चौहान वंश – एक नजर में (Quick Revision Table)
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए चौहान वंश का संक्षिप्त सार नीचे टेबल में दिया गया है।
| विषय | मुख्य तथ्य |
|---|
| वंश का नाम | चौहान वंश (चाहमान वंश) |
| वंश की श्रेणी | अग्निवंशी राजपूत |
| उत्पत्ति का स्थान | माउंट आबू (अग्निकुंड की कथा) |
| संस्थापक | माणिक राय चौहान |
| प्रमुख प्रारंभिक राज्य | सांभर और अजमेर |
| प्रमुख राजधानी | अजमेर |
| प्रसिद्ध शासक | पृथ्वीराज चौहान |
| पृथ्वीराज चौहान की प्रसिद्धि | दिल्ली व अजमेर के शक्तिशाली राजा |
| चौहान वंश का विस्तार | राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर भारत के कई भाग |
| प्रमुख शाखाएँ | सोनगरा, हाड़ा, देवड़ा, सांचोरा आदि |
| प्रमुख युद्ध | तराइन का युद्ध (1191 व 1192) |
| चौहान वंश का पतन | 1192 में मोहम्मद गौरी से पराजय के बाद |
| ऐतिहासिक महत्व | मध्यकालीन उत्तर भारत के प्रमुख राजपूत शासक |
| राजपूतों में स्थान | 36 राजपूत वंशों में प्रमुख वंश |
संक्षिप्त तथ्य:
चौहान राजपूतों को परंपरागत रूप से अग्निकुल राजपूत माना जाता है, जिनकी उत्पत्ति माउंट आबू के अग्निकुंड से बताई जाती है। यह वंश मध्यकालीन उत्तर भारत में अजमेर और दिल्ली क्षेत्र पर शासन करने के लिए प्रसिद्ध था और इनके सबसे प्रसिद्ध शासक Prithviraj Chauhan थे।
चौहान वंश Timeline (Chronological Timeline) – महत्वपूर्ण घटनाएँ
चौहान वंश के इतिहास की प्रमुख घटनाएँ नीचे chronological timeline में दी गई हैं।
| वर्ष / काल | प्रमुख घटना |
|---|
| 7वीं शताब्दी | चौहान (चाहमान) वंश का प्रारम्भ माना जाता है |
| लगभग 8वीं शताब्दी | माणिक राय चौहान द्वारा सांभर क्षेत्र में सत्ता स्थापित |
| 8वीं–10वीं शताब्दी | चौहान वंश का विस्तार राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में |
| 10वीं शताब्दी | अजयराज चौहान द्वारा अजमेर नगर की स्थापना |
| 11वीं शताब्दी | चौहान शक्ति का विस्तार अजमेर और आसपास के क्षेत्रों में |
| 12वीं शताब्दी | पृथ्वीराज चौहान का शासन, चौहान शक्ति अपने चरम पर |
| 1191 ई. | तराइन का प्रथम युद्ध – Prithviraj Chauhan ने Muhammad of Ghor को पराजित किया |
| 1192 ई. | तराइन का द्वितीय युद्ध – मोहम्मद गौरी से पृथ्वीराज चौहान की पराजय |
| 13वीं शताब्दी | चौहान वंश की विभिन्न शाखाओं का अलग-अलग राज्यों में शासन |
| मध्यकालीन काल | हाड़ा, देवड़ा, सोनगरा आदि शाखाओं का राजस्थान में प्रभाव |
राजपूतों की उत्पत्ति: प्रमुख सिद्धांत
राजपूतों की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकार और विद्वान अलग-अलग मत रखते हैं। प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
