लिंग और वचन — पहचान के नियम, अपवाद, स्त्रीलिंग प्रत्यय, बहुवचन नियम, 50 शब्द — CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RSSB CET (12वीं/स्नातक), पटवारी, VDO व REET पाठ्यक्रम की सामान्य हिंदी इकाई; मानक हिंदी व्याकरण (NCERT) की परिभाषाएँ। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष या स्त्री जाति का होने का बोध हो, उसे लिंग कहते हैं; और जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का बोध हो, उसे वचन कहते हैं। हिंदी में दो लिंग हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग (संस्कृत का नपुंसकलिंग हिंदी में नहीं है) — और दो वचन हैं — एकवचन और बहुवचन (संस्कृत का द्विवचन हिंदी में नहीं है)। अप्राणिवाचक शब्दों का लिंग परंपरा से तय होता है, इसलिए परीक्षा में सबसे अधिक वही शब्द पूछे जाते हैं जिनका लिंग अनुमान से उल्टा निकलता है — दही, पानी, घी, मोती (पुल्लिंग) और आत्मा, चाय, सरसों, आयु (स्त्रीलिंग)। लिंग-परिवर्तन के प्रत्यय (-ई, -इया, -इन, -आनी, -नी, -इका, -आइन) और वचन के नियम (लड़का → लड़के, लड़की → लड़कियाँ, माता → माताएँ, बात → बातें) तालिका में याद करें। सबसे भरोसेमंद कसौटी: शब्द के साथ क्रिया या विशेषण लगाकर देखें — "दही खट्टा है", "आत्मा अमर है, वह अजर रहती है"।
संक्षिप्त उत्तर
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| लिंग की संख्या | दो — पुल्लिंग, स्त्रीलिंग |
| वचन की संख्या | दो — एकवचन, बहुवचन |
| लिंग पहचान की कसौटी | क्रिया / विशेषण / संबंध-परसर्ग (का-की) लगाकर देखें |
| प्रायः पुल्लिंग | दिन, महीने, पर्वत, देश, धातु, समुद्र, ग्रह, रत्न, द्रव पदार्थ |
| प्रायः स्त्रीलिंग | नदियाँ, भाषाएँ, लिपियाँ, तिथियाँ, नक्षत्र |
| प्रसिद्ध अपवाद | चाँदी, पृथ्वी (स्त्री.); ब्रह्मपुत्र (पु.); चाय, लस्सी (स्त्री.) |
| चकमा देने वाले पुल्लिंग | दही, पानी, घी, मोती, हाथी, आँसू, प्राण |
| चकमा देने वाले स्त्रीलिंग | आत्मा, सरसों, आयु, मृत्यु, चाय, पुस्तक, आँख, नाक |
| नित्य स्त्रीलिंग | मक्खी, कोयल, चील, मैना, तितली, छिपकली (नर के लिए 'नर' जोड़ें) |
| नित्य पुल्लिंग | खटमल, उल्लू, भेड़िया, कौआ, मच्छर, चीता (मादा के लिए 'मादा' जोड़ें) |
| सदा बहुवचन | प्राण, दर्शन, आँसू, होश, हस्ताक्षर, लोग |
| सदा एकवचन | जनता, पानी, दूध, घी, सोना, सामान |
| आदरसूचक बहुवचन | पिताजी आए हैं, गुरुजी पढ़ा रहे हैं |
| संबोधन बहुवचन | बिना अनुस्वार — भाइयो! बहनो! बच्चो! |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
लिंग और वचन संज्ञा के विकार हैं — इन्हीं के कारण संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के रूप बदलते हैं। हिंदी में क्रिया कर्ता या कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदलती है ("लड़का गया", "लड़की गई", "लड़के गए"), इसलिए वाक्य-शुद्धि के आधे प्रश्न लिंग-वचन की भूल पर ही बनते हैं। संज्ञा के भेदों के साथ इसका आधार संज्ञा और सर्वनाम के भेद वाले नोट में देखें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- CET 12th व Graduation स्तर
- पटवारी, VDO, LDC, पुलिस कांस्टेबल
- REET लेवल-1 व लेवल-2 (हिंदी भाषा खंड)
- राजस्थान पुलिस SI (हिंदी व्याकरण भाग)
- RSMSSB की अन्य भर्तियाँ, स्कूल व्याख्याता
प्रश्न कैसे आते हैं?
- "निम्नलिखित में से पुल्लिंग / स्त्रीलिंग शब्द कौन-सा है?" — सबसे सामान्य रूप
- "'सेठ' / 'शिक्षक' / 'विद्वान' का स्त्रीलिंग रूप" — लिंग-परिवर्तन
- "कौन-सा शब्द नित्य स्त्रीलिंग / नित्य पुल्लिंग है?"
- "'नदी' / 'वस्तु' / 'चिड़िया' का बहुवचन"
- "कौन-सा शब्द सदा बहुवचन में प्रयुक्त होता है?"
- वाक्य-शुद्धि — "मेरा आत्मा", "दही खट्टी है", "भाइयों और बहनों!"
