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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ISRO और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम — इतिहास, PSLV-GSLV-LVM3, कक्षाएँ, चंद्रयान से SpaDeX तक — RAS

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
28 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS (प्रारंभिक व मुख्य) तथा UPSC CSE पाठ्यक्रम की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इकाई; ISRO, DRDO, परमाणु ऊर्जा विभाग व जैव प्रौद्योगिकी विभाग के आधिकारिक प्रकाशन तथा NCERT विज्ञान पाठ्यपुस्तकें। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव डॉ. विक्रम साराभाई ने रखी — 1962 में INCOSPAR बना, 21 नवंबर 1963 को थुम्बा (केरल) से पहला साउंडिंग रॉकेट (नाइकी-अपाचे) छोड़ा गया और 15 अगस्त 1969 को ISRO की स्थापना हुई; 1972 में अंतरिक्ष विभाग (DOS) और अंतरिक्ष आयोग बने। भारत का पहला उपग्रह आर्यभट 19 अप्रैल 1975 को सोवियत रॉकेट से छोड़ा गया, जबकि स्वदेशी रॉकेट SLV-3 ने 18 जुलाई 1980 को रोहिणी (RS-1) को कक्षा में पहुँचाया (परियोजना निदेशक — ए.पी.जे. अब्दुल कलाम)। प्रक्षेपण यानों का क्रम SLV → ASLV → PSLV (चार चरण, ठोस-द्रव-ठोस-द्रव) → GSLV (क्रायोजेनिक ऊपरी चरण) → LVM3 (S200 + L110 + C25) → SSLV है। प्रमुख मिशन: चंद्रयान-1 (2008, M3 उपकरण से चंद्र सतह पर जल/हाइड्रॉक्सिल के संकेत), मंगलयान (2013 में प्रक्षेपित, 24 सितंबर 2014 को मंगल कक्षा — पहले प्रयास में सफल), चंद्रयान-3 (23 अगस्त 2023, दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के पास पहली सफल लैंडिंग; लैंडर विक्रम, रोवर प्रज्ञान; स्थल "शिव शक्ति बिंदु"), आदित्य-L1 (2023; सूर्य-पृथ्वी के L1 बिंदु पर हेलो कक्षा) और SpaDeX (16 जनवरी 2025 को डॉकिंग — अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत चौथा देश)। स्वदेशी नेविगेशन NavIC और विमानन के लिए GAGAN है; व्यावसायिक शाखा NSIL (2019) और निजी क्षेत्र का नियामक-प्रोत्साहक IN-SPACe (2020) है। मुख्य प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR), श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) है।


संक्षिप्त उत्तर

तथ्यउत्तर
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनकडॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई
INCOSPAR (Indian National Committee for Space Research)1962 (परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन)
पहला रॉकेट प्रक्षेपण21 नवंबर 1963, थुम्बा (TERLS), नाइकी-अपाचे (अमेरिकी साउंडिंग रॉकेट)
ISRO की स्थापना15 अगस्त 1969
अंतरिक्ष विभाग (DOS) व अंतरिक्ष आयोग1972; ISRO को DOS के अधीन लाया गया
ISRO मुख्यालयबेंगलुरु (अंतरिक्ष भवन)
पहला भारतीय उपग्रहआर्यभट — 19 अप्रैल 1975, सोवियत संघ के रॉकेट से
पहला स्वदेशी प्रक्षेपण यान से उपग्रह कक्षा मेंSLV-3 से रोहिणी RS-1, 18 जुलाई 1980
SLV-3 के परियोजना निदेशकडॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
PSLV के चरण4 — ठोस (PS1), द्रव (PS2, विकास इंजन), ठोस (PS3), द्रव (PS4)
क्रायोजेनिक ईंधनद्रव हाइड्रोजन (ईंधन) + द्रव ऑक्सीजन (ऑक्सीकारक)
चंद्रयान-122 अक्टूबर 2008, PSLV-C11; M3 (NASA) से जल के संकेत
मंगलयान (Mars Orbiter Mission)प्रक्षेपण 5 नवंबर 2013 (PSLV-C25); मंगल कक्षा 24 सितंबर 2014
चंद्रयान-3 लैंडिंग23 अगस्त 2023 — राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस
आदित्य-L1प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023 (PSLV-C57); L1 हेलो कक्षा 6 जनवरी 2024
SpaDeX डॉकिंग16 जनवरी 2025 (प्रक्षेपण 30 दिसंबर 2024, PSLV-C60)
भू-स्थिर कक्षा की ऊँचाईलगभग 35,786 किमी (भूमध्य रेखा के ऊपर)

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

ISRO और अंतरिक्ष मिशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सबसे अधिक दोहराया जाने वाला अध्याय है। RAS प्रारंभिक में विज्ञान-प्रौद्योगिकी और समसामयिकी दोनों खंडों से इस पर प्रश्न बनते हैं; RAS मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र-III में "अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भारत की उपलब्धियाँ" पर लघु व वर्णनात्मक उत्तर अपेक्षित होते हैं। UPSC प्रारंभिक में कक्षाओं (GEO, SSO), लैग्रेंज बिंदुओं, प्रक्षेपण यानों और मिशनों के उद्देश्य पर कथन-आधारित प्रश्न आते हैं। SSC, RRB NTPC और राजस्थान CET में "पहला उपग्रह", "मुख्यालय", "किस यान से प्रक्षेपित" जैसे सीधे तथ्य पूछे जाते हैं।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य (प्रश्नपत्र-III, विज्ञान-प्रौद्योगिकी)
  • UPSC CSE प्रारंभिक — कथन-आधारित व मिलान प्रश्न
  • SSC CGL, RRB NTPC — एक पंक्ति वाले तथ्य
  • राजस्थान CET, पटवारी, LDC — सामान्य विज्ञान व समसामयिकी

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. इतिहास — पहला उपग्रह, पहला रॉकेट, संस्थापक, स्थापना वर्ष
  2. प्रक्षेपण यान — चरणों की संख्या, क्रायोजेनिक इंजन, किस यान ने कौन-सा मिशन छोड़ा
  3. कक्षाएँ — GEO बनाम SSO, लैग्रेंज बिंदु L1 और L2
  4. मिशन — उद्देश्य, उपकरण, उपलब्धि ("पहली बार")
  5. संस्थाएँ — केंद्र और उनका स्थान, NSIL/IN-SPACe की भूमिका

3. भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का इतिहास

स्वतंत्रता के बाद परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष — दोनों क्षेत्रों को डॉ. होमी भाभा और डॉ. विक्रम साराभाई ने संस्थागत रूप दिया। साराभाई का विचार था कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग संचार, मौसम पूर्वानुमान, शिक्षा और संसाधन-सर्वेक्षण जैसी राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए हो। इसी कारण भारत का कार्यक्रम आरंभ से "विकास के लिए अंतरिक्ष" पर केंद्रित रहा।

