अव्यय के भेद और उदाहरण — क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक व निपात — CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल के कारण कभी नहीं बदलता, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं (अ + व्यय = जिसका व्यय या विकार न हो)। "लड़का धीरे चलता है", "लड़की धीरे चलती है", "लड़के धीरे चलते हैं" — क्रिया बदली, पर 'धीरे' वही रहा। कामता प्रसाद गुरु की परंपरा में अव्यय के चार भेद हैं — क्रिया-विशेषण (क्रिया की विशेषता: कब, कहाँ, कितना, कैसे), संबंधबोधक (संज्ञा / सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध दूसरे शब्दों से बताए: के साथ, के बिना, की ओर), समुच्चयबोधक (शब्दों या वाक्यों को जोड़े: और, परंतु, या, क्योंकि) और विस्मयादिबोधक (मन के भाव प्रकट करे: वाह!, हाय!, छि!)। कई आधुनिक पुस्तकें बल देने वाले शब्दों — ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़, केवल — को निपात नाम से अलग, पाँचवाँ भेद मानती हैं। परीक्षा का मूल सूत्र: शब्द से नहीं, उसके काम से भेद तय करें — "वह बाहर गया" में 'बाहर' क्रिया-विशेषण है, पर "घर के बाहर" में संबंधबोधक।
संक्षिप्त उत्तर
| भेद | काम | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| क्रिया-विशेषण | क्रिया की विशेषता | कब? कहाँ? कितना? कैसे? | वह तेज़ दौड़ता है। |
| संबंधबोधक | संज्ञा / सर्वनाम का संबंध दूसरे शब्दों से | प्रायः संज्ञा + के / की / से के बाद | घर के सामने पेड़ है। |
| समुच्चयबोधक | शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ना | दो अंशों के बीच, किसी संज्ञा से बँधा नहीं | राम और श्याम आए। |
| विस्मयादिबोधक | हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा आदि भाव | बाद में ! चिह्न; वाक्य से व्याकरणिक संबंध नहीं | वाह! क्या बात है। |
| निपात (कुछ पुस्तकों में अलग भेद) | किसी शब्द पर बल देना | हटाने पर अर्थ बचा रहे, केवल बल घटे | मैं ही जाऊँगा। |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| अव्यय का दूसरा नाम | अविकारी शब्द |
| किन कारणों से रूप नहीं बदलता | लिंग, वचन, कारक, काल |
| कामता प्रसाद गुरु के अनुसार भेद | 4 — क्रियाविशेषण, संबंधसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक |
| निपात को अलग भेद मानने पर | 5 भेद |
| क्रिया-विशेषण के अर्थ-आधारित भेद | 4 — कालवाचक, स्थानवाचक, परिमाणवाचक, रीतिवाचक |
| समुच्चयबोधक के मुख्य भेद | 2 — समानाधिकरण और व्यधिकरण |
| 'बाहर', 'पास', 'ऊपर' अकेले | क्रिया-विशेषण |
| 'के बाहर', 'के पास', 'के ऊपर' | संबंधबोधक |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
अव्यय हिंदी व्याकरण के शब्द-विचार खंड का अंतिम अध्याय है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया — ये चार विकारी शब्द हैं; अव्यय पाँचवाँ, अविकारी वर्ग है। प्रश्न सीधे भी आते हैं ("'परंतु' कौन-सा अव्यय है?") और भ्रमित युग्मों के रूप में भी ("किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक है?")। क्रिया-विशेषण का आधार विशेषण और क्रिया के भेद नोट में है; यह नोट उसी को आगे बढ़ाकर पूरे अव्यय वर्ग को जोड़ता है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- CET 12th व Graduation स्तर
- पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
- REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
- राजस्थान पुलिस SI व RAS (हिंदी व्याकरण भाग)
- RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता
प्रश्न कैसे आते हैं?
- "रेखांकित शब्द कौन-सा अव्यय है?" — सबसे सामान्य रूप
- "'वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है' में क्रिया-विशेषण का भेद?" — काल / स्थान / परिमाण / रीति
- "'परंतु' किस प्रकार का समुच्चयबोधक है?" — संयोजक, विभाजक, विरोधदर्शक, परिणामदर्शक
- "किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक है?" — एक शब्द, चार वाक्य
- "'छि!' किस भाव का सूचक है?" — विस्मयादिबोधक के भाव
- "निम्नलिखित में से कौन-सा संबंधबोधक नहीं है?" — सूची में एक समुच्चयबोधक
- विशेषण बनाम क्रिया-विशेषण — "तेज़ घोड़ा" और "तेज़ दौड़ता"
3. अव्यय: परिभाषा और पहचान
परिभाषा: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक और काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, वे अव्यय (अविकारी) कहलाते हैं। विकारी शब्द वाक्य के अनुसार रूप बदलते हैं — लड़का / लड़की / लड़के, अच्छा / अच्छी / अच्छे, जाता / जाती / जाते; अव्यय हर स्थिति में एक-सा रहता है।
| बदलाव का कारण | विकारी शब्द बदला | अव्यय वही रहा |
|---|---|---|
| लिंग | लड़का जाता है / लड़की जाती है | लड़का अभी जाता है / लड़की अभी जाती है |
| वचन | बच्चा खेलता है / बच्चे खेलते हैं | बच्चा बाहर खेलता है / बच्चे बाहर खेलते हैं |
| कारक | लड़का आया / लड़के ने कहा | लड़का भी आया / लड़के ने भी कहा |
| काल | वह पढ़ता है / पढ़ा / पढ़ेगा | वह ध्यान से पढ़ता है / पढ़ा / पढ़ेगा |
3.1 अव्यय के भेद — चार या पाँच?
