बुधवार, 14 अक्टूबर 2026·7 प्रमुख घटनाएँ·निःशुल्क दैनिक संकलन
14 अक्टूबर 2026 — दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख समसामयिकी घटनाक्रम: 14 अक्टूबर "विश्व मानक दिवस 2026" (World Standards Day) — भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 (BIS Act 2016), ISI मार्क, अनिवार्य HUID हॉलमार्किंग व राजस्थान के 50 जिलों में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCOs); 14 अक्टूबर "अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस" (International E-Waste Day) — ई-कचरा प्रबंधन नियम 2022, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), दुर्लभ खनिज व सीतापुरा-भिवाड़ी रिसाइक्लिंग क्लस्टर; राजस्थान प्रशासनिक सुधार एवं सुशासन — राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011, सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012, जन सूचना पोर्टल (धारा 4(2) RTI) व संपर्क 181 हेल्पलाइन रैंकिंग; राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं इसरो रोडमैप — चंद्रयान-4 (Lunar Sample Return) 5-मॉड्यूल आर्किटेक्चर, गगनयान व्योममित्र रोबोट परीक्षण व भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) 2035 विजन; भारतीय कृषि एवं अर्थव्यवस्था — रबी विपणन सत्र 2026-27 हेतु 6 रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), CACP का लागत सूत्र (A2+FL व C2), राजफेड (RAJFED) खरीद व राजस्थान में सरसों-चना उत्पादन; राजस्थान कला, संस्कृति एवं विरासत — रूपायन संस्थान (बोरूंदा, जोधपुर), पद्म भूषण डॉ. कोमल कोठारी, विजयदान देथा 'बिज्जी' (बातां री फुलवारी) व राजस्थान के दुर्लभ लोक वाद्य; तथा खेल जगत में 38वें राष्ट्रीय खेल 2026 (उत्तराखंड) — राजस्थान तीरंदाजी, निशानेबाजी व एथलेटिक्स दल की तैयारियां, जगतपुरा शूटिंग रेंज, आउट-ऑफ-टर्न खेल नीति व महाराणा प्रताप पुरस्कार का संपूर्ण परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण।
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राष्ट्रीयPOLITYECONOMYUPSCRASCETPATWARI
अंतरराष्ट्रीय मानक, उपभोक्ता अधिकार एवं विधिक ढांचा: "विश्व मानक दिवस" (14 अक्टूबर 2026) — भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 (BIS Act), अनिवार्य HUID हॉलमार्किंग व राजस्थान मानकीकरण मॉडल
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर को वैश्विक स्तर पर "विश्व मानक दिवस" (World Standards Day 2026) मनाया जाता है। 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा 'सतत विकास लक्ष्य-9: उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा' विषयक राष्ट्रीय मानक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान के सभी 50 जिलों में स्वर्ण व रजत आभूषणों की अनिवार्य 6-अंकीय HUID हॉलमार्किंग और मार्बल, ग्रेनाइट, हैंडीक्राफ्ट्स व खाद्य तेलों हेतु गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (Quality Control Orders - QCOs) की व्यापक समीक्षा की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓विश्व मानक दिवस (World Standards Day) का इतिहास एवं अंतरराष्ट्रीय ढांचा (UPSC/RAS Core):
• इतिहास एवं शुरुआत: 14 अक्टूबर 1946 को लंदन में 25 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण को सुगम बनाने हेतु ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई; 1947 में अंतरराष्ट्रीय मानक संगठन (ISO) की औपचारिक स्थापना हुई। 1970 से प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जा रहा है।
• त्रिपक्षीय वैश्विक सहयोग: यह दिवस अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO), अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (IEC) और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।
• 2026 का वैश्विक विज़न: "एक बेहतर विश्व हेतु साझा दृष्टिकोण: उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा" (Shared Vision for a Better World: Spotlight on SDG 9) — सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल मानकों का सुदृढ़ीकरण।