वर्षघटनाटिप्पणी
1962INCOSPAR का गठनपरमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन; अध्यक्ष विक्रम साराभाई
1963थुम्बा से पहला रॉकेट (21 नवंबर)TERLS — थुम्बा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र; चुंबकीय भूमध्य रेखा के निकट
1969ISRO की स्थापना (15 अगस्त)INCOSPAR का स्थान लिया
1972अंतरिक्ष विभाग व अंतरिक्ष आयोगISRO को DOS के अधीन रखा गया; DOS सीधे प्रधानमंत्री के अधीन
1975आर्यभट (19 अप्रैल)सोवियत कॉसमॉस-3M रॉकेट से, कपुस्तिन यार से
1975–76SITE प्रयोगउपग्रह के माध्यम से ग्रामीण शैक्षिक टेलीविज़न (अमेरिकी ATS-6 उपग्रह)
1979भास्कर-1; SLV-3 की पहली उड़ानभास्कर — पृथ्वी अवलोकन प्रयोगात्मक उपग्रह; SLV-3 की पहली उड़ान (अगस्त 1979) असफल
1980SLV-3 से रोहिणी RS-1 (18 जुलाई)भारत स्वदेशी यान से उपग्रह प्रक्षेपित करने वाला देश बना
1981APPLEपहला प्रायोगिक भू-स्थिर संचार उपग्रह (एरियन रॉकेट से)
1982INSAT-1AINSAT श्रृंखला का पहला उपग्रह (अमेरिका में निर्मित)
1984राकेश शर्माअंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय — सोवियत सोयुज T-11 से
1988IRS-1Aपहला स्वदेशी सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) उपग्रह
1994PSLV की पहली सफल उड़ान (PSLV-D2)1993 की पहली विकासात्मक उड़ान असफल थी
2001GSLV की पहली उड़ान (GSLV-D1)रूसी क्रायोजेनिक चरण के साथ
2008चंद्रयान-1भारत का पहला चंद्र मिशन
2013–14मंगलयानपहले प्रयास में मंगल कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश
2014GSLV-D5 (जनवरी)स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण की पहली सफल उड़ान
2017PSLV-C37 (फ़रवरी)एक ही उड़ान में 104 उपग्रह
2023चंद्रयान-3, आदित्य-L1चंद्र दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट लैंडिंग; पहली सौर वेधशाला
2025SpaDeX डॉकिंग; श्रीहरिकोटा से 100वाँ प्रक्षेपण (GSLV-F15)डॉकिंग करने वाला चौथा देश

ध्यान दें: थुम्बा को इसलिए चुना गया क्योंकि यह चुंबकीय भूमध्य रेखा के बहुत निकट है, जो ऊपरी वायुमंडल और आयनमंडल के अध्ययन के लिए उपयुक्त था। श्रीहरिकोटा को प्रमुख प्रक्षेपण स्थल इसलिए बनाया गया क्योंकि यह भौगोलिक भूमध्य रेखा के अपेक्षाकृत पास है, पूर्व दिशा में बंगाल की खाड़ी है (पूर्व की ओर प्रक्षेपण में पृथ्वी के घूर्णन का लाभ, और गिरते चरण समुद्र में) और आबादी कम है।

इन वैज्ञानिकों और उनके योगदान का विस्तृत विवरण भारतीय वैज्ञानिक और प्रमुख आविष्कार नोट में देखें।


4. प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles)

प्रक्षेपण यान वह रॉकेट है जो उपग्रह को पृथ्वी से उठाकर निर्धारित कक्षा में पहुँचाता है। रॉकेट न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) पर काम करता है — नोज़ल से तेज़ गति से निकलती गैसें रॉकेट को विपरीत दिशा में धकेलती हैं। बहु-चरणीय (multi-stage) रॉकेट में ईंधन समाप्त होने पर खाली चरण अलग हो जाता है, जिससे शेष यान का द्रव्यमान घटता है।

4.1 प्रणोदक (Propellant) के प्रकार

प्रकारविशेषताभारतीय उदाहरण
ठोस प्रणोदकसरल, भंडारण आसान, अधिक प्रारंभिक धक्का; एक बार जलने पर बंद नहीं किया जा सकताPSLV का PS1 व PS3, LVM3 के S200 बूस्टर, SSLV के तीनों मुख्य चरण
द्रव प्रणोदक (भंडारण-योग्य)इंजन बंद-चालू व नियंत्रित किया जा सकता हैविकास इंजन (PSLV PS2, GSLV GS2, LVM3 L110)
क्रायोजेनिकअत्यंत कम तापमान पर द्रवित हाइड्रोजन (लगभग −253°C) व ऑक्सीजन (लगभग −183°C); प्रति किलोग्राम सर्वाधिक दक्षताGSLV का CUS, LVM3 का C25 चरण (CE-20 इंजन)
सेमी-क्रायोजेनिकपरिष्कृत केरोसिन + द्रव ऑक्सीजनISRO का SE-2000 इंजन विकासाधीन (भविष्य के यानों हेतु)

4.2 भारत के प्रक्षेपण यान

यानपूरा नामचरणप्रमुख तथ्य
SLV-3Satellite Launch Vehicle4 (सभी ठोस)1980 में रोहिणी RS-1; लगभग 40 किग्रा श्रेणी के उपग्रह; परियोजना निदेशक कलाम
ASLVAugmented SLV5 (ठोस)पहली सफल उड़ान 1992 (SROSS-C); भविष्य की तकनीकों का परीक्षण
PSLVPolar Satellite Launch Vehicle4 (ठोस-द्रव-ठोस-द्रव)"ISRO का वर्कहॉर्स"; ध्रुवीय/सूर्य-तुल्यकाली कक्षा; चंद्रयान-1, मंगलयान, आदित्य-L1, AstroSat, XPoSat, SpaDeX
GSLV (Mk II)Geosynchronous SLV3 (ठोस + 4 द्रव स्ट्रैप-ऑन, द्रव, क्रायोजेनिक)GTO में लगभग 2–2.5 टन; NVS श्रृंखला, संचार उपग्रह
LVM3 (पूर्व नाम GSLV Mk III)Launch Vehicle Mark-33 (दो S200 ठोस बूस्टर, L110 द्रव कोर, C25 क्रायोजेनिक)भारत का सबसे भारी यान; चंद्रयान-2, चंद्रयान-3; गगनयान के लिए मानव-रेटेड संस्करण (HLVM3)
SSLVSmall SLV3 ठोस + VTM (वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल, द्रव)लगभग 500 किग्रा तक LEO; कम लागत, कम समय में तैयार; पहली सफल उड़ान SSLV-D2 (फ़रवरी 2023)