| परंपरा | भेद |
|---|---|
| कामता प्रसाद गुरु ("हिंदी व्याकरण") | 4 — क्रियाविशेषण, संबंधसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक; ही, भी, तो जैसे शब्द क्रियाविशेषण के अंतर्गत |
| अनेक आधुनिक स्कूली व प्रतियोगी पुस्तकें | 5 — उपर्युक्त चार + निपात |
दोनों मत प्रचलित हैं, इसलिए "अव्यय के कितने भेद?" का उत्तर प्रश्न के विकल्पों और संदर्भ-पुस्तक से तय होता है। इस नोट के क्विज़ और कथनों में यह संख्या नहीं पूछी गई है। गुरु 'संबंधसूचक' शब्द का प्रयोग करते हैं; अधिकांश पुस्तकों में यही 'संबंधबोधक' कहलाता है — दोनों एक ही हैं।
4. क्रिया-विशेषण
नियम: जो अव्यय क्रिया की विशेषता बताए — कब, कहाँ, कितना या कैसे हुई — वह क्रिया-विशेषण है। अर्थ के आधार पर इसके चार भेद हैं; हर भेद के छोटे उपभेद भी पुस्तकों में मिलते हैं।
4.1 कालवाचक (कब?)
| उपभेद | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| समय-बिंदु | आज, कल, परसों, अभी, अब, तब, जब, तुरंत, सवेरे, पहले, बाद में | वह कल आएगा। |
| अवधि | सदा, सदैव, दिनभर, आजकल, लगातार, निरंतर, अब तक | वह दिनभर पढ़ता रहा। |
| बारंबारता | प्रतिदिन, रोज़, बार-बार, हर बार, कई बार, कभी-कभी | वह प्रतिदिन व्यायाम करता है। |
4.2 स्थानवाचक (कहाँ?)
| उपभेद | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्थितिवाचक | यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, अंदर, बाहर, भीतर, पास, दूर, सामने, आगे, पीछे | बच्चे बाहर खेल रहे हैं। |
| दिशावाचक | इधर, उधर, किधर, दाएँ, बाएँ, चारों ओर | वह इधर आया। |
4.3 परिमाणवाचक (कितना?)
| उपभेद | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| अधिकताबोधक | बहुत, अधिक, खूब, अत्यंत, अति | वह बहुत बोलता है। |
| न्यूनताबोधक | कम, थोड़ा, ज़रा, कुछ, किंचित् | थोड़ा खाओ। |
| पर्याप्तिबोधक | बस, काफ़ी, यथेष्ट, भरपूर | वह काफ़ी पढ़ चुका है। |
| तुलनाबोधक | इतना, उतना, जितना, कितना, अधिक, कम | वह उतना नहीं दौड़ सकता। |
| श्रेणीबोधक | थोड़ा-थोड़ा, क्रमशः, बारी-बारी से, एक-एक करके | दवा थोड़ा-थोड़ा करके पियो। |
4.4 रीतिवाचक (कैसे?)
| उपभेद / भाव | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रकार / ढंग | धीरे, धीरे-धीरे, तेज़, ध्यानपूर्वक, ऐसे, वैसे, अचानक, जल्दी, सहसा | वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है। |
| निश्चय | अवश्य, ज़रूर, सचमुच, निस्संदेह, बेशक | मैं अवश्य आऊँगा। |
| अनिश्चय | शायद, संभवतः, कदाचित् | शायद वह आए। |
| स्वीकार | हाँ, जी, जी हाँ, ठीक | हाँ, मैं चलूँगा। |
| निषेध | नहीं, न, मत | वहाँ मत जाओ। |
| कारण | क्यों, किसलिए | तुम क्यों रो रहे हो? |
रीतिवाचक सबसे बड़ा वर्ग है — जो शब्द काल, स्थान या परिमाण में न आए और क्रिया का ढंग, निश्चय, निषेध आदि बताए, वह प्रायः इसी में गिना जाता है। कुछ पुस्तकें 'नहीं, न, मत' को निपात में भी रखती हैं।
4.5 रूप (रचना) के आधार पर — मूल, यौगिक, स्थानीय
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| मूल | जो किसी दूसरे शब्द से न बने हों | दूर, ठीक, अचानक, फिर, नहीं |
| यौगिक | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया या अव्यय में प्रत्यय / शब्द जोड़कर बने | रातभर, ध्यानपूर्वक, प्रेम से, चुपके से, देखते-देखते, यहाँ तक |
| स्थानीय | अन्य शब्द-भेद जो बिना रूप बदले किसी विशेष स्थान पर आकर क्रिया-विशेषण का काम करें | वह अपना सिर पढ़ेगा। (अर्थ — कुछ नहीं पढ़ेगा) |
रूप के आधार वाला वर्गीकरण कामता प्रसाद गुरु की परंपरा का है; परीक्षा में अर्थ वाले चार भेद कहीं अधिक पूछे जाते हैं। "प्रतिदिन", "यथाशक्ति", "आजन्म" जैसे क्रिया-विशेषण समास की दृष्टि से अव्ययीभाव भी हैं — देखें समास के भेद।
