तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज शब्द — 96 तत्सम-तद्भव जोड़े, रूढ़-यौगिक-योगरूढ़ — CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: उत्पत्ति (स्रोत) के आधार पर हिंदी शब्दों के पाँच भेद हैं — तत्सम (संस्कृत के शब्द जो बिना बदले हिंदी में आए: अग्नि, हस्त, दुग्ध, सूर्य), तद्भव (संस्कृत से निकले पर प्राकृत-अपभ्रंश से होकर बदले रूप: आग, हाथ, दूध, सूरज), देशज (स्थानीय बोलियों से उपजे शब्द जिनका संस्कृत या विदेशी स्रोत नहीं मिलता: पगड़ी, लोटा, खिड़की), विदेशज / आगत (अरबी, फ़ारसी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी आदि से आए: क़ानून, ज़मीन, तोप, अलमारी, स्कूल, कारतूस) और संकर (दो भिन्न स्रोतों के मेल से बने: रेलगाड़ी, टिकटघर)। रचना के आधार पर शब्द तीन प्रकार के हैं — रूढ़ (घर, पेड़), यौगिक (विद्यालय, पुस्तकालय) और योगरूढ़ (पंकज = कमल, लंबोदर = गणेश)। परीक्षा का सबसे बड़ा भाग तत्सम → तद्भव जोड़े हैं; पहचान का सूत्र: ऋ, ष, क्ष, श्र, र-संयुक्त (रेफ) और संयुक्त व्यंजन वाला रूप प्रायः तत्सम; सरल, चंद्रबिंदु वाला बोलचाल का रूप प्रायः तद्भव।
संक्षिप्त उत्तर
| भेद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| तत्सम | तत् + सम = उसके (संस्कृत के) समान; संस्कृत से बिना बदले आए | अग्नि, हस्त, क्षेत्र, सूर्य, ग्राम, दुग्ध |
| तद्भव | तत् + भव = उससे (संस्कृत से) उत्पन्न; रूप बदलकर आए | आग, हाथ, खेत, सूरज, गाँव, दूध |
| देशज | देश (स्थानीय बोलियों) में जन्मे | पगड़ी, लोटा, खिड़की, झोला, डिबिया |
| विदेशज / आगत | विदेशी भाषाओं से आए | क़ानून (अरबी), ज़मीन (फ़ारसी), तोप (तुर्की), अलमारी (पुर्तगाली), स्कूल (अंग्रेज़ी) |
| संकर | दो भिन्न स्रोतों के शब्दों से बने | रेलगाड़ी, टिकटघर, डबलरोटी, सीलबंद |
| रूढ़ | खंड करने पर खंडों का कोई अर्थ नहीं | घर, पेड़, हाथ, रोटी |
| यौगिक | सार्थक खंडों के योग से बना, अर्थ खंडों से ही | विद्यालय, पुस्तकालय, पाठशाला |
| योगरूढ़ | यौगिक बनावट, पर अर्थ एक विशेष वस्तु/व्यक्ति में रूढ़ | पंकज, जलज, लंबोदर, दशानन, पीतांबर |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
शब्द-भेद हिंदी व्याकरण के शब्द-विचार खंड का आधार अध्याय है। तत्सम-तद्भव के जोड़े लगभग हर स्तर की हिंदी परीक्षा में पूछे जाते हैं, और इनकी समझ संधि (संधि प्रायः तत्सम शब्दों में होती है), वर्तनी-शुद्धि (ऋ, ष, क्ष वाले शब्द) और उपसर्ग-प्रत्यय (तत्सम उपसर्ग बनाम हिंदी व विदेशी उपसर्ग) — तीनों में सीधे काम आती है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- CET 12th व Graduation स्तर
- पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
- REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
- राजस्थान पुलिस SI (हिंदी व्याकरण भाग)
- RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता
प्रश्न कैसे आते हैं?
- "'अग्नि' का तद्भव रूप है —" — सबसे सामान्य रूप
- "निम्नलिखित में से तत्सम / तद्भव शब्द कौन-सा है?"
- "कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?" — तत्सम–तद्भव की चार जोड़ियाँ
- "'कुर्सी' / 'तोप' / 'अलमारी' किस भाषा का शब्द है?"
- "निम्नलिखित में से देशज / संकर शब्द कौन-सा है?"
- "'पंकज' / 'लंबोदर' रचना के आधार पर किस प्रकार का शब्द है?"
