प्रस्तावना
गुर्जर प्रतिहार वंश भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है, जिसने छठी से बारहवीं शताब्दी तक उत्तर भारत में राजनीतिक शक्ति, सैन्य सामर्थ्य और सांस्कृतिक वैभव की स्थापना की। इस वंश के शासकों ने अरब आक्रमणकारियों को पराजित कर भारत की भूमि की रक्षा की और उत्तर भारत में अपनी प्रभुत्वशाली सत्ता स्थापित की। इतिहासकारों, यात्रियों और शिलालेखों में गुर्जर प्रतिहारों का उल्लेख स्पष्ट रूप से मिलता है। राजस्थान इतिहास तथा RPSC, REET, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गुर्जर प्रतिहार वंश से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इसका अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
📚 गुर्जर प्रतिहार वंश – Quick Revision Table
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| वंश का नाम | गुर्जर प्रतिहार वंश |
| स्थापना | नागभट्ट प्रथम |
| स्थापना काल | लगभग 730 ई. |
| प्रमुख क्षेत्र | राजस्थान, कन्नौज, उत्तर भारत |
| राजधानी | प्रारम्भ में अवंति (उज्जैन), बाद में कन्नौज |
| प्रसिद्ध शासक | नागभट्ट प्रथम, वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, मिहिर भोज, महेन्द्रपाल |
| सबसे शक्तिशाली शासक | मिहिर भोज |
| प्रमुख उपलब्धि | अरब आक्रमणों को रोककर उत्तर भारत की रक्षा |
| त्रिपक्षीय संघर्ष | प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट के बीच कन्नौज के लिए |
| प्रशासन | सामंतवादी व्यवस्था |
| पतन का कारण | आंतरिक कमजोरी और अन्य राजवंशों का उदय |
| काल | लगभग 8वीं से 11वीं शताब्दी |
⭐ Exam Tip:
RPSC, REET, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि गुर्जर प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था? → मिहिर भोज।
गुर्जर प्रतिहार वंश की उत्पत्ति
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ऐहोल अभिलेख (पुलकेशिन द्वितीय) में पहली बार गुर्जर जाति का उल्लेख मिलता है।
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वाणभट्टकृत हर्षचरित में भी गुर्जरों का वर्णन है।
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डॉ. जी.एच. ओझा ने प्रतिहारों को जाति नहीं बल्कि एक पद से संबंधित माना।
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चंदेल वंश के शिलालेखों में भी गुर्जर प्रतिहार का उल्लेख मिलता है।
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अरब यात्री अल मसूदी ने इन्हें अल-गुजर कहा और इनके राजा को “बोरा” की उपाधि दी।
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भगवानलाल इन्द्रजी ने इन्हें गूजर मानते हुए कनिष्क काल में आगमन की संभावना बताई।
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स्कंधपुराण में पंचद्रविड़ों के वर्णन में गुर्जरों का उल्लेख एक देश विशेष के रूप में हुआ है।
प्रारम्भिक केंद्र : माण्डव्यपुर (मण्डौर)
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घटियाला शिलालेख के अनुसार हरिश्चन्द्र नामक ब्राह्मण और उनकी क्षत्राणी पत्नी भद्रा से चार पुत्र उत्पन्न हुए –
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भोगभट्ट
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कदक
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रज्जिल
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दह
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इन चारों ने माण्डव्यपुर (मण्डौर) को जीतकर परकोटे बनवाए।
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प्रतिहार वंश की वास्तविक वंशावली हरिश्चन्द्र के पुत्र रज्जिल से शुरू होती है।
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रज्जिल का पोता नागभट्ट प्रथम था, जिसने राजधानी को मण्डौर से मेड़ता स्थानांतरित किया।
प्रतिहारों की शाखाएँ
इतिहासकार नैणसी ने प्रतिहारों की –
-
26 शाखाओं का उल्लेख किया है, जबकि
-
हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अनुसार 36 शाखाएँ बताई गई हैं।
इनमें –
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मण्डौर,
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जालौर,
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राजोगढ़ (अलवर),
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कन्नौज,
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उज्जैन,
-
काठियावाड़
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और भड़ोच मुख्य माने जाते हैं।
प्रमुख शासक और उपलब्धियाँ
1. नागभट्ट प्रथम (730 ई.)