- असुमेलित युग्म — शब्द और उसका लिंग / स्त्रीलिंग रूप
3. लिंग — परिभाषा और भेद
परिभाषा: 'लिंग' का अर्थ है चिह्न या पहचान। संज्ञा के जिस रूप से यह पता चले कि वह पुरुष जाति की है या स्त्री जाति की, उसे लिंग कहते हैं।
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| पुल्लिंग | जिससे पुरुष जाति का बोध हो | लड़का, घोड़ा, पिता, राजा, पर्वत, घर, सोना |
| स्त्रीलिंग | जिससे स्त्री जाति का बोध हो | लड़की, घोड़ी, माता, रानी, नदी, पुस्तक, चाँदी |
संस्कृत से अंतर: संस्कृत में तीन लिंग हैं — पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग। हिंदी में नपुंसकलिंग नहीं है; संस्कृत के अधिकांश नपुंसकलिंग शब्द हिंदी में पुल्लिंग हो गए (जल, फल, ज्ञान), पर कुछ स्त्रीलिंग भी बने (पुस्तक)। इसलिए संस्कृत का लिंग देखकर हिंदी का लिंग तय नहीं करना चाहिए — 'आत्मा' संस्कृत में पुल्लिंग है, पर हिंदी में स्त्रीलिंग।
3.1 लिंग पहचानने की कसौटी
| कसौटी | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|
| क्रिया | दही जम गया | चाय ठंडी हो गई |
| विशेषण (आकारांत) | अच्छा मोती | अच्छी पुस्तक |
| संबंध परसर्ग | राम का घर | राम की कलम |
| सर्वनाम रूप | मेरा भाग्य | मेरी आत्मा |
ध्यान दें — 'का-के-की' का लिंग बाद वाले शब्द से तय होता है: "सीता का भाई" (भाई पुल्लिंग), "राम की बहन" (बहन स्त्रीलिंग)।
4. प्राणिवाचक और अप्राणिवाचक शब्दों का लिंग
प्राणिवाचक शब्दों में लिंग प्रायः प्राकृतिक होता है — नर के लिए पुल्लिंग, मादा के लिए स्त्रीलिंग (बैल–गाय, मोर–मोरनी)। कठिनाई अप्राणिवाचक शब्दों में है: 'पत्थर' पुल्लिंग और 'चट्टान' स्त्रीलिंग क्यों है, इसका कोई प्राकृतिक कारण नहीं, यह भाषा की परंपरा है। ऐसे शब्दों के लिए व्याकरण-पुस्तकें कुछ प्रवृत्तियाँ बताती हैं — ये पक्के नियम नहीं, सामान्य रुझान हैं, और इनके अपवाद ही परीक्षा में पूछे जाते हैं।
4.1 प्रायः पुल्लिंग रहने वाले वर्ग
| वर्ग | उदाहरण | प्रसिद्ध अपवाद (स्त्रीलिंग) |
|---|---|---|
| दिनों के नाम | सोमवार, मंगलवार, रविवार | — |
| हिंदी महीनों के नाम | चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण | — |
| पर्वतों के नाम | हिमालय, विंध्याचल, कैलाश | — |
| देशों के नाम | भारत, नेपाल, चीन, जापान | — |
| धातुओं के नाम | सोना, ताँबा, लोहा, पीतल | चाँदी |
| समुद्रों के नाम | हिंद महासागर, अरब सागर, प्रशांत महासागर | — |
| ग्रहों के नाम | सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि | पृथ्वी |
| रत्नों के नाम | हीरा, मोती, पन्ना, नीलम | मणि |
| वृक्षों के नाम | पीपल, बरगद, नीम, आम | इमली |
| द्रव पदार्थ | पानी, दूध, घी, तेल, दही, शरबत | चाय, लस्सी, छाछ, कॉफ़ी |
| अनाज | गेहूँ, चना, जौ, बाजरा, चावल | ज्वार, अरहर |
| शरीर के कुछ अंग | सिर, हाथ, पैर, कान, दाँत, होंठ, गला, मुँह | (स्त्रीलिंग अंग नीचे 4.2 में) |
टिप्पणी: अंग्रेज़ी महीनों के नाम (जनवरी, मई, जुलाई) के लिंग-प्रयोग में बोलचाल में भिन्नता मिलती है, इसलिए यहाँ केवल हिंदी महीनों के उदाहरण दिए गए हैं।
4.2 प्रायः स्त्रीलिंग रहने वाले वर्ग
| वर्ग | उदाहरण | प्रसिद्ध अपवाद (पुल्लिंग) |
|---|---|---|
| नदियों के नाम | गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, चंबल | ब्रह्मपुत्र, सोन (इन्हें 'नद' कहा जाता है) |
| भाषाओं के नाम | हिंदी, संस्कृत, अंग्रेज़ी, उर्दू, राजस्थानी | — |
| लिपियों के नाम | देवनागरी, रोमन, गुरुमुखी, ब्राह्मी | — |
| तिथियों के नाम | प्रतिपदा, द्वितीया, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या | — |
| नक्षत्रों के नाम | अश्विनी, भरणी, रोहिणी | पुष्य, हस्त, मूल (पुल्लिंग) |
| शरीर के कुछ अंग | आँख, नाक, जीभ, गर्दन, कमर, उँगली, पलक | (पुल्लिंग अंग ऊपर 4.1 में) |
कुछ पुस्तकें 'सिंधु' को भी पुल्लिंग अपवाद में रखती हैं; प्रयोग में भिन्नता के कारण इसे परीक्षा के लिए निर्णायक उदाहरण न मानें।
5. प्रत्यय (शब्दांत) से लिंग की पहचान
5.1 प्रायः पुल्लिंग प्रत्यय / अंत
| अंत / प्रत्यय | उदाहरण | अपवाद / टिप्पणी |