3. शब्द-भेद — वर्गीकरण के आधार
हिंदी शब्दों का वर्गीकरण कई आधारों पर होता है। यह नोट पहले दो आधारों (उत्पत्ति और रचना) पर केंद्रित है।
| आधार | भेद |
|---|---|
| उत्पत्ति / स्रोत / इतिहास | तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज, संकर |
| रचना / बनावट / व्युत्पत्ति | रूढ़, यौगिक, योगरूढ़ |
| प्रयोग / रूपांतरण | विकारी (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया), अविकारी (अव्यय) |
| अर्थ | सार्थक-निरर्थक; एकार्थी, अनेकार्थी, पर्यायवाची, विलोम |
अर्थ के आधार वाले भेदों (पर्यायवाची, विलोम) के लिए पर्यायवाची और विलोम शब्द वाला नोट देखें।
4. तत्सम शब्द
परिभाषा: 'तत्सम' = तत् (वह, अर्थात् संस्कृत) + सम (समान)। संस्कृत के वे शब्द जो हिंदी में बिना किसी परिवर्तन के अपने मूल रूप में प्रयुक्त होते हैं, तत्सम कहलाते हैं।
उदाहरण: अग्नि, जल, वायु, पुष्प, कमल, विद्या, ज्ञान, पुस्तक, सूर्य, चंद्र, रात्रि, क्षेत्र, ग्राम, मयूर, हस्त, कर्ण, दुग्ध, घृत।
विशेषताएँ: तत्सम शब्द प्रायः औपचारिक, साहित्यिक और पारिभाषिक हिंदी में आते हैं; इनमें संस्कृत की ध्वनियाँ (ऋ, ष, क्ष, विसर्ग, हलंत) सुरक्षित रहती हैं; संधि और समास के नियम प्रायः इन्हीं पर लागू होते हैं। कई तत्सम शब्द बोलचाल में भी उतने ही प्रचलित हैं — जैसे 'पुस्तक', 'विद्या', 'कमल' — इसलिए "प्रचलित है तो तद्भव है" यह मान लेना भूल है।
5. तद्भव शब्द और अर्धतत्सम
परिभाषा: 'तद्भव' = तत् (वह, संस्कृत) + भव (उत्पन्न)। संस्कृत से उत्पन्न वे शब्द जो पालि, प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए रूप बदलकर हिंदी में आए, तद्भव कहलाते हैं। जैसे — हस्त → हत्थ (प्राकृत) → हाथ।
उदाहरण: आग, हाथ, कान, दूध, घी, सूरज, चाँद, रात, खेत, गाँव, मोर।
5.1 अर्धतत्सम शब्द
कुछ पुस्तकें एक बीच की श्रेणी भी मानती हैं — अर्धतत्सम: संस्कृत के वे शब्द जो प्राकृत से गुज़रे बिना, सीधे बोलचाल में थोड़े बदल गए। ये तत्सम और तद्भव के बीच की अवस्था हैं।
| तत्सम | अर्धतत्सम | तद्भव |
|---|---|---|
| अग्नि | अगिन | आग |
| कर्म | करम | काम |
| धर्म | धरम | — |
| कृष्ण | किसन / किशन | कान्ह |
सभी पुस्तकें अर्धतत्सम को अलग भेद नहीं मानतीं; कई पुस्तकें 'धरम', 'करम' जैसे रूपों को तद्भव में ही गिनती हैं। इसलिए परीक्षा में तद्भव पूछा जाए तो सबसे सरल बोलचाल वाला रूप (आग, काम) चुनें, अर्धतत्सम रूप (अगिन, करम) नहीं।
6. तत्सम → तद्भव — 96 मानक जोड़े
नीचे वे जोड़े हैं जो मानक व्याकरण-पुस्तकों में तत्सम-तद्भव के उदाहरण के रूप में दिए जाते हैं। इन्हें दोनों दिशाओं में याद करें — परीक्षा में कभी तत्सम देकर तद्भव पूछा जाता है, कभी उल्टा।
| क्र. | तत्सम | तद्भव | क्र. | तत्सम | तद्भव |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अग्नि | आग | 49 | पक्षी | पंछी |
| 2 | अंधकार | अँधेरा | 50 | पंच | पाँच |
| 3 | अक्षि | आँख | 51 | पत्र | पत्ता |
| 4 | अश्रु | आँसू | 52 | पर्यंक | पलंग |
| 5 | अष्ट | आठ | 53 | प्रस्तर | पत्थर |
| 6 | अर्ध | आधा | 54 | पुत्र | पूत |
| 7 | आम्र | आम | 55 | पृष्ठ | पीठ |
| 8 | आश्चर्य | अचरज | 56 | बलीवर्द | बैल |
| 9 | अंगुलि | उँगली | 57 | बिंदु | बूँद |
| 10 | उच्च | ऊँचा | 58 | भिक्षा | भीख |
| 11 | उष्ट्र | ऊँट | 59 | भ्रमर | भौंरा |
| 12 | ओष्ठ | होंठ | 60 | भ्राता | भाई |
