UPSC 2027 Free · इतिहास (History) · टेस्ट 01
इतिहास (History) — 25 प्रश्न। UPSC CSE Prelims अभ्यास (हिंदी माध्यम)। व्याख्या सहित।
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UPSC 2027 Free · इतिहास (History) · टेस्ट 01: क्विज़ परिचय
इस क्विज़ में UPSC CSE 2027 Prelims फ्री विषय के 25 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं।
नीचे 10 नमूना प्रश्न सही उत्तर और व्याख्या के साथ दिए गए हैं, ताकि आप प्रश्नों का स्तर देख सकें। पूरी क्विज़ टाइमर, नेगेटिव मार्किंग और स्कोरकार्ड के साथ निःशुल्क लॉगिन के बाद हल करें।
नमूना प्रश्न: उत्तर व व्याख्या सहित
प्रश्न 1. विजयनगर साम्राज्य की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में "अमरनायक" प्रणाली क्या थी?
सही उत्तर: (B) सैन्य कमांडर जिन्हें शासन और सेना के भरण-पोषण हेतु भू-क्षेत्र (अमरम) सौंपे जाते थे
व्याख्या: अमरनायक प्रणाली विजयनगर का एक प्रमुख राजनीतिक नवाचार था (दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से मिलता-जुलता)। अमरनायक सैन्य कमांडर होते थे जिन्हें राय (विजयनगर शासक) द्वारा अमरम (भूमि क्षेत्र) दिया जाता था। वे किसानों और व्यापारियों से कर वसूलते थे, राजा की सहायता हेतु सेना रखते थे और प्रतिवर्ष राजा को व्यक्तिगत रूप से नजराना भेंट करते थे।
प्रश्न 2. मुगल सम्राट अकबर द्वारा लागू की गई "मनसबदारी व्यवस्था" के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मनसबदार का पद आनुवांशिक (hereditary) नहीं था; पदोन्नति, अवनति और पदमुक्ति पूर्णतः सम्राट की इच्छा पर निर्भर थी। 2. "जात" पद मनसबदार की व्यक्तिगत स्थिति और वेतन को दर्शाता था, जबकि "सवार" पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या को निर्धारित करता था। 3. सभी मनसबदारों को केवल नकद वेतन (नकदी) दिया जाता था, जागीर का आवंटन प्रतिबंधित था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: (C) केवल 1 और 2
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं: मनसबदारी व्यवस्था में जात और सवार दोहरे दर्जे थे और यह पद आनुवंशिक नहीं था। कथन 3 गलत है: मनसबदारों को वेतन दो प्रकार से मिलता था - नकद (नकदी) या भू-राजस्व आवंटन के रूप में (जागीरदार)। अधिकांश मनसबदारों को जागीरें दी जाती थीं, हालांकि जागीर पर केवल राजस्व का अधिकार होता था, भूमि का स्वामित्व नहीं।
प्रश्न 3. मध्यकालीन भारत में सूफी परंपरा के संदर्भ में "चिश्ती" और "सुहरावर्दी" सिलसिलों के अंतर पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती संत राजसत्ता और दरबार की नजदीकियों से दूर रहते थे और सादा जीवन व्यतीत करते थे, जबकि सुहरावर्दी संत राजकीय पदों और धन-सपत्ति को स्वीकार करने में संकोच नहीं करते थे। 2. चिश्ती सिलसिले ने कव्वाली और समा (संगीत) को ईश्वर प्रेम का साधन माना, जबकि सुहरावर्दी संत संगीत से दूरी रखते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: (D) और 2 दोनों
व्याख्या: दोनों कथन सही हैं: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया जैसे चिश्ती संतों ने सुल्तानों के दरबार से दूरी रखी (औलिया ने कहा था- मेरे घर के दो दरवाजे हैं, सुल्तान एक से आएगा तो मैं दूसरे से निकल जाऊंगा)। जबकि मुल्तान में सक्रिय सुहरावर्दी सिलसिले के शेख बहाउद्दीन जकारिया ने इल्तुतमिश से शेख-उल-इस्लाम की उपाधि ली और राजकीय संरक्षण व धन स्वीकार किया। चिश्तियों में समा (सूफी संगीत) भक्ति का अभिन्न अंग था।