|---|---|---|
| -आ (तद्भव आकारांत) | लड़का, घोड़ा, कपड़ा, कमरा, पैसा | तत्सम आकारांत प्रायः स्त्रीलिंग — दया, कृपा, शिक्षा, माला, लता, कविता |
| -पन | बचपन, लड़कपन, पागलपन | — |
| -पा | बुढ़ापा, मोटापा, अपनापा | — |
| -आव | बहाव, चढ़ाव, बचाव, घुमाव | — |
| -आवा | बुलावा, पहनावा, छलावा | — |
| -त्व | महत्त्व, बंधुत्व, मनुष्यत्व | — |
| -ना (क्रियार्थक संज्ञा) | खाना, गाना, पढ़ना | — |
5.2 प्रायः स्त्रीलिंग प्रत्यय / अंत
| अंत / प्रत्यय | उदाहरण | अपवाद / टिप्पणी |
|---|---|---|
| -ई | गरमी, सरदी, हँसी, खेती, रोटी, नदी | पुल्लिंग अपवाद — पानी, घी, दही, मोती, हाथी, जी, माली, धोबी |
| -इया | डिबिया, चिड़िया, लुटिया, गुड़िया | — |
| -आई | भलाई, बुराई, पढ़ाई, लिखाई, मिठाई | — |
| -आवट | सजावट, बनावट, लिखावट, थकावट | — |
| -आहट | घबराहट, चिकनाहट, कड़वाहट, मुस्कराहट | — |
| -ता (तत्सम भाववाचक) | सुंदरता, मित्रता, मानवता, एकता | — |
| -ति / -इ (तत्सम) | रीति, नीति, शक्ति, प्रकृति, संस्कृति, बुद्धि | — |
| -ख | भूख, ईख, राख, चीख | — |
| -आस | मिठास, खटास, प्यास | — |
प्रत्ययों के अर्थ और शब्द-निर्माण उपसर्ग और प्रत्यय वाले नोट में विस्तार से हैं।
6. परीक्षा में पूछे जाने वाले कठिन शब्दों का लिंग
नीचे वे शब्द हैं जिनका लिंग मानक हिंदी में निश्चित है पर अनुमान से प्रायः गलत लगाया जाता है। हर शब्द के साथ कसौटी-वाक्य याद करें।
6.1 पुल्लिंग शब्द
| शब्द | लिंग | कसौटी-वाक्य |
|---|---|---|
| दही | पुल्लिंग | दही खट्टा है। |
| पानी | पुल्लिंग | पानी ठंडा है। |
| घी | पुल्लिंग | घी महँगा हो गया। |
| मोती | पुल्लिंग | मोती चमक रहा है। |
| हाथी | पुल्लिंग | हाथी आ रहा है। |
| आँसू | पुल्लिंग | आँसू बह निकले। |
| प्राण | पुल्लिंग | उसके प्राण बच गए। |
| शहद | पुल्लिंग | शहद मीठा है। |
| नमक | पुल्लिंग | नमक कम है। |
| सामान | पुल्लिंग | सारा सामान आ गया। |
| ग्रंथ | पुल्लिंग | यह ग्रंथ पुराना है। |
| हस्ताक्षर | पुल्लिंग | आपके हस्ताक्षर स्पष्ट हैं। |
| दाँत | पुल्लिंग | दाँत टूट गया। |
| होंठ | पुल्लिंग | होंठ सूख गए। |
| समय | पुल्लिंग | समय बीत गया। |
| जीवन | पुल्लिंग | उसका जीवन सरल है। |
| ज़हर / विष | पुल्लिंग | विष फैल गया। |
6.2 स्त्रीलिंग शब्द
| शब्द | लिंग | कसौटी-वाक्य |
|---|---|---|
| आत्मा | स्त्रीलिंग | आत्मा अमर रहती है। / मेरी आत्मा |
| सरसों | स्त्रीलिंग | सरसों फूल गई। |
| आयु | स्त्रीलिंग | उसकी आयु कम है। |
| मृत्यु | स्त्रीलिंग | उसकी मृत्यु हो गई। |
| चाय | स्त्रीलिंग | चाय ठंडी हो गई। |
| पुस्तक / किताब | स्त्रीलिंग | पुस्तक फट गई। |
| क़लम | स्त्रीलिंग | मेरी क़लम खो गई। |
| सड़क | स्त्रीलिंग | सड़क चौड़ी है। |
| आग | स्त्रीलिंग | आग लग गई। |
| ओस | स्त्रीलिंग | ओस गिरी। |
| धूप | स्त्रीलिंग | धूप तेज़ है। |
| शपथ / सौगंध | स्त्रीलिंग | उसने शपथ ली। |
| सलाह | स्त्रीलिंग | अच्छी सलाह दी। |
| वस्तु | स्त्रीलिंग | यह वस्तु क़ीमती है। |
| देह | स्त्रीलिंग | उसकी देह थक गई। |
| बर्फ़ | स्त्रीलिंग | बर्फ़ गिर रही है। |
| परीक्षा / प्रार्थना | स्त्रीलिंग | परीक्षा शुरू हो गई। |
6.3 अर्थ बदलने पर लिंग बदलने वाले शब्द
| शब्द | पुल्लिंग अर्थ | स्त्रीलिंग अर्थ |
|---|---|---|
| हार | माला — "सुंदर हार" | पराजय — "करारी हार" |
| टीका | तिलक / वैक्सीन — "टीका लगा" | व्याख्या — "गीता की टीका" |
| बाट | तराज़ू का बाट | रास्ता — "बाट जोहना" |
7. नित्य पुल्लिंग और नित्य स्त्रीलिंग
कुछ प्राणिवाचक शब्द केवल एक ही लिंग में प्रयुक्त होते हैं — उनका दूसरा लिंग-रूप नहीं बनता। लिंग बताने के लिए आगे 'नर' या 'मादा' जोड़ा जाता है।
| नित्य स्त्रीलिंग | नर बताना हो तो | नित्य पुल्लिंग | मादा बताना हो तो |
|---|---|---|---|
| मक्खी | नर मक्खी | खटमल | मादा खटमल |
| कोयल | नर कोयल | उल्लू | मादा उल्लू |
| चील | नर चील | भेड़िया | मादा भेड़िया |
| मैना | नर मैना | कौआ | मादा कौआ |
| तितली | नर तितली | मच्छर | मादा मच्छर |