✓भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards - BIS) का वैधानिक ढांचा:
• स्थापना एवं विकास: मूल रूप से वर्ष 1947 में 'भारतीय मानक संस्थान' (ISI - Indian Standards Institution) के रूप में स्थापित।
• विधिक आधार: भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 (BIS Act, 2016 - 12 अक्टूबर 2017 से प्रभावी), जिसने पूर्ववर्ती 1986 के अधिनियम का स्थान लिया।
• राष्ट्रीय मानक संस्था (National Standards Body): BIS को भारत की आधिकारिक राष्ट्रीय मानक संस्था का वैधानिक दर्जा प्राप्त है। अध्यक्ष: केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री।
• अनिवार्य हॉलमार्किंग (Hallmarking): सोने के आभूषणों पर 6-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोडयुक्त HUID (Hallmark Unique Identification) अनिवार्य; यह शुद्धता (22K, 18K, 14K) और ट्रेसिबिलिटी की कानूनी गारंटी देता है।
✓भारत में प्रमुख मानक एवं प्रमाणन चिह्न (Certifications - High-Yield RPSC GK):
• ISI मार्क: औद्योगिक और उपभोक्ता उत्पादों (बिजली उपकरण, सीमेंट, एलपीजी सिलेंडर) की सुरक्षा का मानक।
• एगमार्क (AGMARK): कृषि और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता का वैधानिक प्रमाणन (विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय - DMI द्वारा जारी; कृषि उपज अधिनियम 1937)।
• एफएसएसएआई (FSSAI) लोगो: खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत खाद्य पदार्थों की स्वच्छता व गुणवत्ता का प्रमाण पत्र।
• इकोमार्क (Eco Mark): पर्यावरण अनुकूल उत्पादों (पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने वाले) हेतु मिट्टी के घड़े के प्रतीक वाला प्रमाणन।
• बीईई (BEE) स्टार लेबलिंग: ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत विद्युत उपकरणों की ऊर्जा दक्षता (1 से 5 स्टार रेटिंग)।
✓राजस्थान में मानकीकरण एवं उपभोक्ता संरक्षण की पहल:
• BIS जयपुर शाखा कार्यालय (उत्तरी क्षेत्र): राज्य के औद्योगिक केंद्रों (भिवाड़ी, नीमराना, सीतापुरा, बोरानाडा) में गुणवत्ता प्रमाणन का नोडल केंद्र।
• मानक क्लब (Standards Clubs): राजस्थान के सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालयों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में युवा विद्यार्थियों को मानकीकरण और उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक करने हेतु 1,000+ क्लब कार्यरत।
• मकराना मार्बल व कोटा स्टोन जीआई व मानक: राजस्थान के प्राकृतिक पत्थरों की अंतरराष्ट्रीय निर्माण मानकों के अनुरूप ग्रेडिंग प्रणाली।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: भारतीय राजव्यवस्था एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम नोट्स एवं राजस्थान CET स्नातक टेस्ट सीरीज़।
पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था: "अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस" (14 अक्टूबर 2026) — ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2022, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB)
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
14 अक्टूबर 2026 को वैश्विक स्तर पर "अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस" (International E-Waste Day 2026) मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र वैश्विक ई-कचरा मॉनिटर (Global E-waste Monitor) और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा भारत में वार्षिक 1.7 मिलियन टन ई-कचरे के पुनर्चक्रण और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earth Minerals - लिथियम, कोबाल्ट, सोना व नियोडिमियम) की रिकवरी पर राष्ट्रीय समीक्षा जारी की गई। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB, जयपुर) द्वारा सीतापुरा (जयपुर) और भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में राज्य के प्रथम आधुनिक ई-कचरा डिसमेंटलिंग व रिसाइक्लिंग हब के विस्तार की घोषणा की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य (UPSC/RAS Core):