1. अग्निकुण्ड से उत्पत्ति का सिद्धांत
पृथ्वीराज रासो के रचयिता चन्दरबरदाई के अनुसार, राजपूतों की उत्पत्ति मुनि वशिष्ठ द्वारा आबू के अग्निकुण्ड (यज्ञकुण्ड) से हुई।
मुनि वशिष्ठ ने यज्ञ कुण्ड की रक्षा हेतु तीन योद्धा उत्पन्न किए: परमार, चालुक्य और प्रतिहार।
जब ये तीनों असमर्थ सिद्ध हुए, तो चौथा और सबसे शक्तिशाली योद्धा चौहान उत्पन्न हुआ।
जेम्स टॉड ने भी इस सिद्धांत को स्वीकार किया।
2. ब्राह्मणों से उत्पत्ति का सिद्धांत
डॉ. भण्डारकर के अनुसार, चौहान वंश का आदिपुरुष वासुदेव चौहान वत्स गोत्रीय ब्राह्मण था।
यह तथ्य बिजौलिया शिलालेख (1169-1170 ई.) से प्रमाणित होता है।
3. वैदिक आर्यों की संतान
4. विदेशी वंश का सिद्धांत
जेम्स टॉड ने राजपूतों को शक, सीथियन और हूण वंश का माना।
उनके अनुसार, इन जातियों को अग्नि संस्कार (अग्निकुण्ड) द्वारा क्षत्रिय वर्ण में शामिल किया गया।
राजपूतों की रीति-रिवाजों में इन विदेशी जातियों के प्रभाव दिखाई देता है, जैसे: अश्वपूजा, अश्वमेघ, अस्त्रपूजा और अस्त्र प्रशिक्षण।
5. अन्य विद्वानों के मत
ब्रोंच-गुर्जरा ताम्रपत्र के आधार पर कनिंघम ने राजपूतों को यू-ची जाति और कुषाण वंश से संबंधित माना।
अन्य विद्वानों ने चौहान वंश को सूर्यवंशी, चंद्रवंशी और ब्राह्मणवंशी के रूप में वर्गीकृत किया।
अजमेर के चौहान वंश का उद्भव और इतिहास
वासुदेव चौहान और प्रारंभिक चौहान शासन
वासुदेव चौहान को चौहान वंश का आदिपुरुष माना जाता है।
उनका शासनकाल लगभग 551 ई. का माना जाता है।
उनके राज्य का प्रमुख भाग सपादलक्ष (सांभर, शाकम्भरी) और राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) थी।
बिजौलिया अभिलेख के अनुसार, वासुदेव चौहान ने सांभर झील का प्रवर्तन किया।
यह अभिलेख हमें राजस्थान के प्राचीन नगरों के नाम भी बताता है: जाबालिपुर (जालौर), शाकम्भरी (सांभर), श्रीमाल (भीनमाल), अहिच्छत्रपुर (नागौर)।
गुवक और चौहान साम्राज्य का विस्तार
गुवक प्रथम नागभट द्वितीय का सामंत था। उसने चौहानों को गुर्जर प्रतिहारों की अधीनता से मुक्त करवाया।
गुवक ने हर्षनाथ मंदिर (सीकर) का निर्माण करवाया।
गुवक ने कन्नौज के शासक भोजराज से अपनी बहन कलावती का विवाह कर वैवाहिक संबंध स्थापित किए।
गुवक द्वितीय के पुत्र चन्दनराज ने दिल्ली के तोमरों को परास्त किया।
वाक्पतिराज और विग्रहराज द्वितीय
वाक्पतिराज ने प्रतिहारों को परास्त कर राज्य का विस्तार किया।
विग्रहराज द्वितीय ने गुजरत के चालुक्य शासक मूलराज को हराया और अपनी सीमा शिवालिक पहाड़ी (उत्तरप्रदेश) तक बढ़ाई।
विग्रहराज द्वितीय ने बीसलपुर झील बनवाई और संस्कृत पाठशाला बनवाकर नाटकों का अध्ययन कराया।
पृथ्वीराज चौहान का शासनकाल (1177-1192 ई.)
