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हिंदी व्याकरण

लिंग और वचन — पहचान के नियम, अपवाद, स्त्रीलिंग प्रत्यय, बहुवचन नियम, 50 शब्द — CET

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण व सामान्य विज्ञान नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
22 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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संक्षिप्त उत्तर: संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष या स्त्री जाति का होने का बोध हो, उसे लिंग कहते हैं; और जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का बोध हो, उसे वचन कहते हैं। हिंदी में दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग (संस्कृत का नपुंसकलिंग हिंदी में नहीं है) — और दो वचन हैं — एकवचन और बहुवचन (संस्कृत का द्विवचन हिंदी में नहीं है)। अप्राणिवाचक शब्दों का लिंग परंपरा से तय होता है, इसलिए परीक्षा में सबसे अधिक वही शब्द पूछे जाते हैं जिनका लिंग अनुमान से उल्टा निकलता है — दही, पानी, घी, मोती (पुल्लिंग) और आत्मा, चाय, सरसों, आयु (स्त्रीलिंग)। लिंग-परिवर्तन के प्रत्यय (-ई, -इया, -इन, -आनी, -नी, -इका, -आइन) और वचन के नियम (लड़का → लड़के, लड़की → लड़कियाँ, माता → माताएँ, बात → बातें) तालिका में याद करें। सबसे भरोसेमंद कसौटी: शब्द के साथ क्रिया या विशेषण लगाकर देखें — "दही खट्टा है", "आत्मा अमर है, वह अजर रहती है"।


संक्षिप्त उत्तर

बिंदुतथ्य
लिंग की संख्यादो — पुल्लिंग, स्त्रीलिंग
वचन की संख्यादो — एकवचन, बहुवचन
लिंग पहचान की कसौटीक्रिया / विशेषण / संबंध-परसर्ग (का-की) लगाकर देखें
प्रायः पुल्लिंगदिन, महीने, पर्वत, देश, धातु, समुद्र, ग्रह, रत्न, द्रव पदार्थ
प्रायः स्त्रीलिंगनदियाँ, भाषाएँ, लिपियाँ, तिथियाँ, नक्षत्र
प्रसिद्ध अपवादचाँदी, पृथ्वी (स्त्री.); ब्रह्मपुत्र (पु.); चाय, लस्सी (स्त्री.)
चकमा देने वाले पुल्लिंगदही, पानी, घी, मोती, हाथी, आँसू, प्राण
चकमा देने वाले स्त्रीलिंगआत्मा, सरसों, आयु, मृत्यु, चाय, पुस्तक, आँख, नाक
नित्य स्त्रीलिंगमक्खी, कोयल, चील, मैना, तितली, छिपकली (नर के लिए 'नर' जोड़ें)
नित्य पुल्लिंगखटमल, उल्लू, भेड़िया, कौआ, मच्छर, चीता (मादा के लिए 'मादा' जोड़ें)
सदा बहुवचनप्राण, दर्शन, आँसू, होश, हस्ताक्षर, लोग
सदा एकवचनजनता, पानी, दूध, घी, सोना, सामान
आदरसूचक बहुवचनपिताजी आए हैं, गुरुजी पढ़ा रहे हैं
संबोधन बहुवचनबिना अनुस्वार — भाइयो! बहनो! बच्चो!

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

लिंग और वचन संज्ञा के विकार हैं — इन्हीं के कारण संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के रूप बदलते हैं। हिंदी में क्रिया कर्ता या कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदलती है ("लड़का गया", "लड़की गई", "लड़के गए"), इसलिए वाक्य-शुद्धि के आधे प्रश्न लिंग-वचन की भूल पर ही बनते हैं। संज्ञा के भेदों के साथ इसका आधार संज्ञा और सर्वनाम के भेद वाले नोट में देखें।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • CET 12th व Graduation स्तर
  • पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
  • REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
  • राजस्थान पुलिस SI (हिंदी व्याकरण भाग)
  • RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. "निम्नलिखित में से पुल्लिंग / स्त्रीलिंग शब्द कौन-सा है?" — सबसे सामान्य रूप
  2. "'सेठ' / 'शिक्षक' / 'विद्वान' का स्त्रीलिंग रूप" — लिंग-परिवर्तन
  3. "कौन-सा शब्द नित्य स्त्रीलिंग / नित्य पुल्लिंग है?"
  4. "'नदी' / 'वस्तु' / 'चिड़िया' का बहुवचन"
  5. "कौन-सा शब्द सदा बहुवचन में प्रयुक्त होता है?"
  6. वाक्य-शुद्धि — "मेरा आत्मा", "दही खट्टी है", "भाइयों और बहनों!"
  7. असुमेलित युग्म — शब्द और उसका लिंग / स्त्रीलिंग रूप

3. लिंग — परिभाषा और भेद

परिभाषा: 'लिंग' का अर्थ है चिह्न या पहचान। संज्ञा के जिस रूप से यह पता चले कि वह पुरुष जाति की है या स्त्री जाति की, उसे लिंग कहते हैं।

भेदपरिभाषाउदाहरण
पुल्लिंगजिससे पुरुष जाति का बोध होलड़का, घोड़ा, पिता, राजा, पर्वत, घर, सोना
स्त्रीलिंगजिससे स्त्री जाति का बोध होलड़की, घोड़ी, माता, रानी, नदी, पुस्तक, चाँदी

