शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026·5 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन

23 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी

आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: पर्यावरण एवं वैश्विक वन्यजीव संरक्षण — 23 अक्टूबर "अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस" (ISLD), बिश्केक घोषणापत्र 2013, SPAI रिपोर्ट (भारत में 718 हिम तेंदुए), हेमिस राष्ट्रीय उद्यान (लद्दाख) व प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड 2009; राजस्थान प्रशासनिक सुधार एवं भर्ती परीक्षा प्रणाली — राजस्थान CET (12वीं स्तर) परीक्षा 2026 का 23 अक्टूबर से राज्यव्यापी आयोजन, ओएमआर 5वां विकल्प (अनुत्तरित प्रश्न E) अनिवार्यता, बायोमेट्रिक सुरक्षा व अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम 2023 के कड़े प्रावधान; राजस्थान जल संसाधन एवं मरुस्थल की जीवन रेखा — इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP), कँवर सेन का 1948 विजन, हरिके बैराज (सतलुज-व्यास संगम), मुख्य लिफ्ट नहरें, सेम समस्या व द्वितीय चरण आधुनिकीकरण; मौलिक विज्ञान एवं परमाणु भौतिकी — 23 अक्टूबर "राष्ट्रीय मोल दिवस" (National Mole Day), आवोगाद्रो स्थिरांक (6.022 × 10²³ mol⁻¹), मोल संकल्पना की 2019 नई एसआई परिभाषा व आदर्श गैस आयतन; तथा राजस्थान लोक देवता एवं सामाजिक समरसता — बाबा रामदेव जी (रामसा पीर), कामड़िया पंथ, तेरहताली नृत्य, चौबीस बाणियां ग्रंथ, पोकरण-रूणेचा धाम एवं राजस्थान लोक संस्कृति का संपूर्ण प्रामाणिक परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण।

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अंतरराष्ट्रीयENVIRONMENTUPSCRASCETPOLICE

पर्यावरण एवं वैश्विक वन्यजीव संरक्षण: "अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस" (23 अक्टूबर) — 13वीं वर्षगांठ, बिश्केक घोषणापत्र (2013), SPAI रिपोर्ट (भारत में 718 तेंदुए) व प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड

परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?

प्रतिवर्ष 23 अक्टूबर को वैश्विक स्तर पर "अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस" (International Snow Leopard Day - ISLD) मनाया जाता है। 23 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा भारत में हिम तेंदुओं के संरक्षण, उच्च हिमालयी पारितंत्र (High-Altitude Ecosystem) के संरक्षण और स्थानीय गद्दी/बकरवाल समुदायों के साथ सह-प्रबंधन की प्रगति रिपोर्ट जारी की गई।

महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)