• इतिहास एवं आयोजक: WEEE (Waste Electrical and Electronic Equipment) फोरम द्वारा वर्ष 2018 में शुरू; प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर को वैश्विक स्तर पर आयोजित।
• 2026 का वैश्विक फोकस: "अदृश्य ई-कचरा और दुर्लभ खनिजों का चक्रीय पुनर्चक्रण" (Invisible E-waste & Critical Mineral Recovery) — केबल, खिलौने, चार्जर, ईयरफोन और इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जैसे छोटे उपकरणों का वैज्ञानिक संग्रहण।
• वैश्विक ई-अपशिष्ट स्थिति: विश्व में प्रतिवर्ष 62 मिलियन टन से अधिक ई-कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से मात्र 22% ही औपचारिक रूप से पुनर्चक्रित हो पाता है। भारत विश्व में चीन और अमेरिका के बाद ई-कचरा उत्पादन में तीसरे स्थान पर है।
✓ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste Management Rules 2022) के प्रमुख प्रावधान:
• वैधानिक आधार: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित; 1 अप्रैल 2023 से पूरे देश में प्रभावी (2016 के नियमों का स्थान लिया)।
• सोलर पीवी मॉड्यूल का समावेश: पहली बार सौर ऊर्जा फोटोवोल्टिक (Solar PV) सेल, पैनल और मॉड्यूल को ई-कचरा प्रबंधन के दायरे में अनिवार्य रूप से शामिल किया गया (सौर ऊर्जा संपन्न राजस्थान हेतु अत्यधिक महत्वपूर्ण)।
• विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR - Extended Producer Responsibility):
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माताओं, आयातकों और ब्रांड मालिकों (PIBOs) के लिए अपने बेचे गए उत्पादों के जीवनकाल समाप्त होने पर उनके सुरक्षित संग्रहण और पुनर्चक्रण का कानूनी लक्ष्य निर्धारित।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण व व्यापार योग्य डिजिटल EPR प्रमाण पत्र।
• खतरनाक पदार्थों का प्रतिबंध (RoHS - Restriction of Hazardous Substances): सीसा (Lead), पारा (Mercury), कैडमियम (Cadmium) और हेक्सावेलेंट क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक घटकों में निर्धारित सीमा से अधिक उपयोग वैधानिक रूप से प्रतिबंधित।
✓राजस्थान में ई-कचरा प्रबंधन एवं नियामक संस्थाएं:
• राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB, जयपुर):
- स्थापना: वर्ष 1975 में (जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 की धारा 4 के तहत)।
- दायित्व: वायु, जल और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के साथ-साथ ई-अपशिष्ट और प्लास्टिक अपशिष्ट नियमों का क्रियान्वयन।
• राजस्थान ई-कचरा नीति एवं संग्रहण अभियान:
- राज्य के 10 बड़े शहरों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, अलवर, सीकर, भरतपुर) में समर्पित ई-कचरा संग्रहण वैन और डिजिटल ई-क्लिनिक।
- सीतापुरा (जयपुर) व खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा): राज्य के अधिकृत वैज्ञानिक ई-कचरा रिसाइक्लिंग प्लांट जहाँ सर्किट बोर्ड से तांबा, चांदी और सोना निकाला जाता है।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता नोट्स एवं RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़।
राजस्थान सुशासन, प्रशासनिक सुधार एवं जवाबदेही: राजस्थान लोक सेवा गारंटी एवं सुनवाई का अधिकार — जन सूचना पोर्टल (धारा 4(2) RTI), संपर्क 181 व पारदर्शी प्रशासन सूचकांक 2026
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
14 अक्टूबर 2026 को राजस्थान प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग (ARD, जयपुर) द्वारा राज्य में नागरिक अधिकारों, ई-गवर्नेंस और सुशासन तंत्र की उच्च-स्तरीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2011 और राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 के तहत लंबित जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों की राज्यव्यापी रैंकिंग जारी की गई। साथ ही राज्य के "जन सूचना पोर्टल" और "राजस्थान संपर्क पोर्टल" (181 हेल्पलाइन) के एआई-सक्षम ऑटो-एस्केलेशन सिस्टम का अनावरण किया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 (RGDPS Act, 2011 - RPSC Core):