संस्कृत से अंतर: संस्कृत में तीन लिंग हैं — पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग। हिंदी में नपुंसकलिंग नहीं है; संस्कृत के अधिकांश नपुंसकलिंग शब्द हिंदी में पुल्लिंग हो गए (जल, फल, ज्ञान), पर कुछ स्त्रीलिंग भी बने (पुस्तक)। इसलिए संस्कृत का लिंग देखकर हिंदी का लिंग तय नहीं करना चाहिए — 'आत्मा' संस्कृत में पुल्लिंग है, पर हिंदी में स्त्रीलिंग।

3.1 लिंग पहचानने की कसौटी

कसौटीपुल्लिंगस्त्रीलिंग
क्रियादही जम गयाचाय ठंडी हो गई
विशेषण (आकारांत)अच्छा मोतीअच्छी पुस्तक
संबंध परसर्गराम का घरराम की कलम
सर्वनाम रूपमेरा भाग्यमेरी आत्मा

ध्यान दें — 'का-के-की' का लिंग बाद वाले शब्द से तय होता है: "सीता का भाई" (भाई पुल्लिंग), "राम की बहन" (बहन स्त्रीलिंग)।


4. प्राणिवाचक और अप्राणिवाचक शब्दों का लिंग

प्राणिवाचक शब्दों में लिंग प्रायः प्राकृतिक होता है — नर के लिए पुल्लिंग, मादा के लिए स्त्रीलिंग (बैल–गाय, मोर–मोरनी)। कठिनाई अप्राणिवाचक शब्दों में है: 'पत्थर' पुल्लिंग और 'चट्टान' स्त्रीलिंग क्यों है, इसका कोई प्राकृतिक कारण नहीं, यह भाषा की परंपरा है। ऐसे शब्दों के लिए व्याकरण-पुस्तकें कुछ प्रवृत्तियाँ बताती हैं — ये पक्के नियम नहीं, सामान्य रुझान हैं, और इनके अपवाद ही परीक्षा में पूछे जाते हैं।

4.1 प्रायः पुल्लिंग रहने वाले वर्ग

वर्गउदाहरणप्रसिद्ध अपवाद (स्त्रीलिंग)
दिनों के नामसोमवार, मंगलवार, रविवार—
हिंदी महीनों के नामचैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण—
पर्वतों के नामहिमालय, विंध्याचल, कैलाश—
देशों के नामभारत, नेपाल, चीन, जापान—
धातुओं के नामसोना, ताँबा, लोहा, पीतलचाँदी
समुद्रों के नामहिंद महासागर, अरब सागर, प्रशांत महासागर—
ग्रहों के नामसूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शनिपृथ्वी
रत्नों के नामहीरा, मोती, पन्ना, नीलममणि
वृक्षों के नामपीपल, बरगद, नीम, आमइमली
द्रव पदार्थपानी, दूध, घी, तेल, दही, शरबतचाय, लस्सी, छाछ, कॉफ़ी
अनाजगेहूँ, चना, जौ, बाजरा, चावलज्वार, अरहर
शरीर के कुछ अंगसिर, हाथ, पैर, कान, दाँत, होंठ, गला, मुँह(स्त्रीलिंग अंग नीचे 4.2 में)

टिप्पणी: अंग्रेज़ी महीनों के नाम (जनवरी, मई, जुलाई) के लिंग-प्रयोग में बोलचाल में भिन्नता मिलती है, इसलिए यहाँ केवल हिंदी महीनों के उदाहरण दिए गए हैं।

4.2 प्रायः स्त्रीलिंग रहने वाले वर्ग

वर्गउदाहरणप्रसिद्ध अपवाद (पुल्लिंग)
नदियों के नामगंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, चंबलब्रह्मपुत्र, सोन (इन्हें 'नद' कहा जाता है)
भाषाओं के नामहिंदी, संस्कृत, अंग्रेज़ी, उर्दू, राजस्थानी—
लिपियों के नामदेवनागरी, रोमन, गुरुमुखी, ब्राह्मी—
तिथियों के नामप्रतिपदा, द्वितीया, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या—
नक्षत्रों के नामअश्विनी, भरणी, रोहिणीपुष्य, हस्त, मूल (पुल्लिंग)
शरीर के कुछ अंगआँख, नाक, जीभ, गर्दन, कमर, उँगली, पलक(पुल्लिंग अंग ऊपर 4.1 में)

कुछ पुस्तकें 'सिंधु' को भी पुल्लिंग अपवाद में रखती हैं; प्रयोग में भिन्नता के कारण इसे परीक्षा के लिए निर्णायक उदाहरण न मानें।


5. प्रत्यय (शब्दांत) से लिंग की पहचान

5.1 प्रायः पुल्लिंग प्रत्यय / अंत

अंत / प्रत्ययउदाहरणअपवाद / टिप्पणी
-आ (तद्भव आकारांत)लड़का, घोड़ा, कपड़ा, कमरा, पैसातत्सम आकारांत प्रायः स्त्रीलिंग — दया, कृपा, शिक्षा, माला, लता, कविता
-पनबचपन, लड़कपन, पागलपन—
-पाबुढ़ापा, मोटापा, अपनापा—
-आवबहाव, चढ़ाव, बचाव, घुमाव—
-आवाबुलावा, पहनावा, छलावा—
-त्वमहत्त्व, बंधुत्व, मनुष्यत्व—
-ना (क्रियार्थक संज्ञा)खाना, गाना, पढ़ना—