राज्याभिषेक और प्रारंभिक शासन
प्रारंभिक युद्ध और सैन्य अभियान
तराइन के युद्ध
पहला युद्ध (1191 ई.): मुहम्मद गौरी को पराजित किया।
दूसरा युद्ध (1192 ई.): पृथ्वीराज चौहान की पराजय और भारत में तुर्की शासन की शुरुआत।
हार के कारण: संगठनात्मक क्षमता की कमी, गुप्तचर व्यवस्था का अकर्मण्य होना और पैदल सेना पर निर्भरता।
प्रशासन और सांस्कृतिक योगदान
शास्त्रार्थ और वाद-विवाद का आयोजन किया।
धार्मिक सहिष्णुता का पालन किया। जैन और शैव धर्म के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया।
बीसलपुर बांध के पास महादेव मंदिर का निर्माण करवाया।
दरबार और विद्वान
दरबार में विद्वान: जयानक, पृथ्वीभट्ट, चंदरबरदाई, विद्यापति गौड़, विश्वरूप, जनार्दन।
इन विद्वानों ने पृथ्वीराज के वीरता और साहित्यिक योगदान का लेखा-जोखा रखा।
रचनाएँ: पृथ्वीराज विजय और पृथ्वीराज रासो।
चौहान वंश के प्रमुख शासक और उनके योगदान
| शासक | काल | प्रमुख योगदान |
|---|
| वासुदेव चौहान | 551 ई. | सांभर झील का प्रवर्तन |
| गुवक प्रथम | – | गुर्जर प्रतिहारों की अधीनता से मुक्ति |
| चन्दनराज | – | दिल्ली के तोमरों पर विजय |
| वाक्पतिराज | – | प्रतिहारों और तोमरों को परास्त किया |
| विग्रहराज द्वितीय | 973 ई. | बीसलपुर झील निर्माण, चालुक्य मूलराज पर विजय |
| अजयराज | 1105-1133 ई. | अजमेर का निर्माण, मालवा पर आक्रमण |
| अर्णोराज | 1133-1155 ई. | तुर्क और मालवा के शासकों पर विजय |
| विग्रहराज चतुर्थ | 1158-1163 ई. | दिल्ली पर अधिकार, संस्कृत पाठशाला निर्माण |
| पृथ्वीराज प्रथम | 1105 ई. | पुष्कर में ब्राह्मणों के लिए मुफ्त भोजन, युद्ध और प्रशासनिक सुधार |
| पृथ्वीराज तृतीय | 1177-1192 ई. | तराइन के युद्ध, धार्मिक सहिष्णुता, शिक्षा और साहित्यिक योगदान |
प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और स्मारक
सांभर झील: वासुदेव चौहान द्वारा प्रवर्तित।
अजमेर का दुर्ग (गढ़बीठली/तारागढ़): अजयराज द्वारा निर्माण।
बीसलपुर बांध और महादेव मंदिर: विग्रहराज द्वितीय और पृथ्वीराज चौहान।
अजमेर की संस्कृत पाठशाला: विग्रहराज चौथे द्वारा निर्माण।
पार्श्वनाथ और जैन मंदिर: धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक।
पृथ्वीराज चौहान का साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान
पृथ्वीराज रासो: कवि चंदरबरदाई ने लिखा। यह भारत के मध्यकालीन युद्धों और शासकों पर आधारित महाकाव्य है।
शास्त्रार्थ और धर्मविवाद: अजमेर में नियमित रूप से आयोजित।
कला और वास्तुकला: बीसलपुर बांध और मंदिरों का निर्माण, अजमेर दुर्ग।
विद्वानों का संरक्षण: जयानक, पृथ्वीभट्ट और अन्य विद्वानों को दरबार में रखा गया।
चौहान वंश की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ
अजमेर में अढ़ाई दिन का झोपड़ा (विग्रहराज चतुर्थ द्वारा संस्कृत विद्यालय, बाद में मस्जिद में परिवर्तित)।
हर्षनाथ मंदिर (सीकर), सांभर झील का विकास, पुष्कर तीर्थ का संरक्षण।
चौहान शासक विद्या, कला और साहित्य के बड़े संरक्षक थे
Dynasty Diagram / Visual Memory Mind Map
🚀 Exam Booster Facts – चौहान वंश (Top 10 Facts)
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए चौहान वंश के सबसे महत्वपूर्ण तथ्य नीचे दिए गए हैं।
1️⃣ चौहान वंश को चाहमान वंश भी कहा जाता है, जो मध्यकालीन उत्तर भारत का एक प्रमुख राजपूत वंश था।