4.3 PSLV की संरचना

चरणप्रणोदकटिप्पणी
PS1ठोस (HTPB आधारित)कुछ संस्करणों में ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर भी (PSLV-XL में 6)
PS2द्रव — विकास इंजनविकास (VIKAS) नाम विक्रम साराभाई के सम्मान में
PS3ठोसऊपरी वायुमंडल के बाद धक्का
PS4द्रव (दो इंजन)उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में छोड़ने की क्षमता; प्रयोगों के लिए POEM मंच

PSLV के संस्करण: PSLV-G (सामान्य), PSLV-CA (Core Alone — बिना स्ट्रैप-ऑन), PSLV-XL (बड़े स्ट्रैप-ऑन), PSLV-DL और PSLV-QL (2 और 4 स्ट्रैप-ऑन)।

4.4 क्रायोजेनिक इंजन की कहानी

1990 के दशक में रूस से क्रायोजेनिक तकनीक हस्तांतरण का समझौता अमेरिकी दबाव और MTCR (मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था) के कारण सीमित हो गया; रूस ने केवल तैयार इंजन दिए। इसके बाद ISRO ने स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (CUS) विकसित किया। 2010 में GSLV-D3 की उड़ान असफल रही, पर जनवरी 2014 में GSLV-D5 ने स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के साथ सफल उड़ान भरी। LVM3 के लिए अधिक शक्तिशाली CE-20 इंजन बना, जो गैस-जनरेटर चक्र पर चलता है। क्रायोजेनिक इंजन रखने वाले देशों में अमेरिका, रूस, फ्रांस (यूरोप), जापान, चीन और भारत गिने जाते हैं।

4.5 प्रक्षेपण क्षमता: एक तुलना

यानलक्षित कक्षाअनुमानित क्षमता (ISRO द्वारा बताई गई श्रेणी)
SSLVLEO (लगभग 500 किमी)लगभग 500 किग्रा
PSLVSSO (लगभग 600 किमी)लगभग 1,750 किग्रा
GSLV Mk IIGTOलगभग 2,000–2,500 किग्रा
LVM3GTOलगभग 4,000 किग्रा
LVM3LEOलगभग 8,000 किग्रा से अधिक

ये आँकड़े अनुमानित हैं और संस्करण के अनुसार बदलते हैं; परीक्षा में क्रम याद रखें — SSLV < PSLV < GSLV < LVM3।


5. कक्षाएँ (Orbits) और लैग्रेंज बिंदु

कक्षाऊँचाईविशेषताउपयोग / उदाहरण
LEO (निम्न भू-कक्षा)लगभग 160–2,000 किमीतेज़ गति, लगभग 90–120 मिनट में एक चक्करअंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (लगभग 400 किमी), SpaDeX, गगनयान (प्रस्तावित लगभग 400 किमी)
SSO (सूर्य-तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा)लगभग 600–800 किमीउपग्रह किसी स्थान के ऊपर हर बार एक ही स्थानीय समय पर आता है; समान प्रकाश-परिस्थितियाँपृथ्वी अवलोकन, सुदूर संवेदन (IRS, कार्टोसैट, EOS, रिसोर्ससैट)
MEO (मध्यम भू-कक्षा)2,000 से 35,786 किमी के बीच—GPS, GLONASS, गैलीलियो
GTO (भू-तुल्यकाली स्थानांतरण कक्षा)दीर्घवृत्ताकार — निकटतम बिंदु कुछ सौ किमी, दूरस्थ बिंदु लगभग 36,000 किमीअस्थायी कक्षा; उपग्रह अपने इंजन से GEO तक पहुँचता हैGSLV/LVM3 संचार उपग्रहों को यहीं छोड़ते हैं
GEO (भू-स्थिर कक्षा)लगभग 35,786 किमी, भूमध्य रेखा के ठीक ऊपरआवर्तकाल पृथ्वी के घूर्णन के बराबर (लगभग 23 घंटे 56 मिनट); पृथ्वी से स्थिर दिखता हैINSAT, GSAT, मौसम उपग्रह
GSO (भू-तुल्यकाली)लगभग 35,786 किमी, पर झुकी हुई कक्षा भी हो सकती हैआवर्तकाल 1 नाक्षत्र दिवस, पर स्थान आकाश में "8" जैसी आकृति में बदलता हैNavIC के कुछ उपग्रह

5.1 लैग्रेंज बिंदु

दो बड़े पिंडों (जैसे सूर्य और पृथ्वी) की प्रणाली में ऐसे 5 बिंदु (L1 से L5) होते हैं जहाँ एक छोटा पिंड दोनों के गुरुत्वाकर्षण और कक्षीय गति के संतुलन से उनके सापेक्ष लगभग स्थिर स्थिति में रह सकता है। इनका नाम गणितज्ञ जोसेफ़-लुई लैग्रेंज के नाम पर है।

बिंदुस्थिति (सूर्य-पृथ्वी प्रणाली)उपयोग
L1पृथ्वी और सूर्य के बीच, पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमीसूर्य का बिना ग्रहण की बाधा के लगातार अवलोकन — आदित्य-L1, SOHO
L2पृथ्वी के पीछे (सूर्य से विपरीत दिशा), लगभग 15 लाख किमीगहन अंतरिक्ष दूरबीन — जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप
L3सूर्य के पीछे, पृथ्वी की कक्षा पर—
L4, L5पृथ्वी की कक्षा पर, 60° आगे और पीछेस्थायी (stable) बिंदु; यहाँ ट्रोजन क्षुद्रग्रह पाए जाते हैं

उदाहरण गणना: पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी लगभग 15 करोड़ किमी (1.5 × 10⁸ किमी) है। L1 की दूरी 15 लाख किमी (1.5 × 10⁶ किमी) है। अनुपात = 1.5 × 10⁶ / 1.5 × 10⁸ = 1/100 = 1%। अर्थात् आदित्य-L1 पृथ्वी-सूर्य दूरी का केवल लगभग 1% ही तय करता है — वह सूर्य के "पास" नहीं जाता।

L1, L2 पर टिके रहने के लिए यान को इन बिंदुओं के चारों ओर हेलो कक्षा में रखा जाता है, क्योंकि L1, L2, L3 अस्थिर संतुलन बिंदु हैं और यान को समय-समय पर दिशा-सुधार करना पड़ता है।