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राजधानी को मण्डौर से मेड़ता, भीनमाल और बाद में उज्जैन बनाया।
-
अरब आक्रमणकारियों को हराया और “नारायण” की उपाधि प्राप्त की।
-
ग्वालियर प्रशस्ति में इन्हें म्लेच्छों का नाशक कहा गया।
2. वत्सराज (775–805 ई.)
-
प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
-
त्रिपक्षीय संघर्ष (प्रतिहार–पाल–राष्ट्रकूट) की शुरुआत इसी काल में हुई।
-
778 ई. में उद्योतन सूरी ने “कुवलयमाला” की रचना की, जिसमें मरुभाषा का पहला उल्लेख मिलता है।
3. नागभट्ट द्वितीय (805–833 ई.)
-
कन्नौज को राजधानी बनाया।
-
बंगाल के धर्मपाल को पराजित किया।
-
“प्रभावक चरित्र” के अनुसार 23 अगस्त 833 ई. को गंगा में डूबकर आत्महत्या की।
4. मिहिर भोज (843–885 ई.)
-
सर्वाधिक शक्तिशाली शासक।
-
अरब यात्री सुलेमान ने इन्हें इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु कहा।
-
ग्वालियर प्रशस्ति में “आदिवराह” कहा गया।
-
इनके चाँदी-ताँबे के सिक्कों पर “श्रीमदादिवराह” अंकित था।
-
विद्वान, कवि और ग्रंथकार— अनेक ग्रंथों की रचना।
5. महेन्द्रपाल प्रथम (885–910 ई.)
-
राजशेखर इनके दरबारी कवि व राजगुरु थे।
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राजशेखर ने “काव्यमीमांसा”, “भुवनकोष”, “कर्पूरमंजरी” आदि रचनाएँ कीं।
6. महिपाल प्रथम (910–940 ई.)
-
अरब यात्री अलमसूदी के अनुसार, इनके समय कन्नौज अत्यंत समृद्ध था।
7. राज्यपाल (1018 ई.)
-
महमूद गजनवी ने कन्नौज पर आक्रमण कर इन्हें पराजित किया।
-
इसके बाद प्रतिहार साम्राज्य कमजोर होता चला गया।
🕰️ गुर्जर प्रतिहार वंश – Timeline Diagram
730 ई.
│
├── नागभट्ट प्रथम द्वारा गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना
│ (अरब आक्रमणकारियों को पराजित किया)
│
775 ई.
│
├── वत्सराज का शासन
│ कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष की शुरुआत
│
800 ई.
│
├── नागभट्ट द्वितीय
│ कन्नौज पर अधिकार स्थापित
│
836 – 885 ई.
│
├── मिहिर भोज (वंश का सबसे शक्तिशाली शासक)
│ प्रतिहार साम्राज्य का स्वर्णकाल
│
890 – 910 ई.