2️⃣ राजपूत परंपरा के अनुसार चौहान वंश को अग्निवंशी राजपूत माना जाता है, जिनकी उत्पत्ति Mount Abu के अग्निकुंड से बताई जाती है।
3️⃣ चौहान वंश का प्रारंभिक राज्य सांभर (राजस्थान) में स्थापित हुआ था।
4️⃣ Ajayaraja II ने Ajmer नगर की स्थापना की और इसे चौहान राज्य की प्रमुख राजधानी बनाया।
5️⃣ चौहान वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक Prithviraj Chauhan था, जिसे वीरता और युद्ध कौशल के लिए जाना जाता है।
6️⃣ First Battle of Tarain (1191) में पृथ्वीराज चौहान ने Muhammad of Ghor को पराजित किया था।
7️⃣ Second Battle of Tarain (1192) में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया, जिससे चौहान शक्ति कमजोर हो गई।
8️⃣ चौहान वंश की कई शाखाएँ बनीं, जिनमें सोनगरा, हाड़ा, देवड़ा और सांचोरा प्रमुख थीं।
9️⃣ चौहान वंश ने राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के कई क्षेत्रों पर शासन किया।
🔟 चौहान वंश का इतिहास मध्यकालीन भारत में राजपूत वीरता और संघर्ष का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
🧠 Memory Tricks – चौहान वंश याद रखने की आसान ट्रिक्स
1️⃣ अग्निवंशी राजपूत याद रखने की ट्रिक
“आबू की अग्नि से आए चौहान”
👉 मतलब:
Mount Abu
अग्निकुंड से उत्पत्ति
चौहान = अग्निवंशी राजपूत
📌 Trick Sentence:
“आबू की अग्नि से निकले वीर चौहान”
2️⃣ चौहान वंश की प्रमुख राजधानी याद रखने की ट्रिक
“सांभर से अजमेर तक चौहान का सफर”
👉 मतलब:
प्रारंभिक राज्य → सांभर
प्रमुख राजधानी → Ajmer
3️⃣ तराइन के युद्ध याद रखने की ट्रिक
“पहला जीता, दूसरा हारा”
👉 मतलब:
📌 Simple Line:
“1191 में जीते, 1192 में हार गए”
4️⃣ चौहान वंश के महान शासक याद रखने की ट्रिक
“पृथ्वी का वीर – पृथ्वीराज”
👉 मतलब:
सबसे प्रसिद्ध शासक
Prithviraj Chauhan
5️⃣ चौहान शाखाएँ याद रखने की ट्रिक
“सो-हा-दे-सा”
👉 मतलब:
सो → सोनगरा
हा → हाड़ा
दे → देवड़ा
सा → सांचोरा
📌 Trick Sentence:
“सो-हा-दे-सा चौहान की शाखाएँ”
⭐ Quick Super Trick (30-Second Revision):
आबू → अग्निवंश → सांभर → अजमेर → पृथ्वीराज → तराइन (1191 जीत, 1192 हार)
“चौहान वंश MCQs – RPSC / SSC / REET के लिए 30 महत्वपूर्ण प्रश्न”
1. चौहान वंश को किस नाम से भी जाना जाता है?
A. परमार
B. चाहमान
C. प्रतिहार
D. सोलंकी
✅ उत्तर: B
2. चौहान वंश किस राजपूत वंश से संबंधित माना जाता है?
A. सूर्यवंशी
B. चंद्रवंशी
C. अग्निवंशी
D. नागवंशी
✅ उत्तर: C
3. अग्निवंशी राजपूतों की उत्पत्ति किस स्थान से मानी जाती है?
A. चित्तौड़
B. कन्नौज
C. Mount Abu
D. दिल्ली
✅ उत्तर: C
4. चौहान वंश का प्रारंभिक राज्य कहाँ स्थापित हुआ था?
A. जोधपुर
B. बीकानेर
C. सांभर
D. जयपुर
✅ उत्तर: C
5. चौहान वंश की प्रमुख राजधानी कौन-सी थी?
A. दिल्ली
B. Ajmer
C. रणथम्भौर
D. नागौर
✅ उत्तर: B
6. अजमेर नगर की स्थापना किस चौहान शासक ने की?
A. पृथ्वीराज चौहान
B. विग्रहराज चौहान
C. अजयदेव / अजयराज
D. हम्मीर देव
✅ उत्तर: C
7. चौहान वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था?
A. अर्णोराज
B. सोमेश्वर
C. Prithviraj Chauhan
D. अजयराज
✅ उत्तर: C
8. पृथ्वीराज चौहान किस स्थान के शासक थे?
A. अजमेर और दिल्ली
B. जोधपुर और बीकानेर
C. मेवाड़ और मारवाड़
D. गुजरात और मालवा
✅ उत्तर: A
9. 1191 ई. में कौन-सा युद्ध हुआ था?