6. चंद्र मिशन — चंद्रयान श्रृंखला

बिंदुचंद्रयान-1चंद्रयान-2चंद्रयान-3
प्रक्षेपण22 अक्टूबर 200822 जुलाई 201914 जुलाई 2023
प्रक्षेपण यानPSLV-C11 (XL)GSLV Mk III-M1LVM3-M4
घटकऑर्बिटर + मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP)ऑर्बिटर + लैंडर विक्रम + रोवर प्रज्ञानप्रणोदन मॉड्यूल + लैंडर विक्रम + रोवर प्रज्ञान (ऑर्बिटर नहीं)
प्रमुख उपलब्धिNASA के M3 (Moon Mineralogy Mapper) ने चंद्र सतह पर जल/हाइड्रॉक्सिल अणुओं के संकेत दिए; MIP 14 नवंबर 2008 को चंद्रमा पर गिराया गयाऑर्बिटर सफल और कार्यरत; लैंडर सितंबर 2019 में सॉफ्ट लैंडिंग में विफल23 अगस्त 2023 को दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग
नामित स्थलMIP का स्थल — "जवाहर स्थल"विक्रम के दुर्घटना-स्थल का नाम "तिरंगा बिंदु"लैंडिंग स्थल "शिव शक्ति बिंदु"

6.1 चंद्रयान-3 के प्रमुख तथ्य

  • भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश (अमेरिका, सोवियत संघ, चीन के बाद) और दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट उतरने वाला पहला देश बना।
  • लैंडर का नाम विक्रम (विक्रम साराभाई के नाम पर) और रोवर का नाम प्रज्ञान।
  • 23 अगस्त को भारत सरकार ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया; पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त 2024 को मनाया गया।
  • प्रज्ञान पर लगे LIBS उपकरण ने दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र की सतह पर सल्फर की उपस्थिति की पुष्टि की; विक्रम के ChaSTE ने सतह का तापमान-प्रोफ़ाइल मापा।
  • विक्रम ने एक "हॉप प्रयोग" भी किया — इंजन चलाकर लगभग 40 सेमी ऊपर उठा और पास ही फिर उतरा।
  • प्रणोदन मॉड्यूल को बाद में चंद्र कक्षा से वापस पृथ्वी की कक्षा में लाया गया — भविष्य के "नमूना-वापसी" मिशनों का अभ्यास।

आगे के चंद्र मिशन (as of 2026): चंद्रयान-4 (चंद्र नमूना वापसी) को सरकार ने 2024 में मंज़ूरी दी है, और जापान की JAXA के साथ LUPEX (चंद्रयान-5 के रूप में भी उल्लिखित) प्रस्तावित है। इनकी तिथियाँ बदल सकती हैं, इसलिए इन्हें केवल योजना के रूप में याद रखें।


7. मंगलयान, आदित्य-L1 और खगोलीय वेधशालाएँ

7.1 मंगलयान (Mars Orbiter Mission — MOM)

बिंदुतथ्य
प्रक्षेपण5 नवंबर 2013, PSLV-C25, श्रीहरिकोटा
मंगल कक्षा में प्रवेश24 सितंबर 2014
महत्वपहले ही प्रयास में मंगल कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश; मंगल तक पहुँचने वाला पहला एशियाई देश; ISRO चौथी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA, सोवियत/रूसी, ESA के बाद)
विशेषताPSLV जैसे छोटे यान से छोड़ा गया, इसलिए पहले पृथ्वी की कक्षा में कई बार कक्षा-उन्नयन किया गया; अपेक्षाकृत कम लागत के लिए प्रसिद्ध
उपकरणमीथेन सेंसर (MSM), मार्स कलर कैमरा आदि
समापनलगभग आठ वर्ष कार्य के बाद 2022 में संपर्क टूटा; मिशन अपनी नियोजित अवधि (6 माह) से कहीं अधिक चला

7.2 आदित्य-L1

  • भारत का पहला समर्पित सौर मिशन; प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023, PSLV-C57।
  • 6 जनवरी 2024 को सूर्य-पृथ्वी के L1 बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित; पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी।
  • 7 उपकरण; प्रमुख — VELC (दृश्य उत्सर्जन रेखा कोरोनाग्राफ, IIA बेंगलुरु) और SUIT (सौर पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप, IUCAA पुणे)।
  • अध्ययन — सौर कोरोना, कोरोनल मास इजेक्शन (CME), सौर पवन, अंतरिक्ष मौसम।

7.3 अंतरिक्ष वेधशालाएँ

मिशनप्रक्षेपणउद्देश्य
AstroSat28 सितंबर 2015, PSLV-C30भारत की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला — पराबैंगनी, दृश्य और X-किरण में एक साथ अवलोकन
XPoSat1 जनवरी 2024, PSLV-C58X-किरण ध्रुवणमिति (polarimetry) — पल्सर, ब्लैक होल जैसे तीव्र X-किरण स्रोतों का अध्ययन; भारत का पहला ध्रुवणमिति मिशन; NASA के IXPE के बाद विश्व में दूसरा समर्पित मिशन

8. SpaDeX, गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन

8.1 SpaDeX (Space Docking Experiment)

बिंदुतथ्य
प्रक्षेपण30 दिसंबर 2024, PSLV-C60
उपग्रहSDX01 (चेज़र) और SDX02 (टारगेट), लगभग 475 किमी वृत्ताकार कक्षा
डॉकिंग16 जनवरी 2025
महत्वअंतरिक्ष में डॉकिंग करने वाला चौथा देश — अमेरिका, रूस, चीन के बाद
क्यों ज़रूरीचंद्रयान-4 (नमूना वापसी), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का जोड़ना और कक्षा में ईंधन भरना — सबके लिए डॉकिंग आवश्यक
PS4 पर प्रयोगइसी उड़ान के POEM-4 मंच पर अंतरिक्ष में बीज अंकुरण (लोबिया) जैसे जैविक प्रयोग किए गए

8.2 गगनयान — मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम

गगनयान का लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (व्योमनॉट / गगनयात्री) को लगभग 400 किमी की निम्न कक्षा में भेजकर सुरक्षित वापस लाना है। इसके लिए मानव-रेटेड LVM3 (HLVM3), क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम विकसित किए गए। 2023 में TV-D1 परीक्षण उड़ान से क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण हुआ। मानव-रहित उड़ान G1 में अर्ध-मानवाकार रोबोट व्योममित्र भेजा जाना है।

स्थिति (as of October 2026): उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पहली मानव-रहित उड़ान G1 अभी तक नहीं हुई है और ISRO ने इसे 2026 के अंत तक छोड़ने का प्रयास बताया है, हालाँकि जून 2026 की रिपोर्टों में इसके 2027 तक खिसकने की आशंका भी जताई गई; पहली मानवयुक्त उड़ान (H1) का घोषित लक्ष्य 2027 रहा है, जो G1 में देरी होने पर आगे खिसक सकता है। ये तिथियाँ कई बार बदली हैं, इसलिए परीक्षा से पहले नवीनतम स्थिति जाँच लें।