• लागू होने की तिथि: 14 नवंबर 2011 (पंडित नेहरू जयंती) को पूरे राजस्थान में लागू; ऐसा कानून बनाने वाले देश के अग्रणी राज्यों में शुमार।
• उद्देश्य: आम नागरिकों को अधिसूचित सरकारी सेवाएं (जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, राजस्व नकल, बिजली-पानी कनेक्शन आदि) एक विधिक रूप से तय समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराना।
• त्रि-स्तरीय अपील तंत्र:
1. निर्धारित प्राधिकारी (Designated Officer): तय समय में सेवा न देने पर दैनिक ₹250 से अधिकतम ₹5,000 तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान।
2. प्रथम अपील अधिकारी (First Appellate Authority): 30 दिनों के भीतर अपील का निस्तारण।
3. द्वितीय अपील अधिकारी (Second Appellate Authority): अंतिम वैधानिक आदेश देने का अधिकार (60 दिन)।
✓राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 (Right to Hearing Act, 2012):
• लागू होने की तिथि: 1 अगस्त 2012 से प्रभावी; नागरिकों की शिकायतों की अनिवार्य सुनवाई और समयबद्ध निस्तारण का विधिक अधिकार देने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य बना।
• कार्यप्रणाली: ग्राम पंचायत स्तर पर लोक सुनवाई अधिकारी (ग्राम विकास अधिकारी/सरपंच), उपखंड स्तर पर उपखंड अधिकारी (SDO), जिला स्तर पर जिला कलेक्टर तथा राज्य स्तर पर संभागीय आयुक्त व शासन सचिव जनसुनवाई करते हैं।
• लोक सेवा गारंटी और सुनवाई का अधिकार में अंतर: लोक सेवा गारंटी विशिष्ट सरकारी सेवाओं की डिलीवरी से संबंधित है, जबकि सुनवाई का अधिकार सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली के विरुद्ध किसी भी शिकायत के निवारण से संबंधित है।
✓जन सूचना पोर्टल 2019 (Jan Soochna Portal - High-Yield Governance Model):
• शुभारंभ: 13 सितंबर 2019 को जयपुर में बिड़ला ऑडिटोरियम से शुरू।
• विधिक आधार: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act 2005) की धारा 4(2) — जिसके तहत सरकारों को नागरिकों द्वारा मांगे बिना ही स्वयं सूचनाएं सार्वजनिक (Suo-motu disclosure) करनी चाहिए।
• विशेषता: नागरिकों को बिना कोई आरटीआई आवेदन शुल्क दिए 115 से अधिक सरकारी विभागों की 350+ योजनाओं, पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन वितरण, मनरेगा जॉब कार्ड और बजट व्यय की पारदर्शी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध कराता है।
• राजस्थान संपर्क पोर्टल (Helpline 181): नागरिकों की शिकायतों के निःशुल्क ऑनलाइन व टेलीफोनिक पंजीकरण, ट्रैकिंग और निवारण हेतु एकीकृत कॉल सेंटर।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान प्रशासनिक व्यवस्था एवं सुशासन नोट्स एवं राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा एवं अन्वेषण: इसरो चंद्रयान-4 (Lunar Sample Return) एवं गगनयान मिशन 2026 — LVM3, व्योममित्र, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) 2035 व अंतरिक्ष नीति 2023
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
14 अक्टूबर 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अंतरिक्ष विभाग द्वारा चंद्रमा के ऐतिहासिक नमूना वापसी मिशन "चंद्रयान-4" (Chandrayaan-4 Lunar Sample Return Mission) और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम "गगनयान" (Gaganyaan) की एकीकृत तकनीकी प्रगति रिपोर्ट जारी की गई। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत चंद्रयान-4 के 5-मॉड्यूल स्पेस आर्किटेक्चर, अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक और गगनयान के प्रथम मानवरहित परीक्षण (व्योममित्र रोबोट उड़ान) के क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के सफल जमीनी परीक्षणों को अंतिम रूप दिया गया।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓चंद्रयान-4 मिशन (Lunar Sample Return Mission - UPSC/RAS Core Facts):