| छिपकली | नर छिपकली | चीता | मादा चीता |
हाथी नित्य पुल्लिंग नहीं है — इसका स्त्रीलिंग हथिनी बनता है। इसी तरह 'चूहा' का 'चुहिया', 'कुत्ता' का 'कुतिया' बनता है।
8. पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम
8.1 '-ई' प्रत्यय से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| लड़का | लड़की | घोड़ा | घोड़ी |
| बकरा | बकरी | बेटा | बेटी |
| नाना | नानी | दादा | दादी |
| चाचा | चाची | मामा | मामी |
| पुत्र | पुत्री | देव | देवी |
| ब्राह्मण | ब्राह्मणी | गोप | गोपी |
8.2 '-इया' प्रत्यय से (छोटेपन का भाव भी)
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| बूढ़ा | बुढ़िया |
| चूहा | चुहिया |
| कुत्ता | कुतिया |
| बेटा | बिटिया |
| लोटा | लुटिया |
| डिब्बा | डिबिया |
ध्यान दें — '-इया' लगने पर पहला दीर्घ स्वर प्रायः ह्रस्व हो जाता है (बूढ़ा → बुढ़िया, चूहा → चुहिया)। लोटा-लुटिया, डिब्बा-डिबिया अप्राणिवाचक हैं; यहाँ '-इया' छोटेपन (ऊनवाचक) का भाव देता है।
8.3 '-इन' प्रत्यय से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| धोबी | धोबिन | माली | मालिन |
| सुनार | सुनारिन | लुहार | लुहारिन |
| कुम्हार | कुम्हारिन | तेली | तेलिन |
| बाघ | बाघिन | साँप | साँपिन |
| नाग | नागिन | हाथी | हथिनी |
'हाथी → हथिनी' में '-इनी' जुड़ता है और 'हा' ह्रस्व होकर 'ह' बनता है।
8.4 '-आनी' प्रत्यय से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| सेठ | सेठानी | नौकर | नौकरानी |
| देवर | देवरानी | जेठ | जेठानी |
| चौधरी | चौधरानी | भव | भवानी |
| इंद्र | इंद्राणी | रुद्र | रुद्राणी |
इंद्र, रुद्र में 'र' होने से 'न' मूर्धन्य 'ण' बन जाता है (णत्व नियम) — इंद्राणी, रुद्राणी।
8.5 '-नी' प्रत्यय से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| मोर | मोरनी | शेर | शेरनी |
| ऊँट | ऊँटनी | भील | भीलनी |
| जाट | जाटनी | राजपूत | राजपूतनी |
8.6 '-इका' प्रत्यय से (तत्सम '-अक' अंत वाले शब्द)
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| बालक | बालिका | सेवक | सेविका |
| शिक्षक | शिक्षिका | लेखक | लेखिका |
| पाठक | पाठिका | अध्यापक | अध्यापिका |
| नायक | नायिका | गायक | गायिका |
8.7 '-आइन' प्रत्यय से
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| पंडित | पंडिताइन |
| ठाकुर | ठकुराइन |
| चौबे | चौबाइन |
| दुबे | दुबाइन |
| लाला | ललाइन |
'-आइन' वाले रूप प्रायः किसी की पत्नी के लिए बोले जाते हैं। इनमें से कुछ के दूसरे रूप भी प्रचलित हैं (जैसे ठाकुर का 'ठकुरानी' भी), इसलिए यहाँ केवल पहचान के लिए उदाहरण दिए गए हैं।
8.8 अन्य तत्सम प्रत्यय — '-आ', '-वती / -मती', '-त्री'
| प्रत्यय | पुल्लिंग → स्त्रीलिंग |
|---|---|
| -आ | सुत → सुता, छात्र → छात्रा, प्रिय → प्रिया, शिष्य → शिष्या, अनुज → अनुजा |
| -वती | भाग्यवान → भाग्यवती, गुणवान → गुणवती, रूपवान → रूपवती |
| -मती | श्रीमान → श्रीमती, बुद्धिमान → बुद्धिमती |
| -त्री | नेता → नेत्री, अभिनेता → अभिनेत्री, दाता → दात्री, विधाता → विधात्री |
| -इत्री | कवि → कवयित्री (कवियत्री लिखना अशुद्ध) |
8.9 बिल्कुल अलग शब्द से स्त्रीलिंग
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| पिता | माता | राजा | रानी |
| भाई | बहन | वर | वधू |
| पुरुष | स्त्री | बैल | गाय |
| ससुर | सास | सम्राट | साम्राज्ञी |
| साधु | साध्वी | विद्वान | विदुषी |
| युवक | युवती | बादशाह | बेगम |
9. उभयलिंगी शब्द — प्रयोग देखकर निर्णय
कुछ शब्द दोनों लिंगों के लिए एक ही रूप में प्रयुक्त होते हैं। इनका लिंग शब्द से नहीं, वाक्य की क्रिया या विशेषण से पता चलता है।
| शब्द | पुरुष के लिए | स्त्री के लिए |
|---|---|---|
| राष्ट्रपति | राष्ट्रपति आए। | राष्ट्रपति आईं। |
| प्रधानमंत्री | प्रधानमंत्री बोले। | प्रधानमंत्री बोलीं। |
| डॉक्टर | डॉक्टर आ गए। | डॉक्टर आ गईं। |
| मंत्री, सचिव, वकील, प्रोफ़ेसर | क्रिया पुल्लिंग | क्रिया स्त्रीलिंग |
| शिशु, मेहमान | संदर्भ के अनुसार | संदर्भ के अनुसार |