संबंधित तथ्य: गगनयान के लिए चयनित भारतीय वायुसेना अधिकारियों में से शुभांशु शुक्ला ने जून–जुलाई 2025 में Axiom-4 मिशन के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की — ISS जाने वाले पहले भारतीय। राकेश शर्मा (1984) अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय थे।

8.3 भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS)

स्थिति (as of 2026): केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में गगनयान कार्यक्रम के विस्तार के रूप में BAS-1 (पहला मॉड्यूल) को मंज़ूरी दी। ISRO के अनुसार पहला मॉड्यूल 2028 तक और पूर्ण स्टेशन 2035 तक स्थापित करने का लक्ष्य है; 2025 के राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर BAS-1 का मॉडल प्रदर्शित किया गया। भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय को उतारना भी घोषित है। ये सभी लक्ष्य हैं, पूर्ण उपलब्धियाँ नहीं।


9. उपग्रह श्रृंखलाएँ — संचार, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन

श्रृंखलाप्रकारप्रमुख तथ्य
INSATबहुउद्देशीय भू-स्थिर (संचार, प्रसारण, मौसम)INSAT-1A (1982) पहला; INSAT-3D/3DR/3DS मौसम विज्ञान उपग्रह
GSATसंचार (भू-स्थिर)GSAT श्रृंखला; अब कई उपग्रह NSIL के स्वामित्व में (जैसे GSAT-24, GSAT-20/GSAT-N2)
IRSसुदूर संवेदन (SSO)IRS-1A (1988) पहला स्वदेशी; बाद में रिसोर्ससैट, कार्टोसैट, ओशनसैट, RISAT, EOS श्रृंखला
RISATराडार इमेजिंग (SAR)बादल और रात में भी चित्र लेने में सक्षम
कार्टोसैटमानचित्रण (उच्च रिज़ॉल्यूशन)शहरी नियोजन, आधारभूत ढाँचा
ओशनसैटसमुद्र-विज्ञानक्लोरोफ़िल, समुद्री हवाएँ, मत्स्य क्षेत्र
NISARNASA–ISRO संयुक्त SAR उपग्रहदोहरी आवृत्ति (L-बैंड NASA, S-बैंड ISRO); 30 जुलाई 2025 को GSLV-F16 से प्रक्षेपित
EDUSATशिक्षा2004; शिक्षा के लिए समर्पित उपग्रह

9.1 NavIC और GAGAN

बिंदुNavICGAGAN
पूरा नामNavigation with Indian Constellation (पूर्व नाम IRNSS)GPS Aided GEO Augmented Navigation
प्रकारस्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणालीउपग्रह-आधारित संवर्धन प्रणाली (SBAS) — GPS की सटीकता बढ़ाती है
किसने बनायाISROISRO + भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)
मूल संरचना7 उपग्रह (3 GEO + 4 GSO)GSAT उपग्रहों पर लगे पेलोड और भू-केंद्र
कवरेजभारत और उसकी सीमा से लगभग 1,500 किमी तकभारतीय वायु-क्षेत्र
मुख्य उपयोगस्थल, समुद्री और हवाई नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, मछुआरों को चेतावनीनागरिक विमानन — विमानों की सटीक लैंडिंग व मार्ग-निर्धारण

NavIC की नई पीढ़ी (as of 2026): NVS श्रृंखला के उपग्रहों में स्वदेशी परमाणु घड़ी है। NVS-01 (2023) सफल रहा। NVS-02 को 29 जनवरी 2025 को GSLV-F15 से छोड़ा गया — यह श्रीहरिकोटा से 100वाँ प्रक्षेपण था — पर उपग्रह के वाल्व न खुलने से कक्षा-उन्नयन नहीं हो सका और वह स्थानांतरण कक्षा में ही रह गया।


10. संस्थाएँ और ISRO के केंद्र

केंद्रस्थानकार्य
ISRO मुख्यालय (अंतरिक्ष भवन)बेंगलुरु, कर्नाटकनीति, समन्वय
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR)श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेशमुख्य प्रक्षेपण स्थल; दो लॉन्च पैड
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC)तिरुवनंतपुरम, केरलप्रक्षेपण यानों का डिज़ाइन व विकास (सबसे बड़ा केंद्र)
यू. आर. राव उपग्रह केंद्र (URSC; पूर्व ISAC)बेंगलुरुउपग्रहों का डिज़ाइन व निर्माण
द्रव प्रणोदन प्रणाली केंद्र (LPSC)वलियमला (तिरुवनंतपुरम) और बेंगलुरुद्रव व क्रायोजेनिक इंजन
ISRO प्रणोदन परिसर (IPRC)महेंद्रगिरि, तमिलनाडुइंजनों का परीक्षण
अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC)अहमदाबाद, गुजरातपेलोड, उपयोग (संचार, सुदूर संवेदन)
राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC)हैदराबाद, तेलंगानाउपग्रह आँकड़ों का संग्रह व वितरण; भुवन पोर्टल
ISTRACबेंगलुरुउपग्रहों की ट्रैकिंग व कमांड; गहन अंतरिक्ष नेटवर्क (बयालालु)
मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC)बेंगलुरुगगनयान
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL)अहमदाबादअंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान (DOS की इकाई; साराभाई द्वारा स्थापित)
IISTतिरुवनंतपुरमअंतरिक्ष विज्ञान व प्रौद्योगिकी का शिक्षण संस्थान
नया SSLV प्रक्षेपण स्थलकुलशेखरपट्टिनम, तमिलनाडुनिर्माणाधीन दूसरा स्पेसपोर्ट (फ़रवरी 2024 में शिलान्यास)

10.1 व्यावसायिक और नियामक संस्थाएँ

संस्थावर्षभूमिका
Antrix Corporation1992ISRO उत्पादों व सेवाओं की पहली व्यावसायिक शाखा
NSIL (NewSpace India Limited)2019DOS के अधीन सार्वजनिक उपक्रम; "माँग-आधारित" मॉडल — ग्राहक की माँग पर उपग्रह बनाना/छोड़ना, उद्योग को तकनीक हस्तांतरण, PSLV/LVM3 का व्यावसायिक प्रक्षेपण
IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Centre)2020 (घोषणा जून 2020)DOS की स्वायत्त एकल-खिड़की संस्था — निजी कंपनियों की अंतरिक्ष गतिविधियों को अनुमति, प्रोत्साहन व निगरानी; मुख्यालय अहमदाबाद
भारतीय अंतरिक्ष नीति2023ISRO, NSIL, IN-SPACe और निजी क्षेत्र की भूमिकाएँ स्पष्ट कीं