5.2 प्रायः स्त्रीलिंग प्रत्यय / अंत

अंत / प्रत्ययउदाहरणअपवाद / टिप्पणी
-ईगरमी, सरदी, हँसी, खेती, रोटी, नदीपुल्लिंग अपवाद — पानी, घी, दही, मोती, हाथी, जी, माली, धोबी
-इयाडिबिया, चिड़िया, लुटिया, गुड़िया—
-आईभलाई, बुराई, पढ़ाई, लिखाई, मिठाई—
-आवटसजावट, बनावट, लिखावट, थकावट—
-आहटघबराहट, चिकनाहट, कड़वाहट, मुस्कराहट—
-ता (तत्सम भाववाचक)सुंदरता, मित्रता, मानवता, एकता—
-ति / -इ (तत्सम)रीति, नीति, शक्ति, प्रकृति, संस्कृति, बुद्धि—
-खभूख, ईख, राख, चीख—
-आसमिठास, खटास, प्यास—

प्रत्ययों के अर्थ और शब्द-निर्माण उपसर्ग और प्रत्यय वाले नोट में विस्तार से हैं।


6. परीक्षा में पूछे जाने वाले कठिन शब्दों का लिंग

नीचे वे शब्द हैं जिनका लिंग मानक हिंदी में निश्चित है पर अनुमान से प्रायः गलत लगाया जाता है। हर शब्द के साथ कसौटी-वाक्य याद करें।

6.1 पुल्लिंग शब्द

शब्दलिंगकसौटी-वाक्य
दहीपुल्लिंगदही खट्टा है।
पानीपुल्लिंगपानी ठंडा है।
घीपुल्लिंगघी महँगा हो गया।
मोतीपुल्लिंगमोती चमक रहा है।
हाथीपुल्लिंगहाथी आ रहा है।
आँसूपुल्लिंगआँसू बह निकले।
प्राणपुल्लिंगउसके प्राण बच गए।
शहदपुल्लिंगशहद मीठा है।
नमकपुल्लिंगनमक कम है।
सामानपुल्लिंगसारा सामान आ गया।
ग्रंथपुल्लिंगयह ग्रंथ पुराना है।
हस्ताक्षरपुल्लिंगआपके हस्ताक्षर स्पष्ट हैं।
दाँतपुल्लिंगदाँत टूट गया।
होंठपुल्लिंगहोंठ सूख गए।
समयपुल्लिंगसमय बीत गया।
जीवनपुल्लिंगउसका जीवन सरल है।
ज़हर / विषपुल्लिंगविष फैल गया।

6.2 स्त्रीलिंग शब्द

शब्दलिंगकसौटी-वाक्य
आत्मास्त्रीलिंगआत्मा अमर रहती है। / मेरी आत्मा
सरसोंस्त्रीलिंगसरसों फूल गई।
आयुस्त्रीलिंगउसकी आयु कम है।
मृत्युस्त्रीलिंगउसकी मृत्यु हो गई।
चायस्त्रीलिंगचाय ठंडी हो गई।
पुस्तक / किताबस्त्रीलिंगपुस्तक फट गई।
क़लमस्त्रीलिंगमेरी क़लम खो गई।
सड़कस्त्रीलिंगसड़क चौड़ी है।
आगस्त्रीलिंगआग लग गई।
ओसस्त्रीलिंगओस गिरी।
धूपस्त्रीलिंगधूप तेज़ है।
शपथ / सौगंधस्त्रीलिंगउसने शपथ ली।
सलाहस्त्रीलिंगअच्छी सलाह दी।
वस्तुस्त्रीलिंगयह वस्तु क़ीमती है।
देहस्त्रीलिंगउसकी देह थक गई।
बर्फ़स्त्रीलिंगबर्फ़ गिर रही है।
परीक्षा / प्रार्थनास्त्रीलिंगपरीक्षा शुरू हो गई।

6.3 अर्थ बदलने पर लिंग बदलने वाले शब्द

शब्दपुल्लिंग अर्थस्त्रीलिंग अर्थ
हारमाला — "सुंदर हार"पराजय — "करारी हार"
टीकातिलक / वैक्सीन — "टीका लगा"व्याख्या — "गीता की टीका"
बाटतराज़ू का बाटरास्ता — "बाट जोहना"

7. नित्य पुल्लिंग और नित्य स्त्रीलिंग

कुछ प्राणिवाचक शब्द केवल एक ही लिंग में प्रयुक्त होते हैं — उनका दूसरा लिंग-रूप नहीं बनता। लिंग बताने के लिए आगे 'नर' या 'मादा' जोड़ा जाता है।

नित्य स्त्रीलिंगनर बताना हो तोनित्य पुल्लिंगमादा बताना हो तो
मक्खीनर मक्खीखटमलमादा खटमल
कोयलनर कोयलउल्लूमादा उल्लू
चीलनर चीलभेड़ियामादा भेड़िया
मैनानर मैनाकौआमादा कौआ
तितलीनर तितलीमच्छरमादा मच्छर
छिपकलीनर छिपकलीचीतामादा चीता

हाथी नित्य पुल्लिंग नहीं है — इसका स्त्रीलिंग हथिनी बनता है। इसी तरह 'चूहा' का 'चुहिया', 'कुत्ता' का 'कुतिया' बनता है।


8. पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम

8.1 '-ई' प्रत्यय से

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
लड़कालड़कीघोड़ाघोड़ी
बकराबकरीबेटाबेटी
नानानानीदादादादी
चाचाचाचीमामामामी
पुत्रपुत्रीदेवदेवी
ब्राह्मणब्राह्मणीगोपगोपी