│
├── महेन्द्रपाल प्रथम
│ साम्राज्य का विस्तार उत्तर भारत में
│
10वीं शताब्दी
│
├── प्रतिहार शक्ति कमजोर होने लगी
│
11वीं शताब्दी
│
└── गुर्जर प्रतिहार वंश का पतन
⭐ Exam Memory Trick:
“नाग–वत्स–नाग–भोज–महेन्द्र”
→ प्रमुख शासकों का क्रम याद रखने की ट्रिक
🎯Gurjar Pratihara dynasty Visual Memory Mind Map
प्रतिहार कला और स्थापत्य
प्रतिहार काल में मंदिर निर्माण, मूर्तिकला और स्थापत्य कला उत्कर्ष पर थी।
-
दधिमती माता मंदिर (नागौर) – प्रतिहार कालीन उत्कृष्ट उदाहरण।
-
नीमाज का मकरमण्डी माता मंदिर (पाली)
-
आनंदपुर कालू का विष्णु मंदिर
-
आऊवा का कामेश्वर मंदिर
-
किराडू का सूर्य मंदिर (बाड़मेर)
-
सोयला का शिव मंदिर (जोधपुर)
इन मंदिरों में रामायण दृश्यावली का भी अंकन मिलता है।
पतन और उत्तरकाल
-
1093 ई. में गहड़वाल शासक चन्द्रदेव ने कन्नौज छीन लिया।
-
12वीं शताब्दी तक राजस्थान में चौहान शक्तिशाली हो गए।
-
1395 ई. में मण्डौर का दुर्ग प्रतिहारों से राठौड़ चूंडा को दे दिया गया।
गुर्जर प्रतिहार वंश का महत्व
-
अरब आक्रमणों से भारत की रक्षा।
-
कन्नौज को राजधानी बनाकर त्रिपक्षीय संघर्ष का संचालन।
-
कला, साहित्य और स्थापत्य को संरक्षण।
-
“हिन्दू पुनर्जागरण” का आधार।
⭐ 10 Exam Booster Facts – गुर्जर प्रतिहार वंश
-
गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना नागभट्ट प्रथम ने लगभग 730 ई. में की।
-
इस वंश का प्रारम्भिक केंद्र उज्जैन (अवन्ति) था।
-
बाद में प्रतिहारों की राजधानी कन्नौज बनी।
-
प्रतिहारों ने अरब आक्रमणकारियों को भारत में आगे बढ़ने से रोका।
-
वत्सराज ने कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष की शुरुआत की।
-
त्रिपक्षीय संघर्ष प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट वंशों के बीच हुआ।
-
नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज पर अधिकार स्थापित किया।
-
मिहिर भोज को प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है।
-
अरब यात्री सुलेमान ने प्रतिहार साम्राज्य की शक्ति और समृद्धि का वर्णन किया।
-
10वीं–11वीं शताब्दी में आंतरिक कमजोरी के कारण प्रतिहार साम्राज्य का पतन हो गया।
15 RPSC / SSC Level MCQs – गुर्जर प्रतिहार वंश❓
1.गुर्जर प्रतिहार वंश का संस्थापक कौन था?
A. वत्सराज
B. नागभट्ट प्रथम
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: B
2.गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना लगभग कब हुई?
A. 650 ई.
B. 700 ई.
C. 730 ई.
D. 800 ई.
✅ उत्तर: C
3.गुर्जर प्रतिहार वंश की प्रारम्भिक राजधानी कौन-सी थी?
A. अजमेर
B. उज्जैन
C. कन्नौज
D. दिल्ली
✅ उत्तर: B
4.गुर्जर प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक कौन माना जाता है?
A. नागभट्ट द्वितीय
B. वत्सराज
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: C
5.त्रिपक्षीय संघर्ष किन वंशों के बीच हुआ?
A. प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट
B. चोल, चालुक्य, पल्लव
C. मौर्य, गुप्त, कुषाण
D. चौहान, परमार, सोलंकी
✅ उत्तर: A
6.कन्नौज पर अधिकार स्थापित करने वाला प्रतिहार शासक कौन था?
A. वत्सराज
B. नागभट्ट द्वितीय
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: B
7.प्रतिहार वंश के उत्कर्ष काल का श्रेय किसे दिया जाता है?
A. वत्सराज
B. नागभट्ट प्रथम
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: C
8.किस अरब यात्री ने प्रतिहारों की शक्ति का वर्णन किया?
A. इब्न बतूता
B. सुलेमान
C. अलबरूनी
D. फाहियान
✅ उत्तर: B
9.प्रतिहार वंश का प्रमुख शासन क्षेत्र कौन-सा था?
A. दक्षिण भारत
B. उत्तर भारत
C. पूर्वी भारत
D. पश्चिमी भारत
✅ उत्तर: B
10.गुर्जर प्रतिहार वंश का पतन कब शुरू हुआ?
A. 8वीं शताब्दी
B. 9वीं शताब्दी
C. 10वीं शताब्दी
D. 12वीं शताब्दी
✅ उत्तर: C
11.गुर्जर प्रतिहार वंश किस क्षेत्र से संबंधित था?
A. राजस्थान
B. बंगाल
C. तमिलनाडु
D. कर्नाटक
✅ उत्तर: A
12.किस शासक के समय प्रतिहार साम्राज्य सबसे अधिक शक्तिशाली था?