  • ✓अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं बिश्केक घोषणा: • उद्गम: 23 अक्टूबर 2013 को किर्गिस्तान की राजधानी **बिश्केक (Bishkek)** में हिम तेंदुए के निवास वाले सभी 12 देशों के प्रथम वैश्विक फोरम में ऐतिहासिक **'बिश्केक घोषणापत्र' (Bishkek Declaration)** को अंगीकार किया गया था। • 12 हिम तेंदुआ रेंज देश: भारत, नेपाल, भूटान, चीन, मंगोलिया, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान। • GSLEP कार्यक्रम: 2013 में ही 'ग्लोबल स्नो लेपर्ड एंड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम' (GSLEP) प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य इन पर्वतीय शिकारियों के प्राकृतिक पर्यावास को सुरक्षित रखना है।
  • ✓हिम तेंदुआ (Snow Leopard) की जैविक एवं संरक्षण स्थिति (High-Yield Science/Ecology): • वैज्ञानिक नाम: **पैंथेरा अनसिया (Panthera uncia)**। • उपनाम: अपनी एकांतप्रिय प्रकृति और अत्यधिक दुर्गम बर्फीली चट्टानों में अदृश्य रहने की क्षमता के कारण इसे **"पहाड़ों का भूत" (Ghost of the Mountains)** कहा जाता है। • पारिस्थितिक भूमिका: यह उच्च हिमालयी पारितंत्र का शीर्ष शिकारी (Apex Predator) और एक प्रमुख **'इंडिकेटर/फ्लैगशिप प्रजाति'** है, जो जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के स्वास्थ्य का प्रत्यक्ष संकेतक है। • संरक्षण स्थिति (Legal & Global Status): - IUCN रेड लिस्ट: **सुभेद्य (Vulnerable)** — पहले यह 'Endangered' था, 2017 में स्थिति संशोधित की गई। - CITES: परिशिष्ट-I (Appendix-I — अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध)। - भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: **अनुसूची-I (Schedule-I)** के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण। - CMS (प्रवासी प्रजातियों का संरक्षण सम्मेलन): परिशिष्ट-I।
  • ✓भारत में हिम तेंदुआ स्थिति रिपोर्ट (SPAI Report Core Facts): • पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी देश के पहले वैज्ञानिक हिम तेंदुआ जनसंख्या आकलन (Snow Leopard Population Assessment in India - SPAI) के अनुसार: • भारत में कुल हिम तेंदुए: **718**। • राज्यवार वितरण (RPSC/UPSC Rank): 1. **लद्दाख**: **477** (देश में सर्वाधिक — लगभग 66% आबादी)। 2. **उत्तराखंड**: **124**। 3. **हिमाचल प्रदेश**: **51**। 4. **अरुणाचल प्रदेश**: **36**। 5. **सिक्किम**: **21**। 6. **जम्मू और कश्मीर**: **9**।
  • ✓भारत में संरक्षण पहल एवं प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान: • **प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard)**: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष **2009** में प्रारंभ किया गया। • **हेमिस राष्ट्रीय उद्यान (Hemis National Park, लद्दाख)**: - भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान (क्षेत्रफल लगभग 4,400 वर्ग किमी)। - विश्व में हिम तेंदुओं का सर्वाधिक घनत्व यहीं पाया जाता है (हिम तेंदुओं की वैश्विक राजधानी)। • अन्य प्रमुख संरक्षित क्षेत्र: किब्बर वन्यजीव अभयारण्य और पिन वैली नेशनल पार्क (हिमाचल प्रदेश), गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व (उत्तराखंड), कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (सिक्किम), नामदफा राष्ट्रीय उद्यान (अरुणाचल प्रदेश)। • सिक्योर हिमालया परियोजना (SECURE Himalaya): MoEFCC और UNDP की संयुक्त परियोजना (2017), जो उच्च हिमालयी जैव विविधता और आजीविका सुरक्षा पर केंद्रित है।
  • ✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook): • स्मरण सूत्र: "23 अक्टूबर 2013 बिश्केक घोषणा = पहाड़ों का भूत (Panthera uncia) सुरक्षित | SPAI में 718 तेंदुए (लद्दाख 477 शिखर पर) | 2009 प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड, हेमिस लद्दाख बना आवास!" • संरक्षण रैंक: 1. लद्दाख (477) -> 2. उत्तराखंड (124) -> 3. हिमाचल (51)। • संबंधित अध्ययन नोट्स: पर्यावरण, जैव विविधता एवं वन्यजीव संरक्षण संपूर्ण नोट्स एवं RPSC RAS 2026 Prelims मॉक टेस्ट सीरीज़।
#2
राजस्थानPOLITYRASCETPOLICEPATWARI

राजस्थान प्रशासनिक सुधार एवं भर्ती परीक्षा प्रणाली: राजस्थान CET (12वीं स्तर) परीक्षा 2026 का 23 अक्टूबर से राज्यव्यापी आयोजन — ओएमआर 5वां विकल्प (Option E), बायोमेट्रिक सुरक्षा व अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम

परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?