निजी क्षेत्र: 2022 में Skyroot Aerospace का विक्रम-S पहला निजी रूप से विकसित भारतीय रॉकेट (उप-कक्षीय) बना, जो श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया। Agnikul Cosmos ने 2024 में अपने निजी लॉन्च पैड से अर्ध-क्रायोजेनिक 3D-प्रिंटेड इंजन वाला अग्निबाण SOrTeD छोड़ा।


11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: आर्यभट भारत से नहीं छोड़ा गया

आर्यभट भारत में बना पहला उपग्रह है, पर इसे सोवियत संघ के रॉकेट से सोवियत भूमि (कपुस्तिन यार) से छोड़ा गया। भारतीय यान से भारतीय भूमि से कक्षा में पहुँचने वाला पहला उपग्रह रोहिणी RS-1 (SLV-3, 1980) है।

Trap 2: PSLV में चार चरण, GSLV में तीन

PSLV — 4 चरण (ठोस-द्रव-ठोस-द्रव), कोई क्रायोजेनिक चरण नहीं। GSLV Mk II और LVM3 — 3 चरण, अंतिम चरण क्रायोजेनिक। "PSLV में क्रायोजेनिक इंजन" लिखा कथन गलत है।

Trap 3: चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं था

चंद्रयान-3 में प्रणोदन मॉड्यूल, लैंडर और रोवर थे; संचार के लिए चंद्रयान-2 के कार्यरत ऑर्बिटर का बैकअप के रूप में उपयोग किया गया। चंद्रयान-2 का लैंडर विफल हुआ था, ऑर्बिटर नहीं।

Trap 4: जल की खोज — चंद्रयान-1, पर उपकरण NASA का

चंद्र सतह पर जल/हाइड्रॉक्सिल के संकेत चंद्रयान-1 पर लगे M3 से मिले, जो NASA का उपकरण था; MIP (भारतीय) के CHACE उपकरण ने भी चंद्र वायुमंडल में जल के संकेत दिए। प्रश्न में "मिशन" पूछा जाए तो उत्तर चंद्रयान-1 है।

Trap 5: आदित्य-L1 सूर्य के पास नहीं जाता

L1 पृथ्वी से केवल लगभग 15 लाख किमी है — पृथ्वी-सूर्य दूरी का लगभग 1%। लाभ "निकटता" नहीं, बल्कि बिना ग्रहण/अवरोध के लगातार सूर्य-दर्शन है। L2 पर जेम्स वेब टेलीस्कोप है, आदित्य नहीं।

Trap 6: GEO और SSO को उलटना

संचार और मौसम उपग्रह — GEO (लगभग 35,786 किमी, भूमध्यरेखीय)। पृथ्वी-अवलोकन और मानचित्रण — SSO (लगभग 600–800 किमी, ध्रुवीय)। "भू-स्थिर उपग्रह ध्रुवों के ऊपर से गुजरता है" — गलत।

Trap 7: मंगलयान — "पहले प्रयास में पहला देश", "पहला देश" नहीं

मंगल तक पहले भी अमेरिका, सोवियत संघ और यूरोप पहुँच चुके थे। भारत पहले ही प्रयास में सफल होने वाला पहला देश और मंगल पहुँचने वाला पहला एशियाई देश है।

Trap 8: NSIL और IN-SPACe में अंतर

NSIL — व्यावसायिक कंपनी (बेचना, बनाना, प्रक्षेपण सेवाएँ)। IN-SPACe — निजी क्षेत्र के लिए अनुमति देने वाला और प्रोत्साहक निकाय। Antrix पुरानी व्यावसायिक शाखा है।

Trap 9: NavIC बनाम GAGAN

NavIC अपने उपग्रहों से स्वतंत्र रूप से स्थिति बताता है; GAGAN स्वयं स्वतंत्र प्रणाली नहीं, बल्कि GPS संकेतों को सुधारने वाली संवर्धन प्रणाली है और AAI के साथ मिलकर विमानन के लिए बनी।

Trap 10: स्थापना वर्षों का क्रम

INCOSPAR 1962 → पहला रॉकेट 1963 → ISRO 1969 → DOS और अंतरिक्ष आयोग 1972। "ISRO 1962 में बना" गलत है।


12. Most-Asked रिवीज़न तालिका

क्र.प्रश्नउत्तर
1भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनकविक्रम साराभाई
2INCOSPAR का गठन1962
3ISRO की स्थापना15 अगस्त 1969
4अंतरिक्ष विभाग की स्थापना1972
5पहला रॉकेट प्रक्षेपण स्थलथुम्बा (केरल)
6पहला रॉकेटनाइकी-अपाचे (1963)
7पहला भारतीय उपग्रहआर्यभट (1975)
8आर्यभट किस देश के रॉकेट सेसोवियत संघ
9पहला स्वदेशी प्रक्षेपण यानSLV-3
10SLV-3 से छोड़ा गया उपग्रहरोहिणी RS-1 (1980)
11SLV-3 परियोजना निदेशकए.पी.जे. अब्दुल कलाम
12पहला प्रायोगिक संचार उपग्रहAPPLE (1981)
13पहला स्वदेशी सुदूर संवेदन उपग्रहIRS-1A (1988)
14अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीयराकेश शर्मा (1984)
15ISS जाने वाले पहले भारतीयशुभांशु शुक्ला (2025)
16ISRO का वर्कहॉर्सPSLV
17PSLV के चरण4
18भारत का सबसे भारी प्रक्षेपण यानLVM3
19LVM3 के ठोस बूस्टरS200 (दो)
20LVM3 का क्रायोजेनिक चरणC25 (CE-20 इंजन)
21विकास इंजन का प्रणोदकद्रव (भंडारण-योग्य)
22क्रायोजेनिक ईंधनद्रव हाइड्रोजन + द्रव ऑक्सीजन
23स्वदेशी क्रायोजेनिक की पहली सफल उड़ानGSLV-D5 (2014)
24एक उड़ान में 104 उपग्रहPSLV-C37 (2017)
25छोटे उपग्रहों का यानSSLV
26भू-स्थिर कक्षा की ऊँचाईलगभग 35,786 किमी
27सुदूर संवेदन उपग्रहों की कक्षासूर्य-तुल्यकाली ध्रुवीय (SSO)
28लैग्रेंज बिंदुओं की संख्या5
29आदित्य-L1 किस बिंदु परसूर्य-पृथ्वी L1
30L1 की पृथ्वी से दूरीलगभग 15 लाख किमी
31जेम्स वेब टेलीस्कोपL2
32चंद्रयान-1 प्रक्षेपण2008, PSLV-C11
33चंद्रमा पर जल के संकेत देने वाला उपकरणM3 (Moon Mineralogy Mapper)
34चंद्रयान-2 प्रक्षेपण2019, GSLV Mk III
35चंद्रयान-3 लैंडिंग तिथि23 अगस्त 2023
36चंद्रयान-3 का लैंडर / रोवरविक्रम / प्रज्ञान
37चंद्रयान-3 लैंडिंग स्थल का नामशिव शक्ति बिंदु
38चंद्रयान-2 लैंडर दुर्घटना-स्थलतिरंगा बिंदु
39राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस23 अगस्त
40चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पुष्टि कीसल्फर (LIBS)
41मंगलयान प्रक्षेपण यानPSLV-C25
42मंगलयान मंगल कक्षा में24 सितंबर 2014
43भारत की पहली सौर वेधशालाआदित्य-L1
44पहली बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशालाAstroSat (2015)
45X-किरण ध्रुवणमिति उपग्रहXPoSat (2024)
46SpaDeX डॉकिंग तिथि16 जनवरी 2025
47डॉकिंग करने वाला भारत कौन-सा देशचौथा
48गगनयान का मानवाकार रोबोटव्योममित्र
49NavIC का पुराना नामIRNSS
50NavIC के मूल उपग्रह7
51GAGAN किनका संयुक्तISRO + AAI
52NSIL की स्थापना2019
53IN-SPACe2020; निजी क्षेत्र के लिए एकल-खिड़की
54VSSCतिरुवनंतपुरम
55URSCबेंगलुरु
56SACअहमदाबाद
57NRSCहैदराबाद
58IPRCमहेंद्रगिरि (तमिलनाडु)
59पहला निजी भारतीय रॉकेटविक्रम-S (Skyroot, 2022)
60NISARNASA–ISRO संयुक्त राडार उपग्रह