5. संबंधबोधक
नियम: जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताए, वह संबंधबोधक है। अधिकांश संबंधबोधक से पहले के, की या से आता है — "पेड़ के नीचे", "घर की ओर", "गाँव से दूर"।
| अर्थ के आधार पर | संबंधबोधक | उदाहरण |
|---|---|---|
| कालवाचक | के पहले, के बाद, के उपरांत, के पश्चात् | भोजन के बाद टहलो। |
| स्थानवाचक | के ऊपर, के नीचे, के पास, के अंदर, के बाहर, के सामने, के पीछे, के बीच, के निकट | मेज़ के नीचे बिल्ली है। |
| दिशावाचक | की ओर, की तरफ़, के आर-पार | वह घर की ओर चला। |
| साधनवाचक | के सहारे, के माध्यम से, के ज़रिए | वह छड़ी के सहारे चलता है। |
| कारण / हेतुवाचक | के कारण, के मारे, की वजह से | वर्षा के कारण खेल रुका। |
| विषयवाचक | के बारे में, के विषय में, के संबंध में | मुझे उसके बारे में बताओ। |
| व्यतिरेकवाचक | के बिना, के सिवा, के अतिरिक्त, के अलावा | पानी के बिना जीवन नहीं। |
| विनिमयवाचक | के बदले, की जगह, के स्थान पर | उसने रुपये के बदले अनाज लिया। |
| सादृश्यवाचक | के समान, की तरह, की भाँति, के जैसा | वह शेर की तरह लड़ा। |
| विरोधवाचक | के विरुद्ध, के विपरीत, के ख़िलाफ़ | वह नियम के विरुद्ध गया। |
| साहचर्यवाचक | के साथ, के संग, समेत, सहित | वह मित्र के साथ आया। |
| तुलनावाचक | की अपेक्षा, से बढ़कर, के आगे | राम श्याम की अपेक्षा तेज़ है। |
5.1 प्रयोग के आधार पर — संबद्ध और अनुबद्ध
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| संबद्ध | संज्ञा + विभक्ति (के / की / से) के बाद | धन के बिना, पूजा से पहले |
| अनुबद्ध | संज्ञा के विकृत रूप के बाद, बिना अलग विभक्ति के | किनारे तक, सखियों सहित, पुत्रों समेत |
5.2 परसर्ग और संबंधबोधक
ने, को, से, का-के-की, में, पर — ये कारक के परसर्ग (विभक्ति-चिह्न) हैं और कारक के अध्याय में पढ़े जाते हैं। के साथ, के बिना, की ओर, के पास जैसे शब्द-समूह संबंधबोधक अव्यय हैं, जिनमें 'के / की' परसर्ग और उसके बाद अव्यय आता है। परसर्गों का विस्तार कारक के भेद और विभक्ति चिह्न नोट में है।
6. समुच्चयबोधक
नियम: जो अव्यय दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़े या अलग करे, वह समुच्चयबोधक (योजक) है। यह किसी संज्ञा से बँधा नहीं होता और इसके पहले 'के / की' नहीं लगता। मुख्य भेद दो हैं।
6.1 समानाधिकरण समुच्चयबोधक
बराबर स्तर के — एक-दूसरे पर आश्रित न रहने वाले — शब्दों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं।
| उपभेद | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| संयोजक | और, तथा, एवं, व | राम और श्याम भाई हैं। |
| विभाजक (विकल्पसूचक) | या, अथवा, वा, किंवा, चाहे... चाहे, न... न, नहीं तो | चाय लोगे या कॉफ़ी? |
| विरोधदर्शक | पर, परंतु, किंतु, लेकिन, मगर, बल्कि, वरन् | वह आया, परंतु देर से। |
| परिणामदर्शक | इसलिए, अतः, अतएव, सो | वह बीमार था, इसलिए विद्यालय नहीं गया। |
6.2 व्यधिकरण समुच्चयबोधक
एक मुख्य उपवाक्य को उस पर आश्रित उपवाक्य से जोड़ते हैं।
| उपभेद | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| कारणवाचक | क्योंकि, चूँकि, जोकि | वह नहीं आया क्योंकि बीमार था। |
| उद्देश्यवाचक | ताकि, जिससे कि, कि | मेहनत करो ताकि सफल हो सको। |
| संकेतवाचक | यदि... तो, अगर... तो, जो... तो, यद्यपि... तथापि, चाहे... पर | यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे। |
| स्वरूपवाचक | कि, अर्थात्, यानी, मानो, जो | वह इतना डरा मानो भूत देख लिया हो। |
सावधानी: 'कि' उद्देश्य, स्वरूप और विभाजन — तीनों अर्थों में आता है ("उसने कहा कि वह आएगा" — स्वरूपवाचक; "तुम जाओगे कि नहीं" — विभाजक)। ऐसे बहु-अर्थी शब्द का भेद वाक्य के अर्थ से ही तय करें।
7. विस्मयादिबोधक
