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गणेश्वर सभ्यता — ताम्रयुगीन संस्कृति — अभ्यास क्विज़

गणेश्वर सभ्यता का इतिहास जानें – सीकर स्थित गणेश्वर-जोढ़पुरा संस्कृति, ताम्रपाषाण युग, तांबे के औजार और राजस्थान के प्राचीन इतिहास में इसका महत्व। 2026। मुफ्त नोट्स। CET/RAS उपयोगी। 20 प्रश्न

कुल प्रश्न
20 MCQs
अंकन योजना
+2 / −0.66
OMR 5th Option
लागू (सक्रिय)
माध्यम
हिंदी (Hindi)
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गणेश्वर सभ्यता — ताम्रयुगीन संस्कृति — अभ्यास क्विज़: क्विज़ परिचय

इस क्विज़ में राजस्थान इतिहास विषय के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रमुख टॉपिक: भौगोलिक स्थिति, खोज, उत्खनन, काल निर्धारण।

नीचे 10 नमूना प्रश्न सही उत्तर और व्याख्या के साथ दिए गए हैं, ताकि आप प्रश्नों का स्तर देख सकें। पूरी क्विज़ टाइमर, नेगेटिव मार्किंग और स्कोरकार्ड के साथ निःशुल्क लॉगिन के बाद हल करें।

नमूना प्रश्न: उत्तर व व्याख्या सहित

  1. प्रश्न 1. गणेश्वर सभ्यता किस नदी के उद्गम क्षेत्र में विकसित हुई?

    • (A) कांतली
    • (B) बाणगंगा
    • (C) आयड़
    • (D) घग्घर

    सही उत्तर: (A) कांतली

    व्याख्या: गणेश्वर सभ्यता कांतली नदी के उद्गम क्षेत्र में विकसित हुई। बाणगंगा बैराठ से, आयड़ आहड़ से और घग्घर कालीबंगा से जुड़ी है।

  2. प्रश्न 2. गणेश्वर स्थल की पहचान सर्वप्रथम 1972 ई. में किसने की?

    • (A) दयाराम साहनी
    • (B) रत्नचंद्र अग्रवाल
    • (C) अमलानंद घोष
    • (D) एच.डी. सांकलिया

    सही उत्तर: (B) रत्नचंद्र अग्रवाल

    व्याख्या: 1972 ई. में रत्नचंद्र अग्रवाल ने गणेश्वर की खोज की; 1977 से उनके और विजय कुमार के निर्देशन में उत्खनन हुआ।

  3. प्रश्न 3. गणेश्वर के उत्खनन से जुड़े पुरातत्वविदों का सही युग्म कौन-सा है?

    • (A) दयाराम साहनी और एन.आर. बनर्जी
    • (B) बी.बी. लाल और बी.के. थापर
    • (C) आर.सी. अग्रवाल और विजय कुमार
    • (D) एच.डी. सांकलिया और ए.के. व्यास

    सही उत्तर: (C) आर.सी. अग्रवाल और विजय कुमार

    व्याख्या: गणेश्वर का उत्खनन आर.सी. अग्रवाल और विजय कुमार ने किया। बी.बी. लाल-थापर कालीबंगा से, सांकलिया आहड़ से जुड़े हैं।

  4. प्रश्न 4. रेडियो कार्बन पद्धति के आधार पर गणेश्वर सभ्यता का काल लगभग कितना माना गया है?

    • (A) 300 ई.पू.
    • (B) 1800 ई.पू.
    • (C) 600 ई.पू.
    • (D) 2800 ई.पू.

    सही उत्तर: (D) 2800 ई.पू.

    व्याख्या: गणेश्वर का काल लगभग 2800 ई.पू. माना गया है, जो इसे हड़प्पा सभ्यता के प्रारंभिक चरणों जितना प्राचीन बनाता है।

  5. प्रश्न 5. गणेश्वर सभ्यता को किस उपनाम से जाना जाता है?

    • (A) ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी
    • (B) ताम्रवती नगरी
    • (C) राजस्थान का हड़प्पा
    • (D) धूलकोट

    सही उत्तर: (A) ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी

    व्याख्या: गणेश्वर को 'ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी' और 'पुरातत्व का पुष्कर' कहा जाता है। ताम्रवती नगरी व धूलकोट आहड़ के नाम हैं।

  6. प्रश्न 6. 'पुरातत्व का पुष्कर' किस पुरातात्त्विक स्थल को कहा जाता है?

    • (A) बैराठ
    • (B) गणेश्वर
    • (C) कालीबंगा
    • (D) बालाथल

    सही उत्तर: (B) गणेश्वर

    व्याख्या: प्रचुर पुरातात्त्विक सामग्री के कारण गणेश्वर को 'पुरातत्व का पुष्कर' कहा जाता है।

  7. प्रश्न 7. गणेश्वर से प्राप्त ताम्र उपकरणों में ताँबे की शुद्धता लगभग कितनी पाई गई है?

    • (A) 60 प्रतिशत
    • (B) 75 प्रतिशत
    • (C) 99 प्रतिशत
    • (D) 50 प्रतिशत

    सही उत्तर: (C) 99 प्रतिशत

    व्याख्या: गणेश्वर के उपकरणों में लगभग 99% शुद्ध ताँबा है।

  8. प्रश्न 8. गणेश्वर के उपकरणों में लगभग शुद्ध ताँबा मिलने से क्या निष्कर्ष निकलता है?

    • (A) यहाँ सोने के सिक्के चलते थे
    • (B) यहाँ लोहे का प्रयोग होता था
    • (C) यहाँ ताँबा विदेश से आयात होता था
    • (D) यहाँ के लोग ताँबे में टिन मिलाकर काँसा बनाना नहीं जानते थे

    सही उत्तर: (D) यहाँ के लोग ताँबे में टिन मिलाकर काँसा बनाना नहीं जानते थे

    व्याख्या: शुद्ध ताँबे के उपकरण दर्शाते हैं कि यहाँ के लोग मिश्रधातु (काँसा) बनाने की तकनीक नहीं अपनाते थे।

  9. प्रश्न 9. गणेश्वर से प्राप्त ताँबे के मछली पकड़ने के काँटे से क्या संकेत मिलता है?

    • (A) कांतली नदी उस समय पर्याप्त जल वाली नदी थी
    • (B) यहाँ समुद्री व्यापार होता था
    • (C) यहाँ लोग केवल शाकाहारी थे
    • (D) यहाँ नहर सिंचाई होती थी

    सही उत्तर: (A) कांतली नदी उस समय पर्याप्त जल वाली नदी थी

    व्याख्या: मछली पकड़ने के काँटों से पता चलता है कि कांतली नदी में तब पर्याप्त पानी और मछलियाँ थीं तथा लोग मछली भी खाते थे।

  10. प्रश्न 10. गणेश्वर से प्राप्त मृदभांड किस श्रेणी के हैं?

    • (A) चित्रित धूसर मृदभांड (PGW)
    • (B) कापिशवर्णी (गेरुए रंग के) मृदपात्र (OCP)
    • (C) उत्तरी काले पॉलिशदार मृदभांड (NBPW)
    • (D) काले-लाल मृदभांड (BRW)

    सही उत्तर: (B) कापिशवर्णी (गेरुए रंग के) मृदपात्र (OCP)

    व्याख्या: गणेश्वर से गेरुए रंग के मृदपात्र (Ochre Coloured Pottery) मिले हैं, जिन्हें गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति से जोड़ा जाता है।

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