23 अक्टूबर 2026 से राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) द्वारा समान पात्रता परीक्षा (CET - 12th Level) 2026 का तीन दिवसीय राज्यव्यापी आयोजन (23, 24 एवं 25 अक्टूबर) प्रारंभ हुआ। राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस वृहद परीक्षा में पेपर लीक और धांधली रोकने हेतु कड़े सुरक्षा उपाय, बायोमेट्रिक फेशियल वेरिफिकेशन और OMR 5वां विकल्प (अनुत्तरित प्रश्न विकल्प) सख्ती से लागू किए गए हैं।

महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)

  • ✓OMR 5वां विकल्प (Option E) नियम एवं आरपीएससी/आरएसएमएसएसबी दिशा-निर्देश: • अनिवार्य नियम: अभ्यर्थी को प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य है। यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता है, तो उसे **5वां गोला 'E' (अनुत्तरित प्रश्न / Question Not Attempted)** गहरा नीला/काला करना अनिवार्य है। • नेगेटिव मार्किंग प्रावधान: यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न के 5 विकल्पों (A, B, C, D, E) में से कोई भी गोला नहीं भरता है, तो उस प्रश्न के अंकों का **1/3 भाग (One-Third Negative Marking)** काट लिया जाएगा। • अयोग्यता (Disqualification) की शर्त: यदि किसी अभ्यर्थी ने प्रश्न पत्र के कुल प्रश्नों में से **10% से अधिक प्रश्नों (जैसे 150 में से 16 से अधिक प्रश्न)** में कोई भी गोला नहीं भरा, तो उसे उस परीक्षा के लिए पूर्णतः अयोग्य (Disqualified) घोषित कर दिया जाएगा। • अतिरिक्त समय: 5वें गोले को भरने और पुनः जांचने के लिए परीक्षा के निर्धारित समय के अतिरिक्त **10 मिनट का अतिरिक्त समय** दिया जाता है।
  • ✓राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम (Anti-Cheating Law): • मूल अधिनियम: राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 (Rajasthan Public Examination Act, 2022)। • 2023 संशोधन के कठोर दंड प्रावधान (Exam High-Yield): - पेपर लीक या संगठित नकल गिरोह में संलिप्त पाए जाने पर **आजीवन कारावास (Life Imprisonment)** तक की सजा। - न्यूनतम 10 लाख रुपये से लेकर **10 करोड़ रुपये तक का आर्थिक जुर्माना**। - दोषियों की अचल संपत्ति की जब्ती और कुर्की का कानूनी प्रावधान। - अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले परीक्षार्थी को आगामी परीक्षाओं से 3 से 5 वर्ष हेतु डिबार (प्रतिबंधित) करना।
  • ✓राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) का संस्थागत ढांचा: • स्थापना: 29 जनवरी 2014 को राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) का गठन किया गया। • मुख्यालय: राज्य कृषि प्रबंध संस्थान परिसर, **दुर्गापुरा, जयपुर**। • कार्य: राज्य सरकार के अधीनस्थ (Non-Gazetted) एवं मंत्रालयिक संवर्गों (Group-C एवं Group-D) के पदों पर सीधी भर्ती हेतु परीक्षाएं आयोजित करना।
  • ✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook): • स्मरण सूत्र: "CET 2026 ओएमआर नियम: प्रश्न छोड़ना है तो 5वां गोला 'E' भरो | कोई गोला नहीं भरा तो 1/3 कटेगा, 10% से अधिक खाली छोड़ा तो परीक्षा रद्द | 10 मिनट एक्स्ट्रा टाइम!" • संबंधित अध्ययन नोट्स: सुयोग अकादमी OMR Option-E ऑनलाइन प्रैक्टिस लैब एवं Rajasthan CET 12th Level 25+ Full Length Test Series।
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राजस्थानGEOGRAPHYRASCETPATWARIPOLICE

राजस्थान जल संसाधन एवं मरुस्थल की जीवन रेखा: "इंदिरा गांधी नहर परियोजना" (IGNP) — कँवर सेन का विजन, हरिके बैराज, मुख्य नहर, 7 प्रमुख लिफ्ट नहरें, सेम की समस्या व आधुनिक कमांड क्षेत्र

परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?