• मिशन का प्राथमिक उद्देश्य: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 'शिव शक्ति बिंदु' (चंद्रयान-3 लैंडिंग स्थल के समीप) पर उतरना, चंद्रमा की सतह और उप-सतह से रेगोलिथ (चंद्र मिट्टी व चट्टानी नमूने) एकत्र करना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना।
• दोहरी प्रक्षेपण प्रणाली (Dual Launch Architecture):
- LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) और PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) द्वारा दो अलग-अलग हिस्सों में प्रक्षेपित किया जाएगा।
- पृथ्वी की कक्षा व चंद्रमा की कक्षा में स्वायत्त अंतरिक्ष डॉकिंग (Autonomous Space Docking) करने वाला भारत का पहला मिशन।
• 5 प्रमुख अंतरिक्ष मॉड्यूल:
1. प्रणोदन मॉड्यूल (Propulsion Module): यान को पृथ्वी से चंद्रमा की कक्षा तक ले जाना।
2. अवरोहक मॉड्यूल (Descender Module): चंद्रमा सतह पर नियंत्रित सॉफ्ट लैंडिंग।
3. आरोहक मॉड्यूल (Ascender Module): नमूनों को लेकर चंद्रमा सतह से अंतरिक्ष में वापस उड़ान भरना।
4. स्थानांतरण मॉड्यूल (Transfer Module): नमूनों को चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी की कक्षा में वापस लाना।
5. पुन: प्रवेश मॉड्यूल (Re-entry Module): पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर नमूनों को सुरक्षित जमीन पर उतारना।
✓गगनयान मिशन (Gaganyaan Human Spaceflight Program):
• भारत का प्रथम मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन; 3 अंतरिक्ष यात्रियों के दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में 3 दिनों के लिए ले जाना और भारतीय समुद्री जलक्षेत्र में सुरक्षित उतारना।
• प्रक्षेपण यान: मानव-रेटेड LVM3 (Human-Rated LVM3 - H-LVM3)।
• व्योममित्र (Vyommitra): इसरो द्वारा विकसित अर्ध-ह्यूमनॉइड महिला रोबोट (Half-Humanoid Robot); मानवरहित परीक्षण उड़ानों में अंतरिक्ष यात्रियों के जैविक मापदंडों, केबिन दबाव, ऑक्सीजन और विकिरण की निगरानी करेगी।
• अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण: बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र (ISRO Astronaut Training Facility) में प्रशिक्षित 4 विंग कमांडर/ग्रुप कैप्टन (प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप, शुभांशु शुक्ला)।
✓भारत का दीर्घकालिक अंतरिक्ष रोडमैप (Long-Term Space Vision):
• वर्ष 2035: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS-1 - Bharatiya Antariksh Station) की स्थापना।
• वर्ष 2040: चंद्रमा की सतह पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री (First Indian on the Moon) का सफल ऐतिहासिक अवतरण।
• भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 (Indian Space Policy 2023): इन-स्पेस (IN-SPACe) और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के माध्यम से निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) की अंतरिक्ष में भागीदारी।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इसरो एवं मिसाइल कार्यक्रम नोट्स एवं UPSC CSE 2027 प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज़।
भारतीय कृषि, अर्थशास्त्र एवं मूल्य निर्धारण: रबी विपणन सत्र 2026-27 हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) — CACP का लागत फॉर्मूला (A2, A2+FL, C2), राजफेड (RAJFED) व राजस्थान में सरसों-चना उत्पादन
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा रबी विपणन सत्र 2026-27 (Rabi Marketing Season 2026-27) के लिए सभी 6 अनिवार्य रबी फसलों (गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों/तोरिया, कुसुम) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में आकर्षक वृद्धि को अंतिम स्वीकृति दी गई। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की संस्तुतियों के अनुरूप अखिल भारतीय भारित उत्पादन लागत पर कम से कम 50% से 100% का शुद्ध मुनाफा सुनिश्चित किया गया। राजस्थान में सरसों (देश के कुल उत्पादन का 45%+) और चना उत्पादन में देश में अव्वल होने के कारण राज्य के 30 लाख से अधिक किसान इस निर्णय से सीधे लाभान्वित होंगे।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की विधिक एवं संस्थागत संरचना (UPSC/RAS Core):