13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

अंतरिक्ष के प्रश्न प्रायः चार ढाँचों में आते हैं। नीचे हर ढाँचे के लिए एक नमूना प्रश्न दिया गया है (ये अभ्यास के लिए बनाए गए हैं):

  1. सीधा तथ्य: "भारत का पहला उपग्रह किस वर्ष प्रक्षेपित हुआ?" — 1975 (आर्यभट)।
  2. मिलान: सूची-I (मिशन: चंद्रयान-3, आदित्य-L1, मंगलयान, XPoSat) को सूची-II (यान: LVM3, PSLV-C57, PSLV-C25, PSLV-C58) से मिलाइए।
  3. कथन-आधारित (UPSC शैली): "1. आदित्य-L1 सूर्य-पृथ्वी के L2 बिंदु पर है। 2. PSLV में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण है। 3. भू-स्थिर उपग्रह का आवर्तकाल पृथ्वी के घूर्णन काल के बराबर है। सही कथन चुनिए।" — केवल 3।
  4. कालक्रम: "निम्न को कालक्रम में लगाइए — SpaDeX, मंगलयान, चंद्रयान-1, आदित्य-L1" — चंद्रयान-1 (2008), मंगलयान (2013), आदित्य-L1 (2023), SpaDeX (2024–25)।
  5. RAS मुख्य (वर्णनात्मक): "भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 में निजी क्षेत्र की भूमिका स्पष्ट कीजिए" या "चंद्रयान-3 की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ बताइए" — 50–100 शब्दों में बिंदुवार उत्तर।

रणनीति: हर मिशन के लिए चार चीज़ें एक पंक्ति में याद रखें — वर्ष, यान, उद्देश्य, "पहली बार" वाला तथ्य। मुख्य परीक्षा के उत्तर में एक तालिका और "भारत के लिए महत्व" वाला निष्कर्ष-वाक्य जोड़ें। रक्षा क्षेत्र की मिसाइल प्रौद्योगिकी, जो अंतरिक्ष रॉकेट से जुड़ी है, रक्षा प्रौद्योगिकी, DRDO और मिसाइल नोट में है।


14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. स्थापना क्रम "62-63-69-72": INCOSPAR (62) → थुम्बा रॉकेट (63) → ISRO (69) → DOS (72)।

2. "आ-रो" (आर्यभट-रोहिणी): आर्यभट 1975 विदेशी रॉकेट से; रोहिणी 1980 अपने SLV-3 से।

3. PSLV = "S-L-S-L": Solid-Liquid-Solid-Liquid — ठोस-द्रव-ठोस-द्रव।

4. LVM3 = "200-110-25": S200 (ठोस बूस्टर), L110 (द्रव कोर), C25 (क्रायोजेनिक)।

5. लैग्रेंज "1 सूर्य, 2 वेब": L1 पर सूर्य-दर्शन (आदित्य), L2 पर गहन ब्रह्मांड (जेम्स वेब)।

6. चंद्रयान "जल-ऑर्बिटर-लैंडिंग": 1 = जल के संकेत, 2 = ऑर्बिटर सफल, 3 = लैंडिंग सफल।

7. चंद्रयान-3 के नाम "वि-प्र-शि": विक्रम (लैंडर), प्रज्ञान (रोवर), शिव शक्ति (स्थल)।

8. कक्षा "ऊँचा बोले, नीचा देखे": GEO (ऊँचा) संचार के लिए "बोलता" है; SSO (नीचा) पृथ्वी को "देखता" है।


15. कथन अभ्यास

INCOSPAR का गठन 1962 में हुआ था। — सही।

आर्यभट को SLV-3 से प्रक्षेपित किया गया था। — गलत (सोवियत संघ के रॉकेट से; SLV-3 ने रोहिणी को छोड़ा)।

PSLV चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। — सही।

क्रायोजेनिक इंजन में द्रव हाइड्रोजन और द्रव ऑक्सीजन प्रयुक्त होते हैं। — सही।

भू-स्थिर उपग्रह लगभग 600 किमी की ऊँचाई पर रहता है। — गलत (लगभग 35,786 किमी; 600–800 किमी SSO की ऊँचाई है)।

आदित्य-L1 को सूर्य-पृथ्वी के L2 बिंदु पर भेजा गया। — गलत (L1 बिंदु)।

चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण PSLV से हुआ था। — सही।

चंद्रयान-3 के रोवर का नाम विक्रम है। — गलत (विक्रम लैंडर है, रोवर प्रज्ञान है)।

मंगलयान को PSLV-C25 से प्रक्षेपित किया गया। — सही।

SpaDeX के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग करने वाला तीसरा देश बना। — गलत (चौथा देश)।

