गणेश्वर सभ्यता — ताम्रयुगीन संस्कृति — अभ्यास क्विज़
गणेश्वर सभ्यता का इतिहास जानें – सीकर स्थित गणेश्वर-जोढ़पुरा संस्कृति, ताम्रपाषाण युग, तांबे के औजार और राजस्थान के प्राचीन इतिहास में इसका महत्व। 2026। मुफ्त नोट्स। CET/RAS उपयोगी। 20 प्रश्न
टेस्ट शुरू करने के लिए 1-क्लिक लॉगिन करें
टेस्ट सबमिट करते ही आपका स्कोर, रैंक व विश्लेषण और आधिकारिक WhatsApp ग्रुप लिंक तुरंत सक्रिय होगा।
गणेश्वर सभ्यता — ताम्रयुगीन संस्कृति — अभ्यास क्विज़: क्विज़ परिचय
इस क्विज़ में राजस्थान इतिहास विषय के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रमुख टॉपिक: भौगोलिक स्थिति, खोज, उत्खनन, काल निर्धारण।
नीचे 10 नमूना प्रश्न सही उत्तर और व्याख्या के साथ दिए गए हैं, ताकि आप प्रश्नों का स्तर देख सकें। पूरी क्विज़ टाइमर, नेगेटिव मार्किंग और स्कोरकार्ड के साथ निःशुल्क लॉगिन के बाद हल करें।
नमूना प्रश्न: उत्तर व व्याख्या सहित
प्रश्न 1. गणेश्वर सभ्यता किस नदी के उद्गम क्षेत्र में विकसित हुई?
सही उत्तर: (A) कांतली
व्याख्या: गणेश्वर सभ्यता कांतली नदी के उद्गम क्षेत्र में विकसित हुई। बाणगंगा बैराठ से, आयड़ आहड़ से और घग्घर कालीबंगा से जुड़ी है।
प्रश्न 2. गणेश्वर स्थल की पहचान सर्वप्रथम 1972 ई. में किसने की?
सही उत्तर: (B) रत्नचंद्र अग्रवाल
व्याख्या: 1972 ई. में रत्नचंद्र अग्रवाल ने गणेश्वर की खोज की; 1977 से उनके और विजय कुमार के निर्देशन में उत्खनन हुआ।
प्रश्न 3. गणेश्वर के उत्खनन से जुड़े पुरातत्वविदों का सही युग्म कौन-सा है?
सही उत्तर: (C) आर.सी. अग्रवाल और विजय कुमार
व्याख्या: गणेश्वर का उत्खनन आर.सी. अग्रवाल और विजय कुमार ने किया। बी.बी. लाल-थापर कालीबंगा से, सांकलिया आहड़ से जुड़े हैं।
प्रश्न 4. रेडियो कार्बन पद्धति के आधार पर गणेश्वर सभ्यता का काल लगभग कितना माना गया है?
सही उत्तर: (D) 2800 ई.पू.
व्याख्या: गणेश्वर का काल लगभग 2800 ई.पू. माना गया है, जो इसे हड़प्पा सभ्यता के प्रारंभिक चरणों जितना प्राचीन बनाता है।
प्रश्न 5. गणेश्वर सभ्यता को किस उपनाम से जाना जाता है?
सही उत्तर: (A) ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी
व्याख्या: गणेश्वर को 'ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी' और 'पुरातत्व का पुष्कर' कहा जाता है। ताम्रवती नगरी व धूलकोट आहड़ के नाम हैं।
प्रश्न 6. 'पुरातत्व का पुष्कर' किस पुरातात्त्विक स्थल को कहा जाता है?
सही उत्तर: (B) गणेश्वर
व्याख्या: प्रचुर पुरातात्त्विक सामग्री के कारण गणेश्वर को 'पुरातत्व का पुष्कर' कहा जाता है।
प्रश्न 7. गणेश्वर से प्राप्त ताम्र उपकरणों में ताँबे की शुद्धता लगभग कितनी पाई गई है?
सही उत्तर: (C) 99 प्रतिशत
व्याख्या: गणेश्वर के उपकरणों में लगभग 99% शुद्ध ताँबा है।
प्रश्न 8. गणेश्वर के उपकरणों में लगभग शुद्ध ताँबा मिलने से क्या निष्कर्ष निकलता है?
सही उत्तर: (D) यहाँ के लोग ताँबे में टिन मिलाकर काँसा बनाना नहीं जानते थे
व्याख्या: शुद्ध ताँबे के उपकरण दर्शाते हैं कि यहाँ के लोग मिश्रधातु (काँसा) बनाने की तकनीक नहीं अपनाते थे।
प्रश्न 9. गणेश्वर से प्राप्त ताँबे के मछली पकड़ने के काँटे से क्या संकेत मिलता है?
सही उत्तर: (A) कांतली नदी उस समय पर्याप्त जल वाली नदी थी
व्याख्या: मछली पकड़ने के काँटों से पता चलता है कि कांतली नदी में तब पर्याप्त पानी और मछलियाँ थीं तथा लोग मछली भी खाते थे।
प्रश्न 10. गणेश्वर से प्राप्त मृदभांड किस श्रेणी के हैं?
सही उत्तर: (B) कापिशवर्णी (गेरुए रंग के) मृदपात्र (OCP)
व्याख्या: गणेश्वर से गेरुए रंग के मृदपात्र (Ochre Coloured Pottery) मिले हैं, जिन्हें गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति से जोड़ा जाता है।
शेष 10 प्रश्न लॉगिन के बाद क्विज़ में उपलब्ध हैं।
आगे की तैयारी
- इसका नोट: गणेश्वर सभ्यता — ताम्रयुगीन संस्कृति — CET/RAS PYQ के साथ (2026 Free Notes)
- विषय के नोट्स: राजस्थान इतिहास के सभी निःशुल्क नोट्स
इस विषय की पूरी तैयारी के लिए
राजस्थान GK Mega टेस्ट सीरीज़ 2026
महत्वपूर्ण परीक्षा निर्देश (Rules)
- 5वां विकल्प अनिवार्य: RPSC/RSMSSB के नए नियमों के अनुसार यदि आप किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते, तो 5वां विकल्प (अनुत्तरित) अवश्य चुनें।
- नकारात्मक अंकन: गलत उत्तर देने पर प्रश्न के कुल अंकों का 1/3 भाग काट लिया जाएगा।
- रैंक व विश्लेषण: टेस्ट सबमिट करते ही इस टेस्ट को देने वाले अभ्यर्थियों के सापेक्ष आपकी रैंक और पर्सेंटाइल दिखेगी।
पाठ्यक्रम एवं तैयारी सुझाव
इस टेस्ट के प्रश्नों को हल करने से पहले संबंधित विषय के विस्तृत स्टडी नोट्स अवश्य पढ़ें। सुयोग अकादमी पर सभी नोट्स 100% निःशुल्क बिना लॉगिन उपलब्ध हैं।
राजस्थान इतिहास के निःशुल्क नोट्स पढ़ें