| 13 | कर्ण | कान | 61 | मक्षिका | मक्खी |
| 14 | कर्म | काम | 62 | मयूर | मोर |
| 15 | कार्य | काज | 63 | महिषी | भैंस |
| 16 | काष्ठ | काठ | 64 | मुख | मुँह |
| 17 | कज्जल | काजल | 65 | मृत्तिका | मिट्टी |
| 18 | कुंभकार | कुम्हार | 66 | मस्तक | माथा |
| 19 | कूप | कुआँ | 67 | यव | जौ |
| 20 | कोकिल | कोयल | 68 | यमुना | जमुना |
| 21 | कृष्ण | कान्ह | 69 | योगी | जोगी |
| 22 | क्षेत्र | खेत | 70 | रात्रि | रात |
| 23 | क्षीर | खीर | 71 | लक्ष | लाख |
| 24 | गर्दभ | गधा | 72 | लज्जा | लाज |
| 25 | गृह | घर | 73 | वत्स | बछड़ा |
| 26 | ग्राम | गाँव | 74 | वधू | बहू |
| 27 | गौ | गाय | 75 | वानर | बंदर |
| 28 | गोधूम | गेहूँ | 76 | वृद्ध | बूढ़ा |
| 29 | घृत | घी | 77 | व्याघ्र | बाघ |
| 30 | घोटक | घोड़ा | 78 | वर्षा | बरखा |
| 31 | चंद्र | चाँद | 79 | शय्या | सेज |
| 32 | चक्र | चाक | 80 | शाक | साग |
| 33 | चौर | चोर | 81 | शिक्षा | सीख |
| 34 | छिद्र | छेद | 82 | शृंगार | सिंगार |
| 35 | जिह्वा | जीभ | 83 | श्रावण | सावन |
| 36 | ज्येष्ठ | जेठ | 84 | श्वास | साँस |
| 37 | तृण | तिनका | 85 | सप्त | सात |
| 38 | तैल | तेल | 86 | सर्प | साँप |
| 39 | दंत | दाँत | 87 | सत्य | सच |
| 40 | दधि | दही | 88 | सर्षप | सरसों |
| 41 | दश | दस | 89 | सूर्य | सूरज |
| 42 | दुग्ध | दूध | 90 | सूत्र | सूत |
| 43 | दीप | दीया | 91 | स्वर्ण | सोना |
| 44 | धूम्र | धुआँ | 92 | स्वप्न | सपना |
| 45 | धैर्य | धीरज | 93 | स्तंभ | खंभा |
| 46 | नासिका | नाक | 94 | हस्त | हाथ |
| 47 | निद्रा | नींद | 95 | हस्ती | हाथी |
| 48 | नृत्य | नाच | 96 | हरिद्रा | हल्दी |
7. तत्सम शब्द पहचानने के संकेत
तत्सम से तद्भव बनते समय ध्वनियाँ एक निश्चित ढंग से बदलती हैं। इन्हें पहचान लें तो अनदेखे जोड़े भी हल हो जाते हैं। ध्यान रहे — ये प्रवृत्तियाँ हैं, हर शब्द पर लागू होने वाले पक्के नियम नहीं।
| तत्सम में संकेत | तद्भव में क्या होता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| ऋ / ृ की मात्रा | ऋ → इ, ई, अ या लुप्त | घृत → घी, गृह → घर, शृंगार → सिंगार, मृत्तिका → मिट्टी |
| ष | ष → स, ख या लुप्त | सर्षप → सरसों, वर्षा → बरखा, पृष्ठ → पीठ |
| क्ष | क्ष → ख | क्षेत्र → खेत, क्षीर → खीर, भिक्षा → भीख, शिक्षा → सीख, लक्ष → लाख, मक्षिका → मक्खी |
| श / श्र | श → स | श्रावण → सावन, श्वास → साँस, शाक → साग, शय्या → सेज |
| र-संयुक्त / रेफ (र्) | र लुप्त, पहला स्वर दीर्घ | कर्म → काम, कर्ण → कान, सर्प → साँप, स्वर्ण → सोना |
| संयुक्त व्यंजन (स्त, ग्ध, प्त, ष्ट, क्ष) | सरल होकर एक व्यंजन, स्वर दीर्घ | हस्त → हाथ, दुग्ध → दूध, सप्त → सात, अष्ट → आठ |
| व (आरंभ में) | व → ब | वानर → बंदर, वृद्ध → बूढ़ा, व्याघ्र → बाघ, वधू → बहू |
| य (आरंभ में) | य → ज | यव → जौ, यमुना → जमुना, योगी → जोगी |
| पंचमाक्षर / अनुस्वार | प्रायः चंद्रबिंदु | दंत → दाँत, पंच → पाँच, चंद्र → चाँद, ग्राम → गाँव |
| त्र, द्र | सरल रूप | पत्र → पत्ता, रात्रि → रात, छिद्र → छेद, हरिद्रा → हल्दी |
| विसर्ग (ः), हलंत (्) | तद्भव में प्रायः नहीं मिलते | दुःख, प्रातः, जगत् — ये तत्सम रूप हैं |
इन ध्वनियों का उच्चारण स्थान और वर्गीकरण वर्ण विचार: स्वर और व्यंजन वाले नोट में देखें।
8. देशज शब्द