नियम: जो अव्यय वक्ता के मन के भाव — हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, स्वीकृति आदि — प्रकट करें या किसी को पुकारें, वे विस्मयादिबोधक हैं। इनका वाक्य के अन्य शब्दों से व्याकरणिक संबंध नहीं होता और इनके बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है — इस चिह्न के नियम विराम चिह्न नोट में हैं।
| भाव | शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| हर्ष | वाह!, अहा!, शाबाश!, धन्य! | वाह! कितना सुंदर गीत है। |
| शोक | हाय!, आह!, हे राम!, उफ़! | हाय! वह चल बसा। |
| आश्चर्य | अरे!, ओह!, क्या!, ऐं! | ओह! तुम यहाँ? |
| घृणा / तिरस्कार | छि!, छी!, धिक्!, थू! | छि! कितनी गंदगी है। |
| स्वीकृति | हाँ!, ठीक!, अच्छा!, जी हाँ! | अच्छा! मैं चलता हूँ। |
| संबोधन | हे!, अरे!, ओ!, अजी!, अरी! | अरे मोहन! इधर आओ। |
| भय | बाप रे!, हाय राम! | बाप रे! इतना बड़ा साँप। |
| चेतावनी | सावधान!, ख़बरदार!, बचो! | ख़बरदार! आगे मत बढ़ना। |
ध्यान दें: एक ही शब्द भिन्न भाव दे सकता है — 'अरे' आश्चर्य में भी आता है और संबोधन में भी; 'अच्छा' स्वीकृति भी बता सकता है और आश्चर्य भी। ऐसे शब्दों का भाव वाक्य से तय होता है, इसलिए परीक्षा में प्रायः 'छि' (घृणा), 'हाय' (शोक), 'वाह' (हर्ष) जैसे स्पष्ट शब्द पूछे जाते हैं।
8. निपात
नियम: जो अव्यय वाक्य में किसी शब्द या पद के बाद लगकर उस पर विशेष बल दें, उन्हें निपात कहते हैं। निपात हटा देने पर वाक्य का मूल अर्थ बचा रहता है, केवल बल या भाव बदल जाता है। जैसा ऊपर बताया गया, कुछ पुस्तकें इन्हें अव्यय का अलग भेद मानती हैं और कुछ क्रिया-विशेषण के अंतर्गत रखती हैं।
| निपात | भाव | उदाहरण | बल किस पर |
|---|---|---|---|
| ही | केवल यही, अन्य नहीं | राम ही यह काम करेगा। | राम |
| भी | दूसरों के साथ यह भी | मैं भी चलूँगा। | मैं |
| तो | बल / आग्रह | तुम तो आओ। | तुम |
| तक | सीमा या अपेक्षा से कम | उसने मुझे देखा तक नहीं। | देखना |
| मात्र | केवल इतना | दस रुपये मात्र। | दस रुपये |
| भर | पूरा / केवल | वह रात भर जागा। | रात |
| सिर्फ़ | केवल | सिर्फ़ तुम जा सकते हो। | तुम |
| केवल | अकेला यही | केवल सच बोलो। | सच |
| जी | आदर | गुरुजी आ गए। / जी, मैं आया। | गुरु / उत्तर |
स्थान बदलो, बल बदलो: "राम ही आज जाएगा" (और कोई नहीं), "राम आज ही जाएगा" (किसी और दिन नहीं), "राम आज जाएगा ही" (जाना निश्चित है)। 'ही' जिस पद के ठीक बाद आता है, बल उसी पर पड़ता है।
'तक' के दो रूप: "वह दिल्ली तक गया" — स्थान की सीमा, संबंधबोधक का काम; "उसने पानी तक नहीं पिया" — अपेक्षा से कम होने पर बल, निपात का काम।
9. पहचान की कसौटियाँ — भ्रमित युग्म
9.1 क्रिया-विशेषण बनाम संबंधबोधक
शब्द अकेला, सीधे क्रिया से जुड़ा → क्रिया-विशेषण | संज्ञा / सर्वनाम + के / की / से के बाद → संबंधबोधक
| शब्द | क्रिया-विशेषण (अकेला) | संबंधबोधक (संज्ञा के साथ) |
|---|---|---|
| बाहर | वह बाहर गया। | वह घर के बाहर गया। |
| भीतर / अंदर | भीतर आ जाओ। | कमरे के भीतर अँधेरा है। |
| पास | वह पास बैठा है। | मेरे पास एक कलम है। |
| दूर | वह दूर रहता है। | गाँव से दूर एक मंदिर है। |
| ऊपर | पतंग ऊपर उड़ रही है। | छत के ऊपर बंदर है। |
| नीचे | वह नीचे गिर गया। | पेड़ के नीचे छाया है। |
| आगे | तुम आगे चलो। | घर के आगे बगीचा है। |
| पीछे | वह पीछे रह गया। | विद्यालय के पीछे खेल का मैदान है। |
| सामने | सामने देखो। | मंदिर के सामने दुकान है। |
| पहले | वह पहले आया। | भोजन से पहले हाथ धोओ। |
| साथ | हम साथ चलेंगे। | वह भाई के साथ आया। |
| निकट | वह निकट आया। | नदी के निकट गाँव है। |
9.2 समुच्चयबोधक बनाम संबंधबोधक
| बिंदु | समुच्चयबोधक | संबंधबोधक |
|---|---|---|