8.2 '-इया' प्रत्यय से (छोटेपन का भाव भी)

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
बूढ़ाबुढ़िया
चूहाचुहिया
कुत्ताकुतिया
बेटाबिटिया
लोटालुटिया
डिब्बाडिबिया

ध्यान दें — '-इया' लगने पर पहला दीर्घ स्वर प्रायः ह्रस्व हो जाता है (बूढ़ा → बुढ़िया, चूहा → चुहिया)। लोटा-लुटिया, डिब्बा-डिबिया अप्राणिवाचक हैं; यहाँ '-इया' छोटेपन (ऊनवाचक) का भाव देता है।

8.3 '-इन' प्रत्यय से

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
धोबीधोबिनमालीमालिन
सुनारसुनारिनलुहारलुहारिन
कुम्हारकुम्हारिनतेलीतेलिन
बाघबाघिनसाँपसाँपिन
नागनागिनहाथीहथिनी

'हाथी → हथिनी' में '-इनी' जुड़ता है और 'हा' ह्रस्व होकर 'ह' बनता है।

8.4 '-आनी' प्रत्यय से

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
सेठसेठानीनौकरनौकरानी
देवरदेवरानीजेठजेठानी
चौधरीचौधरानीभवभवानी
इंद्रइंद्राणीरुद्ररुद्राणी

इंद्र, रुद्र में 'र' होने से 'न' मूर्धन्य 'ण' बन जाता है (णत्व नियम) — इंद्राणी, रुद्राणी।

8.5 '-नी' प्रत्यय से

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
मोरमोरनीशेरशेरनी
ऊँटऊँटनीभीलभीलनी
जाटजाटनीराजपूतराजपूतनी

8.6 '-इका' प्रत्यय से (तत्सम '-अक' अंत वाले शब्द)

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
बालकबालिकासेवकसेविका
शिक्षकशिक्षिकालेखकलेखिका
पाठकपाठिकाअध्यापकअध्यापिका
नायकनायिकागायकगायिका

8.7 '-आइन' प्रत्यय से

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
पंडितपंडिताइन
ठाकुरठकुराइन
चौबेचौबाइन
दुबेदुबाइन
लालाललाइन

'-आइन' वाले रूप प्रायः किसी की पत्नी के लिए बोले जाते हैं। इनमें से कुछ के दूसरे रूप भी प्रचलित हैं (जैसे ठाकुर का 'ठकुरानी' भी), इसलिए यहाँ केवल पहचान के लिए उदाहरण दिए गए हैं।

8.8 अन्य तत्सम प्रत्यय — '-आ', '-वती / -मती', '-त्री'

प्रत्ययपुल्लिंग → स्त्रीलिंग
-आसुत → सुता, छात्र → छात्रा, प्रिय → प्रिया, शिष्य → शिष्या, अनुज → अनुजा
-वतीभाग्यवान → भाग्यवती, गुणवान → गुणवती, रूपवान → रूपवती
-मतीश्रीमान → श्रीमती, बुद्धिमान → बुद्धिमती
-त्रीनेता → नेत्री, अभिनेता → अभिनेत्री, दाता → दात्री, विधाता → विधात्री
-इत्रीकवि → कवयित्री (कवियत्री लिखना अशुद्ध)

8.9 बिल्कुल अलग शब्द से स्त्रीलिंग

पुल्लिंगस्त्रीलिंगपुल्लिंगस्त्रीलिंग
पितामाताराजारानी
भाईबहनवरवधू
पुरुषस्त्रीबैलगाय
ससुरसाससम्राटसाम्राज्ञी
साधुसाध्वीविद्वानविदुषी
युवकयुवतीबादशाहबेगम

9. उभयलिंगी शब्द — प्रयोग देखकर निर्णय

कुछ शब्द दोनों लिंगों के लिए एक ही रूप में प्रयुक्त होते हैं। इनका लिंग शब्द से नहीं, वाक्य की क्रिया या विशेषण से पता चलता है।

शब्दपुरुष के लिएस्त्री के लिए
राष्ट्रपतिराष्ट्रपति आए।राष्ट्रपति आईं।
प्रधानमंत्रीप्रधानमंत्री बोले।प्रधानमंत्री बोलीं।
डॉक्टरडॉक्टर आ गए।डॉक्टर आ गईं।
मंत्री, सचिव, वकील, प्रोफ़ेसरक्रिया पुल्लिंगक्रिया स्त्रीलिंग
शिशु, मेहमानसंदर्भ के अनुसारसंदर्भ के अनुसार

प्रयोग-भेद वाले शब्द: कुछ शब्दों का लिंग क्षेत्र और बोली के अनुसार अलग बोला जाता है — जैसे पूर्वी क्षेत्रों की बोलचाल में 'दही' कहीं-कहीं स्त्रीलिंग रूप में भी सुनाई देता है, जबकि मानक हिंदी में यह पुल्लिंग है। ऐसे शब्दों में परीक्षा का उत्तर मानक हिंदी के अनुसार दें। जिन शब्दों पर पुस्तकों में ही मतभेद है, उन्हें इस नोट के क्विज़ और कथन-अभ्यास में नहीं रखा गया है।


10. वचन — परिभाषा और भेद

परिभाषा: संज्ञा के जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।

भेदपरिभाषाउदाहरण
एकवचनएक वस्तु / व्यक्ति का बोधलड़का, पुस्तक, नदी, घर
बहुवचनएक से अधिक का बोधलड़के, पुस्तकें, नदियाँ, घर