परिभाषा: 'देशज' = देश में जन्मा। वे शब्द जो क्षेत्रीय बोलियों और लोक-व्यवहार से बने हैं और जिनका स्रोत न संस्कृत में मिलता है न किसी विदेशी भाषा में, देशज कहलाते हैं। कई देशज शब्द ध्वनि के अनुकरण (ध्वन्यात्मक) से भी बने हैं।
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| वस्तुएँ | पगड़ी, लोटा, डिबिया, झोला, थैला, कटोरा, खिड़की, जूता |
| खान-पान / अन्य | खिचड़ी, तेंदुआ, चिड़िया, फुनगी |
| भाव / स्थिति | ठेठ, झंझट, गड़बड़, खटपट |
| ध्वन्यात्मक (अनुकरणमूलक) | खटखटाना, भिनभिनाना, गड़गड़ाहट, चटपट, धड़ाम |
सावधानी: देशज शब्दों की सूची पर विद्वानों में पूरी सहमति नहीं है — कुछ शब्दों के लिए बाद में संस्कृत या प्राकृत स्रोत सुझाए गए हैं। परीक्षा में देशज का प्रश्न प्रायः ऐसे विकल्पों के साथ आता है जिनमें बाकी तीन शब्द स्पष्ट रूप से तत्सम या विदेशी हों; उसी आधार पर उत्तर चुनें।
9. विदेशज / आगत शब्द
परिभाषा: विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए शब्द विदेशज या आगत कहलाते हैं। मध्यकाल में शासन, न्याय और दरबार के संपर्क से अरबी-फ़ारसी-तुर्की शब्द आए; आधुनिक काल में व्यापार और शासन से पुर्तगाली, अंग्रेज़ी और फ्रांसीसी शब्द। अरबी-फ़ारसी शब्दों में प्रायः नुक़्ता वाली ध्वनियाँ (क़, ख़, ग़, ज़, फ़) मिलती हैं।
9.1 अरबी शब्द
| क्षेत्र | शब्द |
|---|---|
| न्याय / शासन | अदालत, क़ानून, मुक़दमा, फ़ैसला, वकील, हक़, हुक्म, तहसील, ज़िला |
| पढ़ाई / लेखन | किताब, क़लम, अख़बार, ख़त, ख़बर, तारीख़, नक़ल |
| जीवन / समाज | औरत, औलाद, इनाम, इलाज, इज़्ज़त, दौलत, दवा, मदद, ग़रीब, मालिक |
| अन्य | कुर्सी, क़िस्मत, क़ीमत, क़िला, जवाब, हिसाब, हलवा, अक़्ल, दुनिया, इंसान, मौसम, तमाशा, तरक़्क़ी, मुल्क |
9.2 फ़ारसी शब्द
| क्षेत्र | शब्द |
|---|---|
| प्रकृति / घर | आसमान, ज़मीन, बर्फ़, शहर, दरवाज़ा, आईना |
| शरीर / स्वास्थ्य | कमर, गर्दन, ख़ून, दर्द, बीमार |
| खान-पान | नमक, अंगूर, बादाम, किशमिश, सब्ज़ी |
| जीवन / समाज | आराम, आवाज़, आमदनी, उम्मीद, ज़िंदगी, शादी, याद, मज़दूर, सरकार, दरबार |
| अन्य | गुलाब, चश्मा, रूमाल, रंग, जादू, कुश्ती, गिरफ़्तार, हफ़्ता, हज़ार, ख़ुद, कबूतर |
9.3 तुर्की शब्द
| शब्द | शब्द | शब्द |
|---|---|---|
| तोप | बारूद | तमग़ा |
| चाकू | कैंची | चम्मच |
| बेगम | बहादुर | लाश |
| उर्दू | कुली | दरोग़ा |
| सौग़ात | बावर्ची | चेचक |
'उर्दू' मूलतः तुर्की शब्द है जिसका अर्थ है सेना का पड़ाव / छावनी।
9.4 पुर्तगाली शब्द
| हिंदी शब्द | हिंदी शब्द | हिंदी शब्द |
|---|---|---|
| अलमारी | आलपिन | इस्पात |
| कमरा | कमीज़ | काजू |
| गमला | गोदाम | चाबी |
| तंबाकू | तौलिया | नीलाम |
| पादरी | पिस्तौल | फ़ीता |
| बाल्टी | मेज़ | अनन्नास |
9.5 अंग्रेज़ी शब्द
| प्रकार | शब्द |
|---|---|
| मूल रूप में | स्कूल, कॉलेज, डॉक्टर, टिकट, स्टेशन, रेल, बस, मोटर, पेन, पेंसिल, बैंक, रेडियो, कंप्यूटर, बटन, डायरी |
| हिंदी में रूप बदलकर | अस्पताल (hospital), लालटेन (lantern), रपट (report), अफ़सर (officer), गिलास (glass) |
अस्पताल, लालटेन जैसे शब्द इतने घुल-मिल गए हैं कि इन्हें हिंदी का मूल शब्द समझ लिया जाता है — परीक्षा में यही जाल बनता है।
9.6 फ्रांसीसी शब्द
| हिंदी शब्द | मूल |
|---|---|
| कारतूस | cartouche |
| अंग्रेज़ | anglais |
| कूपन | coupon |
| रेस्तराँ | restaurant |
| बुर्जुआ | bourgeois |