प्रयोग-भेद वाले शब्द: कुछ शब्दों का लिंग क्षेत्र और बोली के अनुसार अलग बोला जाता है — जैसे पूर्वी क्षेत्रों की बोलचाल में 'दही' कहीं-कहीं स्त्रीलिंग रूप में भी सुनाई देता है, जबकि मानक हिंदी में यह पुल्लिंग है। ऐसे शब्दों में परीक्षा का उत्तर मानक हिंदी के अनुसार दें। जिन शब्दों पर पुस्तकों में ही मतभेद है, उन्हें इस नोट के क्विज़ और कथन-अभ्यास में नहीं रखा गया है।
10. वचन — परिभाषा और भेद
परिभाषा: संज्ञा के जिस रूप से उसके एक या अनेक होने का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकवचन | एक वस्तु / व्यक्ति का बोध | लड़का, पुस्तक, नदी, घर |
| बहुवचन | एक से अधिक का बोध | लड़के, पुस्तकें, नदियाँ, घर |
संस्कृत से अंतर: संस्कृत में तीन वचन हैं — एकवचन, द्विवचन, बहुवचन। हिंदी में द्विवचन नहीं है; दो के लिए भी बहुवचन लगता है ("दो लड़के")।
11. एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम (मूल / अविकारी रूप)
नीचे के नियम बिना परसर्ग वाले (मूल) रूप के हैं — जब शब्द के बाद ने, को, से, में आदि न हो।
| नियम | एकवचन → बहुवचन |
|---|---|
| 1. पुल्लिंग आकारांत → एकारांत | लड़का → लड़के, घोड़ा → घोड़े, कमरा → कमरे, बेटा → बेटे, कपड़ा → कपड़े |
| 2. संबंधवाचक, आदरवाचक व तत्सम आकारांत पुल्लिंग — अपरिवर्तित | पिता, चाचा, दादा, नाना, मामा, राजा, देवता, योद्धा — "चार राजा आए", "दोनों चाचा आए" |
| 3. अन्य पुल्लिंग (अकारांत, ईकारांत, उकारांत) — अपरिवर्तित | बालक → बालक, घर → घर, फल → फल, हाथी → हाथी, साधु → साधु |
| 4. अकारांत स्त्रीलिंग → एँ (अंतिम 'अ' की जगह) | बात → बातें, रात → रातें, आँख → आँखें, बहन → बहनें, पुस्तक → पुस्तकें, सड़क → सड़कें |
| 5. आकारांत स्त्रीलिंग → + एँ | माता → माताएँ, कथा → कथाएँ, लता → लताएँ, कविता → कविताएँ, शाखा → शाखाएँ |
| 6. इकारांत / ईकारांत स्त्रीलिंग → इयाँ (ई ह्रस्व होकर) | लड़की → लड़कियाँ, नदी → नदियाँ, रोटी → रोटियाँ, तिथि → तिथियाँ, नीति → नीतियाँ, शक्ति → शक्तियाँ |
| 7. 'या'-अंत स्त्रीलिंग → याँ (केवल चंद्रबिंदु) | चिड़िया → चिड़ियाँ, गुड़िया → गुड़ियाँ, डिबिया → डिबियाँ, बुढ़िया → बुढ़ियाँ |
| 8. उकारांत / ऊकारांत स्त्रीलिंग → + एँ (ऊ ह्रस्व होकर) | वस्तु → वस्तुएँ, धातु → धातुएँ, ऋतु → ऋतुएँ, बहू → बहुएँ, वधू → वधुएँ |
| 9. औकारांत स्त्रीलिंग → + एँ | गौ → गौएँ |
वर्तनी ध्यान दें: मानक रूप 'एँ' (चंद्रबिंदु) है — माताएँ, वस्तुएँ; 'मातायें', 'वस्तुयें' अशुद्ध माने जाते हैं।
12. विभक्ति-सहित (तिर्यक / विकारी) रूप
जब संज्ञा के बाद कोई परसर्ग (ने, को, से, में, पर, का) आता है, तो शब्द का रूप बदल जाता है — इसे तिर्यक या विकारी रूप कहते हैं। बहुवचन में प्रायः -ओं लगता है। कारक-चिह्नों का पूरा विवरण कारक के भेद और विभक्ति चिह्न वाले नोट में है।
| शब्द | मूल एकवचन | मूल बहुवचन | तिर्यक एकवचन | तिर्यक बहुवचन | संबोधन बहुवचन |
|---|---|---|---|---|---|
| लड़का | लड़का | लड़के | लड़के ने | लड़कों ने | लड़को! |
| बालक | बालक | बालक | बालक ने | बालकों ने | बालको! |
| राजा | राजा | राजा | राजा ने | राजाओं ने | राजाओ! |
| साधु | साधु | साधु | साधु को | साधुओं को | साधुओ! |
| भाई | भाई | भाई | भाई को | भाइयों को | भाइयो! |
| लड़की | लड़की | लड़कियाँ | लड़की ने | लड़कियों ने | लड़कियो! |
| माता | माता | माताएँ | माता को | माताओं को | माताओ! |
| बहन | बहन | बहनें | बहन को | बहनों को | बहनो! |
| वस्तु | वस्तु | वस्तुएँ | वस्तु में | वस्तुओं में | — |
तीन बातें: (1) आकारांत पुल्लिंग एकवचन में भी परसर्ग से पहले एकारांत हो जाता है — "लड़के ने" (लड़का ने नहीं), "कमरे में"। पर संबंधवाचक/तत्सम आकारांत नहीं बदलते — "राजा ने", "पिता को"। (2) ईकारांत में 'ई' ह्रस्व होकर 'इयों' — भाई → भाइयों, लड़की → लड़कियों, नदी → नदियों। (3) संबोधन बहुवचन में अनुस्वार नहीं लगता — भाइयो और बहनो! ("भाइयों और बहनों!" अशुद्ध)।
13. सदा बहुवचन और सदा एकवचन शब्द
13.1 सदा बहुवचन में प्रयुक्त शब्द