प्रश्न 4. प्राचीन भारत की मूर्तिकला की "गांधार" और "मथुरा" शैलियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधार शैली में मुख्य रूप से नीले-धूसर बलुआ पत्थर (Grey Schist) का प्रयोग हुआ और इस पर यूनानी-रोमन प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। 2. मथुरा शैली पूर्णतः स्वदेशी थी और इसमें लाल बलुआ पत्थर (Spotted Red Sandstone) का प्रयोग किया गया। 3. मथुरा शैली में केवल बौद्ध धर्म की मूर्तियां बनीं, जबकि गांधार शैली में हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों की मूर्तियां बनीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: (A) केवल 1 और 2
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि ठीक इसके विपरीत: गांधार शैली में लगभग विशेष रूप से बौद्ध मूर्तियां (अपोलो शैली के बुद्ध) बनीं, जबकि मथुरा शैली में बौद्ध (प्रसन्नचित्त विशाल बुद्ध), जैन (तीर्थंकर प्रतिमाएं जैसे कंकाली टीला) और हिंदू (विष्णु, शिव, कार्तिकेय) तीनों धर्मों की मूर्तियां बड़े पैमाने पर बनाई गईं।
प्रश्न 5. असहयोग आंदोलन (1920-1922) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में असहयोग कार्यक्रम का अंतिम अनुमोदन किया गया और कांग्रेस के संविधान में बदलाव किए गए। 2. आंदोलन के दौरान गांधीजी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिली "कैसर-ए-हिंद" की उपाधि वापस कर दी। 3. चौरी-चौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के बाद गांधीजी ने बारदोली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक कर आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: (B) 1, 2 और 3
व्याख्या: तीनों कथन सही हैं: नागपुर अधिवेशन में भाषाई आधार पर प्रांतीय कांग्रेस समितियों का गठन और चवन्नी चंदा सदस्यता तय हुई। गांधीजी ने कैसर-ए-हिंद पदक लौटाया और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर के चौरी-चौरा में थाने को जलाए जाने के बाद 12 फरवरी 1922 को बारदोली प्रस्ताव द्वारा आंदोलन वापस ले लिया गया।
प्रश्न 6. मुगल कालीन चित्रकला के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
सही उत्तर: (C) जहाँगीर के काल में प्रकृति, पशु-पक्षी और व्यक्ति-चित्रण (Portrait) की चित्रकला अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुंची और उस्ताद मंसूर इसका प्रमुख चित्रकार था।
व्याख्या: जहाँगीर का काल मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग था। उसने चित्रशालाओं के बजाय एकल चित्रों, शिकार के दृश्यों, पशु-पक्षियों (उस्ताद मंसूर द्वारा चित्रित साइबेरियन सारस और जेब्रा) और सूक्ष्म व्यक्ति-चित्रों को बढ़ावा दिया। औरंगजेब ने चित्रकला को गैर-इस्लामी मानकर शाही संरक्षण समाप्त कर दिया था। हम्जानामा अकबर के प्रारंभिक काल की कृति है।
प्रश्न 7. मौर्यकालीन प्रशासन एवं समाज के संदर्भ में कौटिल्य के "अर्थशास्त्र" और मेगस्थनीज की "इंडिका" के विवरणों की तुलना पर विचार कीजिए: 1. मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को सात जातियों में विभाजित बताया और भारत में दास प्रथा की अनुपस्थिति का उल्लेख किया। 2. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों के विभिन्न प्रकारों, उनके विधिक अधिकारों तथा दासता से मुक्ति के नियमों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: (D) और 2 दोनों
व्याख्या: दोनों कथन सही हैं: मेगस्थनीज यूनानी परिप्रेक्ष्य से दासता को देख रहा था जहाँ दासों के साथ अत्यंत अमानवीय व्यवहार होता था। चूंकि भारत में दासों के साथ वैसा बर्बर व्यवहार नहीं था और उन्हें घरेलू संरक्षण प्राप्त था, इसलिए उसने लिखा कि भारत में कोई दास नहीं है। जबकि कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में 9 प्रकार के दासों, अहितक (बंधक) और उनके क्रय-विक्रय तथा मुक्ति के विस्तृत नियम लिखे।
प्रश्न 8. भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act 1935) के प्रमुख प्रावधानों में निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल नहीं था?