9.7 अन्य भाषाएँ (संक्षेप में)
| भाषा | शब्द |
|---|---|
| चीनी | चाय, लीची |
| जापानी | रिक्शा |
| रूसी | सोवियत, स्पुतनिक |
10. संकर शब्द
परिभाषा: दो अलग-अलग स्रोतों (भाषाओं) के शब्दों या शब्दांशों के मेल से बने शब्द संकर कहलाते हैं।
| संकर शब्द | पहला भाग | दूसरा भाग |
|---|---|---|
| रेलगाड़ी | रेल (अंग्रेज़ी) | गाड़ी (हिंदी) |
| टिकटघर | टिकट (अंग्रेज़ी) | घर (हिंदी) |
| डबलरोटी | डबल (अंग्रेज़ी) | रोटी (हिंदी) |
| सीलबंद | सील (अंग्रेज़ी) | बंद (फ़ारसी) |
| लाठीचार्ज | लाठी (हिंदी) | चार्ज (अंग्रेज़ी) |
| रेलयात्री | रेल (अंग्रेज़ी) | यात्री (संस्कृत) |
| बेढंगा | बे (फ़ारसी उपसर्ग) | ढंग (हिंदी) |
| छायादार | छाया (संस्कृत) | दार (फ़ारसी प्रत्यय) |
| किताबघर | किताब (अरबी) | घर (हिंदी) |
उपसर्ग-प्रत्यय से बने संकर शब्द (बे + ढंग, छाया + दार) समझने के लिए उपसर्ग और प्रत्यय वाला नोट देखें — वहाँ संस्कृत, हिंदी और विदेशी उपसर्ग अलग-अलग दिए गए हैं।
11. जिनके स्रोत में प्रायः भ्रम होता है
| शब्द | सही स्रोत | आम भ्रम |
|---|---|---|
| कुर्सी | अरबी | फ़ारसी मान लेना |
| किताब, क़लम | अरबी | फ़ारसी मान लेना |
| कमरा | पुर्तगाली | अंग्रेज़ी मान लेना |
| अलमारी, बाल्टी, मेज़ | पुर्तगाली | हिंदी / अंग्रेज़ी मान लेना |
| तोप, चाकू, बेगम | तुर्की | फ़ारसी / अरबी मान लेना |
| उर्दू | तुर्की (शब्द के रूप में) | फ़ारसी / अरबी मान लेना |
| कारतूस | फ्रांसीसी | अंग्रेज़ी / पुर्तगाली मान लेना |
| अस्पताल, लालटेन | अंग्रेज़ी | हिंदी / देशज मान लेना |
| नमक | फ़ारसी (तत्सम समानार्थी — लवण) | तद्भव मान लेना |
| गर्दन | फ़ारसी (तत्सम समानार्थी — ग्रीवा) | तद्भव मान लेना |
| कबूतर | फ़ारसी | 'कपोत' का तद्भव मान लेना |
| रिक्शा | जापानी | अंग्रेज़ी / चीनी मान लेना |
कपोत–कबूतर पर टिप्पणी: 'कबूतर' फ़ारसी शब्द है; संस्कृत 'कपोत' से इसकी समानता के कारण कुछ पुस्तकों में यह जोड़ा तत्सम-तद्भव के रूप में भी छप गया है। इसीलिए इसे इस नोट की तत्सम-तद्भव तालिका और क्विज़ में नहीं रखा गया।
11.1 एक अर्थ, दो स्रोत — तत्सम और विदेशी समानार्थी
बहुत से अर्थों के लिए हिंदी में एक तत्सम शब्द और एक विदेशी शब्द — दोनों चलते हैं। ये आपस में पर्यायवाची हैं, तत्सम-तद्भव नहीं; तद्भव में ध्वनि का संबंध दिखता है, यहाँ नहीं। परीक्षा में "पुस्तक का तद्भव — किताब" जैसा विकल्प इसी भ्रम पर बनता है।
| तत्सम | विदेशी समानार्थी | स्रोत भाषा |
|---|---|---|
| पुस्तक | किताब | अरबी |
| लेखनी | क़लम | अरबी |
| न्यायालय | अदालत | अरबी |
| पत्र | ख़त | अरबी |
| समाचार | ख़बर | अरबी |
| स्त्री | औरत | अरबी |
| संतान | औलाद | अरबी |
| पुरस्कार | इनाम | अरबी |
| औषधि | दवा | अरबी |
| सहायता | मदद | अरबी |
| भाग्य | क़िस्मत | अरबी |
| उत्तर | जवाब | अरबी |
| निर्धन | ग़रीब | अरबी |
| भूमि | ज़मीन | फ़ारसी |
| आकाश | आसमान | फ़ारसी |
| द्वार | दरवाज़ा | फ़ारसी |
| दर्पण | आईना | फ़ारसी |
| विवाह | शादी | फ़ारसी |
| स्मृति | याद | फ़ारसी |
| श्रमिक | मज़दूर | फ़ारसी |
| रोगी | बीमार | फ़ारसी |
| लवण | नमक | फ़ारसी |
| ग्रीवा | गर्दन | फ़ारसी |
| चिकित्सालय | अस्पताल | अंग्रेज़ी |
| विद्यालय | स्कूल | अंग्रेज़ी |
12. रचना के आधार पर — रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| रूढ़ | खंड करने पर खंड निरर्थक; पूरा शब्द परंपरा से अर्थ देता है | घर (घ + र), पेड़, हाथ, पैर, रोटी, पानी, दिन, गाय |