• घोषणा चक्र: वर्ष में दो बार (खरीफ और रबी फसलों की बुवाई से पूर्व); कुल 22 अनिवार्य फसलों (14 खरीफ, 6 रबी, 2 व्यावसायिक फसलें) हेतु MSP तथा गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) घोषित किया जाता है।
• संस्तुति संस्था: कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP - Commission for Agricultural Costs and Prices):
- स्थापना: वर्ष 1965 में 'कृषि मूल्य आयोग' (Agricultural Prices Commission) के रूप में; वर्ष 1985 में वर्तमान नाम CACP दिया गया।
- स्वरूप: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक सलाहकार निकाय।
• अंतिम निर्णय: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA - Cabinet Committee on Economic Affairs), जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते हैं।
✓CACP का उत्पादन लागत आकलन फॉर्मूला (High-Yield Economics Concepts):
• A2 लागत: किसान द्वारा बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक, किराए के मानव श्रम, बैल/ट्रैक्टर श्रम और सिंचाई पर किया गया प्रत्यक्ष नकद व्यय।
• A2 + FL लागत: A2 प्रत्यक्ष लागत के साथ किसान परिवार के सदस्यों के अवैतनिक पारिवारिक श्रम (Family Labour - FL) का अनुमानित मूल्य।
• C2 लागत (व्यापक लागत - Comprehensive Cost): A2 + FL लागत के अतिरिक्त किसान की स्वयं की कृषि भूमि का अनुमानित किराया और अचल कृषि पूंजी संपत्तियों पर ब्याज का समावेश।
• स्वामीनाथन आयोग (राष्ट्रीय किसान आयोग - 2004-06): प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन की ऐतिहासिक सिफारिश थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को व्यापक उत्पादन लागत (C2) का कम से कम डेढ़ गुना (C2 + 50%) निर्धारित किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार वर्तमान में A2+FL लागत पर 50% मार्जिन का फॉर्मूला अपनाती है।
✓राजस्थान कृषि परिदृश्य एवं राजफेड (RAJFED) खरीद तंत्र:
• राजस्थान का राष्ट्रीय स्थान: राजस्थान पूरे देश में सरसों (Mustard/Rapeseed), चना (Gram), बाजरा और ग्वार के कुल उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है।
• राजफेड (RAJFED - राजस्थान राज्य सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड):
- स्थापना: 26 नवंबर 1957; मुख्यालय: जयपुर।
- कार्य: भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) की राज्य नोडल एजेंसी के रूप में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से सरसों, चना, मूंग और मूंगफली की पारदर्शी ऑनलाइन खरीद (बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण आधारित) करता है।
• पीएम-आशा योजना (PM-AASHA): प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, जिसके तहत मूल्य समर्थन योजना (PSS) और मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) संचालित हैं।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान कृषि, फसलें एवं आर्थिक समीक्षा नोट्स एवं राजस्थान CET 12th लेवल टेस्ट सीरीज़।
राजस्थान कला, संस्कृति, साहित्य एवं लोक विरासत: रूपायन संस्थान (बोरूंदा - जोधपुर) व लोक कला संरक्षण — पद्म भूषण कोमल कोठारी, विजयदान देथा 'बिज्जी' (बातां री फुलवारी) व दुर्लभ लोक वाद्य
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
14 अक्टूबर 2026 को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी (जोधपुर) और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (WZCC, उदयपुर) द्वारा जोधपुर के ऐतिहासिक गांव बोरूंदा स्थित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त "रूपायन संस्थान" (Rupayan Sansthan) के पारंपरिक ऑडियो आर्काइव और दुर्लभ लोक वाद्यों के डिजिटलीकरण की वृहद परियोजना की घोषणा की गई। इस अवसर पर पद्म भूषण डॉ. कोमल कोठारी और महान राजस्थानी कथाकार विजयदान देथा 'बिज्जी' के सांस्कृतिक अवदान, मांगणियार व लांगा लोक कलाकारों की समृद्ध विरासत तथा राजस्थान के विलुप्तप्राय लोक वाद्यों (कमायचा, रावणहत्था, भपंग, सतारा) के संरक्षण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓रूपायन संस्थान, बोरूंदा (जोधपुर) का ऐतिहासिक अवदान (RPSC Exam Favorite):