GAGAN को ISRO ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ मिलकर विकसित किया। — सही।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र बेंगलुरु में स्थित है। — गलत (तिरुवनंतपुरम; बेंगलुरु में URSC व मुख्यालय हैं)।


16. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. साराभाई = जनक; INCOSPAR 1962, थुम्बा 1963, ISRO 1969, DOS 1972
  2. आर्यभट 1975 (सोवियत रॉकेट); रोहिणी RS-1 1980 (SLV-3, कलाम)
  3. SLV → ASLV → PSLV → GSLV → LVM3 → SSLV
  4. PSLV: 4 चरण, ठोस-द्रव-ठोस-द्रव, "वर्कहॉर्स"
  5. GSLV / LVM3: अंतिम चरण क्रायोजेनिक (LH₂ + LOX); CE-20 इंजन LVM3 में
  6. LEO 160–2000 किमी; SSO 600–800 किमी; GEO लगभग 35,786 किमी
  7. लैग्रेंज बिंदु 5; L1 = आदित्य, L2 = जेम्स वेब; L1 लगभग 15 लाख किमी
  8. चंद्रयान-1: 2008, PSLV-C11, M3 से जल के संकेत
  9. चंद्रयान-2: 2019, ऑर्बिटर सफल, लैंडर विफल (तिरंगा बिंदु)
  10. चंद्रयान-3: 23 अगस्त 2023, विक्रम + प्रज्ञान, शिव शक्ति बिंदु, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस
  11. मंगलयान: 2013 प्रक्षेपण, 24 सितंबर 2014 कक्षा, पहले प्रयास में सफल
  12. आदित्य-L1: 2023, PSLV-C57; AstroSat 2015; XPoSat 2024
  13. SpaDeX: डॉकिंग 16 जनवरी 2025 — चौथा देश
  14. NavIC (IRNSS, 7 उपग्रह) — स्वतंत्र; GAGAN (ISRO + AAI) — GPS संवर्धन
  15. NSIL 2019 (व्यावसायिक), IN-SPACe 2020 (निजी क्षेत्र को अनुमति); SHAR श्रीहरिकोटा, VSSC तिरुवनंतपुरम

17. अभ्यास

इस पृष्ठ के अंत में 25 प्रश्नों का अभ्यास क्विज़ दिया गया है — इसमें केवल स्थिर ऐतिहासिक तथ्य (प्रक्षेपण वर्ष, यान, पहली उपलब्धियाँ, कक्षाएँ) हैं। गलत उत्तरों को ऊपर की रिवीज़न तालिका से मिलाएँ। पूर्ण-लंबाई अभ्यास के लिए RAS प्रारंभिक 2026 टेस्ट सीरीज़ और UPSC के कथन-आधारित प्रश्नों के लिए UPSC CSE 2027 प्रारंभिक टेस्ट सीरीज़ हल करें।


18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम थुम्बा के एक चर्च-भवन से शुरू होकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र, मंगल की कक्षा और सूर्य-पृथ्वी के L1 बिंदु तक पहुँच चुका है। परीक्षा के लिए तीन परतें तैयार रखें — इतिहास (1962 से 1980 तक के वर्ष), प्रौद्योगिकी (यान के चरण, क्रायोजेनिक इंजन, कक्षाएँ) और मिशन (वर्ष, यान, उपलब्धि)। गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रयान-4 जैसी आगामी योजनाओं की तिथियाँ बदलती रहती हैं; इन्हें समसामयिकी के रूप में अद्यतन करते रहें, जबकि पूर्ण मिशनों के तथ्य स्थायी अंक दिलाते हैं।

साराभाई 1962-69 · आर्यभट 1975 · SLV-3/रोहिणी 1980 · PSLV 4 चरण · LVM3 क्रायोजेनिक · GEO 35,786 किमी · चंद्रयान-3 23 अगस्त 2023 · मंगलयान 2014 · आदित्य L1 · SpaDeX चौथा देश


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई। इसकी नींव डॉ. विक्रम साराभाई ने रखी, जिन्होंने 1962 में INCOSPAR का नेतृत्व किया था; इसलिए उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है।

भारत का पहला उपग्रह आर्यभट था, जिसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ के रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया। स्वदेशी यान SLV-3 से कक्षा में पहुँचने वाला पहला उपग्रह रोहिणी RS-1 (1980) था।

PSLV चार चरणों (ठोस-द्रव-ठोस-द्रव) वाला यान है, जो मुख्यतः सूर्य-तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा में उपग्रह छोड़ता है। GSLV तीन चरणों वाला है, जिसका अंतिम चरण क्रायोजेनिक है और यह भारी संचार उपग्रहों को भू-तुल्यकाली स्थानांतरण कक्षा (GTO) में पहुँचाता है।

क्रायोजेनिक इंजन अत्यंत कम तापमान पर द्रवित हाइड्रोजन (ईंधन) और द्रवित ऑक्सीजन (ऑक्सीकारक) का उपयोग करता है। यह भारी उपग्रहों को ऊँची कक्षा तक पहुँचाने के लिए सबसे दक्ष प्रणोदन माना जाता है; भारत में GSLV और LVM3 में प्रयुक्त है।

चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट उतरा। लैंडिंग स्थल का नाम शिव शक्ति बिंदु रखा गया और 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया गया।

चंद्रयान-1 (2008) पर लगे NASA के उपकरण M3 (Moon Mineralogy Mapper) ने चंद्र सतह पर जल और हाइड्रॉक्सिल अणुओं के संकेत दिए। इसलिए परीक्षा में मिशन के रूप में चंद्रयान-1 को इस खोज का श्रेय दिया जाता है।

मंगलयान 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुँचा और भारत पहले ही प्रयास में सफल होने वाला पहला देश बना। यह मंगल तक पहुँचने वाला पहला एशियाई मिशन भी था।

आदित्य-L1 भारत का पहला समर्पित सौर मिशन है, जिसे 2 सितंबर 2023 को PSLV-C57 से छोड़ा गया। L1 सूर्य-पृथ्वी के बीच पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर वह बिंदु है जहाँ से सूर्य का बिना अवरोध लगातार अवलोकन किया जा सकता है।

SpaDeX (Space Docking Experiment) में दो उपग्रहों SDX01 और SDX02 को 30 दिसंबर 2024 को PSLV-C60 से छोड़ा गया और 16 जनवरी 2025 को अंतरिक्ष में जोड़ा गया। इससे भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद डॉकिंग करने वाला चौथा देश बना।

NavIC (पूर्व नाम IRNSS) ISRO की स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है, जो भारत और उसके आसपास लगभग 1,500 किमी तक स्थिति बताती है। GAGAN ISRO और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की प्रणाली है, जो विमानन के लिए GPS संकेतों की सटीकता बढ़ाती है।

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