A. नागभट्ट प्रथम
B. वत्सराज
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: C
13.त्रिपक्षीय संघर्ष का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. दिल्ली पर अधिकार
B. कन्नौज पर अधिकार
C. उज्जैन पर अधिकार
D. पाटलिपुत्र पर अधिकार
✅ उत्तर: B
14.गुर्जर प्रतिहार वंश का शासन मुख्यतः किस काल में रहा?
A. 5वीं–7वीं शताब्दी
B. 6वीं–12वीं शताब्दी
C. 8वीं–10वीं शताब्दी
D. 9वीं–13वीं शताब्दी
✅ उत्तर: B
15.प्रतिहारों का मुख्य प्रतिद्वंदी वंश कौन था?
A. चोल
B. पाल
C. पल्लव
D. काकतीय
✅ उत्तर: B
📜 Top 20 Previous Year Questions (PYQs) – गुर्जर प्रतिहार वंश
1.गुर्जर प्रतिहार वंश का संस्थापक कौन था?
A. वत्सराज
B. नागभट्ट प्रथम
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: B
2.गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना किस शताब्दी में हुई?
A. 5वीं
B. 6वीं
C. 7वीं
D. 8वीं
✅ उत्तर: D
3.त्रिपक्षीय संघर्ष किन वंशों के बीच हुआ था?
A. प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट
B. चोल, पल्लव, चालुक्य
C. गुप्त, कुषाण, हूण
D. चौहान, परमार, सोलंकी
✅ उत्तर: A
4.कन्नौज के लिए संघर्ष को इतिहास में क्या कहा जाता है?
A. द्विपक्षीय संघर्ष
B. त्रिपक्षीय संघर्ष
C. धार्मिक संघर्ष
D. क्षेत्रीय संघर्ष
✅ उत्तर: B
5.गुर्जर प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था?
A. नागभट्ट प्रथम
B. वत्सराज
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: C
6.गुर्जर प्रतिहारों की राजधानी बाद में कहाँ स्थापित हुई?
A. अजमेर
B. कन्नौज
C. दिल्ली
D. उज्जैन
✅ उत्तर: B
7.अरब आक्रमणकारियों को पराजित करने वाला प्रतिहार शासक कौन था?
A. नागभट्ट प्रथम
B. वत्सराज
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: A
8.गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य का स्वर्णकाल किस शासक के समय था?
A. वत्सराज
B. नागभट्ट द्वितीय
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: C
9.किस विदेशी यात्री ने प्रतिहार साम्राज्य की प्रशंसा की?
A. फाहियान
B. सुलेमान
C. इब्न बतूता
D. अलबरूनी
✅ उत्तर: B
10.किस शासक ने कन्नौज पर अधिकार स्थापित किया?
A. वत्सराज
B. नागभट्ट द्वितीय
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: B
11.गुर्जर प्रतिहार वंश का मुख्य शासन क्षेत्र कौन-सा था?
A. दक्षिण भारत
B. उत्तर भारत
C. पूर्वी भारत
D. पश्चिमी भारत
✅ उत्तर: B
12.गुर्जर प्रतिहार वंश का पतन कब शुरू हुआ?
A. 8वीं शताब्दी
B. 9वीं शताब्दी
C. 10वीं शताब्दी
D. 11वीं शताब्दी
✅ उत्तर: C
13.गुर्जर प्रतिहार वंश का संबंध मुख्य रूप से किस राज्य से माना जाता है?
A. गुजरात
B. राजस्थान
C. मध्यप्रदेश
D. उत्तर प्रदेश
✅ उत्तर: B
14.त्रिपक्षीय संघर्ष में प्रतिहारों का मुख्य प्रतिद्वंदी कौन था?
A. पाल वंश
B. चोल वंश
C. चालुक्य वंश
D. पल्लव वंश
✅ उत्तर: A
15.किस प्रतिहार शासक ने साम्राज्य का विस्तार किया?
A. महेन्द्रपाल
B. वत्सराज
C. नागभट्ट प्रथम
D. रामभद्र
✅ उत्तर: A
16.गुर्जर प्रतिहार वंश का प्रारम्भिक केंद्र कहाँ था?