23 अक्टूबर 2026 को राजस्थान जल संसाधन विभाग और इंदिरा गांधी नहर बोर्ड (IGNB) द्वारा पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों (अनूपगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी) में रबी फसल 2026-27 की सिंचाई हेतु नहर के जल वितरण चक्र और मुख्य फीडर की लाइनिंग मरम्मत की तकनीकी कार्ययोजना जारी की गई। आरपीएससी एवं सीईटी परीक्षाओं में आईजीएनपी की लिफ्ट नहरों और जल वितरण पर बारंबार प्रश्न पूछे जाते हैं।

महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)

  • ✓इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: • उपनाम: **'मरुगंगा'** एवं **'पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा' (Lifeline of Western Rajasthan)**। • मूल नाम: प्रारंभ में इसका नाम 'राजस्थान नहर' (Rajasthan Canal) था। 2 नवंबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की स्मृति में इसका नाम बदलकर **'इंदिरा गांधी नहर परियोजना' (IGNP)** किया गया। • योजनाकार / स्वप्नदृष्टा: बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता **रायबहादुर कँवर सेन (Kanwar Sain)**। इन्होंने 1948 में ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी: *"बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता" (Water Requirements of Bikaner State)*। • शिलान्यास: **31 मार्च 1958** को भारत के तत्कालीन गृहमंत्री **गोविंद वल्लभ पंत** द्वारा। • प्रथम बार जल प्रवाह: 11 अक्टूबर 1961 को उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा नौरंगदेसर वितरिका (हनुमानगढ़) में जल प्रवाहित कर प्रारंभ हुआ।
  • ✓उद्गम एवं नहर प्रणाली की संरचना (Engineering Framework): • उद्गम स्थल: पंजाब के फिरोजपुर में **सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित 'हरिके बैराज' (Harike Barrage, निर्मित 1952)** से। • नहर के दो प्रमुख भाग: 1. **राजस्थान फीडर (Rajasthan Feeder)**: - कुल लंबाई: **204 किलोमीटर** (170 किमी पंजाब व हरियाणा में + 34 किमी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के मसीतांवाली हेड तक)। - विशेषता: इस भाग से किसी भी प्रकार की सिंचाई या जल निकासी नहीं होती; यह केवल जल परिवहन का कार्य करता है। 2. **मुख्य नहर (Main Canal)**: - कुल लंबाई: **445 किलोमीटर** (मसीतांवाली हेड, हनुमानगढ़ से मोहनगढ़, जैसलमेर तक)। - उप-शाखा विस्तार: मोहनगढ़ से आगे **बाबा रामदेव शाखा (बरकतुल्लाह खान शाखा)** के रूप में गडरा रोड, बाड़मेर (जीरो पॉइंट) तक विस्तार।