• स्थापना: वर्ष 1960 में जोधपुर जिले के बोरूंदा गांव में विख्यात लोक संस्कृति मर्मज्ञ पद्म भूषण डॉ. कोमल कोठारी (Komal Kothari) और महान राजस्थानी साहित्यकार विजयदान देथा (Vijaydan Detha) द्वारा।
• उद्देश्य: राजस्थान की मौखिक लोक संस्कृति, लोक कथाओं, लोक वाद्यों, लोक गीतों, कठपुतली परंपरा और पारंपरिक संगीतकार जातियों (मांगणियार, लांगा, कालबेलिया, जोगी) के विशाल लोक साहित्य का प्रामाणिक ऑडियो-विजुअल प्रलेखन व संरक्षण।
• डॉ. कोमल कोठारी 'कोमल दा' (1929–2004): राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के संस्थापक-सचिव; इन्होंने मांगणियार व लांगा लोक कलाकारों और सारंगी-कमायचा वादकों (जैसे पद्मश्री साकर खान) को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठा दिलाई; 2004 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित।
✓विजयदान देथा 'बिज्जी' (1926–2013) की कालजयी साहित्यिक कृतियां:
• बातां री फुलवारी (Batan Ri Phulwari): राजस्थानी लोक कथाओं का 14 खंडों में विश्वप्रसिद्ध महा-संकलन; इसके लिए बिज्जी को वर्ष 1974 में केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
• सिनेमा व रंगमंच पर रूपांतरित कृतियां:
- 'दुविधा' (Duvidha): इस लोक कथा पर निर्देशक मणि कौल द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'दुविधा' और अभिनेता शाहरुख खान अभिनीत निर्देशक अमोल पालेकर की फिल्म 'पहेली' (Paheli - ऑस्कर हेतु नामांकित) बनी।
- 'चरणदास चोर': प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर द्वारा विख्यात नाटक में रूपांतरित।
- अन्य विख्यात कृतियां: 'उलझन', 'अलेखून हिटलर', 'रूख', 'सपनप्रिया' और 'महामिलन'।
• सर्वोच्च सम्मान: वर्ष 2007 में पद्मश्री, साहित्य चूड़ामणि पुरस्कार तथा 2012 में राजस्थान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'राजस्थान रत्न' (प्रथम बैच) से सम्मानित।
✓राजस्थान के प्रमुख लोक वाद्य यंत्रों का प्रामाणिक वर्गीकरण (High-Yield Facts):
1. तत् वाद्य (तार वाले वाद्य):
- कमायचा: सारंगी की रानी; रोहिड़े की लकड़ी से निर्मित, गज में घोड़े के बाल; मांगणियार जाति का प्रमुख वाद्य।
- रावणहत्था: आधे कटे नारियल की कटोरी पर बकरे की खाल मढ़कर निर्मित; पाबूजी और डूंगजी-जवाहरजी की पड़ वाचन में भोपों द्वारा प्रयुक्त।
- जंतर: वीणा का प्रारंभिक रूप; गुर्जर भोपों द्वारा देवनारायण जी की पड़ वाचन के समय।
- भपंग: मेवात (अलवर) का प्रसिद्ध तत् वाद्य (लौकी के तूंबे से बना); प्रसिद्ध वादक: जहूर खां मेवाती व उमर फारूक मेवाती।
2. सुषिर वाद्य (फूंक से बजने वाले):
- अलगोजा: राजस्थान का आधिकारिक 'राज्य लोक वाद्य'; बांसुरी की तरह की दो नलियां एक साथ मुंह में रखकर बजाई जाती हैं (प्रसिद्ध वादक: रामनाथ चौधरी - पदमपुरा)।
- सतारा, नड़ (प्रसिद्ध वादक: कर्णा भील - जैसलमेर), पूंगी/मुरली, शहनाई, बांकिया व मोरचंग (लोहे का सबसे छोटा वाद्य)।
3. अवनद्ध वाद्य (चमड़े से मढ़े वाद्य):
- मांदल (मोलेला का मिट्टी का वाद्य), नौबत, ढोल, चंग, डफ, खंजरी, नगाड़ा (प्रसिद्ध वादक: रामकिशन सोलंकी - पुष्कर)।
4. घन वाद्य (धातु से निर्मित):
- मंजीरा (कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा 13 मंजीरों से तेरहताली नृत्य), खड़ताल (प्रसिद्ध वादक: सदीक खां मांगणियार), रमझोल, झालर।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान लोक कला, साहित्य, संगीत एवं वाद्य यंत्र नोट्स एवं राजस्थान REET एवं शिक्षक भर्ती 2026 टेस्ट सीरीज़।
राष्ट्रीय खेल, युवा कल्याण एवं एथलेटिक्स: 38वें राष्ट्रीय खेल 2026 (उत्तराखंड) — राजस्थान तीरंदाजी, निशानेबाजी व नौकायन दल की तैयारियां, जगतपुरा शूटिंग रेंज व 'मिशन ओलिंपिक 2028'
परीक्षा की दृष्टि से खबर में क्यों?