A. उज्जैन
B. कन्नौज
C. अजमेर
D. दिल्ली
✅ उत्तर: A
17.किस शासक के समय प्रतिहार शक्ति चरम पर थी?
A. नागभट्ट प्रथम
B. वत्सराज
C. मिहिर भोज
D. महेन्द्रपाल
✅ उत्तर: C
18.गुर्जर प्रतिहार वंश का प्रमुख संघर्ष किस शहर के लिए था?
A. अजमेर
B. कन्नौज
C. दिल्ली
D. उज्जैन
✅ उत्तर: B
19.प्रतिहार वंश के पतन का मुख्य कारण क्या था?
A. विदेशी आक्रमण
B. आंतरिक संघर्ष
C. आर्थिक संकट
D. धार्मिक विवाद
✅ उत्तर: B
20.गुर्जर प्रतिहार वंश का काल लगभग क्या माना जाता है?
A. 6वीं–11वीं शताब्दी
B. 7वीं–12वीं शताब्दी
C. 8वीं–10वीं शताब्दी
D. 9वीं–13वीं शताब्दी
✅ उत्तर: A
🧠 Ultimate Memory Trick – गुर्जर प्रतिहार वंश (10 सेकंड में याद करें)
इतिहास में गुर्जर प्रतिहार वंश के प्रमुख शासकों का क्रम याद रखने के लिए यह super easy trick इस्तेमाल करें।
⭐ Memory Trick
“नाग – वत्स – नाग – भोज – महेन्द्र”
📜 इसका मतलब
| Trick Word | वास्तविक शासक |
|---|---|
| नाग | नागभट्ट प्रथम |
| वत्स | वत्सराज |
| नाग | नागभट्ट द्वितीय |
| भोज | मिहिर भोज |
| महेन्द्र | महेन्द्रपाल |
👉 इस एक लाइन से आप गुर्जर प्रतिहार वंश के मुख्य शासकों का पूरा क्रम तुरंत याद रख सकते हैं।
⚡ 5 सेकंड Revision Formula
नागभट्ट प्रथम → वत्सराज → नागभट्ट द्वितीय → मिहिर भोज → महेन्द्रपाल
🎯 Exam Tip
RPSC, REET, SSC जैसी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है:
-
गुर्जर प्रतिहार वंश का संस्थापक → नागभट्ट प्रथम
-
सबसे शक्तिशाली शासक → मिहिर भोज
-
त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लेने वाला वंश → प्रतिहार
निष्कर्ष
गुर्जर प्रतिहार वंश न केवल राजस्थान बल्कि सम्पूर्ण उत्तर भारत की राजनीतिक, सांस्कृतिक और सैन्य शक्ति का प्रतीक रहा। इस वंश ने अरब आक्रमणों को रोका और भारतीय सभ्यता को सुरक्षित रखा। कन्नौज को राजधानी बनाकर इस वंश ने भारत में दीर्घकालीन साम्राज्य स्थापित किया, जिसका प्रभाव आज भी राजस्थान की संस्कृति और स्थापत्य में देखा जा सकता है।
📊 गुर्जर प्रतिहार वंश – Summary Table (Quick Facts)
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| वंश का नाम | गुर्जर प्रतिहार वंश |
| स्थापना | नागभट्ट प्रथम |
| स्थापना काल | लगभग 730 ई. |
| प्रारम्भिक राजधानी | उज्जैन (अवन्ति) |
| बाद की राजधानी | कन्नौज |
| प्रमुख शासक | वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, मिहिर भोज, महेन्द्रपाल |
| सबसे शक्तिशाली शासक | मिहिर भोज |
| प्रमुख उपलब्धि | अरब आक्रमणों को रोककर उत्तर भारत की रक्षा |
| महत्वपूर्ण घटना | कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष |
| त्रिपक्षीय संघर्ष के वंश | प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट |
| शासन काल | लगभग 8वीं – 11वीं शताब्दी |
| पतन का कारण | आंतरिक कमजोरी और क्षेत्रीय शक्तियों का उदय |
⭐ Quick Exam Tip:
गुर्जर प्रतिहार वंश से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण तथ्य जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
-
संस्थापक → नागभट्ट प्रथम
-
सबसे शक्तिशाली शासक → मिहिर भोज
-
राजधानी → कन्नौज
✅ FAQs : गुर्जर प्रतिहार वंश
Q1. गुर्जर प्रतिहार वंश की उत्पत्ति कहाँ से मानी जाती है?