A. खानवा का युद्ध
B. पानीपत का युद्ध
C. First Battle of Tarain
D. हल्दीघाटी का युद्ध
✅ उत्तर: C
10. 1191 के तराइन के युद्ध में किसकी विजय हुई थी?
A. मोहम्मद गौरी
B. पृथ्वीराज चौहान
C. बाबर
D. कुतुबुद्दीन ऐबक
✅ उत्तर: B
11. 1192 ई. में कौन-सा युद्ध हुआ था?
A. खानवा
B. पानीपत
C. Second Battle of Tarain
D. तलिकोटा
✅ उत्तर: C
12. 1192 में पृथ्वीराज चौहान को किसने पराजित किया?
A. बाबर
B. अकबर
C. Muhammad of Ghor
D. इल्तुतमिश
✅ उत्तर: C
13. पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि कौन थे?
A. तुलसीदास
B. कालिदास
C. चंदबरदाई
D. सूरदास
✅ उत्तर: C
14. “पृथ्वीराज रासो” के रचयिता कौन थे?
A. चंदबरदाई
B. जयदेव
C. अमीर खुसरो
D. भवभूति
✅ उत्तर: A
15. चौहान वंश का प्रमुख केंद्र कौन-सा था?
A. अजमेर
B. जोधपुर
C. जयपुर
D. बीकानेर
✅ उत्तर: A
16. चौहान वंश का प्रारंभिक केंद्र कौन-सा था?
A. नागौर
B. सांभर
C. बूंदी
D. जालोर
✅ उत्तर: B
17. चौहान वंश की कौन-सी शाखा प्रसिद्ध है?
A. सिसोदिया
B. सोनगरा
C. राठौड़
D. कछवाहा
✅ उत्तर: B
18. हाड़ा चौहान किस क्षेत्र से संबंधित थे?
A. बूंदी
B. मेवाड़
C. मारवाड़
D. जयपुर
✅ उत्तर: A
19. चौहान वंश के शासन का प्रमुख क्षेत्र कौन-सा था?
A. गुजरात
B. राजस्थान
C. बंगाल
D. कश्मीर
✅ उत्तर: B
20. चौहान वंश किस काल में प्रमुख था?
A. प्राचीन काल
B. मध्यकालीन काल
C. आधुनिक काल
D. वैदिक काल
✅ उत्तर: B
21. पृथ्वीराज चौहान के पिता का नाम क्या था?
A. अर्णोराज
B. सोमेश्वर
C. विग्रहराज
D. अजयराज
✅ उत्तर: B
22. चौहान वंश के राज्य का विस्तार किन क्षेत्रों तक था?
A. राजस्थान और दिल्ली
B. बिहार और बंगाल
C. कश्मीर और पंजाब
D. गुजरात और महाराष्ट्र
✅ उत्तर: A
23. चौहान वंश का पतन किस घटना के बाद हुआ?
A. पानीपत का युद्ध
B. तराइन का दूसरा युद्ध
C. हल्दीघाटी का युद्ध
D. खानवा का युद्ध
✅ उत्तर: B
24. चौहान वंश के प्रसिद्ध किले में से एक कौन-सा है?
A. रणथम्भौर किला
B. गोलकुंडा किला
C. आगरा किला
D. लाल किला
✅ उत्तर: A
25. चौहान वंश का संबंध किस राज्य से अधिक था?
A. राजस्थान
B. गुजरात
C. पंजाब
D. बंगाल
✅ उत्तर: A
26. चौहान वंश की शाखा “देवड़ा” किस क्षेत्र में प्रसिद्ध थी?
A. सिरोही
B. बीकानेर
C. जोधपुर
D. जयपुर
✅ उत्तर: A
27. चौहान वंश का इतिहास किस प्रकार के राजपूतों से जुड़ा है?
A. 36 राजपूत वंश
B. 24 राजपूत वंश
C. 12 राजपूत वंश
D. 10 राजपूत वंश
✅ उत्तर: A
28. चौहान वंश का स्वर्णकाल किस शासक के समय था?
A. अर्णोराज
B. विग्रहराज
C. पृथ्वीराज चौहान
D. सोमेश्वर
✅ उत्तर: C
29. चौहान वंश की प्रमुख भाषा कौन-सी थी?