मानक व्याकरण-पुस्तकें इन शब्दों को सदा बहुवचन मानती हैं — इनके साथ क्रिया बहुवचन में आती है।
| शब्द | शुद्ध प्रयोग |
|---|---|
| प्राण | उसके प्राण निकल गए। |
| दर्शन | आज गुरुजी के दर्शन हुए। |
| आँसू | उसकी आँखों से आँसू बह निकले। |
| होश | यह सुनकर उसके होश उड़ गए। |
| हस्ताक्षर | प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर हो गए। |
| लोग | गाँव के लोग आए। |
| दाम | सब्ज़ियों के दाम बढ़ गए। |
| अक्षत | पूजा में अक्षत चढ़ाए गए। |
13.2 सदा एकवचन में प्रयुक्त शब्द
द्रव्यवाचक (पदार्थ), भाववाचक और कुछ समूहवाचक संज्ञाएँ सामान्यतः एकवचन में ही प्रयुक्त होती हैं।
| शब्द | शुद्ध प्रयोग | अशुद्ध |
|---|---|---|
| जनता | जनता आ रही है। | जनता आ रहे हैं। |
| पानी | पानी बरस रहा है। | पानियाँ |
| दूध | दूध उबल गया। | — |
| घी, तेल | घी महँगा है। | — |
| सोना, चाँदी | सोना सस्ता हुआ। | — |
| सामान | सारा सामान बिक गया। | सामानों |
| प्रेम, क्रोध, सत्य | उसका क्रोध शांत हुआ। | — |
प्रकार बताने के लिए द्रव्यवाचक शब्दों का बहुवचन कभी-कभी प्रयोग में आता है ("विभिन्न तेलों का मिश्रण"), पर सामान्य वाक्यों में ये एकवचन ही रहते हैं।
14. आदरसूचक बहुवचन और समूहवाचक शब्द
14.1 आदरसूचक बहुवचन
आदरणीय व्यक्ति के लिए एक होने पर भी क्रिया, सर्वनाम और विशेषण बहुवचन में लगाए जाते हैं।
| वाक्य | टिप्पणी |
|---|---|
| पिताजी कल आएँगे। | एक व्यक्ति, क्रिया बहुवचन — आदर |
| गुरुजी पढ़ा रहे हैं। | आदर |
| प्रधानाचार्य ने कहा कि वे कल नहीं आएँगे। | सर्वनाम 'वे' भी आदर में बहुवचन |
| आप कब आए? | 'आप' के साथ क्रिया सदा बहुवचन |
| हम कल जाएँगे। (एक वक्ता) | बड़प्पन / लेखकीय प्रयोग में 'मैं' की जगह 'हम' |
14.2 समूहवाचक शब्द जोड़कर बहुवचन
| शब्द | उदाहरण |
|---|---|
| गण | छात्रगण, अध्यापकगण, देवगण, पाठकगण |
| वृंद | शिष्यवृंद, अध्यापकवृंद |
| वर्ग | मित्र वर्ग, पाठक वर्ग, नारी वर्ग |
| जन | गुरुजन, प्रियजन, स्वजन |
| लोग | आप लोग, हम लोग, शहर के लोग |
| दल | छात्र दल, सैनिक दल |
ध्यान दें — 'दल', 'वर्ग', 'सेना', 'सभा', 'भीड़' जैसे समूहवाचक शब्द स्वयं एकवचन हैं: "छात्र दल आ गया", "भीड़ जमा हो गई"। 'गण', 'जन', 'वृंद' जुड़ने पर बहुवचन का भाव आता है और क्रिया बहुवचन होती है: "गुरुजन आ गए"।
15. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: "दही खट्टी है" — अशुद्ध
मानक हिंदी में दही पुल्लिंग है — "दही खट्टा है"। '-ई' अंत देखकर स्त्रीलिंग न मानें; पानी, घी, मोती, हाथी भी इसी प्रकार पुल्लिंग हैं।
Trap 2: "मेरा आत्मा" — अशुद्ध
हिंदी में आत्मा स्त्रीलिंग — "मेरी आत्मा"। संस्कृत में आत्मन् पुल्लिंग है, इसलिए भ्रम होता है।
Trap 3: चाँदी और पृथ्वी
धातुएँ पुल्लिंग पर चाँदी स्त्रीलिंग; ग्रह पुल्लिंग पर पृथ्वी स्त्रीलिंग।
Trap 4: हाथी नित्य पुल्लिंग नहीं
हाथी → हथिनी। नित्य पुल्लिंग के उदाहरण — खटमल, उल्लू, भेड़िया।
Trap 5: कवि का स्त्रीलिंग
शुद्ध — कवयित्री; 'कवियत्री', 'कवित्री' अशुद्ध।
Trap 6: सम्राट और विद्वान
सम्राट → साम्राज्ञी, विद्वान → विदुषी। 'विद्वानी' जैसा कोई शब्द नहीं।
Trap 7: "भाइयों और बहनों!" — अशुद्ध
संबोधन बहुवचन में अनुस्वार नहीं — "भाइयो और बहनो!"।
Trap 8: "जनता आ रहे हैं" — अशुद्ध
जनता एकवचन, स्त्रीलिंग — "जनता आ रही है"।
Trap 9: "उसका प्राण निकल गया" — अशुद्ध
प्राण सदा बहुवचन — "उसके प्राण निकल गए"। इसी तरह "आपका दर्शन हुआ" के स्थान पर "आपके दर्शन हुए"।
Trap 10: "प्रत्येक छात्रों को" — अशुद्ध
'प्रत्येक', 'हर एक' के साथ एकवचन — "प्रत्येक छात्र को पुरस्कार मिला"।
Trap 11: "राजे आए" — अशुद्ध
राजा, पिता, चाचा जैसे आकारांत पुल्लिंग बहुवचन में नहीं बदलते — "चार राजा आए"। पर परसर्ग के साथ "राजाओं ने"।
Trap 12: "लड़का ने" — अशुद्ध
तद्भव आकारांत पुल्लिंग परसर्ग से पहले एकारांत — "लड़के ने", "घोड़े पर", "कमरे में"।
16. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 शब्द)
| क्र. | शब्द | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | दही | पुल्लिंग |
| 2 | आत्मा | स्त्रीलिंग |