गुर्जर प्रतिहारों की उत्पत्ति माण्डव्यपुर (मण्डौर), राजस्थान से मानी जाती है।
Q2. प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था?
मिहिर भोज प्रथम को प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है।
Q3. वत्सराज किसलिए प्रसिद्ध हैं?
वत्सराज को प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
Q4. नागभट्ट प्रथम की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी?
नागभट्ट प्रथम ने अरब आक्रमणकारियों को पराजित कर भारत की रक्षा की।
Q5. मिहिर भोज को कौन-सी उपाधि दी गई थी?
मिहिर भोज को “आदिवराह” और “प्रभास” की उपाधियाँ दी गई थीं।
Q6. प्रतिहार वंश की राजधानी कहाँ थी?
प्रारंभ में मण्डौर, बाद में कन्नौज प्रतिहारों की राजधानी बनी।
Q7. त्रिपक्षीय संघर्ष क्या था?
प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट शासकों के बीच कन्नौज के लिए हुआ संघर्ष त्रिपक्षीय संघर्ष कहलाता है।
Q8. प्रतिहार काल के प्रमुख मंदिर कौन-से हैं?
दधिमती माता मंदिर, किराडू का सूर्य मंदिर और नीमाज का मंदिर प्रतिहार काल के प्रमुख मंदिर हैं।
Q9. महेन्द्रपाल प्रथम का राजकवि कौन था?
महेन्द्रपाल प्रथम के राजकवि राजशेखर थे।
Q10. किस अरब यात्री ने प्रतिहारों का उल्लेख किया?
अरब यात्री अल-मसूदी और सुलेमान ने प्रतिहार साम्राज्य का वर्णन किया।
Q11. प्रतिहार वंश के पतन का मुख्य कारण क्या था?
महमूद गजनवी के आक्रमण और गहड़वाल शासकों के उदय से प्रतिहार शक्ति कमजोर हुई।
Q12. गुर्जर प्रतिहारों की तुलना किससे की जाती है?
प्रतिहारों की तुलना भगवान राम के भाई लक्ष्मण से की जाती है, जिन्हें “राम का प्रतिहार” कहा गया।
Q13. प्रतिहार काल में किस भाषा का उल्लेख मिलता है?
प्रतिहार काल में मरुभाषा का उल्लेख मिलता है, जो कुवलयमाला ग्रंथ में वर्णित है।
Q14. महिपाल प्रथम के समय कौन-सा यात्री आया?
महिपाल प्रथम के समय अरब यात्री अल-मसूदी भारत आया।
Q15. प्रतिहार वंश का स्वर्णयुग किसके समय था?
प्रतिहार वंश का स्वर्णयुग मिहिर भोज प्रथम के काल में माना जाता है।
Q16. ग्वालियर प्रशस्ति किससे संबंधित है?
ग्वालियर प्रशस्ति मिहिर भोज और नागभट्ट द्वितीय से संबंधित है।
Q17. प्रतिहार कला की प्रमुख विशेषता क्या थी?
प्रतिहार कला में मंदिरों की सूक्ष्म शिल्पकला और रामायण दृश्यावली का अंकन मिलता है।
Q18. प्रतिहार वंश का अंतिम शासक कौन था?
प्रतिहार वंश का अंतिम शासक यशपाल था।
Q19. प्रतिहारों के सिक्कों पर क्या अंकित होता था?
प्रतिहारों के सिक्कों पर “श्रीमदादिवराह” अंकित मिलता है।
Q20. प्रतिहार वंश का प्रमुख ऐतिहासिक योगदान क्या है?
प्रतिहारों ने अरब आक्रमणों को रोककर उत्तर भारत की रक्षा की और कन्नौज साम्राज्य को मजबूत किया।