| यौगिक | दो या अधिक सार्थक खंडों से बना; अर्थ खंडों के योग से ही निकलता है | विद्यालय (विद्या + आलय), पुस्तकालय, पाठशाला, देवालय, रसोईघर, घुड़सवार, सुपुत्र |
| योगरूढ़ | यौगिक की तरह सार्थक खंड, पर अर्थ किसी एक विशेष वस्तु/व्यक्ति के लिए रूढ़ | पंकज, जलज, नीरज (कमल); लंबोदर, गजानन (गणेश); दशानन (रावण); पीतांबर, गिरिधर (कृष्ण); नीलकंठ (शिव); चक्रपाणि (विष्णु); वीणापाणि (सरस्वती); जलद (बादल) |
12.1 यौगिक बनाम योगरूढ़ — एक कसौटी
'पंकज' = पंक (कीचड़) + ज (उत्पन्न)। कीचड़ में घोंघा, कीड़े, घास भी उत्पन्न होते हैं, पर 'पंकज' केवल कमल के लिए प्रयुक्त होता है — अर्थ खंडों से बड़ा होकर एक वस्तु में रूढ़ हो गया, इसलिए योगरूढ़। 'विद्यालय' = विद्या का आलय — जो भी विद्या का स्थान हो, सब विद्यालय; अर्थ खंडों से ही पूरा निकलता है, इसलिए यौगिक।
योगरूढ़ शब्द प्रायः बहुव्रीहि समास से बनते हैं (दशानन = दस हैं आनन जिसके, अर्थात् रावण)। इनका विग्रह समास के भेद और उदाहरण वाले नोट में दिया गया है।
13. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: अर्धतत्सम को तद्भव चुन लेना
'अग्नि' का तद्भव पूछा जाए तो उत्तर आग है; 'अगिन' अर्धतत्सम रूप है। विकल्पों में दोनों हों तो सबसे सरल बोलचाल वाला रूप चुनें।
Trap 2: दधि → दूध नहीं, दही
दधि → दही, दुग्ध → दूध, घृत → घी। तीनों दुग्ध-पदार्थ आपस में अदल-बदल कर असुमेलित युग्म बनाए जाते हैं।
Trap 3: पर्यायवाची को तद्भव समझना
'हस्त' का तद्भव 'हाथ' है, 'कर' नहीं — कर, पाणि हस्त के पर्यायवाची तत्सम शब्द हैं। तद्भव में ध्वनि का संबंध दिखना चाहिए (हस्त → हत्थ → हाथ)।
Trap 4: प्रचलित है तो तद्भव — गलत
पुस्तक, कमल, विद्या, जल बोलचाल में आम हैं, फिर भी तत्सम हैं।
Trap 5: नमक, गर्दन, कबूतर तद्भव नहीं
ये फ़ारसी शब्द हैं। लवण, ग्रीवा, कपोत इनके तत्सम समानार्थी हैं, स्रोत नहीं।
Trap 6: कुर्सी अरबी, कमरा पुर्तगाली
नुक़्ता या उर्दू जैसा लगना फ़ारसी होने का प्रमाण नहीं। कुर्सी, किताब — अरबी; कमरा, मेज़ — पुर्तगाली।
Trap 7: कारतूस फ्रांसीसी
हथियार से जुड़ा शब्द होने से इसे तुर्की या अंग्रेज़ी मान लिया जाता है; यह फ्रांसीसी cartouche से है। तोप और बारूद तुर्की हैं।
Trap 8: संकर शब्द पहचानना
'रेलगाड़ी' में रेल अंग्रेज़ी, गाड़ी हिंदी — संकर। 'विद्यालय' दोनों खंड संस्कृत — संकर नहीं, तत्सम।
Trap 9: योगरूढ़ को यौगिक कहना
पंकज, लंबोदर, दशानन, पीतांबर के खंड सार्थक हैं, पर अर्थ एक विशेष वस्तु/व्यक्ति में रूढ़ है — योगरूढ़।
Trap 10: संकेत से रूप न गढ़ें
क्षेत्र → खेत, क्षीर → खीर, अक्षि → आँख में क्ष → ख हुआ, पर इस संकेत से हर क्ष वाले शब्द का तद्भव गढ़ना गलत है — क्षमा, रक्षा, कक्षा जैसे तत्सम शब्द बोलचाल में भी मूल रूप में ही चलते हैं। संकेत पहचान के लिए है; उत्तर के लिए तालिका वाले मानक रूप ही याद करें।
14. Most-Asked रिवीज़न तालिका (30 प्रश्न-बिंदु)
| क्र. | शब्द | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | अग्नि | आग (तद्भव) |
| 2 | हस्त | हाथ |
| 3 | दुग्ध | दूध |
| 4 | दधि | दही |
| 5 | घृत | घी |
| 6 | कर्म | काम |
| 7 | ग्राम | गाँव |
| 8 | उष्ट्र | ऊँट |
| 9 | मयूर | मोर |
| 10 | क्षेत्र | खेत |
| 11 | सर्प | साँप |
| 12 | श्रावण | सावन |