संस्कृत से अंतर: संस्कृत में तीन वचन हैं — एकवचन, द्विवचन, बहुवचन। हिंदी में द्विवचन नहीं है; दो के लिए भी बहुवचन लगता है ("दो लड़के")।


11. एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम (मूल / अविकारी रूप)

नीचे के नियम बिना परसर्ग वाले (मूल) रूप के हैं — जब शब्द के बाद ने, को, से, में आदि न हो।

नियमएकवचन → बहुवचन
1. पुल्लिंग आकारांत → एकारांतलड़का → लड़के, घोड़ा → घोड़े, कमरा → कमरे, बेटा → बेटे, कपड़ा → कपड़े
2. संबंधवाचक, आदरवाचक व तत्सम आकारांत पुल्लिंग — अपरिवर्तितपिता, चाचा, दादा, नाना, मामा, राजा, देवता, योद्धा — "चार राजा आए", "दोनों चाचा आए"
3. अन्य पुल्लिंग (अकारांत, ईकारांत, उकारांत) — अपरिवर्तितबालक → बालक, घर → घर, फल → फल, हाथी → हाथी, साधु → साधु
4. अकारांत स्त्रीलिंग → एँ (अंतिम 'अ' की जगह)बात → बातें, रात → रातें, आँख → आँखें, बहन → बहनें, पुस्तक → पुस्तकें, सड़क → सड़कें
5. आकारांत स्त्रीलिंग → + एँमाता → माताएँ, कथा → कथाएँ, लता → लताएँ, कविता → कविताएँ, शाखा → शाखाएँ
6. इकारांत / ईकारांत स्त्रीलिंग → इयाँ (ई ह्रस्व होकर)लड़की → लड़कियाँ, नदी → नदियाँ, रोटी → रोटियाँ, तिथि → तिथियाँ, नीति → नीतियाँ, शक्ति → शक्तियाँ
7. 'या'-अंत स्त्रीलिंग → याँ (केवल चंद्रबिंदु)चिड़िया → चिड़ियाँ, गुड़िया → गुड़ियाँ, डिबिया → डिबियाँ, बुढ़िया → बुढ़ियाँ
8. उकारांत / ऊकारांत स्त्रीलिंग → + एँ (ऊ ह्रस्व होकर)वस्तु → वस्तुएँ, धातु → धातुएँ, ऋतु → ऋतुएँ, बहू → बहुएँ, वधू → वधुएँ
9. औकारांत स्त्रीलिंग → + एँगौ → गौएँ

वर्तनी ध्यान दें: मानक रूप 'एँ' (चंद्रबिंदु) है — माताएँ, वस्तुएँ; 'मातायें', 'वस्तुयें' अशुद्ध माने जाते हैं।


12. विभक्ति-सहित (तिर्यक / विकारी) रूप

जब संज्ञा के बाद कोई परसर्ग (ने, को, से, में, पर, का) आता है, तो शब्द का रूप बदल जाता है — इसे तिर्यक या विकारी रूप कहते हैं। बहुवचन में प्रायः -ओं लगता है। कारक-चिह्नों का पूरा विवरण कारक के भेद और विभक्ति चिह्न वाले नोट में है।

शब्दमूल एकवचनमूल बहुवचनतिर्यक एकवचनतिर्यक बहुवचनसंबोधन बहुवचन
लड़कालड़कालड़केलड़के नेलड़कों नेलड़को!
बालकबालकबालकबालक नेबालकों नेबालको!
राजाराजाराजाराजा नेराजाओं नेराजाओ!
साधुसाधुसाधुसाधु कोसाधुओं कोसाधुओ!
भाईभाईभाईभाई कोभाइयों कोभाइयो!
लड़कीलड़कीलड़कियाँलड़की नेलड़कियों नेलड़कियो!
मातामातामाताएँमाता कोमाताओं कोमाताओ!
बहनबहनबहनेंबहन कोबहनों कोबहनो!
वस्तुवस्तुवस्तुएँवस्तु मेंवस्तुओं में—

तीन बातें: (1) आकारांत पुल्लिंग एकवचन में भी परसर्ग से पहले एकारांत हो जाता है — "लड़के ने" (लड़का ने नहीं), "कमरे में"। पर संबंधवाचक/तत्सम आकारांत नहीं बदलते — "राजा ने", "पिता को"। (2) ईकारांत में 'ई' ह्रस्व होकर 'इयों' — भाई → भाइयों, लड़की → लड़कियों, नदी → नदियों। (3) संबोधन बहुवचन में अनुस्वार नहीं लगता — भाइयो और बहनो! ("भाइयों और बहनों!" अशुद्ध)।


13. सदा बहुवचन और सदा एकवचन शब्द

13.1 सदा बहुवचन में प्रयुक्त शब्द

मानक व्याकरण-पुस्तकें इन शब्दों को सदा बहुवचन मानती हैं — इनके साथ क्रिया बहुवचन में आती है।

शब्दशुद्ध प्रयोग
प्राणउसके प्राण निकल गए।
दर्शनआज गुरुजी के दर्शन हुए।
आँसूउसकी आँखों से आँसू बह निकले।
होशयह सुनकर उसके होश उड़ गए।
हस्ताक्षरप्रधानाचार्य के हस्ताक्षर हो गए।
लोगगाँव के लोग आए।
दामसब्ज़ियों के दाम बढ़ गए।
अक्षतपूजा में अक्षत चढ़ाए गए।