| 3 | पानी | पुल्लिंग |
| 4 | चाय | स्त्रीलिंग |
| 5 | मोती | पुल्लिंग |
| 6 | सरसों | स्त्रीलिंग |
| 7 | घी | पुल्लिंग |
| 8 | आयु | स्त्रीलिंग |
| 9 | चाँदी | स्त्रीलिंग |
| 10 | पृथ्वी | स्त्रीलिंग |
| 11 | हिमालय | पुल्लिंग |
| 12 | गंगा | स्त्रीलिंग |
| 13 | ब्रह्मपुत्र | पुल्लिंग |
| 14 | हिंदी (भाषा) | स्त्रीलिंग |
| 15 | नाक | स्त्रीलिंग |
| 16 | दाँत | पुल्लिंग |
| 17 | बचपन | पुल्लिंग |
| 18 | सजावट | स्त्रीलिंग |
| 19 | मक्खी | नित्य स्त्रीलिंग |
| 20 | कोयल | नित्य स्त्रीलिंग |
| 21 | खटमल | नित्य पुल्लिंग |
| 22 | उल्लू | नित्य पुल्लिंग |
| 23 | हाथी | हथिनी |
| 24 | सेठ | सेठानी |
| 25 | देवर | देवरानी |
| 26 | इंद्र | इंद्राणी |
| 27 | मोर | मोरनी |
| 28 | शिक्षक | शिक्षिका |
| 29 | पंडित | पंडिताइन |
| 30 | धोबी | धोबिन |
| 31 | चूहा | चुहिया |
| 32 | कवि | कवयित्री |
| 33 | विद्वान | विदुषी |
| 34 | सम्राट | साम्राज्ञी |
| 35 | श्रीमान | श्रीमती |
| 36 | नेता | नेत्री |
| 37 | साधु | साध्वी |
| 38 | लड़का | लड़के |
| 39 | लड़की | लड़कियाँ |
| 40 | माता | माताएँ |
| 41 | बात | बातें |
| 42 | वस्तु | वस्तुएँ |
| 43 | चिड़िया | चिड़ियाँ |
| 44 | नीति | नीतियाँ |
| 45 | बहू | बहुएँ |
| 46 | राजा (बहुवचन, मूल) | राजा |
| 47 | प्राण | सदा बहुवचन |
| 48 | हस्ताक्षर | सदा बहुवचन |
| 49 | जनता | सदा एकवचन |
| 50 | भाई (संबोधन बहुवचन) | भाइयो! |
17. CET में लिंग-वचन कैसे पूछे जाते हैं
राजस्थान की हिंदी व्याकरण वाली परीक्षाओं में लिंग-वचन के प्रश्न प्रायः कुछ स्थिर ढाँचों में आते हैं। प्रश्नों की संख्या पेपर-दर-पेपर बदलती है, पर ढाँचा पहचान लेने से उत्तर जल्दी मिलता है:
- लिंग पहचान: चार शब्द, एक पुल्लिंग/स्त्रीलिंग — दही, मोती, आत्मा, सरसों जैसे शब्द।
- स्त्रीलिंग रूप: सेठ, विद्वान, कवि, सम्राट, हाथी — प्रत्यय तालिकाएँ।
- नित्य लिंग: मक्खी, कोयल, खटमल, उल्लू।
- बहुवचन रूप: नदी, वस्तु, चिड़िया, बहू, माता।
- सदा एक/बहुवचन: प्राण, दर्शन, हस्ताक्षर; जनता, पानी।
- वाक्य-शुद्धि: लिंग-वचन के अनुसार क्रिया का मेल — इन भूलों का अभ्यास वाक्य शुद्धि के नियम वाले नोट में करें।
रणनीति: लिंग पर संदेह हो तो शब्द के साथ "अच्छा / अच्छी" या "हो गया / हो गई" लगाकर बोलें; मानक प्रयोग वाले वाक्य कान को सही लगते हैं। अपवाद-शब्दों की सूची (खंड 6) अलग से दोहराएँ।
18. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. 'दही-पानी-घी-मोती, सब पुल्लिंग की ज्योति': '-ई' अंत वाले चार प्रसिद्ध पुल्लिंग।
2. 'आत्मा, आयु, सरसों, चाय — स्त्रीलिंग की चार राय'।
3. 'चाँदी-पृथ्वी अलग चलें': धातु और ग्रह पुल्लिंग, पर ये दो स्त्रीलिंग।
4. नित्य स्त्रीलिंग — "मक्खी कोयल चील मैना": नर लगाकर।
5. नित्य पुल्लिंग — "खटमल उल्लू भेड़िया": मादा लगाकर।
6. 'प्राण-दर्शन-आँसू-होश, हस्ताक्षर — सब बहुवचन के दोस्त'।
7. संबोधन में बिंदु नहीं: "पुकारो तो बिंदु हटाओ" — भाइयो, बहनो, बच्चो।
19. कथन अभ्यास
हिंदी में दो लिंग होते हैं। — सही।
'दही' स्त्रीलिंग शब्द है। — गलत (मानक हिंदी में पुल्लिंग)।
'आत्मा' हिंदी में स्त्रीलिंग है। — सही।
'कोयल' नित्य स्त्रीलिंग शब्द है। — सही।
'खटमल' का स्त्रीलिंग 'खटमली' है। — गलत (नित्य पुल्लिंग; मादा खटमल)।
'हाथी' का स्त्रीलिंग 'हथिनी' है। — सही।
'विद्वान' का स्त्रीलिंग 'विदुषी' है। — सही।
'प्राण' शब्द सदा एकवचन में प्रयुक्त होता है। — गलत (सदा बहुवचन)।
'जनता' शब्द के साथ क्रिया एकवचन में आती है। — सही।
हिंदी में द्विवचन होता है। — गलत।
20. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ
- लिंग 2 (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग); वचन 2 (एकवचन, बहुवचन) — नपुंसकलिंग व द्विवचन नहीं
- कसौटी: क्रिया/विशेषण/का-की लगाकर लिंग देखें
- प्रायः पुल्लिंग: दिन, महीने, पर्वत, देश, धातु, समुद्र, ग्रह, रत्न, द्रव
- प्रायः स्त्रीलिंग: नदी, भाषा, लिपि, तिथि, नक्षत्र
- अपवाद: चाँदी, पृथ्वी, चाय (स्त्री.); ब्रह्मपुत्र (पु.)