14 अक्टूबर 2026 को भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और 38वें राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति (उत्तराखंड) द्वारा राष्ट्रीय खेलों के तीरंदाजी (Archery), निशानेबाजी (Shooting), नौकायन (Rowing) और ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं की आधिकारिक तकनीकी नियमावली जारी की गई। राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद (RSSC, सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर) द्वारा जगतपुरा शूटिंग रेंज और राजस्थान विश्वविद्यालय खेल परिसर में राज्य के शीर्ष 150 एथलीटों के लिए उच्च-प्रदर्शन कंडीशनिंग कैंप की शुरुआत की गई। साथ ही खेल विभाग ने राज्य के अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने हेतु 'राजस्थान खिलाड़ी कल्याण कोष 2026' के तहत नई प्रोत्साहन नियमावली अधिसूचित की।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु (Key Exam Points)
✓38वें राष्ट्रीय खेल 2026 (उत्तराखंड) का आयोजन ढांचा:
• मेजबान राज्य: उत्तराखंड (देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, टिहरी और ऋषिकेश के बहुउद्देश्यीय आधुनिक खेल परिसरों में)।
• उत्तराखंड राज्य में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया जा रहा है।
• पिछला 37वां संस्करण: वर्ष 2023 में गोवा में आयोजित (महाराष्ट्र 228 पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर रहा था)।
• राष्ट्रीय खेल इतिहास: 1924 में लाहौर में 'अखिल भारतीय ओलंपिक खेल' के रूप में शुरू; 1940 में बॉम्बे में 'राष्ट्रीय खेल' नामकरण; भारतीय ओलंपिक संघ (IOA - स्थापना 1927) द्वारा संचालित।
✓राजस्थान के आधुनिक खेल अवसंरचना केंद्र एवं प्रमुख अकादमियां:
• जगतपुरा शूटिंग रेंज (जयपुर): अंतरराष्ट्रीय स्तर की 10 मी, 25 मी व 50 मी शूटिंग रेंज; टोक्यो व पेरिस पैरालंपिक की दोहरी स्वर्ण पदक विजेता अवनी लेखरा (Avani Lekhara), अपूर्वी चंदेला और दिव्यांश सिंह पंवार की मूल अभ्यास स्थली।
• राज्य तीरंदाजी अकादमी (डूंगरपुर व उदयपुर): दक्षिणी राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों के उभरते तीरंदाजों हेतु विशेष प्रशिक्षण केंद्र; ऐतिहासिक तीरंदाज लिम्बा राम (पद्मश्री) और अर्जुन पुरस्कार विजेता श्याम सुंदर स्वामी (पैरा-तीरंदाजी) का प्रेरणादायी योगदान।
• सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम (जयपुर): राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद (RSSC) का मुख्यालय; स्थापना वर्ष 1957; प्रदेश की समस्त खेल गतिविधियों और छात्रवृत्ति का शीर्ष नियामक निकाय।
✓राजस्थान सरकार की खेल प्रोत्साहन नीतियां एवं पदक पुरस्कार (High-Yield Exam Data):
• आउट-ऑफ-टर्न राजकीय सेवा नियुक्ति (Out-of-Turn Appointments 2020):
- ओलंपिक, एशियाई, राष्ट्रमंडल और राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को राजस्थान पुलिस सेवा (DSP), राजस्थान तहसीलदार सेवा (RTS) और अन्य ग्रेड-पे सेवाओं में सीधी राजपत्रित नियुक्ति।
• पदक विजेताओं हेतु नकद पुरस्कार राशि:
- ओलंपिक खेल: स्वर्ण पदक - ₹3 करोड़ | रजत पदक - ₹2 करोड़ | कांस्य पदक - ₹1 करोड़।
- एशियाई खेल / राष्ट्रमंडल खेल: स्वर्ण पदक - ₹1 करोड़ | रजत पदक - ₹60 लाख | कांस्य पदक - ₹30 लाख।
• राज्य के सर्वोच्च खेल पुरस्कार (पुरस्कार राशि: ₹5-5 लाख):
1. महाराणा प्रताप पुरस्कार: राजस्थान के उत्कृष्ट पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को दिया जाने वाला राज्य का सर्वोच्च खेल पुरस्कार।
2. गुरु वशिष्ठ पुरस्कार: उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षकों (Coaches) को दिया जाने वाला सर्वोच्च राज्य खेल पुरस्कार।
• 'मिशन ओलिंपिक 2028 / 2032': लॉस एंजेलिस (2028) और ब्रिस्बेन (2032) ओलंपिक खेलों में राजस्थान से अधिक से अधिक पदक जीतने के लक्ष्य हेतु चयनित 50 एथलीटों को विश्वस्तरीय विदेशी कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय स्पॉन्सरशिप।
• संबंधित अध्ययन नोट्स: राजस्थान एवं राष्ट्रीय खेल परिदृश्य 2026 नोट्स एवं राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2026 मॉक टेस्ट।