13.2 सदा एकवचन में प्रयुक्त शब्द

द्रव्यवाचक (पदार्थ), भाववाचक और कुछ समूहवाचक संज्ञाएँ सामान्यतः एकवचन में ही प्रयुक्त होती हैं।

शब्दशुद्ध प्रयोगअशुद्ध
जनताजनता आ रही है।जनता आ रहे हैं।
पानीपानी बरस रहा है।पानियाँ
दूधदूध उबल गया।—
घी, तेलघी महँगा है।—
सोना, चाँदीसोना सस्ता हुआ।—
सामानसारा सामान बिक गया।सामानों
प्रेम, क्रोध, सत्यउसका क्रोध शांत हुआ।—

प्रकार बताने के लिए द्रव्यवाचक शब्दों का बहुवचन कभी-कभी प्रयोग में आता है ("विभिन्न तेलों का मिश्रण"), पर सामान्य वाक्यों में ये एकवचन ही रहते हैं।


14. आदरसूचक बहुवचन और समूहवाचक शब्द

14.1 आदरसूचक बहुवचन

आदरणीय व्यक्ति के लिए एक होने पर भी क्रिया, सर्वनाम और विशेषण बहुवचन में लगाए जाते हैं।

वाक्यटिप्पणी
पिताजी कल आएँगे।एक व्यक्ति, क्रिया बहुवचन — आदर
गुरुजी पढ़ा रहे हैं।आदर
प्रधानाचार्य ने कहा कि वे कल नहीं आएँगे।सर्वनाम 'वे' भी आदर में बहुवचन
आप कब आए?'आप' के साथ क्रिया सदा बहुवचन
हम कल जाएँगे। (एक वक्ता)बड़प्पन / लेखकीय प्रयोग में 'मैं' की जगह 'हम'

14.2 समूहवाचक शब्द जोड़कर बहुवचन

शब्दउदाहरण
गणछात्रगण, अध्यापकगण, देवगण, पाठकगण
वृंदशिष्यवृंद, अध्यापकवृंद
वर्गमित्र वर्ग, पाठक वर्ग, नारी वर्ग
जनगुरुजन, प्रियजन, स्वजन
लोगआप लोग, हम लोग, शहर के लोग
दलछात्र दल, सैनिक दल

ध्यान दें — 'दल', 'वर्ग', 'सेना', 'सभा', 'भीड़' जैसे समूहवाचक शब्द स्वयं एकवचन हैं: "छात्र दल आ गया", "भीड़ जमा हो गई"। 'गण', 'जन', 'वृंद' जुड़ने पर बहुवचन का भाव आता है और क्रिया बहुवचन होती है: "गुरुजन आ गए"।


15. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: "दही खट्टी है" — अशुद्ध

मानक हिंदी में दही पुल्लिंग है — "दही खट्टा है"। '-ई' अंत देखकर स्त्रीलिंग न मानें; पानी, घी, मोती, हाथी भी इसी प्रकार पुल्लिंग हैं।

Trap 2: "मेरा आत्मा" — अशुद्ध

हिंदी में आत्मा स्त्रीलिंग — "मेरी आत्मा"। संस्कृत में आत्मन् पुल्लिंग है, इसलिए भ्रम होता है।

Trap 3: चाँदी और पृथ्वी

धातुएँ पुल्लिंग पर चाँदी स्त्रीलिंग; ग्रह पुल्लिंग पर पृथ्वी स्त्रीलिंग।

Trap 4: हाथी नित्य पुल्लिंग नहीं

हाथी → हथिनी। नित्य पुल्लिंग के उदाहरण — खटमल, उल्लू, भेड़िया।

Trap 5: कवि का स्त्रीलिंग

शुद्ध — कवयित्री; 'कवियत्री', 'कवित्री' अशुद्ध।

Trap 6: सम्राट और विद्वान

सम्राट → साम्राज्ञी, विद्वान → विदुषी। 'विद्वानी' जैसा कोई शब्द नहीं।

Trap 7: "भाइयों और बहनों!" — अशुद्ध

संबोधन बहुवचन में अनुस्वार नहीं — "भाइयो और बहनो!"।

Trap 8: "जनता आ रहे हैं" — अशुद्ध

जनता एकवचन, स्त्रीलिंग — "जनता आ रही है"।

Trap 9: "उसका प्राण निकल गया" — अशुद्ध

प्राण सदा बहुवचन — "उसके प्राण निकल गए"। इसी तरह "आपका दर्शन हुआ" के स्थान पर "आपके दर्शन हुए"।

Trap 10: "प्रत्येक छात्रों को" — अशुद्ध

'प्रत्येक', 'हर एक' के साथ एकवचन — "प्रत्येक छात्र को पुरस्कार मिला"।

Trap 11: "राजे आए" — अशुद्ध

राजा, पिता, चाचा जैसे आकारांत पुल्लिंग बहुवचन में नहीं बदलते — "चार राजा आए"। पर परसर्ग के साथ "राजाओं ने"।

Trap 12: "लड़का ने" — अशुद्ध

तद्भव आकारांत पुल्लिंग परसर्ग से पहले एकारांत — "लड़के ने", "घोड़े पर", "कमरे में"।


16. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 शब्द)

