उपवाक्य से जोड़ते हैं — कारणवाचक (क्योंकि), उद्देश्यवाचक (ताकि), संकेतवाचक (यदि... तो), स्वरूपवाचक (अर्थात्, मानो)।

समुच्चयबोधक दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ता है और उसके पहले 'के / की' नहीं लगता, जैसे 'राम और श्याम आए'। संबंधबोधक संज्ञा से बँधा रहता है, जैसे 'राम के साथ श्याम आया'; यहाँ कर्ता केवल श्याम है, इसलिए क्रिया एकवचन है।

ये हर्ष (वाह!, शाबाश!), शोक (हाय!, आह!), आश्चर्य (ओह!, अरे!), घृणा (छि!, धिक्!), स्वीकृति (हाँ!, अच्छा!) और संबोधन (हे!, अजी!) जैसे भाव प्रकट करते हैं। इनके बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।

जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगकर उस पर विशेष बल दें, उन्हें निपात कहते हैं — ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़, केवल। जैसे 'राम ही यह काम करेगा' में बल राम पर है।

यह प्रयोग पर निर्भर है। 'तेज़ घोड़ा जीत गया' में 'तेज़' घोड़े की विशेषता बताता है, इसलिए विशेषण है। 'घोड़ा तेज़ दौड़ता है' में यह दौड़ने का ढंग बताता है, इसलिए रीतिवाचक क्रिया-विशेषण है।

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