  • ✓आईजीएनपी की 7 प्रमुख लिफ्ट नहरें — बायां किनारा (Exam Core - पुराने व नए नाम): • क्योंकि पश्चिमी राजस्थान का पूर्वी भूभाग अपेक्षाकृत ऊंचा है, अतः जल को ऊपर उठाकर लिफ्ट नहरों द्वारा प्रवाहित किया जाता है: 1. **कंवरसेन लिफ्ट नहर** (पुराना नाम: बीकानेर-लूणकरणसर लिफ्ट नहर): सबसे पहली और सबसे लंबी लिफ्ट नहर; बीकानेर की जीवन रेखा (लाभान्वित: गंगानगर, बीकानेर)। 2. **चौधरी कुंभाराम लिफ्ट नहर** (नोहर-साहवा लिफ्ट): लाभान्वित: हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, बीकानेर। 3. **पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर** (गजनेर लिफ्ट): बीकानेर और नागौर। 4. **वीर तेजाजी लिफ्ट नहर** (बांगड़सर लिफ्ट): सबसे छोटी लिफ्ट नहर; केवल बीकानेर लाभान्वित। 5. **डॉ. करणी सिंह लिफ्ट नहर** (कोलायत लिफ्ट): बीकानेर और जोधपुर/फलौदी। 6. **गुरु जम्भेश्वर लिफ्ट नहर** (फलोदी लिफ्ट): बीकानेर, जैसलमेर और जोधपुर/फलौदी। 7. **जय नारायण व्यास लिफ्ट नहर** (पोकरण लिफ्ट): जैसलमेर और जोधपुर।
  • ✓दाएं किनारे की प्रमुख शाखाएं (प्रवाह प्रणाली - 9 शाखाएं): • रावतसर शाखा (एकमात्र शाखा जो बाएं किनारे से निकलती है), • सूरतगढ़, अनूपगढ़, पूगल, चारणवाला, दांताैर, बिरसलपुर, शहीद बीरबल और सागरमल गोपा शाखा (दाएं किनारे)।
  • ✓पारिस्थितिक दुष्प्रभाव: "सेम की समस्या" (Waterlogging & Salinity): • अत्यधिक अनियंत्रित सिंचाई और नीचे जिप्सम की अभेद्य परत होने के कारण भूमिगत जलस्तर ऊपर आ जाना जिससे भूमि दलदली व लवणीय हो जाती है। • सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र: **बड़ोपल (हनुमानगढ़)**। • समाधान: नीदरलैंड के सहयोग से **'इंडो-डच जल निकास परियोजना'** तथा जल सोखने वाले सफेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ों का सघन रोपण।
  • ✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook): • स्मरण सूत्र: "1948 में कँवर सेन ने देखा मरुगंगा का सपना, 1958 पंत शिलान्यास, हरिके बैराज सतलुज-व्यास संगम | 204 किमी फीडर + 445 किमी मुख्य नहर, कंवरसेन सबसे लंबी तो तेजाजी सबसे छोटी लिफ्ट नहर!" • संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान की नदियाँ, बांध एवं प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं नोट्स एवं राजस्थान सीईटी व पटवारी टेस्ट सीरीज़।
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विज्ञान-तकनीकSCIENCEUPSCRASCETSSCRAILWAY