क्र.शब्दउत्तर
1दहीपुल्लिंग
2आत्मास्त्रीलिंग
3पानीपुल्लिंग
4चायस्त्रीलिंग
5मोतीपुल्लिंग
6सरसोंस्त्रीलिंग
7घीपुल्लिंग
8आयुस्त्रीलिंग
9चाँदीस्त्रीलिंग
10पृथ्वीस्त्रीलिंग
11हिमालयपुल्लिंग
12गंगास्त्रीलिंग
13ब्रह्मपुत्रपुल्लिंग
14हिंदी (भाषा)स्त्रीलिंग
15नाकस्त्रीलिंग
16दाँतपुल्लिंग
17बचपनपुल्लिंग
18सजावटस्त्रीलिंग
19मक्खीनित्य स्त्रीलिंग
20कोयलनित्य स्त्रीलिंग
21खटमलनित्य पुल्लिंग
22उल्लूनित्य पुल्लिंग
23हाथीहथिनी
24सेठसेठानी
25देवरदेवरानी
26इंद्रइंद्राणी
27मोरमोरनी
28शिक्षकशिक्षिका
29पंडितपंडिताइन
30धोबीधोबिन
31चूहाचुहिया
32कविकवयित्री
33विद्वानविदुषी
34सम्राटसाम्राज्ञी
35श्रीमानश्रीमती
36नेतानेत्री
37साधुसाध्वी
38लड़कालड़के
39लड़कीलड़कियाँ
40मातामाताएँ
41बातबातें
42वस्तुवस्तुएँ
43चिड़ियाचिड़ियाँ
44नीतिनीतियाँ
45बहूबहुएँ
46राजा (बहुवचन, मूल)राजा
47प्राणसदा बहुवचन
48हस्ताक्षरसदा बहुवचन
49जनतासदा एकवचन
50भाई (संबोधन बहुवचन)भाइयो!

17. CET में लिंग-वचन कैसे पूछे जाते हैं

राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में लिंग-वचन के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचा पहचान लेने से उत्तर जल्दी मिलता है:

  1. लिंग पहचान: चार शब्द, एक पुल्लिंग/स्त्रीलिंग — दही, मोती, आत्मा, सरसों जैसे शब्द।
  2. स्त्रीलिंग रूप: सेठ, विद्वान, कवि, सम्राट, हाथी — प्रत्यय तालिकाएँ।
  3. नित्य लिंग: मक्खी, कोयल, खटमल, उल्लू।
  4. बहुवचन रूप: नदी, वस्तु, चिड़िया, बहू, माता।
  5. सदा एक/बहुवचन: प्राण, दर्शन, हस्ताक्षर; जनता, पानी।
  6. वाक्य-शुद्धि: लिंग-वचन के अनुसार क्रिया का मेल — इन भूलों का अभ्यास वाक्य शुद्धि के नियम वाले नोट में करें।

रणनीति: लिंग पर संदेह हो तो शब्द के साथ "अच्छा / अच्छी" या "हो गया / हो गई" लगाकर बोलें; मानक प्रयोग वाले वाक्य कान को सही लगते हैं। अपवाद-शब्दों की सूची (खंड 6) अलग से दोहराएँ।


18. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. 'दही-पानी-घी-मोती, सब पुल्लिंग की ज्योति': '-ई' अंत वाले चार प्रसिद्ध पुल्लिंग।