| काम | दो शब्दों / वाक्यों को जोड़ता है | संज्ञा का संबंध दूसरे शब्द से बताता है |
| पहले 'के / की' | नहीं | प्रायः हाँ |
| क्रिया का वचन | राम और श्याम आए। (दोनों कर्ता — बहुवचन) | राम के साथ श्याम आया। (कर्ता केवल श्याम) |
| कारण | वर्षा हुई, इसलिए खेल रुका। | वर्षा के कारण खेल रुका। |
| विरोध / अपवाद | सब आए, परंतु मोहन नहीं आया। | मोहन के सिवा सब आए। |
| सहित | पिता तथा पुत्र गए। | पिता पुत्र सहित गए। |
9.3 विशेषण बनाम क्रिया-विशेषण
संज्ञा की विशेषता बताए तो विशेषण, क्रिया की विशेषता बताए तो क्रिया-विशेषण। आकारांत विशेषण संज्ञा के लिंग-वचन के साथ बदलता है (अच्छा लड़का, अच्छी लड़की); क्रिया-विशेषण के रूप में वही शब्द प्रायः एक-सा रहता है — "लड़की अच्छा गाती है"।
| शब्द | विशेषण (संज्ञा के साथ) | क्रिया-विशेषण (क्रिया के साथ) |
|---|---|---|
| तेज़ | तेज़ घोड़ा जीत गया। | घोड़ा तेज़ दौड़ता है। |
| अच्छा | वह अच्छा लड़का है। | वह अच्छा गाता है। |
| थोड़ा | थोड़ा पानी पियो। | थोड़ा आराम करो। |
| बहुत | बहुत लोग आए। | वह बहुत हँसा। |
| कम | कम नमक डालो। | वह कम बोलता है। |
| सुंदर | सुंदर चित्र है। | वह सुंदर लिखता है। |
| अधिक | अधिक धन हानिकारक है। | वह अधिक पढ़ता है। |
विधेय विशेषण का जाल: "यह चाकू तेज़ है" — 'तेज़' क्रिया के पास है, पर विशेषता चाकू (संज्ञा) की बता रहा है; यह विधेय विशेषण है, क्रिया-विशेषण नहीं।
10. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: 'बाहर' का भेद संज्ञा तय करती है
"वह बाहर गया" — क्रिया-विशेषण (स्थानवाचक)। "वह घर के बाहर गया" — संबंधबोधक। वाक्य में 'बाहर' से पहले संज्ञा + 'के' है या नहीं — बस यही देखना है।
Trap 2: 'मेरे पास' — संबंधबोधक
'मेरे' में 'के' दिखता नहीं (मैं + रे), फिर भी 'पास' सर्वनाम के संबंध-रूप के बाद आया है; इसलिए "मेरे पास", "उसके साथ", "तुम्हारे बिना" — सब संबंधबोधक।
Trap 3: 'इसलिए' बनाम 'क्योंकि'
'इसलिए' परिणाम बताता है और समानाधिकरण (परिणामदर्शक) है; 'क्योंकि' कारण बताता है और व्यधिकरण (कारणवाचक) है। "वह बीमार था, इसलिए नहीं आया" / "वह नहीं आया क्योंकि बीमार था"।
Trap 4: 'के कारण' समुच्चयबोधक नहीं
अर्थ में 'इसलिए' जैसा लगने पर भी "वर्षा के कारण" संज्ञा से बँधा है — संबंधबोधक। समुच्चयबोधक पहले 'के / की' नहीं लेता।
Trap 5: "राम के साथ श्याम आया" — क्रिया एकवचन
'और' दोनों को कर्ता बनाता है (आए); 'के साथ' केवल साथ होने का संबंध बताता है, कर्ता 'श्याम' अकेला रहता है (आया)। वाक्य-शुद्धि में यह अंतर पूछा जाता है।
Trap 6: "तेज़ घोड़ा" बनाम "तेज़ दौड़ता"
पहले में घोड़े की विशेषता — गुणवाचक विशेषण; दूसरे में दौड़ने की — रीतिवाचक क्रिया-विशेषण। "चाकू तेज़ है" — विधेय विशेषण।
Trap 7: 'ही' का स्थान बदलते ही बल बदलता है
"मैं ही कल जाऊँगा" (केवल मैं), "मैं कल ही जाऊँगा" (केवल कल)। प्रश्न "बल किस पर है?" हो तो 'ही' से ठीक पहले वाला पद देखें।
Trap 8: 'परंतु' और 'या' को एक न समझें
'परंतु, किंतु, लेकिन' — विरोध (विरोधदर्शक); 'या, अथवा' — विकल्प (विभाजक); 'और, तथा' — जोड़ (संयोजक); 'अतः, इसलिए' — परिणाम (परिणामदर्शक)। चारों समानाधिकरण के उपभेद हैं।
Trap 9: अव्यय से बने विशेषण अव्यय नहीं
'ऊपर' अव्यय है, पर 'ऊपरी' (ऊपरी मंज़िल / ऊपरी कमाई) विशेषण है; 'पीछे' अव्यय, 'पिछला / पिछली' विशेषण — विशेषण विकारी शब्द-भेद है ('पिछला / पिछली' तो लिंग के अनुसार बदलता भी है)।
11. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 प्रयोग)
| क्र. | वाक्य | अव्यय | भेद |
|---|---|---|---|
| 1 | वह कल आएगा। | कल | कालवाचक क्रिया-विशेषण |
| 2 | वह प्रतिदिन व्यायाम करता है। | प्रतिदिन | कालवाचक क्रिया-विशेषण |