A. संस्कृत और प्राकृत
B. फारसी
C. अरबी
D. उर्दू
✅ उत्तर: A
30. चौहान वंश का इतिहास किस क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण था?
A. उत्तर भारत
B. दक्षिण भारत
C. पूर्व भारत
D. पश्चिम भारत
✅ उत्तर: A
निष्कर्ष
राजपूतों की उत्पत्ति को लेकर अनेक मत हैं—अग्निकुण्ड से उत्पत्ति, वैदिक क्षत्रिय वंशज, विदेशी मूल और ब्राह्मण संतान। चौहान वंश इनमें से एक प्रमुख राजवंश था जिसने राजस्थान और उत्तर भारत में अपनी शक्ति स्थापित की। पृथ्वीराज चौहान के साथ यह वंश शिखर पर पहुँचा।<br/>
चौहान वंश ने भारत के मध्यकालीन इतिहास में स्वाभिमान, शौर्य और स्वतंत्रता की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
<b>पृथ्वीराज चौहान</b> की वीरता आज भी भारतीय संस्कृति में अमर है।
राजपूत वंश की इस परंपरा ने राजस्थान और उत्तर भारत की ऐतिहासिक धारा को नई दिशा दी।
📌 FAQs
Q1. राजपूतों की उत्पत्ति कब और कैसे हुई?
A. गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद मध्यकाल में छोटे-छोटे राज्यों के उदय के साथ राजपूतों की उत्पत्ति हुई।
Q2. राजपूतों की उत्पत्ति का प्रमुख सिद्धांत कौन-सा है?
A. अग्निकुण्ड सिद्धांत और वैदिक क्षत्रिय संतान सिद्धांत प्रमुख हैं।
Q3. चौहान वंश का पहला शासक कौन था?
A. वासुदेव चौहान (551 ई.)।
Q4. चौहान वंश की प्रारंभिक राजधानी कहाँ थी?
A. अहिच्छत्रपुर (नागौर)।
Q5. सांभर झील का प्रवर्तक कौन था?
A. वासुदेव चौहान।
Q6. हर्षनाथ मंदिर का निर्माण किसने कराया?
A. गुवक प्रथम ने।
Q7. अजमेर नगर की स्थापना किसने की?
A. अजयराज प्रथम ने।
Q8. चौहान वंश का सबसे महान शासक कौन माना जाता है?
A. पृथ्वीराज चौहान।
Q9. तराइन का प्रथम युद्ध कब हुआ?
A. 1191 ई.।
Q10. तराइन के दूसरे युद्ध में क्या हुआ?
A. 1192 ई. में पृथ्वीराज चौहान मोहम्मद गौरी से हार गए।
Q11. चौहान वंश के शासकों का प्रमुख क्षेत्र क्या था?
A. सपादलक्ष (सांभर, शाकम्भरी, नागौर, जांगल प्रदेश)।
Q12. बिजौलिया शिलालेख किससे संबंधित है?
A. चौहान वंश और वासुदेव चौहान से।
Q13. चौहान वंश को सूर्यवंशी किस ग्रंथ में बताया गया है?
A. पृथ्वीराज विजय, हम्मीर रासो।
Q14. चौहान वंश को चंद्रवंशी किस अभिलेख में बताया गया है?
A. अचलेश्वर मंदिर लेख।
Q15. चौहान वंश को ब्राह्मणवंशीय किसने कहा?
A. कायमखां रासो और चंद्रावती लेख में।
Q16. अढ़ाई दिन का झोपड़ा किस शासक से संबंधित है?
A. विग्रहराज चतुर्थ।
Q17. गुवक प्रथम किसका सामंत था?
A. गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय का।
Q18. चौहान वंश की राजधानी बाद में कहाँ स्थानांतरित हुई?
A. अजमेर।
Q19. चौहान वंश की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ क्या हैं?
A. हर्षनाथ मंदिर, अढ़ाई दिन का झोपड़ा, पुष्कर तीर्थ का संरक्षण।
Q20. पृथ्वीराज चौहान को किस कारण याद किया जाता है?
A. उनकी वीरता, देशभक्ति और तराइन के युद्धों में पराक्रम के लिए।