सही उत्तर: (A) अवशिष्ट शक्तियां प्रांतीय विधानमंडलों को पूर्ण रूप से सौंपना
व्याख्या: 1935 के अधिनियम में अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) न तो संघीय विधायिका को दी गई थीं और न ही प्रांतीय विधायिका को; बल्कि वे गवर्नर जनरल (वायसराय) के विवेकाधिकार में रखी गई थीं। बाकी तीनों प्रावधान (प्रांतीय स्वायत्तता, केंद्र में द्वैध शासन, और देशी रियासतों के शामिल होने पर निर्भर अखिल भारतीय संघ) इस अधिनियम के प्रमुख भाग थे।
प्रश्न 9. प्राचीन भारत के इतिहास में प्रसिद्ध यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) के विवरणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वह सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया और उसने नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध दर्शन का अध्ययन किया। 2. उसने तत्कालीन समाज में अस्पृश्यता और चांडालों के नगर के बाहर निवास करने की स्थिति का उल्लेख किया। 3. उसने भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह सिक्कों से मुक्त और केवल वस्तु विनिमय पर आधारित बताया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: (B) केवल 1 और 2
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं: ह्वेनसांग 7वीं सदी में हर्ष के काल में आया, कन्नौज धर्मसभा और प्रयाग महामोक्ष परिषद में सम्मिलित हुआ। उसने समाज में चांडालों की दयनीय स्थिति का वर्णन किया। कथन 3 गलत है: उसने कौड़ियों और सोने-चांदी के सिक्कों के प्रचलन का उल्लेख किया है, अर्थव्यवस्था केवल वस्तु-विनिमय तक सीमित नहीं थी।
प्रश्न 10. 1932 के "पूना पैक्ट" (Poona Pact) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच यरवदा जेल में हुआ समझौता था। 2. इसने ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्से मैकडोनाल्ड के "सांप्रदायिक पंचाट" (Communal Award) में दलितों को दिए गए पृथक निर्वाचक मंडल को समाप्त कर दिया। 3. प्रांतीय विधानमंडलों में दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या सांप्रदायिक पंचाट की 71 सीटों से बढ़ाकर 148 कर दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: (C) 1, 2 और 3
व्याख्या: तीनों कथन सही हैं: मैकडोनाल्ड के सांप्रदायिक पंचाट ने दलित वर्ग को हिंदुओं से अलग मानते हुए पृथक निर्वाचक मंडल दिया था जिसके विरोध में गांधीजी ने आमरण अनशन किया। 24 सितंबर 1932 को पूना पैक्ट हुआ जिसके तहत पृथक निर्वाचक मंडल त्याग दिया गया और संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र के भीतर आरक्षित सीटों की संख्या प्रांतीय स्तर पर 71 से बढ़ाकर 148 और केंद्रीय विधायिका में 18% कर दी गई।
शेष 15 प्रश्न लॉगिन के बाद क्विज़ में उपलब्ध हैं।
आगे की तैयारी
इस विषय की पूरी तैयारी के लिए
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महत्वपूर्ण परीक्षा निर्देश (Rules)
- 5वां विकल्प अनिवार्य: RPSC/RSMSSB के नए नियमों के अनुसार यदि आप किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते, तो 5वां विकल्प (अनुत्तरित) अवश्य चुनें।
- नकारात्मक अंकन: गलत उत्तर देने पर प्रश्न के कुल अंकों का 1/3 भाग काट लिया जाएगा।
- रैंक व विश्लेषण: टेस्ट सबमिट करते ही इस टेस्ट को देने वाले अभ्यर्थियों के सापेक्ष आपकी रैंक और पर्सेंटाइल दिखेगी।
पाठ्यक्रम एवं तैयारी सुझाव
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