- दही, पानी, घी, मोती, हाथी, आँसू — पुल्लिंग
- आत्मा, सरसों, आयु, मृत्यु, पुस्तक, आँख, नाक — स्त्रीलिंग
- नित्य स्त्री.: मक्खी, कोयल, चील; नित्य पु.: खटमल, उल्लू, भेड़िया
- प्रत्यय: -ई (लड़की), -इया (चुहिया), -इन (धोबिन), -आनी (सेठानी), -नी (मोरनी), -इका (शिक्षिका), -आइन (पंडिताइन)
- कवयित्री, विदुषी, साम्राज्ञी, हथिनी, इंद्राणी — वर्तनी पक्की
- बहुवचन: लड़का → लड़के, बात → बातें, माता → माताएँ, नदी → नदियाँ, चिड़िया → चिड़ियाँ
- राजा, पिता, चाचा — बहुवचन में अपरिवर्तित; परसर्ग से राजाओं
- सदा बहुवचन: प्राण, दर्शन, आँसू, होश, हस्ताक्षर; सदा एकवचन: जनता, पानी, दूध, सोना
- संबोधन बहुवचन बिना अनुस्वार: भाइयो! बहनो!
21. अभ्यास और आगे क्या पढ़ें
नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। हर गलत उत्तर पर शब्द के साथ क्रिया लगाकर वाक्य बनाएँ। लिंग-वचन के बाद वाक्य-शुद्धि और कारक पढ़ें — दोनों में यही नियम काम आते हैं। मिश्रित और समयबद्ध अभ्यास के लिए हिंदी व्याकरण मेगा टेस्ट सीरीज़ 2026 हल करें।
22. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
लिंग-वचन का अध्याय नियमों से ज़्यादा प्रयोग का अध्याय है। प्राणिवाचक शब्दों में लिंग प्रकृति से तय होता है, पर अप्राणिवाचक शब्दों में परंपरा से — इसलिए वर्गों (दिन, पर्वत, नदी, भाषा) की प्रवृत्ति याद करें और उनके अपवाद (चाँदी, पृथ्वी, ब्रह्मपुत्र) अलग से पक्के करें। लिंग-परिवर्तन के सात प्रत्यय और वचन के नौ नियम तालिका में हैं; तिर्यक रूप और संबोधन बहुवचन की वर्तनी वाक्य-शुद्धि में सीधे काम आती है। जहाँ बोलचाल और मानक हिंदी में अंतर हो, वहाँ परीक्षा में मानक रूप ही चुनें।
दो लिंग, दो वचन | दही-पानी-घी-मोती पुल्लिंग | आत्मा-सरसों-आयु स्त्रीलिंग | चाँदी-पृथ्वी अपवाद | कवयित्री, विदुषी, साम्राज्ञी | प्राण-दर्शन सदा बहुवचन, जनता सदा एकवचन | भाइयो! बहनो!

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
हिंदी में दो लिंग होते हैं — पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। संस्कृत का नपुंसकलिंग हिंदी में नहीं है।
शब्द के साथ क्रिया, आकारांत विशेषण या का-की लगाकर देखें — 'दही खट्टा है' (पुल्लिंग), 'चाय ठंडी है' (स्त्रीलिंग)। अप्राणिवाचक शब्दों का लिंग परंपरा से तय होता है, इसलिए अपवाद-शब्द अलग से याद करने पड़ते हैं।
मानक हिंदी में 'दही' पुल्लिंग है (दही खट्टा है) और 'आत्मा' स्त्रीलिंग है (मेरी आत्मा)। बोलचाल में कहीं-कहीं दही को स्त्रीलिंग बोला जाता है, पर परीक्षा में मानक रूप ही मान्य है।
जो प्राणिवाचक शब्द केवल एक लिंग में प्रयुक्त होते हैं। नित्य स्त्रीलिंग — मक्खी, कोयल, चील, मैना (नर के लिए 'नर मक्खी'); नित्य पुल्लिंग — खटमल, उल्लू, भेड़िया, कौआ (मादा के लिए 'मादा उल्लू')।
दिन, हिंदी महीने, पर्वत, देश, धातु, समुद्र, ग्रह, रत्न और द्रव पदार्थों के नाम प्रायः पुल्लिंग होते हैं। अपवाद — चाँदी, पृथ्वी, चाय, लस्सी (स्त्रीलिंग)।
नदियों, भाषाओं, लिपियों, तिथियों और नक्षत्रों के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। नदियों में ब्रह्मपुत्र और सोन पुल्लिंग (नद) माने जाते हैं।
कवि → कवयित्री, विद्वान → विदुषी, सम्राट → साम्राज्ञी। 'कवियत्री' लिखना अशुद्ध है।
दो — एकवचन और बहुवचन। संस्कृत का द्विवचन हिंदी में नहीं है; दो के लिए भी बहुवचन लगता है।
मानक व्याकरण-पुस्तकों के अनुसार प्राण, दर्शन, आँसू, होश, हस्ताक्षर, लोग, दाम जैसे शब्द सदा बहुवचन में आते हैं — 'उसके प्राण निकल गए', 'आपके दर्शन हुए'।
आदरणीय व्यक्ति के लिए एक होने पर भी क्रिया और सर्वनाम बहुवचन में प्रयोग करना — 'पिताजी कल आएँगे', 'गुरुजी पढ़ा रहे हैं'। 'आप' के साथ क्रिया सदा बहुवचन होती है।
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