| 13 | यव | जौ |
| 14 | हरिद्रा | हल्दी |
| 15 | बलीवर्द | बैल |
| 16 | महिषी | भैंस |
| 17 | गोधूम | गेहूँ |
| 18 | पर्यंक | पलंग |
| 19 | कुर्सी | अरबी |
| 20 | क़ानून | अरबी |
| 21 | ज़मीन | फ़ारसी |
| 22 | तोप | तुर्की |
| 23 | अलमारी | पुर्तगाली |
| 24 | कमरा | पुर्तगाली |
| 25 | कारतूस | फ्रांसीसी |
| 26 | अस्पताल | अंग्रेज़ी |
| 27 | पगड़ी | देशज |
| 28 | रेलगाड़ी | संकर |
| 29 | घर | रूढ़ |
| 30 | पंकज | योगरूढ़ |
15. CET में शब्द-भेद कैसे पूछा जाता है
राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में शब्द-भेद के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचा पहचान लेने से उत्तर जल्दी मिलता है:
- तद्भव / तत्सम रूप: एक शब्द देकर उसका दूसरा रूप — खंड 6 की तालिका।
- चार में से तत्सम / तद्भव: संकेत देखें — ऋ, ष, क्ष, रेफ, संयुक्त व्यंजन।
- असुमेलित युग्म: चार तत्सम–तद्भव जोड़ियाँ, एक गलत (प्रायः दधि–दूध जैसी अदला-बदली)।
- स्रोत-भाषा: "'तोप' किस भाषा का शब्द है?"
- देशज / संकर पहचान: चार विकल्प, बाकी तीन स्पष्ट तत्सम या विदेशी।
- रचना: रूढ़, यौगिक, योगरूढ़ — पंकज, विद्यालय, घर।
रणनीति: तद्भव वाले प्रश्न में हर विकल्प की ध्वनि मूल शब्द से मिलाएँ — जिस विकल्प में ध्वनि-संबंध न हो (जैसे हस्त–कर), वह पर्यायवाची है, तद्भव नहीं।
16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. 'तत्सम = वैसा ही, तद्भव = उससे बना': तत् = संस्कृत; सम = समान, भव = उत्पन्न।
2. 'क्ष से ख': क्षेत्र-खेत, क्षीर-खीर, भिक्षा-भीख, शिक्षा-सीख, लक्ष-लाख।
3. 'व से ब, य से ज': वानर-बंदर, वृद्ध-बूढ़ा; यव-जौ, यमुना-जमुना, योगी-जोगी।
4. 'तीन दुग्ध-पदार्थ': दुग्ध-दूध, दधि-दही, घृत-घी — "दु-दू, द-द, घ-घ"।
5. तुर्की — 'तोप-बारूद-चाकू-कैंची, बेगम-बहादुर-उर्दू'।
6. पुर्तगाली — 'कमरे में अलमारी, मेज़ पर बाल्टी, चाबी और तौलिया'।
7. फ्रांसीसी — 'अंग्रेज़ का कारतूस, कूपन से रेस्तराँ'।
17. कथन अभ्यास
'अग्नि' तत्सम और 'आग' उसका तद्भव रूप है। — सही।
'दधि' का तद्भव 'दूध' है। — गलत (दही; दूध का तत्सम दुग्ध)।
'उष्ट्र' का तद्भव 'ऊँट' है। — सही।
'कुर्सी' तुर्की भाषा का शब्द है। — गलत (अरबी)।
'तोप' तुर्की भाषा का शब्द है। — सही।
'अलमारी' पुर्तगाली भाषा से आया शब्द है। — सही।
'रेलगाड़ी' संकर शब्द है। — सही।
'पुस्तकालय' योगरूढ़ शब्द है। — गलत (यौगिक)।
'लंबोदर' योगरूढ़ शब्द है। — सही।
'हस्त' का तद्भव 'कर' है। — गलत (हाथ; कर पर्यायवाची है)।
18. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ
- उत्पत्ति के आधार पर 5 भेद: तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज, संकर
- तत्सम = संस्कृत से बिना बदले; तद्भव = प्राकृत-अपभ्रंश से होकर बदले
- अग्नि-आग, हस्त-हाथ, दुग्ध-दूध, दधि-दही, घृत-घी
- कर्म-काम, कर्ण-कान, सर्प-साँप, स्वर्ण-सोना (रेफ हटता है)
- क्षेत्र-खेत, क्षीर-खीर, भिक्षा-भीख, मक्षिका-मक्खी (क्ष → ख)
- वानर-बंदर, यव-जौ, योगी-जोगी (व → ब, य → ज)
- उष्ट्र-ऊँट, मयूर-मोर, गोधूम-गेहूँ, बलीवर्द-बैल, महिषी-भैंस
- अगिन, करम = अर्धतत्सम; तद्भव पूछें तो आग, काम
- देशज: पगड़ी, लोटा, खिड़की, झोला, डिबिया, तेंदुआ
- अरबी: कुर्सी, किताब, क़ानून, अदालत; फ़ारसी: ज़मीन, आसमान, नमक, गर्दन
- तुर्की: तोप, बारूद, चाकू, बेगम, उर्दू; पुर्तगाली: अलमारी, कमरा, मेज़, बाल्टी