मौलिक विज्ञान, रसायन शास्त्र एवं परमाणु भौतिकी: "राष्ट्रीय मोल दिवस" (23 अक्टूबर) — आवोगाद्रो स्थिरांक (6.022 × 10²³ mol⁻¹), मोल संकल्पना की 2019 नई एसआई परिभाषा व आदर्श गैस नियम

परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?

प्रतिवर्ष 23 अक्टूबर को विज्ञान जगत में "राष्ट्रीय मोल दिवस" (National Mole Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस रसायन विज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण मौलिक नियतांक — "आवोगाद्रो संख्या" (Avogadro Constant: 6.022 × 10²³) के सम्मान में 23 अक्टूबर को सुबह 6:02 से शाम 6:02 बजे तक (अमेरिकी तिथि प्रारूप 6:02 10/23) विशेष रूप से मनाया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, RAS, CET, SSC, रेलवे) के सामान्य विज्ञान खंड में मोल संकल्पना और रासायनिक गणनाओं पर अनिवार्य प्रश्न पूछे जाते हैं।

महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)

  • ✓मोल दिवस एवं आवोगाद्रो स्थिरांक की पृष्ठभूमि: • आवोगाद्रो संख्या का मान: **$N_A = 6.02214076 \times 10^{23} \text{ कण/मोल}$** (परमाणु, अणु, आयन या इलेक्ट्रॉन)। • नामकरण: इतालवी वैज्ञानिक **अमेदेओ आवोगाद्रो (Amedeo Avogadro, 1776–1856)** के सम्मान में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी जीन बैपटिस्ट पेरिन (Jean Baptiste Perrin) ने 1909 में इस नियतांक का नाम 'आवोगाद्रो संख्या' प्रस्तावित किया। • आवोगाद्रो का नियम (Avogadro's Law - 1811): "समान तापमान और दबाव की परिस्थितियों में, सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है" ($V \propto n$)।
  • ✓मोल (Mole) की आधुनिक परिभाषा (2019 SI Redefinition): • पुरानी परिभाषा (2019 से पूर्व): किसी पदार्थ का एक मोल वह मात्रा थी जिसमें कार्बन-12 ($^{12}C$) के ठीक 0.012 किलोग्राम (12 ग्राम) में उपस्थित परमाणुओं जितनी संख्या में प्राथमिक कण उपस्थित हों। • **नई एसआई परिभाषा (20 मई 2019 से प्रभावी)**: - अंतरराष्ट्रीय बाट एवं माप ब्यूरो (BIPM) द्वारा मोल को सीधे आवोगाद्रो स्थिरांक के निश्चित संख्यात्मक मान **$6.02214076 \times 10^{23}$** द्वारा पुनर्परिभाषित किया गया। अब यह किसी भौतिक प्रोटोटाइप पर निर्भर नहीं है। • मोल पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance) की एसआई आधारभूत इकाई (SI Base Unit) है।
  • ✓रासायनिक गणनाओं में मोल संकल्पना के महत्वपूर्ण सूत्र (Exam Formula Sheet): 1. मोलों की संख्या ($n$) = $\frac{\text{दिया गया द्रव्यमान (m)}}{\text{मोलर द्रव्यमान (M)}}$ = $\frac{\text{कणों की संख्या (N)}}{N_A}$ 2. मानक ताप एवं दाब (STP / NTP पर): - किसी भी आदर्श गैस के **1 मोल का आयतन = 22.4 लीटर (या 22,400 सेमी³)** होता है (मोलर आयतन / Molar Volume)। 3. उदाहरण: - 1 मोल जल ($H_2O$) = 18 ग्राम जल = $6.022 \times 10^{23}$ जल के अणु। - 1 मोल ऑक्सीजन गैस ($O_2$) = 32 ग्राम = STP पर 22.4 लीटर। - 1 मोल हीलियम ($He$) = 4 ग्राम = $6.022 \times 10^{23}$ हीलियम के परमाणु।
  • ✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook): • स्मरण सूत्र: "23 अक्टूबर 6:02 = आवोगाद्रो संख्या 6.022 × 10²³ | 1 मोल = 6.022 × 10²³ कण = STP पर 22.4 लीटर गैस = मोलर द्रव्यमान (ग्राम में)!" • संबंधित अध्ययन नोट्स: सामान्य विज्ञान — परमाणु संरचना, पदार्थ की अवस्थाएं एवं मोल संकल्पना एवं राजस्थान CET व रेलवे परीक्षा टेस्ट सीरीज़।
#5
राजस्थानART_CULTURERASCETREETPOLICEPATWARI

राजस्थान लोक देवता, भक्ति परंपरा एवं सामाजिक समरसता: "बाबा रामदेव जी" (रामसा पीर) — कामड़िया पंथ, तेरहताली नृत्य, चौबीस बाणियां ग्रंथ, पोकरण-रूणेचा धाम व सामाजिक समरसता आंदोलन

परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?

23 अक्टूबर 2026 को राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) और देवस्थान विभाग द्वारा जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित रामदेवरा (रूणेचा) में तीर्थयात्रियों की सुविधा हेतु ₹25 करोड़ के हेरिटेज कॉरिडोर, डिजिटल म्यूजियम और भाद्रपद मेले की स्थायी अवसंरचना परियोजना की समीक्षा की गई। आरपीएससी एवं कर्मचारी चयन बोर्ड की परीक्षाओं में लोक देवता रामदेव जी के सामाजिक समरसता प्रयासों, कामड़िया पंथ और सांस्कृतिक प्रतीकों पर निरंतर प्रश्न पूछे जाते हैं।

महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)