2. 'आत्मा, आयु, सरसों, चाय — स्त्रीलिंग की चार राय'।

3. 'चाँदी-पृथ्वी अलग चलें': धातु और ग्रह पुल्लिंग, पर ये दो स्त्रीलिंग।

4. नित्य स्त्रीलिंग — "मक्खी कोयल चील मैना": नर लगाकर।

5. नित्य पुल्लिंग — "खटमल उल्लू भेड़िया": मादा लगाकर।

6. 'प्राण-दर्शन-आँसू-होश, हस्ताक्षर — सब बहुवचन के दोस्त'।

7. संबोधन में बिंदु नहीं: "पुकारो तो बिंदु हटाओ" — भाइयो, बहनो, बच्चो।


19. कथन अभ्यास

हिंदी में दो लिंग होते हैं। — सही।

'दही' स्त्रीलिंग शब्द है। — गलत (मानक हिंदी में पुल्लिंग)।

'आत्मा' हिंदी में स्त्रीलिंग है। — सही।

'कोयल' नित्य स्त्रीलिंग शब्द है। — सही।

'खटमल' का स्त्रीलिंग 'खटमली' है। — गलत (नित्य पुल्लिंग; मादा खटमल)।

'हाथी' का स्त्रीलिंग 'हथिनी' है। — सही।

'विद्वान' का स्त्रीलिंग 'विदुषी' है। — सही।

'प्राण' शब्द सदा एकवचन में प्रयुक्त होता है। — गलत (सदा बहुवचन)।

'जनता' शब्द के साथ क्रिया एकवचन में आती है। — सही।

हिंदी में द्विवचन होता है। — गलत।


20. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ

  1. लिंग 2 (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग); वचन 2 (एकवचन, बहुवचन) — नपुंसकलिंग व द्विवचन नहीं
  2. कसौटी: क्रिया/विशेषण/का-की लगाकर लिंग देखें
  3. प्रायः पुल्लिंग: दिन, महीने, पर्वत, देश, धातु, समुद्र, ग्रह, रत्न, द्रव
  4. प्रायः स्त्रीलिंग: नदी, भाषा, लिपि, तिथि, नक्षत्र
  5. अपवाद: चाँदी, पृथ्वी, चाय (स्त्री.); ब्रह्मपुत्र (पु.)
  6. दही, पानी, घी, मोती, हाथी, आँसू — पुल्लिंग
  7. आत्मा, सरसों, आयु, मृत्यु, पुस्तक, आँख, नाक — स्त्रीलिंग
  8. नित्य स्त्री.: मक्खी, कोयल, चील; नित्य पु.: खटमल, उल्लू, भेड़िया
  9. प्रत्यय: -ई (लड़की), -इया (चुहिया), -इन (धोबिन), -आनी (सेठानी), -नी (मोरनी), -इका (शिक्षिका), -आइन (पंडिताइन)
  10. कवयित्री, विदुषी, साम्राज्ञी, हथिनी, इंद्राणी — वर्तनी पक्की
  11. बहुवचन: लड़का → लड़के, बात → बातें, माता → माताएँ, नदी → नदियाँ, चिड़िया → चिड़ियाँ
  12. राजा, पिता, चाचा — बहुवचन में अपरिवर्तित; परसर्ग से राजाओं
  13. सदा बहुवचन: प्राण, दर्शन, आँसू, होश, हस्ताक्षर; सदा एकवचन: जनता, पानी, दूध, सोना
  14. संबोधन बहुवचन बिना अनुस्वार: भाइयो! बहनो!

21. अभ्यास और आगे क्या पढ़ें

नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। हर गलत उत्तर पर शब्द के साथ क्रिया लगाकर वाक्य बनाएँ। लिंग-वचन के बाद वाक्य-शुद्धि और कारक पढ़ें — दोनों में यही नियम काम आते हैं। मिश्रित और समयबद्ध अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।


22. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

लिंग-वचन का अध्याय नियमों से ज़्यादा प्रयोग का अध्याय है। प्राणिवाचक शब्दों में लिंग प्रकृति से तय होता है, पर अप्राणिवाचक शब्दों में परंपरा से — इसलिए वर्गों (दिन, पर्वत, नदी, भाषा) की प्रवृत्ति याद करें और उनके अपवाद (चाँदी, पृथ्वी, ब्रह्मपुत्र) अलग से पक्के करें। लिंग-परिवर्तन के सात प्रत्यय और वचन के नौ नियम तालिका में हैं; तिर्यक रूप और संबोधन बहुवचन की वर्तनी वाक्य-शुद्धि में सीधे काम आती है। जहाँ बोलचाल और मानक हिंदी में अंतर हो, वहाँ परीक्षा में मानक रूप ही चुनें।

दो लिंग, दो वचन | दही-पानी-घी-मोती पुल्लिंग | आत्मा-सरसों-आयु स्त्रीलिंग | चाँदी-पृथ्वी अपवाद | कवयित्री, विदुषी, साम्राज्ञी | प्राण-दर्शन सदा बहुवचन, जनता सदा एकवचन | भाइयो! बहनो!


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हिंदी में दो लिंग होते हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। संस्कृत का नपुंसकलिंग हिंदी में नहीं है।

शब्द के साथ क्रिया, आकारांत विशेषण या का-की लगाकर देखें — 'दही खट्टा है' (पुल्लिंग), 'चाय ठंडी है' (स्त्रीलिंग)। अप्राणिवाचक शब्दों का लिंग परंपरा से तय होता है, इसलिए अपवाद-शब्द अलग से याद करने पड़ते हैं।

मानक हिंदी में 'दही' पुल्लिंग है (दही खट्टा है) और 'आत्मा' स्त्रीलिंग है (मेरी आत्मा)। बोलचाल में कहीं-कहीं दही को स्त्रीलिंग बोला जाता है, पर परीक्षा में मानक रूप ही मान्य है।

जो प्राणिवाचक शब्द केवल एक लिंग में प्रयुक्त होते हैं। नित्य स्त्रीलिंग — मक्खी, कोयल, चील, मैना (नर के लिए 'नर मक्खी'); नित्य पुल्लिंग — खटमल, उल्लू, भेड़िया, कौआ (मादा के लिए 'मादा उल्लू')।

दिन, हिंदी महीने, पर्वत, देश, धातु, समुद्र, ग्रह, रत्न और द्रव पदार्थों के नाम प्रायः पुल्लिंग होते हैं। अपवाद — चाँदी, पृथ्वी, चाय, लस्सी (स्त्रीलिंग)।

नदियों, भाषाओं, लिपियों, तिथियों और नक्षत्रों के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। नदियों में ब्रह्मपुत्र और सोन पुल्लिंग (नद) माने जाते हैं।

कवि → कवयित्री, विद्वान → विदुषी, सम्राट → साम्राज्ञी। 'कवियत्री' लिखना अशुद्ध है।

दो — एकवचन और बहुवचन। संस्कृत का द्विवचन हिंदी में नहीं है; दो के लिए भी बहुवचन लगता है।

मानक व्याकरण-पुस्तकों के अनुसार प्राण, दर्शन, आँसू, होश, हस्ताक्षर, लोग, दाम जैसे शब्द सदा बहुवचन में आते हैं — 'उसके प्राण निकल गए', 'आपके दर्शन हुए'।

आदरणीय व्यक्ति के लिए एक होने पर भी क्रिया और सर्वनाम बहुवचन में प्रयोग करना — 'पिताजी कल आएँगे', 'गुरुजी पढ़ा रहे हैं'। 'आप' के साथ क्रिया सदा बहुवचन होती है।

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