- अंग्रेज़ी: अस्पताल, लालटेन; फ्रांसीसी: कारतूस, अंग्रेज़, कूपन
- संकर: रेलगाड़ी, टिकटघर, डबलरोटी, सीलबंद
- रूढ़: घर, पेड़; यौगिक: विद्यालय; योगरूढ़: पंकज, लंबोदर, दशानन
19. अभ्यास और आगे क्या पढ़ें
नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। खंड 6 की तालिका को दो बार दोहराएँ — एक बार तत्सम से तद्भव, एक बार तद्भव से तत्सम। शब्द-भेद के बाद उपसर्ग-प्रत्यय और समास पढ़ें। मिश्रित और समयबद्ध अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।
20. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
शब्द-भेद का अध्याय हिंदी शब्दों का इतिहास है — संस्कृत से सीधे आए तत्सम, बोलचाल में घिसकर बने तद्भव, लोक से उपजे देशज, संपर्क से आए विदेशी और इन सबके मेल से बने संकर शब्द। तत्सम-तद्भव के जोड़ों में ध्वनि-परिवर्तन की प्रवृत्तियाँ (क्ष → ख, व → ब, य → ज, रेफ का लोप, संयुक्त व्यंजन का सरल होना) समझ लेने पर याद रखना आसान हो जाता है। विदेशी शब्दों में केवल वही स्रोत याद करें जिन पर पुस्तकें एकमत हैं; जहाँ स्रोत विवादित है, वहाँ परीक्षा में अनुमान न लगाएँ।
तत्सम = संस्कृत जैसा, तद्भव = संस्कृत से बना | अग्नि-आग, हस्त-हाथ, दधि-दही | क्ष → ख, व → ब, य → ज | कुर्सी अरबी, तोप तुर्की, कमरा पुर्तगाली, कारतूस फ्रांसीसी | रेलगाड़ी संकर | पंकज योगरूढ़

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
तत्सम = तत् (संस्कृत) + सम (समान)। संस्कृत के वे शब्द जो हिंदी में बिना बदले अपने मूल रूप में प्रयुक्त होते हैं — अग्नि, हस्त, दुग्ध, सूर्य, क्षेत्र।
तद्भव = तत् (संस्कृत) + भव (उत्पन्न)। संस्कृत से उत्पन्न वे शब्द जो प्राकृत-अपभ्रंश से होकर बदले रूप में हिंदी में आए — आग, हाथ, दूध, सूरज, खेत।
पाँच — तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज (आगत) और संकर। कुछ पुस्तकें अर्धतत्सम को भी अलग श्रेणी मानती हैं।
संस्कृत के वे शब्द जो थोड़े बदलकर बोलचाल में आए, पर पूरे तद्भव नहीं बने — जैसे अग्नि का 'अगिन' और कर्म का 'करम' (जबकि इनके तद्भव आग और काम हैं)। सभी पुस्तकें इसे अलग भेद नहीं मानतीं।
क्षेत्रीय बोलियों और लोक-व्यवहार से बने वे शब्द जिनका स्रोत न संस्कृत में मिलता है न किसी विदेशी भाषा में — पगड़ी, लोटा, खिड़की, झोला, डिबिया। ध्वनि-अनुकरण से बने शब्द (खटखटाना, भिनभिनाना) भी इसी में आते हैं।
कुर्सी — अरबी, तोप — तुर्की, कमरा — पुर्तगाली, कारतूस — फ्रांसीसी।
दो अलग-अलग भाषाओं के शब्दों या शब्दांशों के मेल से बने शब्द — रेलगाड़ी (रेल अंग्रेज़ी + गाड़ी हिंदी), टिकटघर, डबलरोटी, सीलबंद।
रूढ़ शब्द के खंड निरर्थक होते हैं (घर, पेड़); यौगिक शब्द सार्थक खंडों से बनता है और अर्थ खंडों से ही निकलता है (विद्यालय); योगरूढ़ शब्द सार्थक खंडों से बनता है पर उसका अर्थ एक विशेष वस्तु/व्यक्ति में रूढ़ हो जाता है (पंकज = कमल, लंबोदर = गणेश)।
ऋ की मात्रा, ष, क्ष, श्र, रेफ (र्), संयुक्त व्यंजन, विसर्ग और हलंत वाले रूप प्रायः तत्सम होते हैं; तद्भव में ये ध्वनियाँ सरल हो जाती हैं — क्षेत्र → खेत, कर्म → काम, हस्त → हाथ। यह प्रवृत्ति है, पक्का नियम नहीं।
'कबूतर' फ़ारसी शब्द है; संस्कृत 'कपोत' से ध्वनि-समानता के कारण कुछ पुस्तकों में यह जोड़ा तत्सम-तद्भव के रूप में मिलता है। इस मतभेद के कारण इसे परीक्षा के निर्णायक उदाहरण के रूप में न लें।
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