| 3 | तुम अभी चले जाओ। | अभी | कालवाचक क्रिया-विशेषण |
| 4 | वह बार-बार पूछता है। | बार-बार | कालवाचक क्रिया-विशेषण |
| 5 | सदा सच बोलो। | सदा | कालवाचक क्रिया-विशेषण |
| 6 | बच्चे बाहर खेल रहे हैं। | बाहर | स्थानवाचक क्रिया-विशेषण |
| 7 | यहाँ बैठो। | यहाँ | स्थानवाचक क्रिया-विशेषण |
| 8 | वह इधर-उधर घूमता है। | इधर-उधर | स्थानवाचक क्रिया-विशेषण |
| 9 | पतंग ऊपर उड़ रही है। | ऊपर | स्थानवाचक क्रिया-विशेषण |
| 10 | वह दूर रहता है। | दूर | स्थानवाचक क्रिया-विशेषण |
| 11 | वह बहुत बोलता है। | बहुत | परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण |
| 12 | थोड़ा खाओ। | थोड़ा | परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण |
| 13 | वह कम सोता है। | कम | परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण |
| 14 | वह खूब हँसा। | खूब | परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण |
| 15 | वह काफ़ी पढ़ चुका है। | काफ़ी | परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण |
| 16 | वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है। | ध्यानपूर्वक | रीतिवाचक क्रिया-विशेषण |
| 17 | घोड़ा तेज़ दौड़ता है। | तेज़ | रीतिवाचक क्रिया-विशेषण |
| 18 | वह धीरे-धीरे चलता है। | धीरे-धीरे | रीतिवाचक क्रिया-विशेषण |
| 19 | मैं अवश्य आऊँगा। | अवश्य | रीतिवाचक (निश्चय) |
| 20 | शायद वर्षा होगी। | शायद | रीतिवाचक (अनिश्चय) |
| 21 | वह अचानक आ गया। | अचानक | रीतिवाचक क्रिया-विशेषण |
| 22 | पेड़ के नीचे छाया है। | के नीचे | संबंधबोधक (स्थान) |
| 23 | वह घर की ओर चला। | की ओर | संबंधबोधक (दिशा) |
| 24 | पानी के बिना जीवन नहीं। | के बिना | संबंधबोधक (व्यतिरेक) |
| 25 | वह मित्र के साथ आया। | के साथ | संबंधबोधक (साहचर्य) |
| 26 | वर्षा के कारण खेल रुका। | के कारण | संबंधबोधक (कारण) |
| 27 | भोजन के बाद टहलो। | के बाद | संबंधबोधक (काल) |
| 28 | मेरे पास एक कलम है। | पास | संबंधबोधक (स्थान) |
| 29 | वह शेर की तरह लड़ा। | की तरह | संबंधबोधक (सादृश्य) |
| 30 | वह नियम के विरुद्ध गया। | के विरुद्ध | संबंधबोधक (विरोध) |
| 31 | मोहन के सिवा सब आए। | के सिवा | संबंधबोधक (व्यतिरेक) |
| 32 | मुझे उसके बारे में बताओ। | के बारे में | संबंधबोधक (विषय) |
| 33 | राम और श्याम भाई हैं। | और | संयोजक (समानाधिकरण) |
| 34 | माता तथा पिता आए। | तथा | संयोजक (समानाधिकरण) |
| 35 | चाय लोगे या कॉफ़ी? | या | विभाजक (समानाधिकरण) |
| 36 | न वह आया, न उसका भाई। | न... न | विभाजक (समानाधिकरण) |
| 37 | वह आया, परंतु देर से। | परंतु | विरोधदर्शक (समानाधिकरण) |
| 38 | वह गरीब है, लेकिन ईमानदार है। | लेकिन | विरोधदर्शक (समानाधिकरण) |
| 39 | वह बीमार था, इसलिए नहीं आया। | इसलिए | परिणामदर्शक (समानाधिकरण) |
| 40 | परीक्षा निकट है, अतः पढ़ाई करो। | अतः | परिणामदर्शक (समानाधिकरण) |
| 41 | वह नहीं आया क्योंकि बीमार था। | क्योंकि | कारणवाचक (व्यधिकरण) |
| 42 | मेहनत करो ताकि सफल हो सको। | ताकि | उद्देश्यवाचक (व्यधिकरण) |
| 43 | यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे। | यदि... तो | संकेतवाचक (व्यधिकरण) |
| 44 | यद्यपि वह गरीब है तथापि ईमानदार है। | यद्यपि... तथापि | संकेतवाचक (व्यधिकरण) |
| 45 | वह इतना डरा मानो भूत देख लिया हो। | मानो | स्वरूपवाचक (व्यधिकरण) |
| 46 | वाह! क्या गोल किया। | वाह | विस्मयादिबोधक (हर्ष) |
| 47 | हाय! वह चल बसा। | हाय | विस्मयादिबोधक (शोक) |
| 48 | छि! कितनी गंदगी है। | छि | विस्मयादिबोधक (घृणा) |
| 49 | राम ही यह काम करेगा। | ही | निपात (बल) |
| 50 | उसने पानी तक नहीं पिया। | तक | निपात (बल) |
12. CET में अव्यय कैसे पूछे जाते हैं
राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में अव्यय के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचा पहचान लेने से उत्तर जल्दी मिलता है:
- रेखांकित शब्द का भेद: "'वह धीरे-धीरे चलता है' में 'धीरे-धीरे'" — क्रिया से कैसे? पूछें → रीतिवाचक।
- समुच्चयबोधक का उपभेद: 'परंतु' विरोधदर्शक, 'या' विभाजक, 'क्योंकि' कारणवाचक, 'ताकि' उद्देश्यवाचक।
- एक शब्द, चार वाक्य: "किस वाक्य में 'पास' संबंधबोधक है?" — संज्ञा / सर्वनाम + के वाला वाक्य।
- बेमेल शब्द: "कौन-सा संबंधबोधक नहीं है — के साथ, की ओर, के बिना, और?" — 'और'।
- भाव-पहचान: "'छि!' किस भाव का सूचक है?" — घृणा।
- विशेषण या क्रिया-विशेषण: "तेज़ घोड़ा" बनाम "तेज़ दौड़ता"।
रणनीति: पहले देखें कि शब्द किससे जुड़ा है — क्रिया से (क्रिया-विशेषण), संज्ञा से 'के / की' के साथ (संबंधबोधक), दो वाक्यों के बीच (समुच्चयबोधक), किसी से नहीं और भाव प्रकट करता है (विस्मयादिबोधक)। फिर उपभेद के लिए अर्थ देखें।
13. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. चार काम — "क्रिया, संबंध, जोड़, भाव": क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।
2. क्रिया-विशेषण के चार प्रश्न — "कब-कहाँ-कितना-कैसे": काल, स्थान, परिमाण, रीति।
3. "के लगा तो संबंध, अकेला तो क्रिया": 'के बाहर' संबंधबोधक, 'बाहर' क्रिया-विशेषण।
4. समानाधिकरण के चार — "जोड़ो, बाँटो, विरोध करो, नतीजा बताओ": संयोजक, विभाजक, विरोधदर्शक, परिणामदर्शक।
5. व्यधिकरण के चार — "क्यों? किसलिए? अगर? यानी?": कारण (क्योंकि), उद्देश्य (ताकि), संकेत (यदि... तो), स्वरूप (अर्थात्, मानो)।
6. निपात = बल: "ही-भी-तो-तक, मात्र-भर, सिर्फ़-केवल" — हटाओ तो अर्थ बचे, ज़ोर घटे।
7. 'इसलिए' नतीजा, 'क्योंकि' कारण: पहला समानाधिकरण, दूसरा व्यधिकरण।
14. कथन अभ्यास
अव्यय का रूप लिंग, वचन, कारक और काल के कारण नहीं बदलता। — सही।
'वह बाहर गया' में 'बाहर' संबंधबोधक है। — गलत (स्थानवाचक क्रिया-विशेषण)।
'घर के बाहर पेड़ है' में 'के बाहर' संबंधबोधक है। — सही।
'परंतु' विभाजक समुच्चयबोधक है। — गलत (विरोधदर्शक)।
'क्योंकि' व्यधिकरण समुच्चयबोधक है। — सही (कारणवाचक)।
'छि!' हर्ष का सूचक है। — गलत (घृणा)।
'घोड़ा तेज़ दौड़ता है' में 'तेज़' विशेषण है। — गलत (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)।
'वह ध्यानपूर्वक पढ़ता है' में 'ध्यानपूर्वक' रीतिवाचक क्रिया-विशेषण है। — सही।
'राम के साथ श्याम आया' में 'के साथ' समुच्चयबोधक है। — गलत (संबंधबोधक)।
15. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
- अव्यय = अविकारी शब्द; लिंग, वचन, कारक, काल से रूप नहीं बदलता
- गुरु के अनुसार 4 भेद; निपात जोड़ने पर 5 — दोनों मत प्रचलित
- क्रिया-विशेषण: कब (काल), कहाँ (स्थान), कितना (परिमाण), कैसे (रीति)
- रूप के आधार पर: मूल (दूर, अचानक), यौगिक (रातभर, ध्यानपूर्वक), स्थानीय
- संबंधबोधक: संज्ञा / सर्वनाम के बाद — के साथ, के बिना, की ओर, के पास, के कारण
- 'बाहर' अकेला = क्रिया-विशेषण; 'के बाहर' = संबंधबोधक; 'मेरे पास' = संबंधबोधक
- समानाधिकरण: संयोजक (और), विभाजक (या), विरोधदर्शक (परंतु), परिणामदर्शक (इसलिए, अतः)
- व्यधिकरण: कारण (क्योंकि), उद्देश्य (ताकि), संकेत (यदि... तो), स्वरूप (अर्थात्, मानो)
- विस्मयादिबोधक: वाह (हर्ष), हाय (शोक), ओह (आश्चर्य), छि (घृणा), अच्छा (स्वीकृति), हे (संबोधन)
- निपात: ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़, केवल — बल देने वाले
- 'और' → क्रिया बहुवचन (राम और श्याम आए); 'के साथ' → एकवचन (राम के साथ श्याम आया)
- 'तेज़ घोड़ा' विशेषण; 'तेज़ दौड़ता' क्रिया-विशेषण; 'चाकू तेज़ है' विधेय विशेषण
16. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। हर गलत उत्तर पर देखें कि शब्द किससे जुड़ा था — क्रिया से, संज्ञा से या दो वाक्यों के बीच। संज्ञा से अव्यय तक पूरे शब्द-विचार के मिश्रित अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।
17. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
अव्यय का अध्याय शब्दों की सूची रटने का नहीं, उनके काम को पहचानने का है। एक ही 'बाहर' क्रिया-विशेषण भी है और संबंधबोधक भी; एक ही 'तेज़' विशेषण भी है और क्रिया-विशेषण भी; 'इसलिए' और 'के कारण' अर्थ में पास होकर भी अलग वर्गों के हैं। निर्णय हर बार यही प्रश्न करता है — यह शब्द किससे जुड़ा है? क्रिया से तो क्रिया-विशेषण, संज्ञा से 'के / की' के साथ तो संबंधबोधक, दो अंशों के बीच तो समुच्चयबोधक, और किसी से नहीं तो विस्मयादिबोधक। निपात को अलग भेद मानें या न मानें, ही-भी-तो का काम बल देना ही है। 50 प्रयोगों की तालिका को इसी प्रश्न के साथ दोहराएँ।
अव्यय = अविकारी | कब-कहाँ-कितना-कैसे = क्रिया-विशेषण | के + शब्द = संबंधबोधक | और · या · परंतु · इसलिए = समानाधिकरण | क्योंकि · ताकि · यदि-तो · मानो = व्यधिकरण | वाह · हाय · छि = विस्मयादिबोधक | ही · भी · तो = निपात

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, कारक या काल के कारण नहीं बदलता, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं। जैसे 'लड़का धीरे चलता है' और 'लड़की धीरे चलती है' — दोनों में 'धीरे' वही रहता है।
कामता प्रसाद गुरु की परंपरा में चार भेद हैं — क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक। कई आधुनिक पुस्तकें निपात (ही, भी, तो आदि) को पाँचवाँ भेद मानती हैं, इसलिए उत्तर संदर्भ-पुस्तक पर निर्भर करता है।
अर्थ के आधार पर क्रिया-विशेषण के चार भेद हैं — कालवाचक (कब?), स्थानवाचक (कहाँ?), परिमाणवाचक (कितना?) और रीतिवाचक (कैसे?)। रूप के आधार पर इसके मूल, यौगिक और स्थानीय भेद भी बताए जाते हैं।
जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताए, वह संबंधबोधक है। जैसे के साथ, के बिना, की ओर, के पास, के कारण — 'वह मित्र के साथ आया।'
एक ही शब्द अकेला आकर क्रिया की विशेषता बताए तो क्रिया-विशेषण है, जैसे 'वह बाहर गया'। वही शब्द संज्ञा या सर्वनाम के बाद के / की के साथ आए तो संबंधबोधक है, जैसे 'वह घर के बाहर गया'।
समानाधिकरण समुच्चयबोधक बराबर स्तर के शब्दों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं — संयोजक (और), विभाजक (या), विरोधदर्शक (परंतु), परिणामदर्शक (इसलिए)। व्यधिकरण समुच्चयबोधक मुख्य उपवाक्य को आश्रित उपवाक्य से जोड़ते हैं — कारणवाचक (क्योंकि), उद्देश्यवाचक (ताकि), संकेतवाचक (यदि... तो), स्वरूपवाचक (अर्थात्, मानो)।
समुच्चयबोधक दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ता है और उसके पहले 'के / की' नहीं लगता, जैसे 'राम और श्याम आए'। संबंधबोधक संज्ञा से बँधा रहता है, जैसे 'राम के साथ श्याम आया'; यहाँ कर्ता केवल श्याम है, इसलिए क्रिया एकवचन है।
ये हर्ष (वाह!, शाबाश!), शोक (हाय!, आह!), आश्चर्य (ओह!, अरे!), घृणा (छि!, धिक्!), स्वीकृति (हाँ!, अच्छा!) और संबोधन (हे!, अजी!) जैसे भाव प्रकट करते हैं। इनके बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।
जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगकर उस पर विशेष बल दें, उन्हें निपात कहते हैं — ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़, केवल। जैसे 'राम ही यह काम करेगा' में बल राम पर है।
यह प्रयोग पर निर्भर है। 'तेज़ घोड़ा जीत गया' में 'तेज़' घोड़े की विशेषता बताता है, इसलिए विशेषण है। 'घोड़ा तेज़ दौड़ता है' में यह दौड़ने का ढंग बताता है, इसलिए रीतिवाचक क्रिया-विशेषण है।
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