  • ✓बाबा रामदेव जी का जीवन परिचय एवं वंशावली: • जन्म: **उंडूकाश्मीर गांव (शिव तहसील, बाड़मेर)** में तंवर वंशीय राजपूत परिवार में (विक्रम संवत 1409 / 14वीं-15वीं शताब्दी)। • पिता: अजमाल जी तंवर (द्वारिकाधीश कृष्ण के अनन्य भक्त)। • माता: मैणादे। • पत्नी: नेतलदे (अमरकोट/पाकिस्तान के सोढ़ा राजा दलपत की पुत्री)। • भाई-बहन: बड़े भाई वीरमदेव (बलराम के अवतार माने जाते हैं), बहनें सुगना बाई व लाछा बाई; धर्मबहन: **डाली बाई (मेघवाल जाति की)**। • गुरु: **बालीनाथ जी** (इनका समाधि स्थल/धूंणा: मसूरिया पहाड़ी, जोधपुर)। • धार्मिक मान्यता: भगवान **श्रीकृष्ण के अवतार** माने जाते हैं। मुस्लिम समाज इन्हें **'रामसा पीर'** अथवा **'पीरों का पीर'** कहकर पूजता है (मक्का से आए पांच पीरों ने रामदेव जी के चमत्कारों को देखकर कहा था — *"मैं तो केवल पीर हाँ, थे तो पीरां का पीर हो"*।
  • ✓सामाजिक क्रांति एवं कामड़िया पंथ (Social Harmony Movement): • **कामड़िया पंथ (Kamadiya Panth)** की स्थापना: जाति-पाति, छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित करने हेतु रामदेव जी ने कामड़िया पंथ की नींव रखी। • **तेरहताली नृत्य (Terah Taali Dance)**: - कामड़िया पंथ की विवाहित महिलाओं द्वारा बैठकर किया जाने वाला सुप्रसिद्ध व्यावसायिक लोकनृत्य। - शरीर के विभिन्न 13 अंगों पर **13 मंजीरे** बांधकर लयबद्ध गति से बजाया जाता है। - प्रमुख कलाकार: मांगी बाई (पादरला गांव, पाली), मोहिनी देवी, नारायणी देवी। • जम्मा जागरण (Jamma): - मेघवाल जाति के भक्तों द्वारा रातभर किया जाने वाला सत्संग व रात्रि जागरण। - रामदेव जी के मेघवाल भक्तों को **'रिखिया' (Rikhiya)** कहा जाता है।
  • ✓साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक (RPSC Core): • **चौबीस बाणियां (Chaubis Baniyan)**: राजस्थान के **एकमात्र ऐसे लोक देवता जो एक सिद्ध कवि भी थे**। इन्होंने 'चौबीस बाणियां' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की। • समाधि: भाद्रपद शुक्ल एकादशी (विक्रम संवत 1442 / 1458 ई.) को रामदेवरा (रूणेचा, जैसलमेर) में रामसरोवर तालाब की पाल पर जीवित समाधि ली। (इनसे एक दिन पूर्व इनकी धर्मबहन डाली बाई ने समाधि ली थी)। • मुख्य प्रतीक: - **नेजा (Neja)**: रामदेव जी की 5 रंगों वाली ध्वजा (पचरंगी ध्वजा)। - **पगल्ये (Paglye)**: पूजे जाने वाले संगमरमर या मिट्टी के चरण चिह्न। - **ब्यावले**: भक्तों द्वारा गाए जाने वाले रामदेव जी के लोक भजन। - घोड़ा: लीला घोड़ा (रेवंत)। • प्रसिद्ध मंदिर: मुख्य मंदिर रामदेवरा (रूणेचा, जैसलमेर - बीकानेर के महाराजा गंगासिंह द्वारा 1931 में वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया); छोटा रामदेवरा (गुजरात); सुरताखेड़ा (चित्तौड़गढ़); बिराटिया (ब्यावर); मसूरिया पहाड़ी (जोधपुर)।
  • ✓🧠 परीक्षा स्मरण सूत्र व मेमोरी ट्रिक (Quick Revision Hook): • स्मरण सूत्र: "उंडूकाश्मीर में जन्मे अजमाल-मैणादे के लाल रामसा पीर | कामड़िया पंथ रचा, तेरहताली नृत्य सजाया | चौबीस बाणियां लिख डाली, रूणेचा में रामसरोवर पाल समाधि पाई!" • लोक देवता पंचपीर ट्रिक: "पाबू, हड़बू, रामदे, मांगलिया, मेहा — पांचू पीर पधारज्यो, गोगाजी जेहा!" • संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान के प्रमुख लोक देवता एवं लोक देवियां हस्तलिखित नोट्स एवं RPSC 2nd Grade व CET टेस्ट सीरीज़।